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Punjab Stubble Burning: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90% कमी, जानिए भगवंत मान सरकार की रणनीति

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और मध्य प्रदेश के आंकड़े।

नई दिल्ली / चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा तेज हो जाती है और पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब का नाम प्रमुखता से सामने आता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े राज्य में पराली प्रबंधन के प्रयासों और घटनाओं में आई कमी की ओर संकेत करते हैं।

पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में राज्य में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 474 घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, 2026 का आंकड़ा अभी तक की अवधि का है, इसलिए इसकी तुलना पूरे वर्ष के आंकड़ों से सीधे नहीं की जानी चाहिए।

मध्य प्रदेश में पंजाब से अधिक मामले

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के CREAMS कार्यक्रम की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश 118 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर रहा। पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि मेंकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश को 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है. इसके लिए भारत सरकार लगभग ₹415 करोड़ का अनुदान देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में इसे अहम कदम बताते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि इससे हिमाचल के युवाओं को अपने ही राज्य में मेडिकल की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे. साथ ही, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा तेजी से लिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए जेपी नड्डा ने बताया कि हिमाचल सरकार से 23 जून 2026 को प्रस्ताव मिला था. इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री से भी इस विषय पर चर्चा हुई और अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है.

कहां पर कितनी सीटों को मिली है मंजूरी?

जेपी नड्डा ने कहा, “केंद्र सरकार ने हिमाचल के प्रस्ताव पर तेजी से काम करते हुए सभी 320 सीटों को मंजूरी दी है. अब हम राज्य सरकार से भी उम्मीद करते हैं कि वह इसी तेजी से जरूरी कदम उठाए, ताकि प्रदेश के युवाओं और आम लोगों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके.” इन 320 नई सीटों में शिमला के लिए 91, टांडा और हमीरपुर के लिए 57-57, मंडी के लिए 55, नाहन के लिए 32 और चंबा के लिए 28 सीटें शामिल हैं. इनसे सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, कैंसर सहित कई अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने ₹15,000 करोड़ की लागत से अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई यूजी और पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है. हिमाचल प्रदेश में 320 नई पीजी सीटों की स्वीकृति भी इसी योजना का हिस्सा है.

‘समय से शुरू करने पूरे किए जाएं जरूरी काम’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल सरकार से आग्रह किया कि वह इन सभी 320 सीटों को समय पर शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके. उन्होंने राज्य में केंद्र सरकार की मदद से चल रही अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत बताई.

जेपी नड्डा ने कहा कि चंडीगढ़बद्दी और भानुपल्लीबिलासपुर जैसी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में राज्य सरकार की हिस्सेदारी और जमीन से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाना चाहिए. इसी तरह, केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, “हिमाचल के लोगों के हित से जुड़े विकास कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए. केंद्र सरकार प्रदेश के विकास के लिए हर संभव सहयोग दे रही है. हमारी अपेक्षा है कि राज्य सरकार भी इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दे और इन्हें समय पर पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए.”

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता स्पष्ट है—हिमाचल का विकास और हिमाचल के हर परिवार का कल्याण.”

पंजाब में किसी भी दिन पराली जलाने की घटनाओं की संख्या दहाई तक नहीं पहुंची, जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन ऐसे रहे, जब घटनाओं का आंकड़ा दहाई में दर्ज किया गया।

वर्ष 2025 के आंकड़े भी इस अंतर को स्पष्ट करते हैं। छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 33,028 घटनाओं में से मध्य प्रदेश में 17,067, उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 मामले दर्ज हुए। इन आंकड़ों के आधार पर पराली जलाने की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित मानने के बजाय दूसरे कृषि प्रधान राज्यों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को सब्सिडी देने पर जोर दिया है। सरकार की रणनीति का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और अगली फसल की बुवाई भी समय पर हो सके।

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, वर्ष 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें 14,384 सुपर सीडर, 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक शामिल हैं।

