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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने मनाया स्वच्छता पखवाड़ा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय और अपने सभी स्वायत्त संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 1 मई से 15 मई तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया। कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के दिशानिर्देशों एवं कैलेंडर के अनुसार इसका आयोजन किया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का प्रारंभ 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित जैव प्रौद्योगिकी विभाग में शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुआ। इसमें विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया। सामूहिक शपथ पाठ के माध्यम से स्वच्छता, अनुशासन और नागरिक उत्तरदायित्व के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया। साथ ही इसने पखवाड़े भर चलने वाली गतिविधियों के लिए एक आधार भी तैयार किया। इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भागीदारी देखी गई और यह पखवाड़े के लिए एक सशक्त शुरुआत साबित हुआ। पखवाड़े के दौरान, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इसके संबद्ध स्वायत्त संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों की योजना बनाई गई और उन्हें व्यापक भागीदारी के साथ पूरा किया गया। स्वच्छता, जल संरक्षण और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली विभिन्न सर्वोत्तम नियमों को कार्य योजना में शामिल किया गया।

इस दौरान स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण अभियान, एकल-उपयोग प्लास्टिक पर जागरूकता के लिए अतिथियों का व्याख्यान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं, सेमिनार, चित्रकला, अपशिष्ट से धन सृजन प्रतियोगिता, जूट बोरियों का वितरण, लकड़ी की पैकिंग सामग्री का पुन: उपयोग करके सुंदर गमले बनाने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा, पास के सरकारी स्कूल में प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन, शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण पर विशेष वार्ता आयोजित की गई। स्वच्छता के प्रति लोगों को शिक्षित करने के लिए छात्रों द्वारा निबंध/कविता/नारा लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।

बिरसा हरित ग्राम योजना ने बदली झारखंड के किसानों की तस्वीर, बंजर भूमि बनी आय का मजबूत स्रोत

रांची / सत्ता संदेश

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनती जा रही है। कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी भूमि अब फलदार पौधों, हरित खेती और बागवानी गतिविधियों के जरिए किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है। योजना के प्रभाव से हजारों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिले हैं।

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य बंजर और परती भूमि का उत्पादक उपयोग करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। इसके तहत किसानों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, पपीता और अन्य फलदार पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही पौधारोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत बड़ी मात्रा में अनुपयोगी भूमि को बागवानी क्षेत्र में परिवर्तित किया गया है। इससे न केवल हरित आवरण बढ़ा है बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आय का नया साधन भी मिला है। कई गांवों में ऐसे किसान सामने आए हैं जिन्होंने पहले खाली पड़ी जमीन पर फलदार पौधे लगाए और अब उनकी फसल से नियमित आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसे ग्रामीण रोजगार से जोड़ा गया है। पौधारोपण, सिंचाई, रखरखाव और फसल प्रबंधन के कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे राज्य, जहां बड़ी मात्रा में भूमि वर्षो तक अनुपयोगी पड़ी रहती है, वहां ऐसी योजनाएं कृषि और पर्यावरण दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बागवानी आधारित खेती किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर और स्थायी आय देने की क्षमता रखती है।

योजना का पर्यावरणीय प्रभाव भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा मिला है और स्थानीय जैव विविधता को भी लाभ पहुंचा है। इसके अलावा जल संरक्षण और सूक्ष्म जलवायु सुधार में भी ऐसे प्रयास सहायक साबित हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के कई लाभार्थियों का कहना है कि योजना ने उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। जहां पहले भूमि बेकार पड़ी रहती थी, वहीं अब वही जमीन परिवार की आय बढ़ाने का माध्यम बन गई है। कई किसानों ने फल उत्पादन के साथ-साथ सब्जी और अन्य सहायक कृषि गतिविधियां भी शुरू की हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है और किसानों को बाजार, भंडारण तथा प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़ा जाता है, तो यह झारखंड के ग्रामीण विकास मॉडल की एक बड़ी सफलता बन सकती है।

बिरसा हरित ग्राम योजना इस बात का उदाहरण बनकर उभरी है कि सही नीति, सामुदायिक भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से बंजर भूमि को भी समृद्धि और रोजगार का आधार बनाया जा सकता है।

राष्ट्रीय खेल 2027 की तैयारियों की समीक्षा, मेघालय में बनेगा 150 करोड़ रुपये का हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर

शिलांग / सत्ता संदेश

केंद्रीय खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने अगले वर्ष आयोजित होने वाले 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया और मेघालय में 150 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक हाई-एल्टीट्यूड (ऊंचाई पर स्थित) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।

शिलांग में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में Conrad Sangma, केंद्रीय खेल एवं युवा कार्य राज्य मंत्री Raksha Khadse, P. T. Usha, मेघालय के खेल मंत्री तथा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के खेल विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों के आवास, परिवहन, सुरक्षा और प्रतियोगिता स्थलों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेल केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करने और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मांडविया ने कहा कि मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहां के खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग और अन्य खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऐसे में हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना क्षेत्र के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेने से खिलाड़ियों की सहनशक्ति, फेफड़ों की क्षमता और प्रदर्शन में सुधार होता है। यही कारण है कि दुनिया के कई प्रमुख खेल राष्ट्र अपने एथलीटों को ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं। मेघालय में प्रस्तावित केंद्र भारतीय खिलाड़ियों को विदेश जाने के बजाय देश में ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में खेल पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि इस आयोजन से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और खेलों के प्रति युवाओं की रुचि और मजबूत होगी।

Indian Olympic Association की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा कि राष्ट्रीय खेल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने आयोजन की तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तेजी से आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित कर रहा है।

केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ और अन्य खेल विकास योजनाओं के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। खेल मंत्रालय का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के जरिए भारत वैश्विक खेल प्रतिस्पर्धाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों के साथ-साथ हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की घोषणा को भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वर्ष 2026-27 में प्रवेश के लिए गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, लुधियाना में हेल्प डेस्क स्थापित – डिप्टी कमिश्नर

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन, आई.ए.एस. ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंजाब राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड, चंडीगढ़ के माध्यम से किए जा रहे प्रवेश (Admissions) के लिए ऋषि नगर, छोटी हैबोवाल के पास स्थित एस.आर.एस. सरकारी बहु-तकनीकी (पॉलिटेक्निक) कॉलेज में एक हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्र इस हेल्प डेस्क पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना पंजीकरण (Registration) करवा सकते हैं।
प्रवेश के लिए योग्यता (Eligibility): प्रथम वर्ष डिप्लोमा (1st Year Diploma): 10वीं पास कर चुके छात्र इंजीनियरिंग डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं। द्वितीय वर्ष (Direct 2nd Year / Lateral Entry): आईटीआई (2 वर्षीय), 12वीं (वोकेशनल), या 12वीं (साइंस) पास छात्र सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।
सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में 7 डिप्लोमा स्ट्रीम उपलब्ध हैं: कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (Computer Science & Engineering), इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Information Technology), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Electrical Engineering), इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (Electronics & Communication Engineering), फैशन डिजाइनिंग (Fashion Designing), गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग (Garment Manufacturing), मॉडर्न ऑफिस प्रैक्टिस (Modern Office Practice)
छात्रवृत्ति और फीस में छूट (Scholarships): अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए: भारत/पंजाब सरकार द्वारा संचालित डॉ. अंबेडकर पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत, जिन छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से कम है, उन्हें केवल 1,133 रुपये की मामूली फीस देनी होगी। अन्य श्रेणियों के लिए: मुख्यमंत्री वजीफा (स्कॉलरशिप) योजना के तहत छात्रों को उनकी मुख्य योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर फीस में बड़ी राहत/लाभ दिया जाता है। संपर्क सूत्र और मार्गदर्शन सेल (Contact Details) विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों की जानकारी और मार्गदर्शन के लिए एक गाइडेंस सेल का गठन किया गया है, जो श्रीमती रूपिंदर कौर (विभागाध्यक्ष) और डॉ. पवन कुमार (वरिष्ठ व्याख्याता) की देखरेख में काम कर रहा है: मोबाइल नंबर: 98158-95547, लैंडलाइन नंबर: 0161-2303223
कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए सुरक्षित होस्टल की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ पारिवारिक और अनुशासित माहौल है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास (Personality Development) के लिए बेहतरीन खेल के मैदान और सांस्कृतिक गतिविधियों (Cultural Activities) का भी विशेष प्रबंध है।
डिप्टी कमिश्नर ने लुधियाना जिले और आसपास के युवाओं से पंजाब सरकार की इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।

