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लुधियाना से दिल्ली का सफर अब आसान: हलवारा एयरपोर्ट से 15 मई से उड़ानें शुरू, टिकटों की बुकिंग हुई लाइव

पंजाब डेस्क: पंजाब के लुधियाना में हलवारा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं का इंतज़ार खत्म हो गया है। एयर इंडिया कंपनी ने 1 अप्रैल से दिल्ली के लिए फ्लाइट्स की बुकिंग शुरू कर दी है। इस रूट पर पहली आधिकारिक उड़ान 15 मई को संचालित की जाएगी।

किराया और समय: लुधियाना से दिल्ली के लिए शुरुआती किराया ₹3512 तय किया गया है,। इस हवाई यात्रा में मात्र 1 घंटा 10 मिनट का समय लगेगा।

फ्लाइट का शेड्यूल: रोजाना दो फ्लाइट्स लैंड होंगी और दो ही उड़ान भरेंगी। दिल्ली से लुधियाना: पहली फ्लाइट सुबह 5:55 बजे और दूसरी दोपहर 12:55 बजे उड़ेगी।

लुधियाना से दिल्ली: सुबह पहली फ्लाइट 7:55 बजे और दूसरी दोपहर 2:40 बजे रवाना होगी।

बड़े विमानों की सुविधा: पुराने साहनेवाल एयरपोर्ट के विपरीत, हलवारा का रनवे काफी लंबा है, जिससे यहाँ Airbus A321 और बोइंग 737 जैसे बड़े कमर्शियल विमान आसानी से उतर सकेंगे।

खराब मौसम में भी लैंडिंग: एयरपोर्ट CAT-II नेविगेशन सिस्टम से लैस है, जिससे घने कोहरे या जीरो विजिबिलिटी में भी विमान सुरक्षित लैंड और टेक-ऑफ कर सकेंगे।

पंजाब की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट: केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इसे पंजाब की कनेक्टिविटी और ग्रोथ के लिए एक बड़ा कदम बताया है। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से लुधियाना की होजरी, साइकिल और ऑटो-पार्ट्स इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि विदेशी कारोबारी अब सीधे लुधियाना लैंड कर सकेंगे।

साथ ही मोगा, बरनाला और बठिंडा जैसे जिलों के लोगों को अब दिल्ली जाने के लिए चंडीगढ़ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 फरवरी को इस एयरपोर्ट का वर्जुअल उद्घाटन किया था।

चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर धमाका; खालिस्तानी आतंकी ने ली जिम्मेदारी

पंजाब डेस्क: चंडीगढ़ के सेक्टर 37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय (BJP Office) के बाहर बुधवार शाम करीब 5:15 बजे एक विस्फोट होने से हड़कंप मच गया। यह धमाका कार्यालय के बाहर खड़ी एक एक्टिवा में हुआ।

नुकसान की स्थिति: भाजपा नेता वनीत जोशी के अनुसार, यह कम तीव्रता (Low Intensity) वाला धमाका था। हालांकि, विस्फोट इतना जोरदार था कि पार्किंग में खड़े वाहनों के शीशे टूट गए और भाजपा कार्यालय की दीवार पर 70 से 80 छर्रों (pellets) जैसे निशान देखे गए। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, केवल संपत्ति का नुकसान हुआ है।

जांच एजेंसियां सतर्क: घटना की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस, बम स्क्वाड, सीएफएसएल (CFSL), एनआईए (NIA), सेना और पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

CCTV फुटेज और संदिग्ध: घटनास्थल से करीब 10 मीटर दूर स्थित एक पेट्रोल पंप की CCTV फुटेज मिली है, जिसमें धमाके के तुरंत बाद दो संदिग्ध व्यक्ति बाइक पर भागते हुए दिखाई दे रहे हैं।

खालिस्तानी लिंक: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से खालिस्तानी आतंकी सुखजिंदर सिंह बब्बर ने इस ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में भारतीय सिस्टम को चेतावनी दी गई है, हालांकि समाचार एजेंसी इसकी पुष्टि नहीं करती है।

चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि हाल के दिनों में शहर में हिंसा और हत्या की कई घटनाएं सामने आई हैं।

भारतीय शासन व्यवस्था की पटकथा फिर से लिख रहा है मिशन कर्मयोगी
  • डॉ जितेंद्र सिंह

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।

चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।

इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर

नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।

‘मिशन कर्मयोगी’ को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित ‘क्षमता निर्माण आयोग’ द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव ‘कर्मचारी’—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से ‘कर्मयोगी’ बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।

पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह’  के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं। जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी ‘पहुँच की संरचना’  है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का ‘लोकतांत्रिक लाभांश’ है।