इन मशीनों की मदद से खेतों में पराली को मिट्टी में मिलाने, अवशेषों को इकट्ठा करने और पराली का वैकल्पिक उपयोग करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी सुविधा मिल सकती है।

किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी

पराली प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों तथा पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक भी आधुनिक मशीनों की सुविधा पहुंचाना है। महंगी कृषि मशीनें खरीदना हर किसान के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में सामूहिक मशीन केंद्रों के माध्यम से किसान जरूरत के अनुसार मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन की 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, तकनीकी सहायता देने और फसल अवशेषों के वैकल्पिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में भी क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनरी के लिए करीब 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी।

पराली से कमाई के रास्ते तलाश रहे किसान

पराली को केवल कृषि अपशिष्ट मानने के बजाय उससे आमदनी के अवसर तलाशने पर भी काम हो रहा है। पंजाब में कुछ किसान पराली को इकट्ठा करके बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के लिए बेच रहे हैं।

संगरूर के एक किसान द्वारा लगभग 12 हजार क्विंटल पराली बेचकर करीब 16 लाख रुपये की आय अर्जित करने का उदाहरण सामने आया है। हालांकि, इस तरह की कमाई पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन लागत और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। फिर भी, यह मॉडल किसानों के लिए फसल अवशेषों के आर्थिक इस्तेमाल की संभावनाएं दिखाता है।

पराली जलाने पर रोक के लिए किसानों का सहयोग जरूरी

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच सीमित समय, मजदूरी का खर्च, मशीनों की उपलब्धता और पराली हटाने की लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान केवल जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। किसानों को किफायती मशीनें, तकनीकी सहायता और पराली के उपयोग के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी सरकार की नीतियों, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता और किसानों के सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है। हालांकि, इस बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए हर सीजन में प्रभावी निगरानी, किसानों तक सुविधाओं की पहुंच और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी होगा।

दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर होने वाली बहस के बीच पंजाब के आंकड़े यह भी बताते हैं कि पराली प्रबंधन की चुनौती बहुआयामी है और इसका समाधान राज्यों के साझा प्रयासों, किसानों के सहयोग तथा व्यावहारिक कृषि नीतियों से ही संभव है।

समराला: कोऑपरेटिव सोसायटियों के नए नियमों के खिलाफ BKU कादियां का विरोध, सरकार से फरमान वापस लेने की मांग

समराला में BKU कादियां ने कोऑपरेटिव सोसायटियों के नियमों में कथित बदलावों का विरोध किया। शेयर मनी, ब्याज दर और जमीन गिरवी रखने की शर्तों पर सवाल उठाते हुए सरकार से नियम वापस लेने की मांग की।

समराला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: मनीष सचदेवा

पंजाब सरकार द्वारा कोऑपरेटिव सोसायटियों के नियमों में किए गए कथित बदलावों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) कादियां ने विरोध जताया है। संगठन के जिला प्रधान हरदीप सिंह ग्यासपुरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नए नियमों पर सवाल उठाए और सरकार से इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से छोटे और गरीब किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और सहकारी सोसायटियों के माध्यम से मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।

हरदीप सिंह ग्यासपुरा के अनुसार, पहले कोऑपरेटिव सोसायटियों में एक लाख रुपये के कर्ज के पीछे 5 प्रतिशत यानी 5,000 रुपये शेयर मनी जमा करवानी पड़ती थी। अब इसे बढ़ाकर 9 प्रतिशत किए जाने का दावा किया जा रहा है, जिसके चलते किसानों को एक लाख रुपये के पीछे 9,000 रुपये शेयर मनी जमा करवानी पड़ सकती है।

किसान नेता ने यह भी कहा कि छोटे किसानों की श्रेणी में शामिल होने के लिए जमीन की सीमा सात एकड़ से घटाकर पांच एकड़ कर दी गई है। उनके मुताबिक, इस बदलाव से कई किसानों की पात्रता और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।

