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Punjab Politics 2027: पंजाब की सियासत में बदला मुद्दों का केंद्र, 2027 चुनाव से पहले नशे पर बढ़ी राजनीतिक जंग

Punjab Politics 2027: अमित शाह के पंजाब दौरे के बाद नशे का मुद्दा फिर चर्चा में है। जानिए भाजपा, आप, अकाली दल और कांग्रेस के सामने क्या चुनौतियां हैं।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा प्रमुखता से उभर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पंजाब दौरे और नशे से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद राज्य में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नशे के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दे रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप), शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के सामने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने और अपने रिकॉर्ड का हिसाब देने की चुनौती है।

एक समय पंजाब की राजनीति में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, लापता पावन स्वरूपों और अन्य धार्मिक विवादों से जुड़े पंथक मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाते थे। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों को लगातार जवाब देना पड़ता था। अब नशा तस्करी, गैंगस्टरवाद, हत्याएं, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे सवाल भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ रहे हैं।

अमित शाह ने 20 अक्टूबर को पंजाब दौरे के दौरान नशे से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले तीन लोगों के परिवारों से मुलाकात की। इनमें मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का परिवार भी शामिल था। इस दौरे के दौरान शाह ने पंजाब में नशे की समस्या और नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। इससे पहले भी भाजपा नशे के मुद्दे पर पंजाब में अपनी राजनीतिक मुहिम तेज कर चुकी है।

नशे का मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। पंजाब के अनेक परिवारों के लिए यह युवाओं के भविष्य, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से जुड़े मामलों ने भी प्रशासन की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था पर बहस को तेज किया है।

प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने क्या हैं चुनौतियां?

भाजपा के लिए नशे का मुद्दा पंजाब में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का अवसर बना है। पार्टी ने पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए वर्ष 2029 तक का लक्ष्य घोषित किया है। अब उसके सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती भी है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ठोस कदम क्या होंगे और नशे की आपूर्ति तथा तस्करी पर किस तरह प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी की सरकार के सामने नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई और उसके परिणामों को सामने रखने की चुनौती है। सरकार ने फरवरी 2025 में ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान शुरू किया था। अब राजनीतिक बहस के बीच सरकार की कार्रवाई के आंकड़ों के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नशे की उपलब्धता, तस्करी के नेटवर्क और नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास के मोर्चे पर कितनी प्रगति हुई है।

शिरोमणि अकाली दल के लिए भी नशे का मुद्दा महत्वपूर्ण है। पार्टी को अपने शासनकाल से जुड़े पुराने आरोपों पर अपना पक्ष रखने के साथ-साथ नशे की समस्या से निपटने के लिए अपनी नीतियों और प्रस्तावित कदमों को स्पष्ट करना होगा। कांग्रेस के सामने भी पिछली सरकार के कार्यकाल में किए गए वादों और नशे के खिलाफ कार्रवाई के रिकॉर्ड को लेकर सवालों का जवाब देने की चुनौती है।

पिछली सरकारों की कार्रवाई और आंकड़ों पर भी होगी चर्चा

पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा नया नहीं है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में नशीले पदार्थों की बरामदगी, गिरफ्तारियों और तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के आंकड़े सामने आते रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक बहस में इन आंकड़ों की तुलना की जा रही है, लेकिन किसी भी सरकार के प्रदर्शन का आकलन केवल बरामदगी या गिरफ्तारी की संख्या से नहीं किया जा सकता।

इसके लिए यह देखना भी जरूरी है कि नशे की आपूर्ति कितनी कम हुई, बड़े तस्करी नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई, नशे की लत से पीड़ित लोगों को उपचार और पुनर्वास की कितनी सुविधाएं मिलीं तथा युवाओं के लिए रोजगार और रोकथाम से जुड़े कार्यक्रमों का क्या असर पड़ा। विभिन्न वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते समय संबंधित अवधि, दर्ज मामलों की प्रकृति और आंकड़ों के आधिकारिक स्रोत को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।

