ब्रेकिंग न्यूज़
छुट्टी पर आए सेना के जवान ने की आत्महत्या, घर में अकेला था फौजी; परिवार गया था श्री हजूर साहिब

पंजाब डेस्क : पंजाब: पंजाब के बटाला के पास स्थित गांव रंगड़ नंगल में भारतीय सेना के एक जवान द्वारा फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने का दुखद मामला सामने आया है। मृतक की पहचान निर्मलजीत सिंह के रूप में हुई है, जो वर्तमान में राजस्थान में तैनात थे।

पिता की बरसी पर आए थे छुट्टी: परिजनों और सरपंच जसबीर सिंह के अनुसार, निर्मलजीत सिंह करीब 10 दिन पहले अपने पिता की बरसी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छुट्टी लेकर गांव आए थे। घटना के समय वे घर में अकेले थे, क्योंकि उनकी माता, पत्नी और बच्चे श्री हजूर साहिब (नांदेड़) की यात्रा पर गए हुए थे।

कमरे में पंखे से लटका मिला शव : मंगलवार दोपहर बाद जब चचेरे भाई और अन्य लोग घर पहुंचे, तो उन्होंने निर्मलजीत का शव कमरे में छत वाले पंखे से लटकता हुआ पाया। सरपंच ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। निर्मलजीत अपने पीछे बुजुर्ग माता, पत्नी और 7 व 9 साल के दो बेटों को छोड़ गए हैं।

पुलिस की कार्रवाई और जांच : सूचना मिलते ही डीएसपी हरीश बहल और एसएचओ गुरइकबाल सिंह पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बटाला के सिविल अस्पताल भेज दिया है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है और पुलिस परिजनों के बयानों के आधार पर कानूनी कार्रवाई कर रही है।

मोगा में अकाली पार्षद की कोठी में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़: नाबालिग समेत 14 लड़कियां बरामद, 7 पुरुष गिरफ्तार

पंजाब डेस्क : पंजाब के मोगा में अमृतसर रोड स्थित बुघीपुरा चौक के पास पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक कोठी में छापेमारी कर 14 लड़कियों और 7 पुरुषों को आपत्तिजनक गतिविधियों में संलिप्त पाया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध धंधे का मुख्य संचालक अकाली दल का एक पार्षद है।

पार्षद ही चला रहा था अवैध धंधा : जांच में सामने आया है कि जिस कोठी में यह रैकेट चल रहा था, वह मोगा के वार्ड नंबर 28 के पार्षद जगजीत सिंह उर्फ जीता की है। वह शिरोमणि अकाली दल से जुड़ा है और अपने साथियों लखविंदर सिंह और बलविंदर सिंह के साथ मिलकर पिछले 3 महीनों से यह काम कर रहा था। इस कोठी को ‘डेविल जॉन होटल’ के नाम से चलाया जा रहा था।

नाबालिग लड़की और आपत्तिजनक सामग्री बरामद: पुलिस को कोठी के पास कचरे में कंडोम के पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है। हिरासत में ली गई 14 लड़कियों में से एक लड़की नाबालिग पाई गई है। अन्य लड़कियां जालंधर और लुधियाना जैसे शहरों से लाई गई थीं। नाबालिग को अदालत में पेश किया जाएगा, जबकि अन्य लड़कियों को नारी निकेतन भेज दिया गया है।

सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज: धर्मकोट के डीएसपी जसविंदर सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ इम्मोरल ट्रैफिकिंग एक्ट, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की अवैध गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…11-04-2026

पंजाब डेस्क: आज पंजाब और चंडीगढ़ में विकास, विवाद और साहस की खबरें छाई रहीं। एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर से ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ का श्रीगणेश किया, जिससे अब प्रदेश की महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता मिलना तय हो गया है। वहीं, चंडीगढ़ में एक बहादुर महिला डॉक्टर द्वारा अस्पताल माफिया की पोल खोलने और लुधियाना में इंस्टाग्राम रील की वजह से एक महिला की जान बचने जैसी घटनाओं ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। दूसरी तरफ, अमृतसर में गोलीबारी और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल से जुड़े बैंक स्टेटमेंट विवाद ने सियासी पारे को भी गरमा दिया है।

