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कैबिनेट ने NIIF में ₹30,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में भारत की निवेश प्रतिबद्धता को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के नए और आगामी कोषों के लिए भारत सरकार की ओर से ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी। इससे एनआईआईएफ के लिए भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता ₹60,000 करोड़ हो गई।

राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) भारत का संप्रभु-आधारित कोष है, जिसका संचालन और प्रबंधन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) की ओर से पेशेवर तरीके से किया जाता है। भारत सरकार एनआईआईएफ में 49% शेयरधारक है और वर्तमान में यह अपने कोषों और निवेश रणनीतियों में लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजी प्रतिबद्धता का प्रबंधन करती है। एनआईआईएफ ने पूंजी के इस्तेमाल और प्राप्ति में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड दिखाया है, और बड़े पोर्टफोलियो से बाहर निकलने के माध्यम से निवेशकों को लगभग ₹12,000 करोड़ लौटाए हैं।

एनआईआईएफ ने प्रमुख संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाई है, जिनमें सॉवरेन वेल्थ फंड, पेंशन फंड, बहुपक्षीय विकास और अग्रणी घरेलू वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, पीएसपी इन्वेस्टमेंट्स, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन, यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी ग्रुप, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

ये निवेशक ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई भौगोलिक क्षेत्रों से आते हैं, जो भारत की विकास यात्रा और एनआईआईएफ के शासन और वाणिज्यिक ट्रैक रिकॉर्ड में मजबूत अंतरराष्ट्रीय विश्वास को प्रतिबिंबित करता है।

भारत-जापान व्यापार गलियारे में एनआईआईएफ की चार परिचालन निवेश रणनीतियों – इंफ्रास्ट्रक्चर, निजी बाजार, विकास इक्विटी और जलवायु निवेश – ने निवेश में विशेष गति हासिल की है।

एनआईआईएफ का पहला इंफ्रास्ट्रक्चर कोष, ₹16000 करोड़ के कोष के साथ, भारत का सबसे बड़ा घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर कोष है और इसने परिवहन (सड़कें, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स, और हवाई अड्डे), ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटर और विद्युत पारेषण) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्लेटफॉर्म स्थापित किए हैं। इसके निजी बाजार कोष ने स्वदेशी प्रबंधकों की ओर से प्रबंधित कई सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर कोषों में निवेश किया है, जिन्होंने जलवायु, किफायती आवास, किफायती स्वास्थ्य सेवा और वेंचर कैपिटल (वीसी)/ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। एनआईआईएफ के रणनीतिक अवसर कोष ने वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे विकास क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। एनआईआईएफ का भारत-जापान कोष इसका पहला द्विपक्षीय कोष है और यह जलवायु और चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा परिवर्तन पर, साथ ही भारत-जापान व्यापार गलियारे को बढ़ावा देने वाले निवेशों पर भी, ध्यान केंद्रित करता है।

एनआईआईएफ की ओर से प्रबंधित निधियों ने सामूहिक आधार पर परिवहन, ऊर्जा परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों से आवागमन, किफायती आवास, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहित प्रमुख क्षेत्रों में कई भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी का निवेश किया है। ये निवेश गति शक्ति, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, सीओपी प्रतिबद्धताओं और एफएएमई और पीएम ई-ड्राइव जैसी प्रमुख योजनाओं जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

एनआईआईएफ एक रणनीतिक सलाहकार की भूमिका भी निभाता है, जो केंद्र सरकार के विभागों और राज्य संस्थाओं को नई पीपीपी पहलों और निवेश विचारों पर सहायता प्रदान करता है जो निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। इसमें समुद्री विकास कोष और अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष की संरचना जैसी पहलों पर सलाहकार और नीतिगत सहायता, मुद्रीकरण और पीपीपी संरचनाओं पर सरकारी अधिकारियों के साथ सहयोग, और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अन्य क्षेत्र-विशिष्ट निवेश ढांचों पर सलाह शामिल है।

भारत में अतिरिक्त निजी पूंजी लाने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने में एनआईआईएफ की ओर से वर्षों से निभाई गई भूमिका को मान्यता देते हुए, भारत सरकार की इस अतिरिक्त प्रतिबद्धता से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-मोबिलिटी और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन की उम्मीद है।

भारत सरकार की ओर से एनआईआईएफ में किए गए ₹30,000 करोड़ के इस अतिरिक्त निवेश का इस्तेमाल एनआईआईएफ के दूसरे अवसंरचना केंद्रित कोष की स्थापना के लिए किया जाएगा, जो इस उद्देश्य के साथ स्थापित इसके पहले प्रमुख कोष का उत्तराधिकारी होगा। एनआईआईएफ अवसंरचना कोष द्वितीय का लक्ष्य कोष लगभग ₹30,000 करोड़ प्रस्तावित है और इससे परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और शहरी अवसंरचना तथा ई-गतिशीलता जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किए जाने की उम्मीद है। यह आवंटन एनआईआईएफ की नई कोष रणनीतियों और इसके उत्तराधिकारी द्विपक्षीय एवं अन्य रणनीतिक कोषों को भी सहयोग देगा।