क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र  के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ ‘वास्तुकार’  और ‘संचालक’ दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त  कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों  के माध्यम से जुड़ चुके हैं  ताकि ऐसी विशिष्ट ‘क्षमता निर्माण योजनाएं’  तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया  है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।

मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ या ‘लॉग किए गए घंटों’ में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक ‘लेन-देन’ वाले संबंध से हटकर ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया  तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत,  जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है। इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ’  के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ‘अमृत ज्ञान कोष’  भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह ‘वि-औपनिवेशीकरण’,  जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।

‘साधना’ सप्ताह  2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। ‘साधना’ शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक ‘राष्ट्रीय सम्मेलन’ के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक ‘नागरिक-चैंपियन’ और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत  माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।

भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार ‘सीखना’ सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)

संसद प्रश्न: मौसम विज्ञान विभाग की वेधशालाएं

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन मौसम विभाग (आईएमडी) तमिलनाडु और पुदुचेरी में मौसम विज्ञान वेधशालाओं का एक नेटवर्क संचालित करता है, जिसमें 35 मैनुअल सतह मौसम विज्ञान वेधशालाएं (विभागीय और गैर-विभागीय दोनों), 56 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस), 87 स्वचालित वर्षामापी (एआरजी) और 11 कृषि- स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) शामिल हैं। हालांकि, तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में वर्तमान में उपलब्ध 154 अवलोकन केंद्रों में से कम से कम 2 से 3 एडब्ल्यूएस/एआरजी/कृषि-एडब्ल्यूएस स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, 5 डॉप्लर मौसम रडार (चेन्नई पोर्ट, चेन्नई पल्लीकरनई, कराईकल, कल्पक्कम (बीएआरसी) और श्रीहरिकोटा (आईएसआरओ)) भी हैं। तमिलनाडु के सभी जिले ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) के अंतर्गत जिला-स्तरीय और ब्लॉक-स्तरीय कृषि-मौसम विज्ञान संबंधी परामर्श सेवाओं के दायरे में आते हैं। ये परामर्श सेवाएं द्विसाप्ताहिक रूप से जारी की जाती हैं।

पेरम्बालूर लोकसभा क्षेत्र मौसम विभाग के अवलोकन एवं परामर्श ढांचे के अंतर्गत आता है। कृषि, आपदा तैयारी और जन सुरक्षा के लिए ये संसाधन निरंतर मौसम निगरानी और समय पर परामर्श सहायता सुनिश्चित करते हैं। निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं:

  • राज्यव्यापी नेटवर्क के हिस्से के रूप में पेराम्बालुर जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में एडब्ल्यूएस और एआरजी स्थापित किए गए हैं।
  • जिलावार वर्षा निगरानी योजना (डीआरएमएस), ब्लॉकवार वर्षा निगरानी योजना (बीआरएमएस), जिला स्तरीय मौसम पूर्वानुमान और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) के तहत जारी कृषि-मौसम संबंधी सलाहों के अंतर्गत कवरेज।
  • एसएमएस, मोबाइल एप्लिकेशन, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पूर्वानुमानों और चेतावनियों का प्रसार।
  • भीषण गर्मी, अत्‍यधिक बारिश और सूखे सहित चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी सेवाएं।

विशेष रूप से, पेराम्बालुर निर्वाचन क्षेत्र में:

  • पेराम्बालुर कस्बे में एक एडब्ल्यूएस (स्वचालित मौसम स्टेशन) चालू है।
  • दो एआरजी कार्यरत हैं – एक चेट्टीकुलम में और दूसरा वेप्पनथट्टई में।
  • डीआरएमएस स्टेशन।

मौसम पूर्वानुमान में बेहतर सटीकता प्राप्त करने के साथ-साथ समय पर प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए मंत्रालय तमिलनाडु सहित एडब्ल्यूएस, एआरजी, एग्रो-एडब्ल्यूएस, डीडब्ल्यूआर और अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना सहित अवलोकन नेटवर्क को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने पहली अप्रैल 2026 को लोकसभा में दी।

इजराइल ने ईरान में फैक्टरी पर हमला किया, हथियार कार्यक्रम के लिए फेंटानिल आपूर्ति का लगाया आरोप

दुबई, एक अप्रैल (एपी) इजराइल ने कथित रूप से रासायनिक हथियार कार्यक्रम में इस्तेमाल के लिए ‘‘ईरान सरकार को फेंटालिन की आपूर्ति करने वाले वाली’’ एक फैक्टरी पर हमला किया है। इजराइल ने बुधवार तड़के यह जानकारी दी।

ईरान ने तोफीघ डारू फैक्टरी पर हमले की पुष्टि की लेकिन उसने साथ ही कहा कि यह फैक्टरी केवल ‘‘अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी दवाओं’’ की आपूर्ति करती थी जिनका उपयोग चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में होता है।