आइए विस्तार से जानते हैं दिनभर की वो 10 बड़ी खबरें जिन्होंने आज सबका ध्यान खींचा…

महिलाओं के लिए ₹1000 महीना योजना शुरू: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर से ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ का शुभारंभ किया। इसके तहत जनरल वर्ग की महिलाओं को ₹1000 और SC वर्ग की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह सम्मान राशि दी जाएगी।

BBMB पदों पर पंजाब-हरियाणा का दबदबा खत्म: केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के नियमों में संशोधन कर मेंबर पावर और इरिगेशन के पदों को अन्य राज्यों के लिए भी खोल दिया है।

डंपिंग ग्राउंड की सफाई का अल्टीमेटम: चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक डंपिंग ग्राउंड का सारा कचरा साफ किया जाए, अन्यथा कार्रवाई होगी।

इंस्टाग्राम रील ने बचाई जान: लुधियाना की एक महिला ने नाव हादसे के दौरान पानी में डूबने से बचने के लिए इंस्टाग्राम रील में देखे गए सुरक्षा युक्तियों (टिप्स) का पालन किया और सुरक्षित बच गईं।

₹21 हजार के विवाद में गोलीबारी: अमृतसर के जंडियाला गुरू में लंगर के पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में हमलावरों ने घर में घुसकर बाप-बेटे को गोली मार दी।

ट्रॉली विवाद में फँसे विधायक: AAP विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं; विपक्ष ने ₹6.5 लाख के बैंक ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर वसूली का आरोप लगाया है।

इटली से लौटा युवक का शव: संगरूर के नवदीप सिंह का शव 4 साल बाद इटली से उनके पैतृक गांव पहुंचा। उनकी मार्च में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

जीरकपुर होटल में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़: पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर होटल में छापेमारी की, जहाँ से 7 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया और 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

लेडी डॉक्टर का पहले ही दिन इस्तीफा: चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में नियुक्त महिला डॉक्टर ने अस्पताल प्रबंधन पर मरीजों के साथ ‘गलत काम’ और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाकर नौकरी छोड़ दी।

दुकानदार ने लुटेरे को धूल चटाई: लुधियाना में लूट के इरादे से घुसे बदमाशों से दुकानदार भिड़ गया। दुकानदार ने एक लुटेरे को पकड़कर पीटा, हालांकि बाद में बदमाश भागने में सफल रहे।

भारत की औषधि रणनीति पैमाने से नवाचार की ओर बढ़ रही है, ताकि देश को बायोफार्मा और उच्च-मूल्य वाले चिकित्सा विज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके

जगत प्रकाश नड्डा           

वैश्विक स्तर पर, कुल औषधि राजस्व में बायोलॉजिक, बायोसिमिलर और विशेष दवाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो गयी है। लंबे समय से जेनरिक दवाओं में अग्रणी देश होने के कारण ‘विश्व की फ़ार्मेसी’ के रूप में प्रसिद्ध भारत का औषधि उद्योग अब पैमाने से नवाचार की ओर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत सरकार भविष्य के अनुरूप एक नीतिगत रूपरेखा को गति दे रही है, ताकि देश जेनरिक दवाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए इन उभरते क्षेत्रों में अधिक हिस्सेदारी प्राप्त कर सके।

केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹10,000 करोड़ के मिशन बायोफार्मा निर्माण शक्ति की घोषणा इस दिशा में एक निर्णायक कदम को रेखांकित करती है। यह अगले 8 से 10 वर्षों में भारत को बायोफार्मा नवाचार और उच्च मूल्य वाली चिकित्सा सेवाओं के वैश्विक केन्द्र बनाने के देश के संकल्प का संकेत देती है। यह विज़न गहरी वैज्ञानिक क्षमताओं के निर्माण, नवाचार-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने और भारत को अगली पीढ़ी की दवाओं के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में उभरने में सक्षम बनाने पर आधारित होगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और उन्नत चिकित्सीय क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को गति देना है। यह कार्यक्रम औषधि विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग की मौजूदा पहलों का पूरक है, जैसे फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना (पीआरआईपी), अनुसंधान विकास और नवाचार योजना, बायोनेस्ट आदि, जिनका उद्देश्य जैव- औषधि समेत जीवन विज्ञान क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना है। ये पहलें भारत के नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने, उद्योग-अकादमी सहयोग को बढ़ावा देने तथा जेनेरिक दवाओं से नवाचार संचालित दवा अनुसंधान और विकास की ओर बदलाव को सक्षम करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ किण्वन-आधारित निर्माण क्षमताओं का विकास करना है। एंटिबायोटिक, वैक्सीन, एंज़ाइम और बायोलॉजिक्स के निर्माण में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, यह क्षेत्र लंबे समय से आयात पर निर्भर रहा है। अवसंरचना में निवेश करके, प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाकर तथा लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करके, भारत इस रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

भारत के नैदानिक ​​अनुसंधान इकोसिस्टम का विस्तार भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। 1,000 मान्यता प्राप्त नैदानिक ​​प्रयोग केंद्र स्थापित किये जायेंगे, जो वैश्विक दवा विकास गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को बेहतर बनायेंगे। अपनी लागत लाभ और कुशल शोधकर्ताओं की बढ़ती संख्या के साथ, भारत कुशल और उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक ​​प्रयोग के लिए असाधारण अवसर प्रदान करता है। साथ ही, नियामक व्यवस्था को मजबूत करने और संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने से भारत की मौजूदा व्यवस्था वैश्विक मानकों के अधिक अनुरूप होगी, जिससे तेज अनुमोदन संभव होंगे और वैश्विक हितधारकों के बीच विश्वास बढ़ेगा।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने पीएलआई और थोक दवा (बल्क ड्रग) पार्क योजनाओं के सहारे सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और मुख्य आरंभिक सामग्रियों (केएसएम) के स्थानीय उत्पादन में तेज़ी से प्रगति हुई है। इससे देश में दवाओं की कीमतें घटाने में मदद मिली है, जो विश्व स्तर पर सबसे कम कीमतों में से एक है और इसके कारण नागरिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की लागत किफायती बनी रहती है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना ने सस्ती कीमतों पर गुणवत्ता युक्त जेनेरिक दवाओं तक पहुंच का विस्तार किया है, जिसके तहत 19,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र लाखों लोगों की सेवा कर रहे हैं। कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रियाओं पर सीमा-शुल्क को सुव्यवस्थित करने जैसे पूरक उपाय जीवन रक्षक उपचारों तक पहुंच को और सुलभ बना रहे हैं। जैसे-जैसे उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाएं अधिक व्यापक होंगी, किफायती दर और समान पहुंच सुनिश्चित करना केंद्रीय नीति की प्राथमिकता बनी रहेगी।

जैसे-जैसे उद्योग विकसित हो रहा है, भारत का उद्देश्य न केवल स्थापित बाजारों में बल्कि उभरते क्षेत्रों में, विशेष रूप से नवाचार-संचालित क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करना है। सुधार, इस बदलाव के केंद्र में हैं। नियामक समन्वय, अनुमोदन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और तेजी से मंजूरी जैसे प्रयास व्यापार करने में आसानी को बढ़ा रहे हैं। गुणवत्ता मानकों और नियामक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने से भारतीय औषधि उत्पादों पर वैश्विक विश्वास की निरंतरता सुनिश्चित होती है। हालांकि, आरएंडडी निवेश बढ़ाना एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। इसका समाधान करने के लिए, सार्वजनिक-निजी सहयोग को मजबूती देना आवश्यक होगा, ताकि दीर्घकालिक नवाचार को बनाए रहा जा सके।