जीवन और शतायु जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ

दिल्ली / सत्ता संदेश

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए “जीवन” यानी ज्‍वाइंट इम्‍पावरमेंट एंड वर्चुअल असिस्‍टेंस नेटवर्क मोबाइल एप्लिकेशन और “शतायु” वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र देखभाल सहायता एवं प्रशिक्षण जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड लॉन्च किया है।

यह वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, देखभाल, गरिमा और सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है, ताकि प्रौद्योगिकी आधारित देखभाल सहायता के माध्यम से वृद्धावस्था देखभाल का इकोसिस्‍टम तैयार हो सके।

देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को संयुक्त बुजुर्ग सशक्तिकरण और वर्चुअल सहायता नेटवर्क मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया, जो भारत में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और सामाजिक समावेश को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

वहीं देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल संबंधी सेवाओं को समर्थन देकर मजबूत करने के लिए विकसित एक अन्य एप्लिकेशन, “शतायु” सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी नामक डैशबोर्ड को भी “एक सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का निर्माण” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान लॉन्च किया गया था।

यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी विशेष जिले और राज्य में वृद्धावस्था देखभालकर्ताओं की उपलब्धता जैसी जानकारी प्रदान करता है।

इस प्लेटफॉर्म को सरलीकृत कार्यक्षमताओं और उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस के साथ डिजाइन किया गया है ताकि इस्‍तेमाल में आसानी और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया


छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि बस्तर के नेतानार गांव को तीर्थ माना जाता है, नक्सलवाद की समाप्ति के बाद वहाँ CSC केंद्र का खुलना ऐतिहासिक है

बस्तर की जिस भूमि पर नक्सलियों ने 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की थी, उसी स्थान पर आज गरीब आदिवासियों के लिए जनसेवा केंद्र का निर्माण हो रहा है

नक्सलवाद की समाप्ति का उद्देश्य केवल नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकना ही नहीं, बल्कि गरीब आदिवासियों तक जनकल्याणकारी सुविधाएँ पहुँचाना भी है

देशभर में आजादी 1947 में आ गई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च, 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद आदिवासी बहनें विकास का नेतृत्व करेंगी