नए नियमों के तहत कर्ज लेने के लिए स्टांप पेपर पर हलफनामा देने और जमीन गिरवी रखने जैसी शर्तों पर भी BKU कादियां ने आपत्ति जताई है। हरदीप सिंह ग्यासपुरा ने आरोप लगाया कि सहकारी सोसायटियों से कर्ज लेने की प्रक्रिया अब व्यावसायिक बैंकों जैसी बनाई जा रही है, जिससे किसानों को अतिरिक्त औपचारिकताओं और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने दावा किया कि कर्ज की ब्याज दर भी 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 11 प्रतिशत कर दी गई है। किसान नेता के मुताबिक, यदि कोई किसान अपनी स्वीकृत कर्ज सीमा से कम राशि लेता है, तो भी उस पर पूरी स्वीकृत सीमा के आधार पर ब्याज लगने की आशंका है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था किसानों के लिए आर्थिक रूप से मुश्किलें बढ़ा सकती है।

ग्यासपुरा ने कहा कि वर्ष 1961 से कोऑपरेटिव सोसायटियां ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कर्ज और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं। उनके अनुसार, इन संस्थाओं का उद्देश्य किसानों को जरूरत के समय आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना है, लेकिन प्रस्तावित बदलावों से इस व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

किसान नेता ने सोसायटियों के सचिवों पर किसानों की कर्ज सीमा जल्द तैयार करके बैंकों में जमा करवाने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने जिले के DR और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि सचिवों पर डाला जा रहा कथित अनावश्यक दबाव बंद किया जाए।

BKU कादियां ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो संबंधित सरकारी कार्यालयों के बाहर धरने और विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन ने मांग की कि सरकार नए नियमों की समीक्षा करे और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए विवादित बदलाव वापस ले।

फिलहाल, शेयर मनी, ब्याज दरों और जमीन गिरवी रखने की शर्तों में बताए गए बदलावों को लेकर सरकार या संबंधित सहकारी विभाग का आधिकारिक पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। इन नियमों की वास्तविक स्थिति और लागू होने की शर्तों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

Punjab Roadways Strike: पंजाब में रोडवेज का चक्का जाम, कच्चे कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

पंजाब में पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया। जानें रेशम सिंह गिल ने सरकार पर क्या आरोप लगाए।

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब (25/11) ने कर्मचारियों को पक्का करने और अन्य मांगें पूरी करने की मांग को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। हड़ताल के चलते बस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

यूनियन और पंजाब सरकार के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बरकरार है। यूनियन ने सरकार पर बार-बार बैठकों को आगे बढ़ाकर कर्मचारियों की मांगों को टालने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर चर्चा हो रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ सात से आठ बैठकें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, हर बैठक में यूनियन से दस दिन का समय मांगा जाता रहा, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की एक भी मांग पूरी नहीं हुई।

रेशम सिंह गिल के अनुसार, 5 अक्टूबर को हुई अंतिम बैठक में सरकार की ओर से 15 अक्टूबर तक लिए गए फैसलों को लागू करने और संबंधित नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, यूनियन का आरोप है कि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक कर्मचारियों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता और सरकार अपने आश्वासनों को लागू नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया जाएगा। हड़ताल की अवधि में बस सेवाओं पर पड़ने वाले वास्तविक असर और यात्रियों को होने वाली परेशानी की स्थिति संबंधित अपडेट के आधार पर स्पष्ट होगी।

Rajbir Singh Ghumman CBI Case : भगवंत मान के OSD राजबीर घुम्मन ने CBI रेड को हाईकोर्ट में दी चुनौती

Rajbir Singh Ghumman CBI Case : पंजाब CM भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने CBI की FIR और घराचों में छापेमारी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देकर जांच पर रोक की मांग की।

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज FIR और उनके पैतृक निवास पर की गई छापेमारी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वकील गिन्नीजीत मल्होत्रा के माध्यम से दायर सिविल रिट याचिका में घुम्मन ने CBI की जांच पर तत्काल रोक लगाने और किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की है।

