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PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज, भारत से मदद की गुहार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत का नाम खुलकर सामने आने लगा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) खोलने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद इलाके में राशन और दवाइयों की कमी हो गई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

पीओजेके के नेता ने भारत से क्या अपील की?

सरदार अमन खान ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पीओजेके के लोगों को भारत की मदद की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आम लोगों को खाने-पीने का सामान और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पूंछ और डोडा सेक्टर की ओर रास्ता खोलने की भी मांग की। हालांकि, उनके इस कथित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीओजेके में विरोध प्रदर्शन क्यों तेज हुए हैं?

पिछले महीने से पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और विरोध की आवाज उठाने वालों पर सख्ती की जा रही है। ईदगाह मैदान में हुई एक बड़ी रैली में प्रदर्शनकारियों ने ‘पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है’ और ‘हमें आजादी चाहिए’ जैसे नारे लगाए। इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन अब केवल स्थानीय मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।विज्ञापन

जेएएसी पर कार्रवाई को लेकर क्या दावा?

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने पांच जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पीओजेके में असंतोष और बढ़ गया। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव रहा है, जबकि स्थानीय संगठनों की भूमिका लगातार सीमित होती गई है।

पाकिस्तान प्रशासन पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?

  • प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कार्रवाई में कई लोगों की जान जा चुकी है।
  • जेएएसी का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सख्ती की जा रही है।
  • संगठन ने कहा कि यदि मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
  • कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
  • क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
  • पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

ये प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए चुनौती क्यों?

पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शन अब पाकिस्तान के लिए एक राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनते जा रहे हैं। भारत से मदद मांगने और एलओसी खोलने की अपील ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, इन मांगों पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान प्रशासन आंदोलन को बातचीत से शांत करने की कोशिश करता है या सख्ती का रास्ता जारी रखता है। फिलहाल पीओजेके के हालात पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

फतेहगढ़ चूड़ियां में जर्जर सड़क से लोग परेशान, एक महीने से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य

बारिश के बाद गहरे गड्ढों ने बढ़ाई मुश्किलें, लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क बनाने की मांग की

फतेहगढ़ चूड़ियां / सत्ता संदेश

फतेहगढ़ चूड़ियां में डेरा रोड चुंगी से पुलिस स्टेशन और बद्दोवाल चौक तक सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। पिछले एक महीने से अधिक समय से सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे लोगों को रोजाना आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के व्यापार पर भी असर पड़ा है। कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम होने से उनका काम-धंधा प्रभावित हुआ है।

पीड़ित मलूक सिंह, डॉ. अमरबीर सिंह और अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क को खोदे हुए एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं किया गया। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है और उनकी गहराई बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और पैदल चलने वालों को लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी मार्ग पर पुलिस स्टेशन, डीएसपी कार्यालय, सेवा केंद्र, सांझ केंद्र, तहसील कॉम्प्लेक्स तथा तीन स्कूल स्थित हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों को इसी सड़क से गुजरना पड़ता है, लेकिन बदहाल सड़क के कारण उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

निवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और संभावित हादसों से बचा जा सके।

वहीं, इस संबंध में ठेकेदार के प्रतिनिधि ने बताया कि निर्माण कार्य में देरी का एक कारण सीवरेज बोर्ड से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय होने के बाद सड़क का निर्माण जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।