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सोना खरीदने का प्लान बना रहे हैं? GST और मेकिंग चार्ज का पूरा गणित जान लें; एक गलती से हो सकता है हजारों का नुकसान

बिजनेस डेस्क: भारत में सोना सिर्फ एक मेटल नहीं, बल्कि परंपरा, इन्वेस्टमेंट और भावनाओं का एक अहम हिस्सा है। शादी हो या कोई त्योहार, हर घर में सोने की चमक खास मानी जाती है। लेकिन जब ज्वेलरी शॉप पर बिल हाथ में आता है, तो GST, मेकिंग चार्ज और वेस्टेज जैसे शब्द अक्सर ग्राहकों को कन्फ्यूज कर देते हैं।

सोने पर GST रेट (3%): सूत्रों के मुताबिक, भारत में सोने की खरीद पर 3% GST लगता है। यह रेट सभी तरह के सोने पर एक जैसा रहता है, चाहे वह 24 कैरेट हो, 22 कैरेट हो या 18 कैरेट हो। आप चाहे ज्वेलरी खरीदें, सोने के सिक्के खरीदें या सोने की छड़ें, GST रेट 3% ही रहेगा। उदाहरण के लिए, अगर 10 ग्राम सोने की कीमत 1 लाख रुपये है, तो उस पर 3000 रुपये GST देना होगा। डिजिटल गोल्ड पर भी 3% GST लगता है, हालांकि सर्विस फीस पर 18% तक टैक्स लग सकता है।

मेकिंग चार्ज का कैलकुलेशन: मेकिंग चार्ज वह कॉस्ट है जो ज्वेलरी बनाने में लगती है, जो आम तौर पर सोने की कीमत का 5% से 25% तक हो सकती है। यह चार्ज प्रति ग्राम फिक्स्ड रेट पर भी हो सकता है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर सोने की कीमत पर GST देने के बाद मेकिंग चार्ज लगता है, तो टैक्स आपकी उम्मीद से ज़्यादा हो सकता है, इसलिए बिल में उनकी अलग-अलग डिटेल्स देखना ज़रूरी है।

ज्वेलरी खरीदते समय इन ज़रूरी बातों का ध्यान रखें:

हॉलमार्क ज़रूर चेक करें: हमेशा HUID नंबर वाला सोना खरीदें, जो प्योरिटी की गारंटी देता है।

आइडेंटिटी प्रूफ (ID): 2 लाख रुपये से ज़्यादा की खरीदारी पर PAN या आधार कार्ड देना ज़रूरी है।

बेकार और मोलभाव: कई ज्वेलर एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ते हैं, जिसके लिए मोलभाव किया जा सकता है।

बायबैक पॉलिसी: पुराना सोना बेचकर नया खरीदने पर GST का बोझ कम हो सकता है।

फिक्स्ड बिल: टैक्स और चार्ज की पूरी डिटेल्स वाला बिल लेना बहुत ज़रूरी है।

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