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Himachal Pradesh Medical Colleges: हिमाचल में 320 नई PG मेडिकल सीटों को मंजूरी, ₹415 करोड़ देगा केंद्र

हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई PG मेडिकल सीटों को केंद्र की मंजूरी मिली है। इसके लिए करीब ₹415 करोड़ का अनुदान दिया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार करीब 415 करोड़ रुपये का अनुदान देगी।

जेपी नड्डा के अनुसार, इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के युवाओं को अपने राज्य में ही मेडिकल की उच्च शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में मदद मिल सकती है।

हिमाचल के 6 मेडिकल कॉलेजों में सीटों का ब्योरा

केंद्र सरकार की मंजूरी के तहत राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नई पीजी सीटें बढ़ाई जाएंगी। कॉलेजवार विवरण इस प्रकार है:

  • शिमला: 91 नई पीजी सीटें
  • टांडा: 57 नई पीजी सीटें
  • हमीरपुर: 57 नई पीजी सीटें
  • मंडी: 55 नई पीजी सीटें
  • नाहन: 32 नई पीजी सीटें
  • चंबा: 28 नई पीजी सीटें

इन सीटों के शुरू होने से सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और कैंसर सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने दी ₹415 करोड़ की मंजूरी

जेपी नड्डा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार से इस संबंध में प्रस्ताव 23 जून 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा हुई। अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 पीजी सीटों को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि सीटों को समय पर शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं और तैयारियां जल्द पूरी की जाएं, ताकि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

देशभर में बढ़ाई जाएंगी 10,000 मेडिकल सीटें

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल सीटें बढ़ाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। हिमाचल प्रदेश की 320 नई पीजी सीटों को इसी पहल का हिस्सा बताया गया है।

रेल और स्वास्थ्य परियोजनाओं में तेजी लाने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार से चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजनाओं से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाने की अपील भी की। उन्होंने जमीन और राज्य सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया।

इसके अलावा, केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता बताई।

जेपी नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार सहयोग जारी रखेगी। नई पीजी सीटों की मंजूरी से राज्य में चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार की उम्मीद है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए इसकी छह दशकों की विशिष्ट राष्ट्र सेवा को स्मरण किया


तिरुवनंतपुरम /सत्ता संदेश

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रही है

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने ऑपरेशन सिंदूर सहित संकट के समय अनुकरणीय सेवा दी है

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तिरुवनंतपुरम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल पेरूकाडा फैक्ट्री में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। यह समारोह देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संगठन के 60 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

वर्ष 1966 में स्थापित, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपने शुरुआती योगदान से लेकर स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों, निदान, अवसंरचना विकास और सामाजिक विपणन में अपनी विविध उपस्थिति तक, संगठन ने लगातार उत्कृष्टता, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जताए गए गहरे विश्वास पर जोर दिया और कहा कि संगठन ने प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विश्वास को लगातार कायम रखा है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने एचएलएल के निरंतर विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की उभरती जरूरतों के प्रति उसकी तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक, प्रभावी उपायों के माध्यम से उन्हें दूर करने की अद्वितीय क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि ऐसे प्रयास हमेशा स्तर तक नहीं पहुंचते, लेकिन उनका संचयी प्रभाव, विशेष रूप से महिलाओं और रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में, राष्ट्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एचएलएल पर विश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के किफायती दवाइयां और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (एएमआरआईटी) फार्मेसी नेटवर्क जैसी प्रमुख पहलों के प्रति मजबूत समर्थन और जुड़ाव में भी परिलक्षित होता है, जिसने हाल ही में अपनी सेवा के एक दशक पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ-साथ ऐसी पहलों ने देश भर में सस्ती दवाओं की उपलब्धता को काफी हद तक बढ़ाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि एएमआरआईटी फार्मेसियों ने मंत्रालय को कैंसर की दवाओं, ब्रांडेड दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिनकी कीमतें प्रचलित बाजार दरों से 50 प्रतिशत कम हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को ठोस वित्तीय राहत मिल रही है।

संकट के समय में एचएलएल की सराहनीय भूमिका को याद करते हुए, श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसके तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण, भीष्म क्यूब्स और दवाएं जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब राज्यों में तुरंत पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संकट के समय राष्ट्र की सेवा करने के लिए एचएलएल की परिचालन तत्परता, प्रतिबद्धता और क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संस्था की वास्तविक क्षमता महत्वपूर्ण क्षणों में चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता में निहित होती है और इस संबंध में एचएलएल ने सार्वजनिक सेवा वितरण में एक मिसाल कायम की है।

अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और समर्पण के उच्चतम मानकों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठन की सराहना की और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भागीदार के रूप में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में मंत्रालय के निरंतर विश्वास की पुष्टि की।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्मारक सिक्के का विमोचन था, जो भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में एचएलएल की विशिष्ट यात्रा के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है। यह इसकी स्थायी विरासत और राष्ट्रीय महत्व का भी प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास सहित प्रमुख संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को आगे बढ़ाना और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाना है।

किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों और सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, एचएलएल ने इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण उत्पाद और सेवा पहलों की घोषणा की। इनमें हाइड्रोसेफालस शंट का पुनः शुभारंभ, एचएलएल परिवर्तन वेलनेस क्लिनिक, एचएलएल वाटर का शुभारंभ और ‘हैप्पी डेज़’ कम्पोस्टेबल सैनिटरी नैपकिन का विमोचन शामिल हैं। ये सभी पहल संगठन के सुलभता, स्थिरता और नवाचार-संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल के अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का उद्घाटन भी शामिल था। यह उन्नत सुविधा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता समाधानों को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी विनिर्माण उत्कृष्टता को मजबूत करने के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की पीएफटी और एएफटी सुविधाओं का दौरा किया जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रमुख कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने दोनों इकाइयों के कारखाना का दौरा किया, टीमों के साथ बातचीत की और विनिर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही उनके गुणवत्ता, दक्षता और स्वदेशी उत्पादन के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी, साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित हितधारकों ने भाग लिया।

चंडीगढ़ ने रक्त आधान सेवाओं पर राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) एवं महानिदेशक (NACO) ने की*

चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026: आज सुबह 11 बजे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रक्त चढ़ाने से जुड़ी सेवाओं की एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) और महानिदेशक, नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने की।

इस बैठक में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चंडीगढ़ से भी वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।

बैठक में रक्त सेवाओं के 5 मुख्य चरणों की समीक्षा की गई, जैसे—लाइसेंस देना और नवीनीकरण, रक्तदान करने वालों की जांच और रक्त संग्रह, संक्रमण (TTI) की जांच, रक्त का प्रोसेसिंग और स्टोरेज, तथा रिकॉर्ड रखना। इन सभी को 10 मुख्य मानकों (KPI) के आधार पर परखा गया। इसके लिए eRaktKosh, CDSCO, ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम (BBMS) और अन्य रिकॉर्ड्स के डेटा का उपयोग किया गया।

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि देश का लक्ष्य है कि हर जिले में सुरक्षित खून उपलब्ध हो और खून चढ़ाने से होने वाले संक्रमण (TTI) बिल्कुल खत्म हों। उन्होंने यह भी बताया कि दिसंबर 2026 तक हर जिले में कम से कम एक ब्लड बैंक होना चाहिए।

बैठक में बताया गया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर जिला स्तर पर ब्लड सेंटर बढ़ाने और सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर को eRaktKosh से जोड़ने का काम चल रहा है।

चंडीगढ़ के बारे में बताया गया कि यहां हर जिले में कम से कम एक ब्लड सेंटर उपलब्ध है। साथ ही, यहां अधिकतर रक्तदान स्वेच्छा से किया जाता है और जांच की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है।

आगे के लिए यह तय किया गया कि ब्लड सेंटरों में काम करने के नियमों (SOPs) को सही तरीके से लागू किया जाए, आधुनिक टेस्ट (जैसे ELISA/CLIA) अपनाए जाएं, ब्लड कंपोनेंट अलग करने की सुविधा बढ़ाई जाए और eRaktKosh व BBMS के जरिए डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए।

इसके अलावा, ब्लड डोनर्स की पहचान के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम और हर ब्लड सेंटर का डिजिटल रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। इस काम में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, रेड क्रॉस सोसायटी और अन्य संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।

बैठक के अंत में डॉ. गुप्ता ने निर्देश दिए कि सभी ब्लड सेंटरों के लाइसेंस की जांच की जाए, eRaktKosh और BBMS का 100% उपयोग सुनिश्चित किया जाए, नियमों का सख्ती से पालन हो, कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण दिया जाए और सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

चंडीगढ़ प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर हर नागरिक को समय पर और सुरक्षित रक्त  उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।