नक्सलवाद से हुए दशकों के नुकसान की भरपाई हमारी सरकार अगले 5 वर्षों में करेग

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन और श्री तपन डेका, निदेशक, आसूचना ब्यूरो सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज एक बहुत ऐतिहासिक दिन है। शहीद वीर गुण्डाधर की यह जन्मभूमि और कर्मभूमि अपने आप में भारत के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है। वर्ष 1910 में हमारे वीर आदिवासी नेता ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत की थी और विदेशी शासन के विरुद्ध बस्तर के आदिवासियों की लड़ाई का नेतृत्व शहीद वीर गुण्डाधुर ने किया था। उन्होंने कहा कि आज उन्हीं से प्रेरणा लेकर नेतानार का यह कैंप, जो वर्ष 2013 से सुरक्षा कैंप था, अब सेवा कैंप बनकर आदिवासियों की सेवा करेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सेवा कैंप का नाम भी शहीद वीर गुण्डाधुर के नाम पर रखा है। यह कैंप हमें सदैव स्मरण कराएगा कि एक समय यहां छह पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की गई थी, यहां के स्कूल, अस्पताल उजाड़ दिए गए थे, राशन पहुंचने नहीं दिया गया, रोजगार और शिक्षा से लोगों को वंचित रखा गया। श्री शाह ने कहा कि आज उसी स्थान पर, जहां हमारे छह जवान शहीद हुए थे, वहां गरीब आदिवासियों की सेवा का एक तीर्थ स्थल बनाने का कार्य प्रारंभ हो रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब हमने नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया, उसका उद्देश्य केवल नक्सलियों का खात्मा करना नहीं बल्कि इस क्षेत्र के गरीब आदिवासियों के जीवन में वे सभी सुविधाएं पहुंचाना भी था, जो बड़े-बड़े शहरों में उपलब्ध हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल बन सके। उन्होंने कहा कि “नियद नेल्लानार” योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार हर गांव में सस्ते राशन की दुकान खोल रही है, हर गांव में प्राथमिक विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं और गांवों के बीच में एक समूह PSC एवं CSC खोले जा रहे हैं। अब यहां हर गरीब के घर तक पीने का पानी पहुंचाने का काम हो रहा है, आधार कार्ड बन रहे हैं, राशन कार्ड बन रहे हैं। हर व्यक्ति को प्रति माह 7 किलो चावल दिया जाता है और 5 लाख रूपए तक का पूरा इलाज मुफ्त में करने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की योजना भी अब यहां तक पहुंच चुकी है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने दशकों तक गलतफहमी फैलाई कि हमारा विकास नहीं हुआ इसलिए हमने हथियार उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि इस क्षेत्र का विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि नक्सलियों ने हाथों में हथियार उठा रखे थे। उन्होंने कहा कि रायपुर में विकास के जितने कार्य हुए हैं, उन्हें एक साल के भीतर हमारी सरकार आपके गांवों तक लाएगी। श्री शाह ने कहा कि सरकार की हर सुविधा पर आपका इतना ही अधिकार है जितना बड़े शहरों की जनता का है। श्री शाह ने कहा कि यह आपकी सरकार है और आपके जीवन में खुशियां लाना सरकार का उत्तरदायित्व है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बस्तर में अभी लगभग 200 कैंप हैं और उनमें से 70 कैंप को अगले डेढ़ वर्षों में हम इसी प्रकार के जनसेवा केंद्र के रूप में परिवर्तित कर आदिवासी कल्याण का केन्द्र बनाएंगे। इन कैंपों का डिजाइन कंप्लीट होगा, जिनके अंदर बैंकिंग सुविधा भी होगी, आधार कार्ड भी बनेगा, राशन कार्ड भी बनेगा, सरकार की योजना के पैसे यहीं से मिलेंगे, कॉमन सर्विस सेंटर पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी आह्वान किया है कि नक्सलवाद समाप्त हो गया है, ऐसा मानकर चैन की नींद नहीं सोना है। नक्सलवाद से हुए नुकसान की भरपाई हम 5 साल के अंदर कर इन सभी गांवों को ऊर्जावान आदिवासी गांवों में बदलेंगे । इसके लिए आदिवासियों के खेल को बढ़ावा देने के लिए हमने बस्तर ओलंपिक और आदिवासी साहित्य, भाषा, संगीत, कला, नृत्य और विविध पकवानों को विश्व प्रसिद्ध करने के लिए बस्तर पंडुम शुरू किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि इसी दिन के लिए शहीद वीर गुण्डाधुर ने आजादी का आंदोलन शुरू किया होगा। उन्होंने कहा कि देशभर में तो आजादी 1947 में आ गई थी, मगर हमारे बस्तर में 31 मार्च, 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है। श्री शाह ने कहा कि जो देरी हुई है, उसके पूरे नुकसान की भरपाई हम बहुत जल्द करेंगे और इस क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने कहा कि विकास को रोकने से कभी विकास नहीं होता है, बल्कि जब हम विकास को गति देंगे तभी विकास का फायदा हम तक पहुंचेगा।

सरकार ने छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद को मजबूत किया; आत्मनिर्भर मिशन के अंतर्गत बिहार में पहली बार संगठित तरीके से दलहन खरीद शुरू की


बिहार में 100 मीट्रिक टन से अधिक की खरीद की गई; एनसीसीएफ और एनएएफईडी के किसान संपर्क और खरीद बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने से छत्तीसगढ़ में परिचालन 12,000 मीट्रिक टन के पार पहुंचा

डिजिटल प्लेटफॉर्म, विस्तारित पीएसीएस नेटवर्क और सहकारी समितियों के नेतृत्व वाले खरीद अभियान से किसानों की भागीदारी और मूल्य समर्थन में वृद्धि दर्ज की गई

बिहार /सत्ता संदेश

भारत सरकार ने पीएम-आशा योजना के अंतर्गत खरीद कार्यों का काफी विस्तार किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएएफईडी) ने केंद्रीय भूमिका निभाई है, साथ ही आत्मनिर्भर दलहन मिशन के अंतर्गत बिहार में पहली बार संरचित दलहन खरीद पहल शुरू की है।

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, एनसीसीएफ ने बिहार में पहली बार मसूर (दाल) की संगठित खरीद शुरू की है, जो दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है। यह पहल केंद्रीय भंडारण निगम के सहयोग से संचालित डब्ल्यूडीआरए द्वारा अनुमोदित गोदामों के माध्यम से वैज्ञानिक भंडारण द्वारा समर्थित है।

