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पंजाब पुलिस में बड़ा फेरबदल: चुनाव से पहले 129 DSP और ACP अधिकारियों के तबादले

पंजाब डेस्क: पंजाब सरकार ने राज्य में होने वाले नगर निगम चुनावों और अगले साल के चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पुलिस विभाग में एक व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, राज्यभर के 129 DSP और ACP रैंक के अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है।

इन सभी अधिकारियों को अपनी नई तैनाती वाली जगह पर 18 अप्रैल की दोपहर तक रिपोर्ट करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।इस फेरबदल के तहत कई महत्वपूर्ण जिलों में तैनातियां बदली गई हैं। तरनतारन से डीएसपी सरबजीत सिंह को अब लुधियाना में एसीपी सिविल लाइंस के पद पर नियुक्त किया गया है।

बटाला के डीएसपी सिटी संजीव कुमार को अब पठानकोट में डीएसपी (PBI NDPS-cum-Narcotic) तैनात किया गया है, जबकि उनकी जगह सुखजिंदर सिंह को बटाला का नया डीएसपी सिटी लगाया गया है। इसके अलावा कपूरथला के फगवाड़ा, होशियारपुर के चब्बेवाल और पटियाला के बहादुरगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी अधिकारियों की नई तैनातियां की गई हैं।

लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन बिल: दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से केंद्र सरकार को लगा बड़ा झटका

नेशनल डेस्क: संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में गिर गया है,। सदन में हुई वोटिंग के दौरान विधेयक के पक्ष में 278 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 211 मत दर्ज किए गए, जिसके कारण यह पारित होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका,। इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करना और लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करना था।

विपक्ष ने इस आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) और 2011 की जनगणना से जोड़ने पर कड़ा विरोध जताया, वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय “भारत के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास” करार दिया,। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए रिकॉर्ड भागीदारी का जिक्र किया और कहा कि इस चर्चा में 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया, जो एक नया रिकॉर्ड है।

हालांकि, नए विधेयक के गिरने की संभावना को देखते हुए सरकार ने 16 अप्रैल की आधी रात को ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ को नोटिफाई कर दिया था, ताकि महिला आरक्षण का मूल आधार बना रहे।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…17-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में आज का दिन राजनीतिक सरगर्मी और रोंगटे खड़े कर देने वाली आपराधिक घटनाओं के नाम रहा। आज की सबसे बड़ी खबर आम आदमी पार्टी के मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर हुई ईडी (ED) की छापेमारी रही, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सियासी उठापटक के बीच, कुछ ऐसी खबरें भी सामने आईं जिन्होंने सबको हैरान कर दिया—कहीं एक बुजुर्ग मां को जंजीरों में जकड़ा गया, तो कहीं स्कूल के भीतर एक महिला शिक्षिका पर तेजाब से हमला हुआ। इसके अलावा, चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में होने वाले बड़े बदलावों और सांसद अमृतपाल सिंह की जेल वापसी से जुड़ी खबरों ने भी सबका ध्यान खींचा।तो आइए विस्तार से जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ की आज की वो 10 बड़ी खबरें जो आपको जाननी चाहिए।

आप मंत्री संजीव अरोड़ा पर ईडी की छापेमारी: लुधियाना, जालंधर और गुड़गांव समेत 13 ठिकानों पर जमीन सौदे में गड़बड़ी (CLU) के आरोप में कार्रवाई की गई।

पंजाब विधानसभा की सीटें नहीं बढ़ेंगी: साल 2027 के चुनाव मौजूदा 117 सीटों पर ही होंगे, क्योंकि परिसीमन 2029 में होना तय है।

कैबिनेट मंत्री मुंडियां पर रिश्वत का आरोप: पूर्व सरपंच धर्मजीत गिल ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सरपंच बनाने के लिए 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