वर्तमान सरकारी आवंटन से अंतर्निहित परिसंपत्तियों और पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था पर उत्प्रेरक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, रोजगार निर्माण (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों) और राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, इस प्रकार आत्मनिर्भरता और 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा को सहयोग मिलेगा।

भारत एआई क्रांति के अगले चरण का नेतृत्व करने को तैयार: माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी

नयी दिल्ली/ सत्ता संदेश

वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी Microsoft के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत अपने मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम और विशाल डेवलपर समुदाय के दम पर कृत्रिम मेधा (एआई) के अगले चरण की तैनाती में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, इंटरनेट की व्यापक पहुंच और तकनीकी प्रतिभा का बड़ा आधार इसे वैश्विक एआई विकास के केंद्र के रूप में उभरने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत एआई आधारित नवाचारों और अनुप्रयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे एआई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के नए अवसर बन रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और शासन जैसे क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग से देश में डिजिटल परिवर्तन को और गति मिलेगी।

माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी के अनुसार, भारत न केवल एआई तकनीक का उपयोग करने वाला बड़ा बाजार है, बल्कि यह एक ऐसा देश भी है जहां बड़ी संख्या में डेवलपर्स और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नवाचार में योगदान दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे कि आधार, यूपीआई और अन्य ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म एआई के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। इससे न केवल सेवाओं की दक्षता बढ़ेगी बल्कि पारदर्शिता और पहुंच में भी सुधार होगा।

अधिकारी ने कहा कि एआई के अगले चरण में जिम्मेदार और सुरक्षित तकनीक के विकास पर जोर होगा, और भारत इस दिशा में वैश्विक मानकों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एआई नवाचारों का वैश्विक हब बन सकता है, जहां तकनीक और प्रतिभा दोनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

भारत-जापान संगोष्ठी से कार्यबल सहयोग को नई रफ्तार मिली

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच कार्यबल गतिशीलता सहयोग पर चर्चा करने के लिए 25 मई को टोक्यो में एक संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी जापान स्थित भारतीय दूतावास और जापान की आसियान वन कंपनी लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।

भारत और जापान के बीच कुशल कार्यबल गतिशीलता और मानव संसाधन विकास में दीर्घकालिक सहयोग पर चर्चा के लिए इस संगोष्ठी में जापानी नीति निर्माताओं, उद्योग जगत प्रमुखों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यबल गतिशीलता से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाया गया।

इस संगोष्ठी में जापान की प्रमुख कंपनियों के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी और मानव संसाधन प्रबंधक शामिल थे। प्रतिनिधियों ने भारत के कुशल कार्यबल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ संरचित जुड़ाव की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रतिभागियों ने विनिर्माण, देखभाल, निर्माण, वाहन रखरखाव, आतिथ्य सत्कार, कृषि, आईटी और डिजिटल सेवाओं तथा उभरते हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की प्रबल संभावनाओं को स्वीकार किया। चर्चाओं में पारदर्शी और व्यापक कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और रोजगार सुविधा प्रणालियों के महत्व पर भी बल दिया गया।

आगे बढ़ने के तरीके के रूप में, दोनों पक्षों ने भारत में जापानी भाषा और परीक्षण केंद्रों का विस्तार करने, जापानी नियोक्ताओं और भारतीय कौशल संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने, जापान से मांग की दृश्यता में सुधार करने, कौशल-मान्यता और व्यावसायिक संरेखण को बढ़ावा देने और घनिष्ठ संस्थागत सहयोग के माध्यम से विश्वसनीय कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने पर चर्चा की।

असम सरकार की फॉरेन लैंग्वेज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल टैलेंट (फ्लाइट) को राज्य के नेतृत्व वाली एक पहल के रूप में उजागर किया गया, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को वैश्विक कार्यबल के अवसरों, विशेष रूप से जापान-उन्मुख मार्गों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम का समापन आसियान ग्रुप कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री तोशियाकी निशिकावा के संबोधन से हुआ, जिन्होंने भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक जन-सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भविष्य में कार्यबल सहयोग के प्रति आशा व्यक्त करते हुए अगले 10 वर्षों में 50,000 लोगों को शामिल करने के साथ जापान-भारत मानव विनिमय कार्यक्रम को साकार करने के प्रति वचनबद्धता जताई।