इजराइल और ईरान ने बताया कि यह हमला मंगलवार को किया गया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान स्थित फैक्टरी की एक तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इजराइल के युद्ध अपराधी दवा कंपनियों पर अब खुलेआम और बेशर्मी से बमबारी कर रहे हैं।’’

भीषण दर्द के इलाज के लिए अस्पतालों में फेंटानिल का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल जानलेवा भी हो सकता है।

इजराइल और अमेरिका ने हाल के वर्षों में दावा किया है कि ईरान हथियारों में फेंटानिल के इस्तेमाल के लिए परीक्षण कर रहा है। अमेरिका ने यह दावा करते हुए ईरान के उस शैक्षणिक शोध का भी हवाला दिया था जिसमें यह अध्ययन किया गया कि 2002 में चेचेन चरमपंथियों द्वारा मॉस्को के थिएटर में लोगों को बंधक बनाए जाने की घटना के दौरान रूस ने संभवतः फेंटानिल का कैसे इस्तेमाल किया।

इजराइल ने आरोप लगाया कि ‘तोफीघ डारू’ तेहरान के एक उन्नत अनुसंधान संस्थान एसपीएनडी को फेंटानिल की आपूर्ति करता था। अमेरिका का आरोप है कि एसपीएनडी ने ऐसे शोध और परीक्षण किए हैं जिनका इस्तेमाल परमाणु विस्फोटक उपकरणों और अन्य हथियारों के विकास में किया जा सकता है।

इस बीच, प्राधिकारियों ने बताया कि बुधवार तड़के कतर के तट के पास एक टैंकर पोत पर हमला हुआ।

ब्रिटेन की सेना के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस’ केंद्र ने हमले की घोषणा करते हुए कहा कि प्रक्षेपास्त्र पोत के किनारे से टकराया।

उसने कहा कि इस दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ और चालक दल सुरक्षित है।

मंगलवार को दुबई के तट के पास तेल से भरे एक कुवैती टैंकर पर हमला हुआ था। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान फारस की खाड़ी में 20 से अधिक पोत पर हमले कर चुका है।

प्रधानमंत्री ने असम में चाय बागान का दौरा किया, वहां काम करने वाली महिलाओं से बात की

गुवाहाटी, एक अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक चाय बागान का दौरा किया और वहां काम कर रहीं महिला श्रमिकों से बातचीत की।

मोदी भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए राज्य के एक दिवसीय दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘मनोहारी टी इस्टेट’ का दौरा करने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘हम हर चाय जनजाति परिवार के प्रयासों पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम के गौरव को बढ़ाया है।’’

मोदी को महिलाओं के एक समूह के साथ चाय की पत्तियां तोड़ते हुए भी देखा गया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में बात की और अंत में एक सेल्फी भी ली!’’

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि ये डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान की कुछ झलकियां हैं।

जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत नियामक सुधारों के कारण बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी दस्तावेजों की फाइलिंग में भारी वृद्धि

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण-एनबीए ने भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो जैव विविधता, अनुसंधान, नवोन्‍मेषण और औद्योगिक विकास के बढ़ते समन्वय को दर्शाती है। यह वृद्धि जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने जैविक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को सुदृढ़ और स्पष्ट किया है।

संशोधित प्रावधानों के तहत, अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत आने वाले आवेदकों को भारत में उत्पन्न जैविक संसाधनों पर आधारित बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट सहित) के लिए आवेदन करने से पहले एनबीए से पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) प्राप्त करना अनिवार्य है। इस अनिवार्यता से बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली में अनुपालन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है, साथ ही यह सुनिश्चित हुआ है कि जैविक संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय कानून और संरक्षण तथा निष्पक्ष एवं समान लाभ बंटवारे के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

संशोधित ढांचे ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है और स्पष्ट रूप से परिभाषित अनुमोदन प्रक्रियाओं को लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकरण-आधारित प्रणाली की ओर निर्णायक बदलाव आया है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि के दौरान, लगभग 857 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदन प्राप्त हुए और 792 आवेदनों के लिए सीओआर जारी किए गए जो सही पाए गए। इसके बाद की अवधि, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक, कार्यालय को 1,077 आईपीआर आवेदन प्राप्त हुए और 885 पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) जारी किए गए, जो आवेदनों में वृद्धि और आईपीआर से संबंधित एनबीए आवेदनों के समय पर निपटान की दिशा में निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

