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NASA की गंभीर चेतावनी: एस्टेरॉयड के हमले से तबाह हो सकते हैं दुनिया के कई शहर, मचेगा ‘भूचाल’

इंटरनेशनल डेस्क : नासा (NASA) की ग्रह रक्षा अधिकारी (Planetary Defense Officer) केली फास्ट ने पृथ्वी के लिए एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार, अंतरिक्ष में हजारों ऐसे एस्टेरॉयड्स मौजूद हैं जो कभी भी पृथ्वी से टकरा सकते हैं और जिनसे बचाव का फिलहाल कोई पुख्ता उपाय नजर नहीं आ रहा है।

15,000 अनदेखे एस्टेरॉयड्स का खतरा: वैज्ञानिक केली फास्ट ने बताया कि पृथ्वी के पास लगभग 15,000 ऐसे एस्टेरॉयड्स हैं जिन्हें अभी तक देखा नहीं गया है। इनमें से प्रत्येक एस्टेरॉयड में एक पूरे शहर को तबाह करने की क्षमता है। उन्होंने इन मध्यम आकार के पिंडों को “शहर-नाशक” (city-killers) करार दिया है, जो क्षेत्रीय स्तर पर गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं।

ट्रैकिंग में आ रही हैं मुश्किलें : रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 25,000 एस्टेरॉयड्स पृथ्वी के करीब से गुजरते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को उनमें से केवल 40% के सटीक स्थान की जानकारी है। सबसे शक्तिशाली दूरबीनों से भी इनका पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि ये सूर्य के प्रकाश को परावर्तित (reflect) नहीं कर पाते।

भविष्य की तैयारी: इस खतरे से निपटने के लिए नासा अगले साल एक ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट सर्वेयर अंतरिक्ष दूरबीन’ लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह दूरबीन थर्मल सिग्नेचर का उपयोग करके उन अंधेरे एस्टेरॉयड्स और धूमकेतुओं का पता लगाएगी जो अब तक छिपे हुए थे। वैज्ञानिक ने स्पष्ट किया कि एस्टेरॉयड्स के हम तक पहुंचने से पहले उन्हें ढूंढना और उन्हें नष्ट करने की तकनीक विकसित करना मानव जाति के लिए बहुत जरूरी है।

अंतरिक्ष से आ रहे रहस्यमय धीमे रेडियो संकेतों की गुत्थी जल्द सुलझ सकती है

अंतरिक्ष रेडियो संकेत

( सैनेड हॉर्वत एवं नताशा हर्ले वाकर – क्यूर्टिन यूनिवर्सिटी )

पर्थ, दो फरवरी (द कन्वरसेशन) अंतरिक्ष से हर कुछ मिनटों या घंटों में दोहराए जाने वाले रहस्यमय रेडियो संकेत ‘‘लॉन्ग-पीरियड ट्रांज़िएंट्स’’ की खोज 2022 में हुई थी लेकिन इनके बारे में तब अधिक जानकारी नहीं मिल पाई और खगोलविद इनका रहस्य सुलझाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।

‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में इन संकेतों की प्रकृति को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।

रेडियो खगोलविद ‘पल्सर’ से भली-भांति परिचित हैं, जो तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे होते हैं। पृथ्वी से देखने पर ये इसलिए स्पंदित दिखाई देते हैं क्योंकि इनके ध्रुवों से निकलने वाली शक्तिशाली रेडियो किरणें लाइटहाउस की तरह अंतरिक्ष में घूमती हैं। अब तक ज्ञात सबसे धीमे पल्सर भी कुछ सेकंड में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं।

हाल के वर्षों में ऐसे रेडियो संकेतों के स्रोत खोजे गए हैं, जिनकी अवधि 18 मिनट से लेकर छह घंटे से अधिक तक है। मौजूदा भौतिकी के अनुसार, न्यूट्रॉन तारे इतनी धीमी गति से घूमते हुए रेडियो तरंगें उत्पन्न नहीं कर सकते, जिससे वैज्ञानिकों के सामने नई पहेली खड़ी हो गई।

अध्ययन के अनुसार, अब तक का सबसे लंबे समय तक सक्रिय लॉन्ग-पीरियड ट्रांज़िएंट जीपीएम जे1839-10 है जो वास्तव में एक ‘व्हाइट ड्वार्फ’ तारा हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तारा अपने एक सहचर तारे की मदद से शक्तिशाली रेडियो किरणें उत्पन्न कर रहा है, और संभव है कि अन्य ऐसे स्रोत भी इसी तरह के हों।

‘व्हाइट ड्वार्फ’ मृत तारों के अवशेष होते हैं, जो आकार में पृथ्वी जितने लेकिन द्रव्यमान में सूर्य के बराबर होते हैं। अकेले व्हाइट ड्वार्फ से अब तक रेडियो स्पंदन नहीं देखे गए हैं, लेकिन जब वे किसी एम-टाइप ड्वार्फ तारे के साथ द्वितारा प्रणाली में होते हैं, तो ऐसी गतिविधि संभव हो जाती है। वर्ष 2016 में पहले व्हाइट ड्वार्फ पल्सर की पुष्टि हो चुकी है।

अब तक खोजे गए दस से अधिक लॉन्ग-पीरियड ट्रांज़िएंट्स में से 2025 में पहली बार दो को निश्चित रूप से व्हाइट ड्वार्फ–एम-ड्वार्फ द्वितारा प्रणाली के रूप में पहचाना गया, जिसने वैज्ञानिकों को नए सवालों पर विचार करने के लिए मजबूर किया।

वर्ष 2023 में खोजे गये जीपीएम जे1839-10 की परिक्रमा अवधि 21 मिनट है और यह अन्य स्रोतों की तुलना में असाधारण रूप से लंबे समय से सक्रिय पाया गया। अभिलेखीय आंकड़ों में इसके संकेत 1988 तक दर्ज मिले। यह स्रोत पृथ्वी से लगभग 15,000 प्रकाश-वर्ष दूर है और केवल रेडियो तरंगों में ही दिखाई देता है।

तीन महाद्वीपों में स्थित रेडियो दूरबीनों—ऑस्ट्रेलिया की एएसके