6 जिलों के रिजर्वेशन रोस्टर में बदलाव: पंजाब कैबिनेट ने मोहाली, पटियाला और फाजिल्का सहित 6 जिलों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव और किसानों को डिसिल्टिंग की मंजूरी दी है।

सांसद अमृतपाल सिंह की पंजाब वापसी नहीं: सुरक्षा कारणों से अमृतपाल फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही रहेंगे और उनके मामलों की सुनवाई वहीं होगी।

लिव-इन पार्टनर के धोखे पर आत्मघाती कदम: कपूरथला की महिला ने पूर्व सरपंच पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए फिनाइल पीकर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया।

चंडीगढ़ मास्टर प्लान में बड़े बदलाव: प्रशासन ने शहर में 5 मंजिला इमारतें बनाने, मिक्स्ड लैंड यूज और स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया है।

महिला शिक्षिका पर तेजाब हमला: गुरदासपुर के एक स्कूल में नशेड़ी भांजे ने क्लासरूम में घुसकर टीचर पर तेजाब फेंका, जिससे दो बच्चे भी झुलस गए।

बुजुर्ग मां के साथ क्रूरता: अमृतसर में बेटे-बहू ने 75 साल की बुजुर्ग मां को जंजीरों से बांधकर सड़क किनारे छोड़ा; महिला आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

सुरक्षा कटौती पर शिवसेना नेता का विरोध: संदीप थापर ने गनमैन कम किए जाने के विरोध में पुलिस को अपनी पूरी सुरक्षा वापस करने की पेशकश की, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा बहाल की।

दूरसंचार विभाग, हरियाणा एलएसए ने फतेहाबाद, हरियाणा में साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया

फतेहाबाद, 16 अप्रैल 2026: दूरसंचार विभाग (डीओटी), हरियाणा एलएसए ने फतेहाबाद पुलिस के साथ समन्वय से पुलिस लाइंस, फतेहाबाद में एक उच्च प्रभाव वाले संवाद-सह-जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। हरियाणा एलएसए के अपर महानिदेशक दूरसंचार श्री राधाचरण शाक्य और फतेहाबाद की पुलिस अधीक्षक सुश्री निकिता खट्टर ने संयुक्त रूप से बैठक की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में जिले भर के पुलिस अधिकारियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) सहित लगभग 100 लोगों ने भाग लिया।

फतेहाबाद के पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए दूरसंचार विभाग की पहल की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान डिजिटल युग में धोखेबाजों द्वारा उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए साइबर अपराध को प्रभावी ढंग से रोकने और उस पर अंकुश लगाने के लिए सभी हितधारकों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता है।

हरियाणा एलएसए के अपर महानिदेशक ने राष्ट्र निर्माण और माननीय प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सुरक्षित संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी और दूरसंचार सेवाओं के बढ़ते दुस्र्पयोग के खतरे को रेखांकित किया, सभी हितधारकों द्वारा सतर्कता और सक्रिय उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके अलावा, दूरसंचार विभाग की विभिन्न नई पहलों पर प्रकाश डाला और दूरसंचार विभाग की प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया, जिनका उल्लेख नीचे किया गया है:
• साइबर धोखाधड़ी से निपटने के उपाय:
o चोरी/दुरुपयोग किए गए उपकरणों का पता लगाने के लिए केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (सीईआईआर) का उपयोग
o नागरिक केंद्रित दूरसंचार सुरक्षा सेवाओं के लिए संचार साथी पोर्टल
o साइबर अपराध पैटर्न की पहचान करने के लिए आई4सी और एनसीआरबी के साथ सहयोग
o संदिग्ध लेन-देन को चिह्नित करने के लिए बैंकों के साथ वित्तीय जोखिम संकेतक (एफआरआई) का विकास
• नागरिक जागरूकता और रिपोर्टिंग तंत्र:
o साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन
o शिकायत दर्ज करने के लिए www.cybercrime.gov.in
o सुरक्षित बैंकिंग संचार के लिए 1600 श्रृंखला नंबरों पर जागरूकता
• संचार साथी पहल का प्रदर्शन किया गया:
o चक्षु – संदिग्ध कॉल/संदेशों की रिपोर्ट करना
o खोए/चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट को ब्लॉक करें
o किसी के नाम पर जारी किए गए मोबाइल कनेक्शनों को जानें
o अपने मोबाइल हैंडसेट को जानें (KYM)
o रिकविन – अंतर्राष्ट्रीय कॉल पर नज़र रखना
• सिम जारी करने के दिशानिर्देश: कार्यक्रम में सिम अधिग्रहण प्रक्रिया को भी शामिल किया गया, जिसमें दुरुपयोग को रोकने के लिए PoS ऑपरेटरों और TSP के लिए आवश्यक सावधानियों पर जोर दिया गया।

