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डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूएमएमआईडी (उम्‍मीद) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया; कहा- जीनोमिक और सटीक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य तय करेगी


दिल्ली / सत्ता संदेश

यूएमएमआईडी: दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से पीड़ित परिवारों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप और किफायती स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय पहल

चिकित्सा का पूरा भविष्य जीन और जीनोम आधारित व्यक्तिगत उपचार की ओर अग्रसर है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- उम्‍मीद यह दर्शाता है कि विज्ञान और सार्वजनिक नीति किस प्रकार जीवन को बदल सकते हैं

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज दुर्लभ आनुवंशिक विकारों/रोगों के लिए यूएमएमआईडी (वंशानुगत विकारों के इलाज की अनूठी विधियां) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत धीरे-धीरे एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है जहां स्वास्थ्य सेवा, निदान और उपचार तेजी से जीनोम-आधारित, सटीक और प्रत्येक रोगी की आनुवंशिक प्रोफ़ाइल के अनुसार व्यक्तिगत होते जाएंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार दशकों तक उपेक्षित रहे क्योंकि निदान ही कठिन था, उपचार दुर्गम था और दवाएं या तो अनुपलब्ध थीं या अत्यधिक महंगी थीं, इसलिए सभी परिवारों के लिए निदान और इलाज को व्यवहार्य, वहनीय और सुलभ बनाने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय तंत्र का निर्माण करना आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने यूएमएमआईडी (उम्मीद) को भारत में सटीक चिकित्सा के भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह पहल देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को जीन और जीनोम-आधारित चिकित्सा देखभाल की अगली पीढ़ी के लिए भी तैयार करेगी।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली के पृथ्वी भवन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्र को यूएमएमआईडी नेटवर्क समर्पित करने के लिए आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने यूएमएमआईडी संकलन का विमोचन किया और आनुवंशिक विकारों के निदान, परामर्श, जागरूकता अभियान और कार्यक्रम निगरानी तक राष्ट्रव्यापी पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से यूएमएमआईडी डैशबोर्ड का शुभारम्भ किया।

इस कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले; डीबीटी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुचिता नीनावे; वरिष्ठ वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, यूएमएमआईडी कार्यान्वयन संस्थानों के प्रतिनिधि और देश भर के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संगठनों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने लगातार किफायती, सुलभ, निवारक और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया है, स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मजबूत किया है और सस्ती दवाओं तक पहुंच को व्यापक बनाया है, साथ ही साथ शीघ्र निदान और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रणालियां भी विकसित की हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार एक मूक लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें परिवार अक्सर निदान और उपचार की तलाश में वर्षों तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत कम आबादी को प्रभावित करने के बावजूद, ये विकार प्रभावित परिवारों पर भारी भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक बोझ डालते हैं और इसलिए अन्य किसी भी गंभीर बीमारी की तरह ही इस पर भी राष्ट्रीय ध्यान देने और स्वास्थ्य देखभाल को लेकर संवेदनशील होने की जरूरत है।