2027 के चुनाव में नशा कितना अहम रहेगा?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच बहस का प्रमुख विषय बनता दिखाई दे रहा है। अमित शाह के दौरे ने इस बहस को और तेज किया है। हालांकि, चुनाव में विभिन्न मुद्दों का वास्तविक महत्व मतदाताओं की प्राथमिकताओं, राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों और जमीनी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

पंजाब को नशे से मुक्त करने की बात तभी सार्थक होगी, जब राजनीतिक घोषणाओं के साथ प्रभावी कार्रवाई भी दिखाई दे। तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना, युवाओं को नशे से बचाना, प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और कानून-व्यवस्था में सुधार लाना इस चुनौती के महत्वपूर्ण पहलू हैं। आखिरकार, नशे के खिलाफ किसी भी अभियान की सफलता का आकलन उसके दावों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से किया जाना चाहिए।

शिरोमणि अकाली दल को लगा झटका, पूर्व पार्षद सुरजीत राणा कांग्रेस में हुए शामिल

विधायक राणा गुरजीत सिंह ने शेखूपुर पहुंचकर करवाया पार्टी में शामिल, अकाली नेता सबी लंकेश भी कांग्रेस में आए

कपूरथला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : गगन बहल

पंजाब की राजनीति में कपूरथला से जुड़ी एक अहम राजनीतिक गतिविधि सामने आई है। करीब 30 साल से शिरोमणि अकाली दल के साथ जुड़े पूर्व नगर पार्षद (MC) सुरजीत सिंह राणा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उनके साथ अकाली नेता सबी लंकेश और करीब 100 परिवारों के कांग्रेस में शामिल होने का दावा किया गया है।

कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह शेखूपुर स्थित सुरजीत सिंह राणा के घर पहुंचे, जहां उन्होंने सुरजीत सिंह राणा समेत अन्य लोगों को कांग्रेस में शामिल करवाया।

1996 से अकाली दल के साथ थे सुरजीत सिंह राणा

कांग्रेस में शामिल होने के बाद पूर्व MC सुरजीत सिंह राणा ने अकाली दल छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि वह 1996 से लगातार शिरोमणि अकाली दल के लिए काम करते आ रहे थे। उन्होंने पार्टी के साथ अपने करीब तीन दशक लंबे जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए मेहनत की।

सुरजीत सिंह राणा ने आरोप लगाया कि जो लोग पहले उनका विरोध करते थे, वे बाद में दूसरी पार्टी में चले गए और उनकी पुरानी पार्टी से जीते तीन पार्षदों को समर्थन दिया गया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से आहत होकर उन्होंने शिरोमणि अकाली दल को अलविदा कहने का फैसला किया।

बोले- मैं अकेला नहीं, वार्ड के 100 परिवार भी कांग्रेस में आएंगे

सुरजीत सिंह राणा ने कहा कि कांग्रेस में उनका शामिल होना व्यक्तिगत फैसला नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके वार्ड से करीब 100 परिवार कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के नेतृत्व में उन्हें नई राजनीतिक दिशा मिली है और अब वह कांग्रेस के साथ मिलकर क्षेत्र में काम करेंगे।

इस मौके पर अकाली नेता सबी लंकेश के भी कांग्रेस में शामिल होने की बात सामने आई है। कांग्रेस की ओर से इसे कपूरथला क्षेत्र में पार्टी के आधार को मजबूत करने वाली राजनीतिक घटना के तौर पर देखा जा रहा है।

Punjab: 75 विधानसभा सीटों पर बदला सियासी समीकरण, 20 लाख से ज्यादा वोटरों के कटे नाम

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट सूची के काफी रोचक आंकड़े सामने आए हैं. पंजाब में SIR की ड्राफ्ट सूची जारी होते ही राजनीतिक तौर पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इसका ज्यादा असर राज्य की 117 में से 75 विधानसभा सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है.