दूरसंचार विभाग ने जागरूकता पहल, निवारक उपायों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं के साथ मजबूत समन्वय के माध्यम से नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिससे एक सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार दूरसंचार इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सीडीएलयू सिरसा में साइबर सुरक्षा एवं DoT पहलों पर सेमिनार: डिजिटल सुरक्षा और दूरसंचार जागरूकता पर जोर”

सिरसा, 16 अप्रैल 2026: चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU), सिरसा के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से 16 अप्रैल 2026 को टैगोर भवन, सीडीएलयू, सिरसा में “साइबर सुरक्षा एवं DoT पहलें” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के बीच साइबर सुरक्षा, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार तथा दूरसंचार नीति संबंधी प्रमुख पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

यह सेमिनार माननीय कुलपति प्रो. विजय कुमार के संरक्षण में आयोजित किया गया। हरियाणा एलएसए के अतिरिक्त डीजीटी, श्री राधाचरण शाक्य (ITS) ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. हरीश रोहिल, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति एवं शैक्षणिक नेतृत्व के साथ संवाद सत्र से हुई, जिसके पश्चात उद्घाटन संबोधन प्रस्तुत किया गया।

श्री सचिन लांबा, एडीजी (सुरक्षा) ने साइबर सुरक्षा पर एक विशेष सत्र का संचालन किया, जिसमें उन्होंने फिशिंग, डिजिटल धोखाधड़ी, पहचान की चोरी तथा सोशल इंजीनियरिंग जैसे उभरते खतरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यावहारिक बचाव उपायों, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार तथा दैनिक डिजिटल गतिविधियों में साइबर स्वच्छता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। इस सत्र में साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, सुरक्षित डिजिटल अभ्यास, DoT की पहलें एवं नीतियां तथा साइबर खतरों से प्रभावी सुरक्षा जैसे प्रमुख विषय शामिल रहे। विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा एवं दूरसंचार शासन व्यवस्था की समझ विकसित की।

सत्र में दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित संचार साथी पोर्टल के छह प्रमुख घटकों का भी परिचय कराया गया। इनमें CEIR (Central Equipment Identity Register) के माध्यम से खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक एवं ट्रैक करना, TAFCOP के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच, संदिग्ध धोखाधड़ी संचार की रिपोर्टिंग, मोबाइल नंबर सत्यापन के लिए नागरिक-केंद्रित उपकरण तथा दूरसंचार संबंधी धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उपाय शामिल हैं। इस पोर्टल को उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने एवं दूरसंचार क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने वाली एक समग्र पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

श्री शैलेन्द्र सागर, निदेशक (प्रौद्योगिकी) ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) वित्तपोषण अवसरों पर एक महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF), अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) तथा अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से दूरसंचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फंडिंग तंत्र, प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्रों एवं अकादमिक-उद्योग सहयोग के अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने विद्यार्थियों को संचार मित्र के रूप में दूरसंचार विभाग से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस पहल के अंतर्गत दूरसंचार सेवाओं एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने, डिजिटल साक्षरता अभियानों में योगदान देने, संचार एवं नेतृत्व कौशल विकसित करने तथा राष्ट्र निर्माण में भागीदारी जैसे लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई।