धारा 17A के तहत मंजूरी नहीं लेने का आरोप

याचिका में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि CBI ने जांच शुरू करने से पहले आवश्यक पूर्व मंजूरी नहीं ली। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि किसी लोक सेवक के खिलाफ उसकी आधिकारिक भूमिका या निर्णय से जुड़े कथित अपराध की जांच की जानी है, तो कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक हो सकती है।

घुम्मन का आरोप है कि इस मामले में पंजाब सरकार से ऐसी मंजूरी प्राप्त नहीं की गई। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से मांग की है कि वैधानिक मंजूरी मिलने तक CBI की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई जाए।

हाईकोर्ट से की तीन प्रमुख मांगें

OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने अपनी याचिका में तीन प्रमुख राहतों की मांग की है। पहली, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक मंजूरी मिलने तक FIR और जांच की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई जाए।

दूसरी, याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान CBI को उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित किसी भी तरह की दबावपूर्ण कार्रवाई करने से रोका जाए।

तीसरी, संगरूर जिले के घराचों गांव में 6 अक्टूबर को की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई तथा चंडीगढ़ की विशेष अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट को गैरकानूनी घोषित कर रद्द किया जाए।

फिलहाल, याचिका में लगाए गए आरोप और मांगी गई राहतें याचिकाकर्ता का पक्ष हैं। हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में क्या आदेश दिया जाता है, यह आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

मैड संधू मर्डर केस: ‘मेरे बेटे का क्या कसूर था?’ पिता ने बयां किया दर्द, परिवार ने मांगा इंसाफ

मैड संधू मर्डर केस में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मधुसूदन सिंह के पिता भूपिंदर सिंह ने सुरक्षा में चूक के आरोप लगाए हैं। परिवार ने हत्यारों की गिरफ्तारी और छोटे बेटे के लिए सरकारी नौकरी की मांग की।

पंजाब / सत्ता संदेश

सोशल मीडिया पर ‘मैड संधू’ के नाम से मशहूर मधुसूदन सिंह की हत्या के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। पंजाब पुलिस से रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर और मधुसूदन के पिता भूपिंदर सिंह ने मीडिया के सामने भावुक होते हुए अपने बेटे की हत्या पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा हमेशा लोगों की मदद और समाज सेवा के लिए आगे रहता था, फिर उसका क्या कसूर था?

भूपिंदर सिंह के मुताबिक, मधुसूदन पूरे परिवार का सहारा था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। पिता ने बताया कि मधुसूदन सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान और स्टाइल के कारण युवाओं के बीच लोकप्रिय था और ‘मैड संधू’ के नाम से जाना जाता था। बढ़ती लोकप्रियता के बाद उसे विभिन्न कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि भी बुलाया जाने लगा था।

बढ़ती लोकप्रियता को बताया हत्या की वजह

मधुसूदन के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की बढ़ती शोहरत, लोकप्रियता और सोशल मीडिया फॉलोइंग से कुछ लोग नाराज थे। उनका दावा है कि इसी रंजिश के चलते साजिश रचकर मधुसूदन की हत्या कर दी गई। हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक कारण और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गरीबों और जरूरतमंदों की करता था मदद

भूपिंदर सिंह ने बताया कि मधुसूदन केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभाता था, बल्कि जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी आगे रहता था। उनके अनुसार, वह गरीब बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंद परिवारों के राशन का खर्च उठाता था। इसके अलावा उसने मेडिकल कैंप और रक्तदान शिविर आयोजित किए तथा बाढ़ प्रभावित लोगों की भी मदद की।

पिता ने बताया कि मधुसूदन गुरुद्वारों में सेवा करने के साथ पाठ में भी शामिल होता था। उसने एक सैलून भी शुरू किया था, जहां कई लोग काम करके अपने परिवार का गुजारा करते थे। उसकी मौत के बाद सैलून बंद हो गया है और वहां काम करने वाले लोगों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

धमकियों के बावजूद सुरक्षा नहीं मिलने का आरोप

मधुसूदन के पिता ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनके बेटे को पहले से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। परिवार की ओर से इन धमकियों की जानकारी संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों को दिए जाने का दावा किया गया था।