ये आवेदन जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, खाद्य विज्ञान, जैव रसायन, कृषि रसायन, पॉलिमर प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, वस्त्र और अन्य विज्ञान-आधारित उद्योगों सहित विभिन्न सेक्‍टरों से प्राप्त हुए। यह ज्ञान-आधारित सेक्‍टरों में सुव्यवस्थित नियामक तंत्र के व्यापक रूप से अपनाए जाने और बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

जैविक संसाधनों से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य करके और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 एक जिम्मेदार नवोन्‍मेषण इकोसिस्‍टम को बढ़ावा दे रहा है– एक ऐसा इकोसिस्‍टम जो वैज्ञानिक प्रगति और संरक्षण प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखता है और हितधारकों के साथ निष्पक्ष और समान लाभ साझाकरण सुनिश्चित करता है। इसने अनुसंधान और व्यापार करने में सुगमता प्रदान की है, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं एक मजबूत और पारदर्शी नियामक दायरे में आएं।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज परम पूज्‍य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान से देश की हर पीढ़ी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित होती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः
स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।

नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः
परोपकाराय सतां विभूतयः॥”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मानवता के अनन्य उपासक परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को उनकी जन्म-जयंती पर कोटि-कोटि नमन! शिक्षा, समाज कल्याण और अध्यात्म के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान देश की हर पीढ़ी को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

IPL 2026: जीत के बावजूद श्रेयस अय्यर पर गिरी गाज; BCCI ने लगाया ₹12 लाख का भारी जुर्माना

स्पोर्टस डेस्क: आईपीएल 2026 के अपने पहले ही मैच में गुजरात टाइटंस (GT) के खिलाफ रोमांचक जीत दर्ज करने वाली पंजाब किंग्स (PBKS) के लिए एक बुरी खबर आई है। टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर पर बीसीसीआई (BCCI) ने 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

जुर्माने का कारण: यह जुर्माना गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच के दौरान धीमी ओवर गति (Slow Over-rate) के कारण लगाया गया है। आईपीएल की आचार संहिता के तहत टीम निर्धारित समय में अपने 20 ओवर पूरे करने में विफल रही, जिसकी जिम्मेदारी कप्तान की होती है।

मैच का परिणाम: पंजाब किंग्स ने इस मुकाबले में गुजरात को 3 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में शानदार शुरुआत की है।शानदार प्रदर्शन: पंजाब की जीत के हीरो ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ी कूपर कोनोली रहे, जिन्होंने 44 गेंदों में 72 रनों की पारी खेली। गेंदबाजी में विजयकुमार वैशाख ने 3 और युजवेंद्र चहल ने 2 विकेट चटकाए।

पुराना रिकॉर्ड: श्रेयस अय्यर के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। साल 2025 में भी उन पर स्लो ओवर रेट के कारण दो बार जुर्माना लग चुका है (पहली बार 12 लाख और दूसरी बार 24 लाख)। यदि इस सीजन में दोबारा यह गलती होती है, तो जुर्माने की राशि दोगुनी हो जाएगी।इस कार्रवाई को लेकर आईपीएल की ओर से एक आधिकारिक रिलीज भी जारी की गई है।

लुधियाना की अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण धमाका: एक मजदूर की मौत, दो घायल; यूपी के दो भाई गिरफ्तार

पंजाब डेस्क: लुधियाना के गांव जोधां-नारंगवाल लिंक रोड पर स्थित एक अवैध पटाखा फैक्टरी में मंगलवार देर रात हुए जबरदस्त विस्फोट में एक 18 वर्षीय युवक, मोहम्मद कैफ, की मौत हो गई। इस हादसे में एक युवती और एक अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार चल रहा है।

धमाके का कारण: फैक्टरी के स्टोर में भारी मात्रा में विस्फोटक पोटाश रखी हुई थी। मजदूर परिवार जब पटाखे बना रहे थे, तब अचानक पोटाश में जोरदार धमाका हुआ, जिससे पूरा घर मलबे में तब्दील हो गया और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया।

पुलिस कार्रवाई: डीएसपी दाखा वरिंदर सिंह खोसा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फराबाद निवासी दो सगे भाइयों, साजिद और वाजिद, को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन पर एक्सप्लोसिव एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

झांसा देकर मजदूरी: आरोपी भाई उत्तर प्रदेश के गरीब परिवारों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर पंजाब लाए थे और पिछले कुछ दिनों से उनसे अवैध रूप से पटाखे बनवा रहे थे।

जांच और राहत कार्य: यह अवैध फैक्टरी एक एनआरआई परिवार के घर में चल रही थी। मलबे को हटाने और जांच के लिए सेना और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों की मदद ली जा रही है।

पुलिस अब मकान मालिकों और इस धंधे में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि दिवाली और अन्य त्योहारों के लिए अभी से पटाखे तैयार किए जा रहे थे।