अपने समापन वक्तव्य में अतिरिक्त डीजीटी, हरियाणा एलएसए ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों से आह्वान किया कि वे विभिन्न अनुसंधान एवं परियोजना निधियों का अधिकतम उपयोग करते हुए भारत की उभरती 6G यात्रा में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने मजबूत बौद्धिक संपदा (IPR) के निर्माण, विशेष रूप से स्टैंडर्ड एसेंशियल पेटेंट्स (SEPs) पर ध्यान देने तथा अनुसंधान को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों एवं समाधानों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने के बजाय उद्यमी बनने, नवाचार को आगे बढ़ाने और तकनीकी नेतृत्व की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। यह सत्र युवाओं की उस महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है, जिसके माध्यम से वे उन्नत दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के जरिए नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

कार्यालय नियंत्रक संचार लेखा हरियाणा द्वारा प्रथम त्रैमासिक पेंशन अदालत का आयोजन

हिसार, 17 अप्रैल 2026: नियंत्रक संचार लेखा (CCA), हरियाणा दूरसंचार सर्किल, अंबाला के कार्यालय द्वारा दिनांक 17.04.2026 को कार्यालय महाप्रबंधक, बीएसएनएल, हिसार में प्रथम त्रैमासिक पेंशन अदालत तथा KYP, LC/DLC एवं आईडी कार्ड शिविर का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती शिल्पी सिन्हा, नियंत्रक संचार लेखा, हरियाणा दूरसंचार सर्किल द्वारा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पेंशनरों ने भाग लिया तथा अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।

कार्यक्रम के दौरान पेंशनरों को SAMPANN सॉफ्टवेर का उमंग ऐप एवं DigiLocker के साथ एकीकरण के बारे में जानकारी दी गई, जिससे वे डिजिटल माध्यम से पेंशन सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।

पेंशनरों के लिए एक स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें केसरी अस्पताल,हिसार के चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PMTBMBA) के अंतर्गत डॉ. धर्मेन्द्र मनडया द्वारा टीबी जागरूकता पर व्याख्यान दिया गया, जिसमें रोग की पहचान, रोकथाम एवं उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

इस अवसर पर वरिष्ठतम पेंशनरों को श्रीमती शिल्पी सिन्हा द्वारा सम्मानित किया गया, जिससे उनके योगदान को सराहा गया।

यह आयोजन पेंशनरों के कल्याण, जागरूकता एवं सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्यालय नियंत्रक संचार लेखा, हरियाणा की एक महत्वपूर्ण पहल है।

*जनगणना 2027: हरियाणा सचिवालय में राज्य के अधिकारियों के लिए स्वगणना कार्यशाला का आयोजन*

चंडीगढ़: 17 अप्रैल, 2026

हरियाणा राज्य जनगणना संचालन निदेशालय के निदेशक डॉ. ललित जैन के मार्गदर्शन में आज हरियाणा के मुख्य सचिवालय तथा और नए सचिवालय में राज्य के अधिकारियों के लिए एक सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्वगणना) कार्यशाला हुई। कार्यशाला की अध्यक्षता हरियाणा की विशेष सचिव, रेवेन्यू, श्रीमती हेमा शर्मा ने की। सेशन के दौरान, हरियाणा जनगणना निदेशालय के अधिकारियों ने भागीदारों को जनगणना 2027 के तहत सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रोसेस के बारे में बताया और ऑफिशियल पोर्टल *se.census.gov.in* के ज़रिए स्वगणना विवरण ऑनलाइन दर्ज करने के बारे में समझाया।