चिकित्सा जगत से जुड़े अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुर्लभ आनुवंशिक विकारों को ऐतिहासिक रूप से मुख्यधारा की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सीमित महत्व दिया गया है, क्योंकि ये कम प्रचलित हैं और इनकी निदान प्रक्रिया जटिल है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अक्सर निदान में देरी, जागरूकता की कमी और रोगियों के लिए अपर्याप्त उपचार की सुविधा उपलब्ध होती है। उन्होंने यह भी कि भारत की व्यापक आनुवंशिक विविधता इस चुनौती को और भी जटिल बनाती है और इसके लिए प्रारंभिक जांच, आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व परामर्श, चिकित्सकों के प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता के एक मजबूत तंत्र की जरूरत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इस कठिन लेकिन सामाजिक परिवर्तनकारी मिशन को हाथ में लेने की सराहना करते हुए कहा कि यूएमएमआईडी यह दर्शाता है कि कैसे विज्ञान, करुणा और जन नीति समय पर हस्तक्षेप और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से पीड़ा को कम करने के लिए एक साथ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व और नवजात शिशु स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श, चिकित्सकों की क्षमता निर्माण और सामुदायिक आउटरीच को एकीकृत जन स्वास्थ्य मॉडल के तहत एकीकृत करते हुए एक राष्ट्रीय ढांचा सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि स्क्रीनिंग और निदान सेवाओं के माध्यम से इस कार्यक्रम से पहले ही लगभग तीन लाख लोगों को लाभ मिल चुका है और आकांक्षी जिलों तथा वंचित क्षेत्रों में इसका विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से उन्नत निदान और परामर्श के लिए लगभग 30 निदान केंद्र स्थापित करने में भी मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि उन्नत जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा महानगरों से बाहर भी आम नागरिकों तक पहुंचे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यूएमएमआईडी के माध्यम से प्राप्त अनुभव सटीक चिकित्सा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा, जहां मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार प्रोटोकॉल रोगियों की व्यक्तिगत आनुवंशिक प्रोफाइल पर आधारित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आनुवंशिक चिकित्सा और परमाणु चिकित्सा दो प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं जो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा को नया रूप दे सकते हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यूएमएमआईडी पहल ने वैज्ञानिक हस्तक्षेप, सहयोगात्मक जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और शीघ्र निदान के माध्यम से हजारों परिवारों को आशा की किरण दिखाई है। उन्होंने कहा कि भारत की आनुवंशिक विविधता वैज्ञानिक नवाचार और व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक हैं।

इससे पहले, उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए डॉ. सुचिता नीनावे ने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, परामर्श और क्षमता निर्माण तक पहुंच में सुधार करके वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल ने समन्वित संस्थागत साझेदारी के माध्यम से दुर्लभ और वंशानुगत रोगों के इलाज के लिए एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाने में मदद की है।

इस कार्यक्रम में यूएमएमआईडी पहल का एक संक्षिप्त विवरण, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों पर प्रस्तुतियां और इस पहल की यात्रा, प्रभाव और भविष्य की रूपरेखा को उजागर करने वाली एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी शामिल था।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए इसकी छह दशकों की विशिष्ट राष्ट्र सेवा को स्मरण किया


तिरुवनंतपुरम /सत्ता संदेश

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रही है

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने ऑपरेशन सिंदूर सहित संकट के समय अनुकरणीय सेवा दी है

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तिरुवनंतपुरम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल पेरूकाडा फैक्ट्री में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। यह समारोह देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संगठन के 60 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

वर्ष 1966 में स्थापित, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपने शुरुआती योगदान से लेकर स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों, निदान, अवसंरचना विकास और सामाजिक विपणन में अपनी विविध उपस्थिति तक, संगठन ने लगातार उत्कृष्टता, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जताए गए गहरे विश्वास पर जोर दिया और कहा कि संगठन ने प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विश्वास को लगातार कायम रखा है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने एचएलएल के निरंतर विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की उभरती जरूरतों के प्रति उसकी तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक, प्रभावी उपायों के माध्यम से उन्हें दूर करने की अद्वितीय क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि ऐसे प्रयास हमेशा स्तर तक नहीं पहुंचते, लेकिन उनका संचयी प्रभाव, विशेष रूप से महिलाओं और रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में, राष्ट्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एचएलएल पर विश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के किफायती दवाइयां और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (एएमआरआईटी) फार्मेसी नेटवर्क जैसी प्रमुख पहलों के प्रति मजबूत समर्थन और जुड़ाव में भी परिलक्षित होता है, जिसने हाल ही में अपनी सेवा के एक दशक पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ-साथ ऐसी पहलों ने देश भर में सस्ती दवाओं की उपलब्धता को काफी हद तक बढ़ाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि एएमआरआईटी फार्मेसियों ने मंत्रालय को कैंसर की दवाओं, ब्रांडेड दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिनकी कीमतें प्रचलित बाजार दरों से 50 प्रतिशत कम हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को ठोस वित्तीय राहत मिल रही है।