भूपिंदर सिंह के अनुसार, CID, इंटेलिजेंस और पंजाब पुलिस को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी और सुरक्षा के लिए गनमैन की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद मधुसूदन को स्थायी सुरक्षा नहीं मिली।

पिता ने कहा कि अगर समय रहते सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती और धमकियों को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता। उन्होंने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि हत्या के बाद अब तक सरकार की ओर से परिवार से मिलने या उनका दुख साझा करने के लिए किसी बड़े प्रतिनिधि के नहीं पहुंचने से परिवार में नाराजगी है।

छोटे बेटे के लिए सरकारी नौकरी की मांग

मधुसूदन की मौत के बाद परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और छोटा बेटा अर्शदीप सिंह रह गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भूपिंदर सिंह ने पंजाब सरकार से छोटे बेटे को सहानुभूति के आधार पर पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर या उसकी योग्यता के अनुरूप सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

इसके साथ ही परिवार ने पुलिस प्रशासन से मधुसूदन के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने और मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की हत्या का इंसाफ चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पंजाब में CM भगवंत मान से जुड़े ठिकानों पर CBI रेड के बाद सियासी घमासान, 2027 चुनाव से जोड़ा मामला

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 07 अक्टूबर 2026

Punjab CBI Raid: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े ठिकानों पर CBI की कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की रेड को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा।

भगवंत मान ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए परेशान करना बीजेपी की कार्यशैली रही है। उन्होंने कहा कि CBI की कार्रवाई से अब साफ हो गया है कि पंजाब में चुनावी माहौल शुरू हो चुका है।

रेड में कुछ नहीं मिला- CM भगवंत मान

संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि CBI ने जिन-जिन ठिकानों पर छापेमारी की, वहां से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के अधिकारी कार्रवाई के बाद चले गए और उन्हें कोई आपत्तिजनक चीज नहीं मिली।

मान ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें, उनके परिवार और पंजाब सरकार को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है तो वह किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने OSD राजबीर सिंह घुम्मन के गांव के लोगों द्वारा उनके समर्थन में खड़े होने की भी बात कही।

CBI ने पंजाब और चंडीगढ़ में 8 ठिकानों पर की तलाशी

वहीं, CBI के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

CBI ने यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई FIR के आधार पर की है।

राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 लोग FIR में आरोपी

CBI ने मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR में राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं।

CBI के अनुसार, जांच में आरोप है कि आरोपियों ने IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के बदले कथित तौर पर आर्थिक लाभ हासिल किया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI की एंट्री

इस मामले की शुरुआत ED की जांच से हुई थी। ED ने पंजाब के DGP को पत्र लिखकर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR दर्ज करने को कहा था। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।

5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने CBI को मामले की जांच सौंपने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने पंजाब पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और CBI को दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

हाईकोर्ट के इस आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी बीच CBI ने FIR दर्ज कर अगले ही दिन पंजाब और चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

फिलहाल CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है, जबकि CBI अपनी जांच के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पंजाब कैबिनेट के बड़े फैसले: रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी बिल को मंजूरी, नर्सिंग और PICTS कर्मचारियों को भी राहत

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 6 अक्टूबर 2026:

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) बिल, 2026 को मंजूरी देने के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में नए पद सृजित करने, नर्सिंग सेवा नियमों में संशोधन और PICTS के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने को भी मंजूरी दी गई।

पंजाब सरकार के अनुसार, रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी बिल, 2026 का उद्देश्य रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बांध क्षेत्रों का योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है। इस बिल के माध्यम से रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी की स्थापना का रास्ता साफ होगा।

रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी को पर्यटन और सांस्कृतिक मामले विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा। अथॉरिटी को क्षेत्र के एकीकृत विकास, भूमि प्रबंधन, विभिन्न विकास परियोजनाओं को लागू करने और पर्यटन स्थलों के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय और नियामक शक्तियां प्रदान की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे इन क्षेत्रों में पर्यटन और विकास गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में नए पदों को मंजूरी