नीतिगत समर्थन, तकनीकी प्रगति और बाजार का आपसी समन्वय; औषधि क्षेत्र के लिए विकास का एक अद्वितीय अवसर प्रस्तुत करता है। भारत का घरेलू बाजार, जिसका मूल्य पहले से ही ₹4 लाख करोड़ से अधिक है, निरंतर विस्तार के लिए तैयार है। अगले दशक में, भारत न केवल जेनेरिक दवाओं में एक अग्रणी देश के रूप में, बल्कि नवोन्मेषी दवाओं, किण्वन-आधारित उत्पादों और अगली पीढ़ी की चिकित्सा-सेवाओं में भी एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में उभरने के लिए बेहतर स्थिति में है।

निष्कर्ष के तौर पर, भारत का औषधि क्षेत्र नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जो नवाचार, सुदृढ़ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा द्वारा परिभाषित होता है। बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम जैसी पहलों, नैदानिक अवसंरचना के विस्तार और लक्षित निर्माण प्रोत्साहनों के समर्थन से, भारत धीरे-धीरे मात्रा-संचालित जेनेरिक दवा केंद्र से उच्च-मूल्य वाले बायोफार्मा नवाचार अग्रणी देश की ओर आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल में भारत की भूमिका को मजबूत करने और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न, विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्यों को हासिल करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।  

******** 

(लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री हैं)

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के होते हुए भी चिकित्सा शिक्षा में मजबूत नैदानिक ​​आधार की आवश्यकता पर बल दिया

दिल्ली / सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बच्चों में उभरते हुए गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यकृत संबंधी विकारों के बारे में बताने वाली अद्यतन चिकित्सा पाठ्यपुस्तक का विमोचन किया

बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी पाठ्यपुस्तक का विस्तारित संस्करण चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति को दर्शाता है

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ज्ञान के तीव्र विस्तार के युग में चिकित्सा में अवधारणा-आधारित शिक्षण पर बल दिय

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो चिकित्सा विज्ञान और मधुमेह के प्रख्यात प्राध्यापक भी हैं, ने आज स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए प्रोफेसर अनुपम सिबल और डॉ. सरथ गोपालन के संपादन में तैयार जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर कैथलीन बी. श्वार्ट्ज की ओर से लिखित प्रस्तावना वाली “बाल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण” पाठ्यपुस्तक के द्वितीय संस्करण का विमोचन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इसकी बढ़ती भूमिका के बावजूद चिकित्सा शिक्षा में मजबूत नैदानिक ​​आधार की आवश्यकता पर बल दिया।

मंत्री महोदय ने कहा कि एक बार ठोस नैदानिक ​​आधार स्थापित हो जाने पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता मूल्यवान सहायक, सहयोगी और सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चिकित्सा अवधारणाओं के मूल तत्व को समझे बिना एआई का सहारा लेता है तो उसके समक्ष किसी भी उपकरण, गैजेट, जांच या यहां तक ​​कि दवाओं के न होने की स्थिति में भी समाज की सेवा करने में सक्षम चिकित्सक बनने के लिए आवश्यक बुनियादी शिक्षण प्रक्रिया से वंचित रहने का जोखिम होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा संबंधी ज्ञान के तीव्र विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि शोध और प्रकाशन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जिसके कारण चिकित्सा शिक्षा के लिए वैचारिक स्पष्टता और मूलभूत नैदानिक ​​प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि यद्यपि नई तकनीकों ने सूचना तक पहुंच को आसान बना दिया है फिर भी सीखने की प्रक्रिया मूलभूत समझ और व्यावहारिक नैदानिक ​​अनुभव पर आधारित होनी चाहिए।