संकट के समय में एचएलएल की सराहनीय भूमिका को याद करते हुए, श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसके तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण, भीष्म क्यूब्स और दवाएं जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब राज्यों में तुरंत पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संकट के समय राष्ट्र की सेवा करने के लिए एचएलएल की परिचालन तत्परता, प्रतिबद्धता और क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संस्था की वास्तविक क्षमता महत्वपूर्ण क्षणों में चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता में निहित होती है और इस संबंध में एचएलएल ने सार्वजनिक सेवा वितरण में एक मिसाल कायम की है।

अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और समर्पण के उच्चतम मानकों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठन की सराहना की और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भागीदार के रूप में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में मंत्रालय के निरंतर विश्वास की पुष्टि की।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्मारक सिक्के का विमोचन था, जो भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में एचएलएल की विशिष्ट यात्रा के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है। यह इसकी स्थायी विरासत और राष्ट्रीय महत्व का भी प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास सहित प्रमुख संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को आगे बढ़ाना और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाना है।

किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों और सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, एचएलएल ने इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण उत्पाद और सेवा पहलों की घोषणा की। इनमें हाइड्रोसेफालस शंट का पुनः शुभारंभ, एचएलएल परिवर्तन वेलनेस क्लिनिक, एचएलएल वाटर का शुभारंभ और ‘हैप्पी डेज़’ कम्पोस्टेबल सैनिटरी नैपकिन का विमोचन शामिल हैं। ये सभी पहल संगठन के सुलभता, स्थिरता और नवाचार-संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल के अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का उद्घाटन भी शामिल था। यह उन्नत सुविधा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता समाधानों को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी विनिर्माण उत्कृष्टता को मजबूत करने के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की पीएफटी और एएफटी सुविधाओं का दौरा किया जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रमुख कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने दोनों इकाइयों के कारखाना का दौरा किया, टीमों के साथ बातचीत की और विनिर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही उनके गुणवत्ता, दक्षता और स्वदेशी उत्पादन के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी, साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित हितधारकों ने भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले दो-दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे

आयुष मंत्रालय 10 अप्रैल, 2026 को विज्ञान भवन में विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 मनाएगा।  इस अवसर पर दो-दिवसीय संवादात्मक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में प्रमुख नीति निर्माता, शोधकर्ता, चिकित्सक और प्रतिनिधि एक साथ आकर सतत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण में होम्योपैथी की उभरती भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस संगोष्ठी का विषय सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है। इस वर्ष का आयोजन इस बात पर प्रकाश डालेगा कि होम्योपैथी किस प्रकार स्वास्थ्य सेवा के लिए एक समग्र, लागत प्रभावी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण प्रदान करती है – जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण पर सतत विकास लक्ष्य 3 (एसडीजी 3) जैसी वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के साथ-साथ देश भर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रख्यात विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में होम्योपैथी के क्षेत्र में प्रमुख अनुसंधान उन्नयन, जन स्वास्थ्य पहल और नीतिगत विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक मान्यता, नैतिक मानकों को मजबूत करने और होम्योपैथी को स्वास्थ्य प्रणालियों के मुख्यधारा में एकीकृत करने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों के बढ़ते बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में, यह आयोजन एक स्थायी चिकित्सा प्रणाली के रूप में होम्योपैथी की क्षमता को रेखांकित करेगा – जो न्यूनतम पारिस्थितिक पदचिह्न, संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग और शरीर के जन्मजात उपचार तंत्र को उत्तेजित करने पर केंद्रित है।

विशेष सत्रों में निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली संबंधी और पुराने रोगों के प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका और पारंपरिक औषध चिकित्सा पर निर्भरता कम करने में इसके योगदान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल औषधीय पद्धतियों, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में, देश में और वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी पहलों में, होम्योपैथी की स्वीकार्यता में वृद्धि देखी गई है। आयुष मंत्रालय साक्ष्य-आधारित पद्धतियों, बेहतर पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकरण के माध्यम से इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करने तथा एक लचीला, समावेशी और सतत स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों को नई गति प्रदान करने की उम्मीद है।

यह आयोजन हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा जिससे एक ऐसे भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा जहां स्वास्थ्य सेवा न केवल प्रभावी हो बल्कि न्यायसंगत, पर्यावरण के प्रति जागरूक और टिकाऊ भी हो।