कैबिनेट ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब के कार्यालय में ड्राइवरों के नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी है। ये पद 19 स्थायी सेवादार पदों और एक स्थायी मुहर्रिर पद को सरेंडर करके बनाए जाएंगे।

सरकार के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब के कार्यालय के प्रशासनिक और दैनिक कामकाज को अधिक सुचारू एवं प्रभावी बनाना है।

नर्सिंग सेवा नियमों में संशोधन

मंत्रिमंडल ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन सरकारी नर्सिंग कॉलेज, पटियाला और अमृतसर में ट्यूटर के पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने के लिए पंजाब नर्सिंग एजुकेशन सर्विस रूल्स (ग्रुप बी), 2016 के परिशिष्ट-बी में संशोधन को भी मंजूरी दी है।

इन पदों पर निदेशक, अनुसंधान एवं चिकित्सा शिक्षा, पंजाब के नियंत्रण में नियमित आधार पर कार्यरत ऐसी स्टाफ नर्सों और नर्सिंग सिस्टर्स को पदोन्नति का अवसर मिलेगा, जिन्होंने संबंधित क्षेत्र में एम.एससी. नर्सिंग की योग्यता हासिल की हो। नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम एक वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

PICTS के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाएं होंगी नियमित

पंजाब कैबिनेट ने पंजाब इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एजुकेशन सोसाइटी (PICTS) के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के तहत पात्र कर्मचारियों को PICTS के अधीन निर्धारित वेतनमान में सेवाएं नियमित करने का लाभ मिलेगा। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट आधार पर सेवाएं दे रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट के इन फैसलों को पंजाब में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, पर्यटन क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास और सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कपूरथला मंडी पहुंचे मंत्री लालचंद कटारूचक्क, बोले- केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल

कपूरथला / सत्ता संदेश

पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लालचंद कटारूचक्क ने शनिवार को कपूरथला मंडी का दौरा कर धान की खरीद प्रक्रिया का जायजा लिया। उन्होंने मंडी में अधिकारियों से खरीद व्यवस्था को लेकर जानकारी ली और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।

मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार धान की खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को उनकी फसल का निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की तौल में किसी भी तरह की लापरवाही न हो और नमी की जांच निर्धारित नियमों के अनुसार की जाए, ताकि किसानों को मंडियों में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

अब तक करीब 70 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद

लालचंद कटारूचक्क ने बताया कि पंजाब में अब तक करीब 70 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है और प्रदेश की विभिन्न मंडियों में खरीद प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि वह खुद भी लगातार मंडियों का दौरा कर रहे हैं, ताकि किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा सके और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

धान के उठान में तेजी की केंद्र से मांग

मंत्री ने पंजाब में भंडारण क्षमता की कमी को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर राज्य में पैदा हो रही स्पेस की समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि शेलरों और गोदामों में पहले से पड़ा अनाज समय पर नहीं उठाए जाने के कारण नई धान की फसल को रखने के लिए जगह की समस्या पैदा हो रही है।

‘केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही’

लालचंद कटारूचक्क ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार अपनी तरफ से लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने केंद्र से अपील की कि मिलों और गोदामों में पड़े अनाज के उठान में तेजी लाई जाए, ताकि आने वाले दिनों में किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की ओर से स्पेस की समस्या का उचित समाधान नहीं किया जाता तो पंजाब सरकार अपने स्तर पर वैकल्पिक प्रबंध करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल बिना किसी रुकावट के मंडियों में खरीदी जाए, यह पंजाब सरकार की प्राथमिकता है।

नए पंजाब कांग्रेस प्रधान को दी बधाई

मंत्री लालचंद कटारूचक्क ने पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान जगन सिंह को बधाई देते हुए कहा कि कांग्रेस को एकजुट रखना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में प्रधान का बदलना एक राजनीतिक प्रक्रिया है।