मंत्री महोदय ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण और बीमारियों की बढ़ती जटिलता सहित उभरती चुनौतियों के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा प्रणालियों को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चिकित्सा जगत के युवा पेशेवरों को मजबूत बुनियादी ज्ञान विकसित करने और धीरे-धीरे चुने हुए क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण की पाठ्यपुस्तक के दूसरे संस्करण में इस क्षेत्र में हुई नवीनतम प्रगति को शामिल किया गया है और 45 अध्यायों में इसका विस्तार किया गया है जिसमें कई नए विषय भी हैं। यह पुस्तक सूजन आंत्र रोग, न्यूरो-गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, सीलिएक रोग और गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यकृत संबंधी रोगों में आनुवंशिकी की भूमिका, एंडोस्कोपी और यकृत प्रत्यारोपण जैसे उभरते क्षेत्रों के बारे में विस्तृत विवरण प्रदान करती है।

यह भी पाया गया है कि बाल रोग विशेषज्ञों के पास आने वाले लगभग 30 प्रतिशत बच्चे पाचन और यकृत संबंधी विकारों से पीड़ित होते हैं जो इस क्षेत्र में अद्यतन ज्ञान और विशेष प्रशिक्षण के महत्व पर बल देता है। यह पाठ्यपुस्तक बाल रोग, बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के प्रशिक्षुओं और कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञों के लिए व्यापक संसाधन के रूप में तैयार की गई है।

इसका संपादन अपोलो हॉस्पिटल्स समूह के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर अनुपम सिबल और दिल्ली के मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ डॉ. सरथ गोपालन ने किया है। श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद इशाक मलिक इसके सह-संपादक हैं।

इस पुस्तक की प्रस्तावना जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर कैथलीन बी. श्वार्ट्ज ने लिखी है। पाठ्यपुस्तक का पहला संस्करण 2016 में प्रकाशित हुआ था और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसका विमोचन किया था। वर्तमान संस्करण को उसी के आधार पर तैयार किया गया है और उसमें इस क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक विकास और नैदानिक ​​पद्धतियों को शामिल किया गया है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के लिए शुल्क को सरल बनाने हेतू संशोधन अधिसूचित किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) चौथे संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के लिए प्रवर्तन को मजबूत करना और तर्कसंगत शुल्क संग्रह सुनिश्चित करना है।

संशोधित नियम 15 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे।

अधिसूचना के अनुसार, नियम 10 के अंतर्गत अनुमेय सकल वाहन भार (जीवीडब्ल्यू) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क लगाने के लिए एक संशोधित प्रारूप प्रस्तुत किया गया है।

इस संशोधन का उद्देश्य निर्धारित भार सीमा के अनुपालन को बढ़ावा देना और राजमार्ग अवसंरचना की देखभाल करते हुए सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएं:

ओवरलोडिंग के लिए संशोधित शुल्क संरचना:

निर्धारित भार ले जाने वाले वाहनों पर ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लगाया जाएगा:

10 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार: ओवरलोड शुल्क नहीं।

10 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत तक: मूल दर से दोगुनी दर पर शुल्क लिया जाएगा।

40 प्रतिशत से अधिक: मूल दर से चार गुना शुल्क लिया जाएगा

वैज्ञानिक तरीके से वजन मापन:

ओवरलोडिंग का निर्धारण शुल्क प्लाजा पर स्थापित प्रमाणित वजन मापन उपकरणों का उपयोग करके किया जाएगा।

वजन की सुविधा के बिना कोई शुल्क नहीं:

यदि शुल्क प्लाजा पर वजन करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो ओवरलोड शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

डिजिटल भुगतान अनिवार्य:

ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्‍टैग के माध्यम से ही वसूला जाएगा।

अनिवार्य रिपोर्टिंग:

अधिक भार वाले वाहनों का विवरण दर्ज किया जाएगा और राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर (वाहन) को सूचित किया जाएगा।

फास्‍टैग अनुपालन:

वैध फास्‍टैग के बिना राष्ट्रीय राजमार्गों में प्रवेश करने वाले वाहनों पर वर्तमान नियमों के अंतर्गत लागू प्रावधान लागू होंगे।