कार्यशाला में, राज्य के अधिकारियों ने सक्रियता से भाग लिया और मौके पर ही अपना सेल्फ-एन्यूमरेशन भी पूरा किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विभागों को जनगणना डिजिटल प्रकिया से परिचित कराना और हरियाणा में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले पहले चरण को सफलता पूर्ण पूरा करने के लिए सुविधाजनक बनाना था। अधिकारियों को डेटा सिक्योरिटी उपायों के बारे में भी बताया गया, जिसमें सारी जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स के प्रोटेक्टेड सर्वर पर स्टोर की जाती है और इसका इस्तेमाल सिर्फ़ आंकड़े एकत्रित करने के लिए किया जाता है।

जनगणना 2027 हुई डिजिटल: चंडीगढ़ DGP ने ऑनलाइन स्व-गणना की

चंडीगढ़, 17 अप्रैल 2026: जनगणना 2027 में जनता की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में, डॉ. सागर प्रीत हूडा, पुलिस महानिदेशक, यूटी चंडीगढ़, ने आज ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना सफलतापूर्वक पूरी की। स्व-गणना प्रक्रिया को डॉ. नवजोत खोसा, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ और सुश्री खुशप्रीत कौर, एसडीएम (केंद्रीय), यूटी चंडीगढ़ द्वारा सुगम बनाया गया।

स्व-गणना प्रक्रिया को अपनाकर, DGP ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की सरलता, पहुंच और सुरक्षित प्रकृति को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी नागरिक-केंद्रित पहल न केवल गणना प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करती हैं बल्कि डेटा संग्रह में अधिक सटीकता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती हैं।

उन्होंने सभी पुलिस कर्मियों के साथ-साथ आम जनता से जनगणना 2027 में स्व-गणना सुविधा का उपयोग करके सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने रेखांकित किया कि डेटा का सटीक और समय पर जमा होना प्रभावी नीति निर्माण, कुशल संसाधन आवंटन और शासन तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

स्व-गणना, जनगणना 2027 की एक प्रमुख विशेषता, व्यक्तियों को अपने घर पर  आराम से ऑनलाइन अपनी जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक विवरण जमा करने में सक्षम बनाती है। यह पहल शारीरिक संपर्क की आवश्यकता को काफी कम करती है जबकि डेटा की दक्षता, कवरेज और विश्वसनीयता को बढ़ाती है।

सभी निवासियों को इस सुविधा का लाभ उठाने और जनगणना 2027 की सफलता में पूर्ण हृदय से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनकी सक्रिय भागीदारी एक व्यापक और विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो सूचित निर्णय लेने और भविष्य की योजना के लिए आवश्यक है।

ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पर संगोष्ठी का आयोजन

मोहाली, 17 अप्रैल 2026: 17 अप्रैल को मुख्यालय विशेष महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल की पश्चिमी कमान चंडीगढ़ ने लखनौर (मोहाली) स्थित सिंदूर सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का केंद्र बिंदु ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव था। चर्चा में वर्तमान चेतावनियों, तस्करी और इनसे लड़ने हेतु सुरक्षा संस्थानों के मध्य दृढ समन्वय पर चर्चा की गयी।

इसमें सीमा सुरक्षा बल, बल मुख्यालय, नई दिल्ली, फील्ड फॉरमेशन, भारतीय सेना पश्चिमी कमान, भारतीय वायु सेना चंडीगढ़, पंजाब पुलिस, आई आई टी रोपड़, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, IISER मोहाली, नैनो साइंस सेंटर मोहाली, C-DAC मोहाली, NIELIT रोपड़ और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ सहित अन्य प्रमुख और विशिष्ठ संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।

संगोष्ठी में ड्रोन से होने वाली तस्करी, निगरानी और सीमा पार गतिविधियों से बढ़ते खतरों पर चर्चा की गयी। मुख्यतः, उन्नत ड्रोन पहचान और ड्रोन-रोधी प्रौधागिकयों की तैनाती, फोरेंसिक विश्लेषण क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने उभरते तकनीकी खतरों का मुकाबला करने के लिए एक सक्रिय और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और नवाचार, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को परिचालन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय सुरक्षा व ड्रोन खतरे के बदले परिदृश्य का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के साथ हुआ।

नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में है नारी शक्ति
  • शोभा करंदलाजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सितंबर 2023 में संसद में समर्थन करते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता जब देश की नारियां भी इसके साथ ही उन्नति करें। उनका यह विश्वास एमएसएमई क्षेत्र (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) में सरकार के काम में हर रोज दिखाई देता है।

एमएसएमई  क्षेत्र को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। लेकिन अगर गहराई से देखें तो इसके दिल में महिला उद्यमियों का मूक बल बसता है। आखिरकार आज इस मूक बल को वह राष्ट्रीय मान्यता, संस्थागत समर्थन और नीतिगत गति मिल रही है जिसका वह हमेशा से हकदार है।

आँकड़े बयां करते हैं कहानी

भारत के एमएसएमई  इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हुए हैं। वास्तव में, ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ पंजीकरण के अनुसार, देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई में महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और ये रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। पूरी तरह से ऑनलाइन, कागज रहित और स्व-घोषणा पर आधारित इस व्यवस्था ने उस नौकरशाही बाधा को समाप्त कर दिया, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी। जनवरी 2023 में शुरू किए गए ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ ने अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत उन महिलाओं तक पहुँच बनाकर इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया, जिनके पास ‘पैन’ नंबर या ‘जीएसटीएन’  नहीं था। इसने उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभों के दायरे में लाने का काम किया।

सरकार ने महिलाओं को विकास वाहक के रूप में अपने आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है।

आर्थिक शक्ति के रूप में नारी शक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति है। उन्होंने ही कहा था कि  जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार सशक्त होते हैं और जब परिवार सशक्त होते हैं, तो राष्ट्र निरंतर मज़बूत होता जाता है।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ राजनीतिक क्षेत्र में इस दर्शन की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक व्यापक और बहुआयामी नीतिगत ढांचे के रूप में सामने आई है, जो ऋण, कौशल, बाज़ार तक पहुंच, पहचान और गरिमा जैसे पहलुओं को समाहित करती है।

महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नीतिगत संरचना

एमएसएमई मंत्रालय ने अपने हर बड़े कार्यक्रम और योजना में महिलाओं के सशक्तिकरण को व्यवस्थित रूप से शामिल किया है।

ये सभी मिलकर, आपूर्ति पक्ष पर आठ मुख्य श्रेणियों के माध्यम से उद्यमियों को सहायता प्रदान करते हैं: तकनीक तक पहुँच, ऋण और वित्त तक पहुँच, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, अवसरंचना सहायता, औपचारिकीकरण और समावेशन, बाज़ार तक पहुँच, और उद्योग-स्तरीय कौशल विकास।

पिछले पाँच वर्षों में, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 3.2 लाख से ज़्यादा महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों को सहायता दी गई है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से 39% महिलाएँ हैं जो इस योजना की रूपरेखा और महिलाओं की कुछ कर दिखाने की ललक, दोनों को दर्शाता है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट महिला ऋणदाताओं को 90 प्रतिशत तक का बढ़ा हुआ गारंटी कवर प्रदान करता है। इससे बैंक बिना कुछ गिरवी रखे महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हैं।

इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक खरीद नीति  में संशोधन कर यह अनिवार्य किया गया कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से ही खरीदें। इससे महिला उद्यमियों के लिए एक सुनिश्चित और अनुमानित बाज़ार तैयार होता है, जिससे सरकारी खर्च को महिलाओं के व्यवसाय की वृद्धि में बदला जा रहा है। यह देखकर खुशी होती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा की गई कुल खरीद का 3.5 प्रतिशत हिस्सा महिला एमएसएमई  से ही खरीदा गया था।