‘गुड गवर्नेंस में मान सरकार का कोई मुकाबला नहीं’

लालचंद कटारूचक्क ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी और लोकहित से जुड़े कार्यों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है।

Punjab Cabinet Decisions: चुनाव आयोग में 19 नए पद, नर्सिंग नियमों में संशोधन, पठानकोट में रणजीतगढ़ विकास प्राधिकरण

पंजाब कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय में 19 नए पद, नर्सिंग सेवा नियम-2016 में संशोधन और पठानकोट में रणजीतगढ़ विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी मिली।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब कैबिनेट की बैठक में सोमवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय में 19 नए पद सृजित करने का निर्णय लिया है। इन पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे चुनाव संबंधी कार्यों के लिए विभाग की प्रशासनिक क्षमता मजबूत होगी।

हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि चुनाव आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय में नए पद सृजित किए गए हैं। सरकार के इस फैसले से कार्यालय के कामकाज के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी और चुनाव से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

पंजाब नर्सिंग शिक्षा सेवा नियम-2016 में संशोधन

कैबिनेट ने पंजाब नर्सिंग शिक्षा सेवा नियम-2016 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। चीमा के मुताबिक संबंधित विभाग का गठन वर्ष 2021 में किया गया था, लेकिन उस समय सेवा नियम तैयार नहीं किए गए थे। इसके बाद करीब 1,400 स्टाफ नर्सों की भर्ती भी की गई।

अब सरकार ने मंत्रिमंडल के माध्यम से नए नियमों को मंजूरी दे दी है। संशोधित नियम लागू होने के बाद नर्सिंग विभाग में सेवा से संबंधित व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा सकेंगी।

गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सोसायटी के दायरे में लाने का फैसला

पंजाब सरकार ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाओं को भी संबंधित सोसायटी के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। इससे पहले कंप्यूटर शिक्षकों को सोसायटी के दायरे में शामिल किया गया था। अब शेष गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था के तहत लाने की मंजूरी दी गई है।

पठानकोट में रणजीतगढ़ विकास प्राधिकरण बनेगा

कैबिनेट बैठक में पठानकोट के पर्यटन विकास को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। सरकार ने रणजीतगढ़ विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य पठानकोट और आसपास के पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पठानकोट में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। रणजीत सागर बांध और आसपास के प्राकृतिक एवं पर्यटन स्थलों को विकसित कर क्षेत्र में पर्यटकों की आमद बढ़ाने की योजना है।

रणजीतगढ़ विकास प्राधिकरण में मुख्यमंत्री भगवंत मान को अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को उपाध्यक्ष बनाए जाने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि प्राधिकरण के गठन से पठानकोट के पर्यटन विकास को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और क्षेत्र को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

पंजाब सरकार के मुताबिक इन फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना, नर्सिंग क्षेत्र में सेवा नियमों को व्यवस्थित करना, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और पठानकोट में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करना है।

MLA मदन लाल बग्गा ने वार्ड नंबर 92 में गली निर्माण कार्य का किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मदन लाल बग्गा ने वार्ड नंबर 92 के बिशन एन्क्लेव में गली निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। इस मौके पर स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में निर्माण कार्य की शुरुआत की गई।

उद्घाटन अवसर पर पार्षद बिट्टू भारद्वाज, ब्लॉक अध्यक्ष शशि शर्मा, महिला विंग इंचार्ज पूनम अरोड़ा, वरिंदर चोपड़ा समेत बड़ी संख्या में इलाके के लोग मौजूद रहे।

मदन लाल बग्गा ने कहा कि वर्ष 2022 में नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने उन पर भरोसा जताकर सेवा करने का अवसर दिया था। उन्होंने कहा कि लोगों से किए गए वादों को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है और क्षेत्र में विकास कार्य लगातार करवाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के मामले में आगे बढ़े। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा क्षेत्र और लुधियाना शहर में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार लुधियाना शहर में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसके लिए विकास कार्य जारी रहेंगे।