उच्च शिक्षा संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, शिक्षुता प्रणालियों, डिजिटल कौशल विकास प्लेटफार्मों और कैरियर सेवाओं द्वारा समर्थित भारत के व्यापक कार्यबल तैयारी तंत्र पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट प्लेटफार्म, राष्ट्रीय कैरियर सेवा प्लेटफार्म, मॉडल कैरियर केंद्रों और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करने वाले व्यापक कौशल विकास तंत्र सहित भारत के अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता ढांचे पर प्रकाश डाला।

सचिव महोदया ने भारत और जापान के बीच जापानी भाषा की तैयारी, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल विकास, परीक्षण अवसंरचना, कौशल मानचित्रण, व्यावसायिक संरेखण, संरचित मांग एकत्रीकरण, नैतिक भर्ती प्रथाओं और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

भारत के बढ़ते डेटा सेंटर सेक्‍टर से एक लाख इंजीनियरिंग रोजगारों का सृजन होने की उम्मीद: डॉ. जितेंद्र सिंह


भारत डेटा सेंटर अर्थव्यवस्था में विश्व का नेतृत्व कर सकता है; सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब विदेशों की सफलता की कहानियों का इंतजार नहीं करता; आज दुनिया अत्याधुनिक तकनीकों में भारत के साथ साझेदारी करना चाहती है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और स्वच्छ ऊर्जा भारत की अगली तकनीकी क्रांति को शक्ति प्रदान करेंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का भविष्य तय करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब दुनिया प्रौद्योगिकी की साझेदारी के लिए भारत की ओर अधिकाधिक देख रही है, न कि भारत अन्यत्र हुई प्रगति का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की भागीदारी, स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण और तेजी से विकसित हो रहे नवाचार इकोसिस्‍टम के समर्थन से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

एएमसीएचएएम इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में “भारत के डेटा केंद्रों को भविष्य के लिए तैयार करना: सशक्‍त आपूर्ति श्रृंखलाएं और अवसर” विषय पर विशेष सत्र के दौरान मुख्य भाषण देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब डेटा अर्थव्यवस्था को केवल एक तकनीकी परिवर्तन के रूप में नहीं देख सकता है, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसर के रूप में देख सकता है जो आने वाले दशकों में निवेश, रोजगार, ऊर्जा प्रणालियों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 1.5 गीगावॉट से बढ़कर लगभग 6.5 गीगावॉट होने का अनुमान है और इस निरंतर विस्तार से एआई सिस्टम, कूलिंग टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लगभग एक लाख इंजीनियरिंग रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि एआई, 6जी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से संचालित भारत का तेजी से विकसित हो रहा इकोसिस्टम वैश्विक निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रहा है।

डेटा केंद्रों को “अगली तेल अर्थव्यवस्था” बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डेटा नियंत्रण, डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और सुरक्षित प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम पर अधिकाधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर डेटा केंद्रों और कोलोकेशन बाजारों में उभरते अवसरों का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भारत को सरकार, निजी उद्योग, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रदाताओं, दूरसंचार नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा हितधारकों और अनुसंधान संस्थानों को शामिल करते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना होगा।

तेजी से बदलते वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज कई अग्रणी क्षेत्रों में अग्रणी देशों के बराबर तकनीकी प्रगति पर खड़ा है। उन्होंने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने निर्धारित समय के आधे से भी कम समय में अपने आधे से अधिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम संचार इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर स्थापित करने के लक्ष्य के मुकाबले भारत ने मात्र तीन वर्षों में 1,000 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर लिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों और रणनीतिक उद्योगों के लिए तैयार करने हेतु कई साहसिक और परिवर्तनकारी निर्णय लिए हैं। उन्होंने विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए दीर्घकालिक कर प्रोत्साहन, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन, सेमीकंडक्टर मिशन और अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इनमें से कई सुधार कुछ वर्ष पूर्व अकल्पनीय माने जाते थे, लेकिन भारत ने भविष्य के आर्थिक विकास और तकनीकी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार न केवल प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दे रही है, बल्कि उद्योग की भागीदारी को गति देने के लिए अनुकूल ढांचा भी तैयार कर रही है। निजी क्षेत्र के नवाचार और गहन तकनीकी अनुसंधान को समर्थन देने वाली हालिया पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक नए युग का साक्षी बन रहा है, जहां सरकार और उद्योग विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार के रूप में काम कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डेटा सेंटर क्षेत्र में भारत की भविष्य की वृद्धि सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं, टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत दूरसंचार कनेक्टिविटी, सब-सी केबल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, स्मार्ट कूलिंग समाधानों और सभी क्षेत्रों में समन्वित नीतिगत समर्थन पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि नीतिगत समर्थन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बीच देश की बढ़ती अनुकूलता ने एक ऐसा वातावरण बनाया है जहां भारत विश्व के सबसे भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर केंद्रों में से एक के रूप में उभर सकता है।