SIR के दौरान जिन 6 बड़े जिलों में सबसे ज्यादा वोट काटे गए हैं, वहां कुल 52 विधानसभा सीटें हैं. जिनमें सबसे ज्यादा 39 AAP, कांग्रेस 11 व अकाली दल के पास 2 सीटें हैं. बीजेपी को यहां 2022 विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी.

चुनाव में हार-जीत का अंतर बेहद कम

इन 52 सीटों पर औसतन हर सीट पर लगभग 20000 से 35000 वोटों का फेरबदल हुआ है. पंजाब में पिछले चुनावों के दौरान कई सीटों पर हार-जीत का अंतर 2 हजार से 8 हजार वोटों के बीच रहा था. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में वोटों की छंटनी से आगामी चुनाव में हार-जीत का अंतर बेहद कम और मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा.

इनमें 11 सीटें ऐसी हैं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम रहा था. वहीं पंजाब में 35 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर 10 हजार वोट से कम रहा था. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की हर विधानसभा सीट पर औसत निकाला जाए तो औसतन हर विधानसभा सीट पर करीब 17,500 वोट काटे गए हैं.

दूसरी जगह शिफ्ट हो गए 10 लाख वोट

ये संख्या कई सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा है. ऐसे में इन वोटों के सूची से बाहर होने से विधानसभा सीटों का चुनावी समीकरण बदल सकता है. SIR में काटे गए 20.66 लाख वोटों में करीब 10 लाख वोट ऐसे हैं, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं. इनमें बड़ी संख्या उन वोटर्स की है, जो दूसरे राज्यों से पंजाब आए थे. उनके राज्यों में SIR होने के बाद उन्होंने वहां अपना वोट रजिस्टर्ड करा लिया.

शहरी सीटों का बदल जाएगा चुनावी गणित

लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और किराए पर रहने वाले लोग बसते हैं. पते में बदलाव, कम टाइम के लिए रहना और जरूरी कागजात ना होने के कारण इनके नाम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में हटे हैं. इससे उन शहरी सीटों का पूरा चुनावी गणित बदल जाएगा, जहां ये प्रवासी वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता रहा है.

बड़ी संख्या में विदेश पलायन कर चुके युवा

अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में युवा विदेश पलायन कर चुके हैं, लेकिन उनके नाम कागजों में दर्ज थे. अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के तहत ऐसे फर्जी और डुप्लीकेट वोटों के हटने से अब वास्तविक वोटरों की संख्या ही उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेगी. जिन राजनीतिक दलों का वोट बैंक असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अस्थायी प्रवासी मजदूरों, निवासियों या युवाओं पर टिका था, उन्हें अब नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी.

पिछली जीत का सारा समीकरण बिगड़ना तय

विधानसभा चुनाव 2022 में पूरे राज्य में 35 सीटें ऐसी थी, जहां पर हार जीत का अंतर 500 से लेकर 9,900 वोटों के बीच था. SIR के तहत इन सीटों पर औसतन 15 हजार से 30 हजार तक वोट कटे या पेंडिंग हैं. कटने वाले वोटों की संख्या जीत के अंतर से दोगुनी या तीन गुनी हो जाती है, तो पिछली जीत का सारा समीकरण बिगड़ना तय है. इनमें से ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी.

इन 35 में से कई सीटें शहरी या सेमी-अर्बन इलाकों में आती हैं, जहां दूसरे राज्यों से आए मजदूर वर्ग के लोग हैं. उनमें से ज्यादातर लोगों के वोट अपने गृह राज्य में बने हैं. इसलिए उन्होंने यहां अपने वोट कटवा दिए. इसके अलावा उनके दस्तावेज पूरे न होने या पते में बदलाव के कारण इस वर्ग के सबसे ज्यादा वोट कटे हैं. जो दल या प्रत्याशी इस अस्थायी वर्ग पर निर्भर थे, उनके सभी समीकरण बिगड़ सकतें हैं.

