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असम में बाढ़ का कहर : PM ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक विधायकों को 1 महीने का वेतन देने का किया ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने असम के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त बाढ़ की स्थिति पर राज्य के सांसदों के साथ बैठक की। इसके साथ ही आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पीएम मोदी ने क्या बताया? 

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने एक्स पर लिखा,’असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कुशल मंगल की कामना करता हूं। 

असम में क्या है हालात?

इस बीच, असम के शिवसागर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है क्योंकि नौजान गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया और सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवार आश्रय, भोजन और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं।


वहीं, असम के विधायकों ने एक बड़ा फैसला लिया है। रायजोर दल को छोड़कर सभी विधायकों ने मंगलवार को राज्य के बाढ़ पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने क्या एलान किया?

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने कहा कि वह और उपाध्यक्ष हब्बे टेरोन बाढ़ राहत के लिए एक महीने का वेतन दान करेंगे। उन्होंने घोषणा की, ‘हमारे अलावा, विधानसभा सचिवालय के सभी कर्मचारी पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए एक दिन का वेतन दान करेंगे।’

संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा? 

इस पहल का स्वागत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि भाजपा के सभी विधायक भी एक महीने का वेतन दान करेंगे। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक शेरमन अली अहमद ने भी ऐसा ही किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

वायुसेना की ओर से राहत अभियान जारी

भारतीय वायुसेना की ओर से असम और नागालैंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी हुई है। मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उसके हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ में फंसे 458 लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाला है।

वायुसेना के मुताबिक अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में हवाई मार्ग से 9 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई गई है। वायुसेना के अधिकारी व जवान रहात अभियान के दौरान लगातार दुर्गम और जलमग्न क्षेत्रों में उड़ान भर रहे है।

बता दे कि कुल 631 गांव अभी भी जलमग्न हैं। वहीं, राहत कार्य 184 शिविरों और वितरण केंद्रों के माध्यम से जारी हैं, जहां लगभग 28,700 लोगों को आश्रय दिया गया है। 

असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में तस्करी से लाई गई विदेशी सुपारी की 60 हजार किलो जब्त, 5 गिरफ्तार

दिल्ली / सत्ता संदेश

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की गुवाहाटी क्षेत्रीय इकाई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस सप्ताह की शुरुआत में संचालित किए गए दो बड़े अभियानों में लगभग 60,000 किलोग्राम तस्करी की गई विदेशी सुपारी जब्त की है।

डीआरआई ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर मिजोरम और असम में अभियान संचालित करते हुए ये ज़ब्ती की। शुरुआती जांच में पता चला कि इस विदेशी सूखी सुपारी की म्यांमा-मिजोरम सीमा के रास्ते म्यांमार से भारत में तस्करी की जा रही थी। इस अभियान में डीआरआई को असम राइफल्स की 38वीं बटालियन का सहयोग मिला। अब तक इन अभियानों में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पड़ोसी देश से सुपारी की अवैध आवक घरेलू सुपारी उत्पादकों को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रही है।

प्रधानमंत्री ने असम में चाय बागान का दौरा किया, वहां काम करने वाली महिलाओं से बात की

गुवाहाटी, एक अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक चाय बागान का दौरा किया और वहां काम कर रहीं महिला श्रमिकों से बातचीत की।

मोदी भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए राज्य के एक दिवसीय दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘मनोहारी टी इस्टेट’ का दौरा करने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘हम हर चाय जनजाति परिवार के प्रयासों पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम के गौरव को बढ़ाया है।’’

मोदी को महिलाओं के एक समूह के साथ चाय की पत्तियां तोड़ते हुए भी देखा गया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में बात की और अंत में एक सेल्फी भी ली!’’

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि ये डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान की कुछ झलकियां हैं।

कांग्रेस ने पूर्वोत्तर की उपेक्षा की और अपने शासनकाल में असम में उग्रवाद को बढ़ावा दिया : मोदी

गुवाहाटी, 14 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उस पर पूर्वोत्तर की उपेक्षा करने और अपने शासनकाल के दौरान असम में उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

मोदी ने यहां एक रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा देश की सुरक्षा को खतरे में डाला है और असम में उसके कार्यकाल के दौरान भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति में लिप्त होकर ऐसे निर्णय लिए, जिनसे इन चीजों को बढ़ावा मिला।’’

मोदी ने कहा, ‘‘देश का विभाजन मुस्लिम लीग के कारण हुआ था, लेकिन अब ‘एमएमसी’ – माओवादी, मुस्लिम, कांग्रेस – हैं और लोगों को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया, लेकिन भाजपा ‘‘अवैध अप्रवासन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसलिए अगले पांच साल राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं’’।

उन्होंने यह भी दावा किया कि असम में 10 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस ‘‘सत्ता में रहने के समय से भी अधिक खतरनाक हो गई है और यह बात उसके नेताओं द्वारा दिये गये जहरीले बयानों से स्पष्ट है।’’

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने सात दशकों में ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल तीन पुलों का निर्माण किया, लेकिन भाजपा सरकार ने 10 वर्षों में पांच पुलों का निर्माण किया।

मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार के प्रयासों से असम में चौतरफा विकास हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा असम की पहचान और उसकी परंपराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।’’

मोदी ने कहा कि भाजपा की सफलता का श्रेय केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को जाता है और पार्टी संगठनात्मक शक्ति में भरोसा रखती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भाजपा कार्यकर्ता होना मेरी सबसे बड़ी योग्यता और सम्मान है और यह मेरे लिए गर्व का स्रोत है।’’