‘जेडइडी’ (जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट) प्रमाणन योजना के तहत, महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई को प्रमाणन शुल्क पर सौ प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। ये विस्तृत विवरण काफी महत्वपूर्ण हैं और ये मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में गहराई से विचार किया है कि महिलाओं को कहाँ कहाँ बाधाओं का सामना करना पड़ता है और ठीक उन्हीं बाधाओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ सहायता दी गई।

‘महिला कॉयर योजना’, के तहत कॉयर क्षेत्र में काम करने वाली महिला कारीगरों को विशेष कौशल विकास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ‘एमएसएमई- व्यापार सशक्तिकरण और विपणन’ के तहत महिलाओं को मार्केटिंग के लिए मदद करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 लाख लाभार्थियों में से 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘यशस्विनी अभियान’ में, एमएसएमई  योजनाओं और पंजीकरण से मिलने वाले लाभों के बारे में महिलाओं को जानकारी देने के लिए पूरे देश में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए आयोजित ‘एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन’ 3.0 के तहत 18,888 से अधिक आइडिया प्राप्त हुए, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि महिलाओं में रचनात्मक और उद्यमशीलता की ऊर्जा का भंडार मौजूद है, जो बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहा है।

इसके अलावा, मंत्रालय के पास एक समर्पित महिला उद्यमिता प्रकोष्ठ है, जो विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करके, महिलाओं के लिए प्राप्त परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन करके, तथा इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ जुड़कर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।

इन सभी पहलों ने जेंडर टारगेटिंग (लैंगिक लक्ष्यीकरण) और अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया है। ये कदम योजनाओं के भीतर केवल एक सब्सिडी प्रावधान के रूप में ‘महिलाओं के समावेश’ से आगे बढ़कर, महिला-अनुकूल उद्यमिता सहायता के लिए एक अधिक सुविचारित और व्यापक ढांचे की ओर बढ़ने के सफर को दर्शाते हैं।

कौशल, आत्मविश्वास, समुदाय

क्रेडिट और बाज़ारों से परे, सरकार ने यह माना है कि उद्यमिता कौशल और आत्मविश्वास का भी विषय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, जहाँ महिलाएँ पारंपरिक रूप से अपने समाज की आर्थिक रीढ़ रही हैं, लक्षित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रशिक्षित प्रतिभागियों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक हो।

स्वयं सहायता समूहों को एमएसएमई सहायता तंत्रों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे महिला उद्यमियों के ऐसे समुदाय बने हैं जो एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। वे न केवल अपना व्यवसाय खड़ा करते हैं, बल्कि आपस में जुड़कर एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार करते हैं।

यह एक ऐसी सरकार है जो निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। प्रत्येक बजट, प्रत्येक योजना और प्रत्येक पोर्टल का सरलीकरण उस विशाल इमारत की एक ईंट के समान है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री मोदी ने एक सरल, किंतु क्रांतिकारी विचार के साथ रखी थी—कि भारत की महिलाएं एक ऐसी शक्ति हैं जिन्हें अब स्वतंत्र और सशक्त होने का अवसर मिलना चाहिए।

हर उद्यम में नारी शक्तिकी भावना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने दुनिया को बताया कि भारत की महिलाएँ यहाँ की संसद का हिस्सा हैं। इस सरकार की एमएसएमई नीतियां दुनिया को यह बता रही हैं कि भारत की महिलाएँ देश के बाजारों, कारखानों, उसकी निर्यात श्रृंखलाओं, उसके नवाचार केंद्रों और उसके बोर्डरूम्स की भी हकदार हैं।

ये उसी एक सत्य की अभिव्यक्तियाँ हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के अपने विज़न का आधार बनाया है। एक विकसित भारत वह भारत है, जहाँ 3 करोड़ से भी ज़्यादा महिला उद्यमी (और यह संख्या लगातार बढ़ रही है) विकास की असली ताकत हैं।

अभी हम उस लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुँचे हैं, लेकिन इस सरकार की देखरेख में और प्रधानमंत्री के पक्के इरादों के साथ, हम यकीनन उस राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

(लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)