कुल 20.66 लाख मतदाताओं के नाम कटे

चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई पंजाब की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार, राज्य में कुल 20.66 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं (जो कुल वोटर्स का लगभग 9.63% है).

  • इस छंटनी के बाद पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या 2.14 करोड़ से घटकर 1.93 करोड़ रह गई है.
  • स्थायी रूप से शिफ्ट हुए: 9,44,131 मतदाता (4.40%) दूसरे स्थानों या राज्यों में चले गए.
  • मृतक: 5,74,568 मतदाता (2.68%) मृत पाए गए.
  • लापता/पता नहीं चला: 4,12,715 मतदाता (1.92%) घर पर नहीं मिले.
  • फर्जी/एक से अधिक जगह नाम: 1,19,145 मतदाता (0.56%) डबल एंट्री वाले थे.
  • लुधियाना, जालंधर और मोहाली (साहिबजादा अजीत सिंह नगर) में प्रवासी मजदूरों और किराएदारों की संख्या अधिक होने के कारण, दस्तावेजों की कमी या पते बदलने से सबसे ज्यादा वोट कटे हैं.
  • अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर – इन जिलों से भारी संख्या में युवाओं का विदेश में पलायन हो चुका है, जिससे अनुपस्थित पाए जाने पर हजारों नाम सूची से हटाए गए हैं.
  • अकेले बठिंडा जिले में कुल 10,53,091 वोटर्स में से 65,072 मतदाताओं को ASDD कैटेगरी में डालकर सूची से बाहर किया गया है.
  • बड़ी बात ये है कि जिन सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं वो शहरी सीटें हैं और यहां पर प्रवासी वोट बैंक बड़ी संख्या में हैं और उनके ही ज्यादातर वोट कटने की बात सामने आ रही है.
Kapurthala Politics: AAP को झटका, निकाय चुनाव लड़ चुके कई नेता कांग्रेस में शामिल

कपूरथला में AAP को राजनीतिक झटका लगा है। निकाय चुनाव लड़ चुके कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। पुराने वॉलंटियरों की अनदेखी का लगाया आरोप।

कपूरथला / सत्ता संदेश

निकाय चुनावों के बाद कपूरथला में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच आम आदमी पार्टी को झटका लगा है। नगर निगम चुनाव लड़ चुके AAP के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस नेताओं ने नए साथियों का स्वागत करते हुए इसे पार्टी के लिए मजबूती का संकेत बताया।

पुराने वॉलंटियरों की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से आम आदमी पार्टी के लिए काम कर रहे थे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पुराने और मेहनती वॉलंटियरों की अनदेखी हो रही है। इनमें कुछ ऐसे कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जो वर्ष 2014 से पार्टी के साथ जुड़े होने का दावा कर रहे हैं।

उनका कहना है कि लगातार पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान और राजनीतिक महत्व नहीं मिल रहा था, जिसके चलते उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला किया।

कांग्रेस से AAP में आए काउंसलरों को लेकर नाराजगी

नए कांग्रेसियों ने पार्टी के भीतर हुए राजनीतिक बदलावों पर भी नाराजगी जाहिर की। उनका आरोप है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस के कई निर्वाचित काउंसलर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए, जिसके बाद पार्टी में इन नेताओं का प्रभाव बढ़ गया।

उन्होंने कहा कि इससे लंबे समय से AAP के लिए काम कर रहे पुराने वॉलंटियरों में असंतोष पैदा हुआ और उन्हें लगा कि उनकी मेहनत की अनदेखी की जा रही है।

कांग्रेस ने किया नए साथियों का स्वागत

इस मौके पर कांग्रेस नेताओं ने AAP छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को हमेशा सम्मान देती है।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि नए नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी में शामिल होने से कपूरथला में कांग्रेस संगठन को और मजबूती मिलेगी।