प्रयोज्यता खंड:

ये प्रावधान प्रारंभ होने से पहले निष्पादित कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जब तक कि रियायतग्राही संशोधित नियमों को अपनाने के लिए सहमति न दें।

नियमों में उदाहरण दिया गया है:

इस अधिसूचना में अनुमेय वजन सीमा के आधार पर वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए ओवरलोड शुल्क की गणना को स्पष्ट करने वाला एक विस्तृत विवरण शामिल है, जिससे कार्यान्वयन में स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

इस संशोधन से अनुपालन में सुधार होने, ओवरलोड वाहनों के कारण होने वाले सड़क नुकसान में कमी आने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल की सुरक्षित और अधिक कुशल आवाजाही को बढ़ावा मिलने की आशा है और यह डब्ल्यूआईएम के साथ निर्बाध रूप से संचालित होगी।

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनावों में 2,926 उम्मीदवार मैदान में

पश्चिम बंगाल / सत्ता संदेश

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।

  1. पश्चिम बंगाल राज्य (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, जिसके लिए 29 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, 9 अप्रैल, 2026 थी, जबकि पश्चिम बंगाल (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 10 अप्रैल, 2026 थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 13 अप्रैल, 2026 दोपहर 3:00 बजे तक थी ।
  2. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद, पश्चिम बंगाल के लिए उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नामविधानसभा क्षेत्रों (एसी) की संख्याउम्मीदवारों की कुल संख्यानामांकन वापस लेने के बाद
1.पश्चिम बंगाल (चरण-I)1521,478
2.पश्चिम बंगाल (चरण-II)1421,448
  1. निर्वाचन अधिकारी (आरओ) चुनाव संचालन नियमावली, 1961 के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करेंगे ।
  2. आरओ प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकनजांच और उम्मीदवारी वापस लेने से संबंधित सभी चुनाव पत्रों और कार्यवाही को एक सीलबंद पैकेट/लिफाफे में सील के साथ अपनी निगरानी में रखेंगे ।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप पर “अपने उम्मीदवार को जानें” टैब से अपने उम्मीदवारों का विवरण देख सकते हैं, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यताएं, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और देनदारियां शामिल हैं, और उनके शपथपत्र डाउनलोड कर सकते हैं ।
  4. इसके अतिरिक्‍त, ईसीआई की पहल के अनुरूप, ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और उनके विवरण, जिनमें क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न शामिल हैं, मतदाताओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में अंकित होंगे।
आम चुनाव और उपचुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनावों में 2,926 उम्मीदवार मैदान में

तिथि: 14 APR 2026 by PIB Delhi

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।

  1. पश्चिम बंगाल राज्य (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, जिसके लिए 29 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, 9 अप्रैल, 2026 थी, जबकि पश्चिम बंगाल (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 10 अप्रैल, 2026 थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 13 अप्रैल, 2026 दोपहर 3:00 बजे तक थी ।
  2. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद, पश्चिम बंगाल के लिए उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नामविधानसभा क्षेत्रों (एसी) की संख्याउम्मीदवारों की कुल संख्यानामांकन वापस लेने के बाद
1.पश्चिम बंगाल (चरण-I)1521,478
2.पश्चिम बंगाल (चरण-II)1421,448
  1. निर्वाचन अधिकारी (आरओ) चुनाव संचालन नियमावली, 1961 के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करेंगे ।
  2. आरओ प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकनजांच और उम्मीदवारी वापस लेने से संबंधित सभी चुनाव पत्रों और कार्यवाही को एक सीलबंद पैकेट/लिफाफे में सील के साथ अपनी निगरानी में रखेंगे ।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप पर “अपने उम्मीदवार को जानें” टैब से अपने उम्मीदवारों का विवरण देख सकते हैं, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यताएं, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और देनदारियां शामिल हैं, और उनके शपथपत्र डाउनलोड कर सकते हैं ।
  4. इसके अतिरिक्‍त, ईसीआई की पहल के अनुरूप, ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और उनके विवरण, जिनमें क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न शामिल हैं, मतदाताओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में अंकित होंगे।
उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की


केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, पूर्व सांसदों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है: लोक सभा अध्यक्ष

बाबासाहेब की दूरदर्ष्टि ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए: लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली, 14 अप्रैल, 2026: भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे; राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश; सांसदों, पूर्व सांसदों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके उपरांत लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला; केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे, सांसदों एवं पूर्व सांसदों ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) द्वारा संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपनी प्रतिभा, समर्पण और दृढ़ निष्ठा के बल पर अपने जीवन की प्रत्येक चुनौती को अवसर में परिवर्तित किया।उन्होंने आगे  कहा कि उनका जीवन, उनके आदर्श, उनके विचार तथा राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हम सभी के लिए चिरस्थायी प्रेरणा है।

 डॉ. अम्बेडकर के प्रमुख योगदानों का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार तथा बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार जैसे प्रगतिशील प्रावधानों ने एक सशक्त भारत की नींव रखी, जो न केवल भारत के लोकतंत्र को बल्कि विश्व के अन्य लोकतंत्रों को भी निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

भारत के युवाओं को बाबासाहेब  के विचारों का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए श्री बिरला ने उन्हें सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के 

साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिभा, कौशल, नवाचार और समर्पण भारत को और अधिक सशक्त तथा विकसित बनाएंगे।

इस अवसर पर श्री बिरला ने X पर अपने  संदेश में कहा कि, “बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है।विषम परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने तमाम ऊँचाइयों को छुआ तथा अपने अदम्य साहस, कठोर परिश्रम और शिक्षा के बल पर न केवल स्वयं को स्थापित किया, बल्कि करोड़ों वंचितों और शोषितों के लिए आशा की नई किरण बन गए।

उन्होंने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के मूल्यों को जीवन का ध्येय बनाया और इन्हीं आदर्शों को भारत के संविधान में समाहित कर राष्ट्र को एक सशक्त दिशा प्रदान की।

बाबासाहेब हमारे राष्ट्र के वह विशिष्ट रत्न हैं, जिनके जीवन व कार्यों ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए।

संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसा दूरदर्शी दस्तावेज देश को दिया, जो आज भी लोकतंत्र की मजबूत नींव है और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता हैउनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, जागरूकता और संगठित प्रयासों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

आज जब हम विकसित और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर हैं, बाबासाहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका संघर्ष और दर्शन हमें अन्याय, असमानता और भेदभाव के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

डॉ. अम्बेडकर का प्रेरणादायी जीवन और उनके आदर्श सदैव हमें एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।”

खेल खेलने से होने वाले फायदे

खेल खेलने से व्यक्ति को एक नहीं बल्कि अनेकों फायदे होते हैं जोकि निम्नलिखित हैं –

  • बहुत से रोगों से बचाव होता है जैसे कि मोटापा, हृदय की समस्या, मधुमेह, गठिया रोग इत्यादि।
  • व्यक्ति अनुशासित, समय का पाबंद, धैर्यवान और शालीन बनता है।
  • अपनी रुचि के अनुसार जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से खेल खेलता है तो उसका गुस्सा कम होता है और उसका चिड़चिड़ापन भी खत्म हो जाता है।
  • शारीरिक तंदुरुस्ती बनती है और मानसिक तौर पर व्यक्ति को आराम मिलता है। 
  • शरीर के सभी अंगों को खेल शारीरिक तौर पर बेहतर बनाते हैं जिसकी वजह से शरीर मजबूत बनता है।
  • खेल खेलने से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और साथ ही उसका दिमाग भी तेज़ होता है।
  • मनुष्य के काम करने का तरीका अच्छा होता है और वह हर काम को लगन के साथ करता है।  
  • खेल से शारीरिक ताकत बढ़ती है और शारीरिक समन्वय भी बना रहता है।