22 अप्रैल 2026 तक बिहार में निम्नलिखित कदम उठाए गए:

  • 32,000 मीट्रिक टन (मसूर) की खरीद का लक्ष्य
  • 16 पीएसीएस/एफपीओ पंजीकृत
  • 59 किसानों को ऑनबोर्ड किया गया
  • 100.4 मीट्रिक टन की खरीद पूरी हुई

एनएएफईडी राज्य भर में अपने सहकारी नेटवर्क के माध्यम से मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत संचालन को बढ़ाने की तैयारी भी कर रहा है।

छत्तीसगढ़: एमएसपी खरीद संचालन का विस्तार

छत्तीसगढ़ में, ई-संयुक्ति पोर्टल के माध्यम से किसानों की डिजिटल भागीदारी और जमीनी स्तर पर संपर्क और दूरदर्शन के साथ जुड़ाव सहित व्यापक जागरूकता अभियानों के कारण पीएम-आशा के अंतर्गत खरीद में तेजी आई है।

वर्तमान में 85 पैक्स केंद्रों का एक नेटवर्क कार्यान्वित हैं, जिसमें धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जैसे जिलों में खरीद चल रही है। परिचालन का विस्तार सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया तक करने की तैयारी है।

एनसीसीएफ का प्रदर्शन (22 अप्रैल 2026 तक):

  • खरीद लक्ष्य:
  • चना: 63,325 मीट्रिक टन
  • मसूर: 5,360 मीट्रिक टन
  • पंजीकृत किसान:
  • चना: 16,012
  • मसूर: 451
  • खरीद प्रक्रिया पूरी हुई:
  • चना: 9,032 मीट्रिक टन
  • मसूर: 7.98 मीट्रिक टन
  • किसानों को लाभ हुआ:
  • चना: 6,129
  • मसूर: 28

एनएएफईडी का प्रदर्शन (22 अप्रैल 2026 तक):

  • राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से 137 केंद्र खोले गए।
  • अतिरिक्त प्रत्यक्ष केंद्र:
  • चना: 7
  • मसूर: 3
  • पंजीकृत किसान:
  • चना: 39,467
  • मसूर: 510
  • खरीद प्रक्रिया पूरी हुई:
  • चना: 3,850 मीट्रिक टन
  • मसूर: 109 मीट्रिक टन
  • किसानों को लाभ हुआ:
  • चना: 2,645
  • मसूर: 281

ये पहलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित खरीद प्रणाली को मजबूत करने, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और उन्हें औपचारिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाती हैं। खरीद प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार से पारदर्शिता, दक्षता और व्यापक पहुंच में और वृद्धि होने की आशा है।

एनसीसीएफ और एनएएफईडी दोनों राज्यों में अपने परिचालन को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरीकरण में योगदान मिलेगा और साथ ही आत्मनिर्भर भारत पहल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

जनगणना 2027 हुई डिजिटल: चंडीगढ़ DGP ने ऑनलाइन स्व-गणना की

चंडीगढ़, 17 अप्रैल 2026: जनगणना 2027 में जनता की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में, डॉ. सागर प्रीत हूडा, पुलिस महानिदेशक, यूटी चंडीगढ़, ने आज ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना सफलतापूर्वक पूरी की। स्व-गणना प्रक्रिया को डॉ. नवजोत खोसा, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ और सुश्री खुशप्रीत कौर, एसडीएम (केंद्रीय), यूटी चंडीगढ़ द्वारा सुगम बनाया गया।

स्व-गणना प्रक्रिया को अपनाकर, DGP ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की सरलता, पहुंच और सुरक्षित प्रकृति को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी नागरिक-केंद्रित पहल न केवल गणना प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करती हैं बल्कि डेटा संग्रह में अधिक सटीकता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती हैं।

उन्होंने सभी पुलिस कर्मियों के साथ-साथ आम जनता से जनगणना 2027 में स्व-गणना सुविधा का उपयोग करके सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने रेखांकित किया कि डेटा का सटीक और समय पर जमा होना प्रभावी नीति निर्माण, कुशल संसाधन आवंटन और शासन तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

स्व-गणना, जनगणना 2027 की एक प्रमुख विशेषता, व्यक्तियों को अपने घर पर  आराम से ऑनलाइन अपनी जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक विवरण जमा करने में सक्षम बनाती है। यह पहल शारीरिक संपर्क की आवश्यकता को काफी कम करती है जबकि डेटा की दक्षता, कवरेज और विश्वसनीयता को बढ़ाती है।