राणा गुरजीत सिंह की नीतियों से प्रभावित होने का दावा

कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं ने कहा कि वे कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह की नीतियों और कांग्रेस द्वारा किए जा रहे जनहित के कार्यों से प्रभावित हैं। इसी वजह से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में और भी नेता एवं कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ जुड़ सकते हैं। हालांकि, इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Kapurthala Politics: AAP को झटका, निकाय चुनाव लड़ चुके कई नेता कांग्रेस में शामिल

कपूरथला में AAP को राजनीतिक झटका लगा है। निकाय चुनाव लड़ चुके कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। पुराने वॉलंटियरों की अनदेखी का लगाया आरोप।

पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल: पूर्व विधायक डॉ. राज कुमार वेरका का मान सरकार पर हमला

पंजाब / सत्ता संदेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक डॉक्‍टर राज कुमार वेरका ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पंजाब को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और आम लोग भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। डॉक्‍टर वेरका ने कहा कि पंजाब में गुंडागर्दी, लूटपाट, फायरिंग, हत्या और जबरन वसूली जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही आपराधिक वारदातों ने लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों के भीतर भी गैंगस्टर गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम है।

पूर्व विधायक ने कहा कि नशे की समस्या ने पंजाब के युवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। ड्रग्स के कारण कई परिवार तबाह हो रहे हैं और युवा अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब आम आदमी पार्टी सरकार से निराश हो चुकी है और बदलाव चाहती है। डॉक्‍टर वेरका ने अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और पटियाला में हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं ने लोगों की चिंता और असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं, कर्मचारियों और शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पंजाब की जनता अपने वोट के माध्यम से सरकार को जवाब देगी और राज्य में बदलाव लाएगी। अमृतसर से ब्‍यूरो रिपोर्ट टीम एनएनआर

कपूरथला में कथित चुनावी रंजिश को लेकर विवाद, राणा गुरजीत सिंह ने गुंडागर्दी का लगाया आरोप

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला के अजीत नगर में बीती रात कथित चुनावी रंजिश को लेकर हुई झड़प के बाद कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह मौके पर पहुंचे। उनके साथ नवनिर्वाचित पार्षदों की टीम भी मौजूद रही। विधायक ने आरोप लगाया कि विदेश से आए शेरा नामक व्यक्ति के इशारे पर उनके समर्थकों के साथ मारपीट की गई और उन्हें धमकाया गया।


राणा गुरजीत सिंह ने बताया कि वार्ड नंबर 11 से कांग्रेस उम्मीदवार बलवीर सिंह बीरा ने नगर निगम चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बलवीर सिंह की मदद करने वाले मंजीत सिंह के सहयोगी अंकुश शर्मा के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। साथ ही दुकान पर काम करने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी धमकाया गया।


विधायक के अनुसार पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में कुछ युवक दुकान के अंदर घुस आए और सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर मौके से फरार हो गए। राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि शहर में किसी भी कीमत पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


घटना की सूचना मिलने पर थाना सिटी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने एक युवक को पूछताछ के लिए राउंडअप भी किया, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया।


थाना सिटी प्रभारी अमनदीप नाहर ने बताया कि पुलिस ने दुकान के अंदर लगी सीसीटीवी प्रणाली की डीवीआर अपने कब्जे में ले ली है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई भी शिकायतकर्ता औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए सामने नहीं आया है। इसी कारण राउंडअप किए गए युवक को छोड़ना पड़ा।


राणा गुरजीत सिंह ने दावा किया कि शनिवार दोपहर को भी शेरा नामक व्यक्ति के खिलाफ एक दुकानदार ने पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण वह फरार हो गया।


दूसरी ओर थाना प्रभारी अमनदीप नाहर ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस शेरा को पकड़ने के लिए उसके घर गई थी, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी जिम्मेदारी से अपना काम कर रही है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।


पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच किसी पारिवारिक विवाद को लेकर पहले से तनाव चल रहा था, जिसके चलते विवाद बढ़कर झड़प में बदल गया। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।