सभी निवासियों को इस सुविधा का लाभ उठाने और जनगणना 2027 की सफलता में पूर्ण हृदय से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनकी सक्रिय भागीदारी एक व्यापक और विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो सूचित निर्णय लेने और भविष्य की योजना के लिए आवश्यक है।

मंत्रिमंडल मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने 1.74 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना परियोजना की आधारशिला रखी

लुधियाना/ सत्ता संदेश

स्थानीय सड़क अवसंरचना को बढ़ावा देते हुए, मंत्रिमंडल मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने राम नगर से साहिबाना चौक तक 1.42 किलोमीटर लंबी सड़क के आधुनिकीकरण की आधारशिला रखी, जिसकी लागत 1.74 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर निवासियों को संबोधित करते हुए, मंत्री मुंडियन ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सड़क नेटवर्क को उन्नत बनाने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से आवागमन में काफी आसानी होगी और अधिकारियों को पर्यावरण संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने का निर्देश दिया।

मंत्री ने स्थानीय लोगों से पारदर्शिता और समय पर पूरा होने के लिए परियोजना की सक्रिय रूप से निगरानी करने का आग्रह किया और जोर देते हुए कहा, “यह जन-केंद्रित सरकार है, और ये सड़कें जनता के लिए बनाई जा रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य भर में गांवों और शहरों की सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड का गठन किया गया है, जो इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है।

*मुख्य मंत्री ने हरियाणा में जनगणना 2027 के पहले चरण का शुभारंभ किया*

*स्व-गणना आज से शुरू, पहली बार डिजीटल गणना का क्रियान्वयन*

चंडीगढ़: 16 अप्रैल, 2026

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज राज्य में स्व-गणना प्रोसेस शुरू करके जनगणना 2027 के पहले चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना एक अनिवार्य राष्ट्रीय दायित्व है जो नियमित अंतराल पर किया जाता है, और एकत्रित किया गया डेटा आसान, सुरक्षित और पूरी तरह से गोपनीय होता है।

उन्होंने आगे कहा कि डेटा समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए योजनाएं बनाने और विकास का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इस जनगणना की थीम पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, जनगणना 2027 की टैगलाइन, ‘हमारी सेंसस, हमारा डेवलपमेंट,’ इस देश भर में चलने वाले अभियान की अहमियत को दिखाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेंसस डेटा 2047 तक एक विकसित भारत के विज़न को पाने में बहुत काम आएगा, और उन्होंने सभी नागरिकों से इस प्रक्रिया में सहयोग देने की अपील की।

 इस मौके पर, जनगणना 2027 के लिए हरियाणा स्टेट नोडल ऑफिसर, रेवेन्यू और डिज़ास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंशियल कमिश्नर डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि सेल्फ-एन्यूमरेशन 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक चलेगा, इसके बाद 1 मई से 30 मई, 2026 तक हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस गतिविधि होगी। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय मिशन के लिए पूरे हरियाणा में अच्छी तरह से ट्रेंड टीमों को लगाया जा रहा है।

हरियाणा स्टेट डायरेक्टरेट ऑफ़ सेंसस ऑपरेशंस के डायरेक्टर, श्री ललित जैन ने कहा कि उनका विभाग हरियाणा राज्य की पहली डिजिटल जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है। 7,000 से 65,000 ट्रेंड सेंसस वर्कर्स के साथ, नागरिक सुविधाजनक मल्टीलिंगुअल पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके कहीं से भी स्व-गणना कर सकते हैं, जिससे गणक के साथ सिर्फ़  आई डी शेयर करके समय की बचत होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सारा डेटा गृह मंत्रालय के सुरक्षित सर्वर पर स्टोर है, जिसे रिस्पॉन्डेंट सहित कोई भी एक्सेस नहीं कर सकता, और सिर्फ़ मैक्रो-लेवल डेटा ही रिलीज़ किया जाएगा।

 मुख्यमंत्री ने हरियाणा के सभी निवासियों से अपील की कि वे सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रोसेस में सक्रिय भागीदारी निभाएं और *se.census.gov.in* के ज़रिए सही जानकारी दें, ताकि देश के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य में हर घर की गणना हो सके।