ब्रेकिंग न्यूज़
‘मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की एकता के लिए अमर प्रेरणा’ : पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। 

श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। 

डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’

कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।

उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न ‘दीपक’ यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  

यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।

भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  

75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।

डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। 

कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे। 

पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे आज होगें घोषित, सुबह 8 बजे से शुरु हुई वोटों गिनती

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में शुक्रवार को 8 नगर निगमों बठिंडा, अबोहर, बटाला, बरनाला, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और मोहाली के नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही 75 नगर कौंसिल, 20 नगर पंचायतों के नतीज भी आएंगे। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली में कांटे की टक्कर थी। 26 मई को इन चुनावों के लिए मतदान हुआ था।

आपको बता दें कि ईवीएम की जगह इस बार बैलेट पेपर से चुनाव कराया गया था। 35 लाख 45 हजार 567 वोटरों में से करीब 64% ने इस मतदान में हिस्सा लिया है। इस बार निकाय चुनाव में कुल 7555 उम्मीदवार मैदान में प्रत्याशी के तौर पर खड़े हुए। इसमें 1613 नगर निगम 5142 नगर कौंसिल और नगर पंचायत के लिए 800 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

मतगणना के लिए 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए

बता दें कि पंजाब में 26 मई को 8 नगर निगम, 75 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों समेत कुल 104 निकायों के लिए वोट डाले गए थे।मतगणना के लिए राज्यभर में 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी केंद्रों पर सुबह 8 बजे से गिनती शुरू हो गई है। आयोग का अनुमान है कि दोपहर 12 बजे तक अधिकांश निकायों के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे।

राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल

ये निकाय चुनाव राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल है। ऐसे में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए ये इलेक्शन काफी अहम है।उधर, विपक्षी दलों ने भी इस बार पूरी ताकत झोंकी. चुनाव प्रचार के दौरान जमकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर जुबानी जंग भी देखने को मिली। इस चुनाव में मुकाबला आम आदमी पार्टी की डबल इंजन सरकार की चाह और विपक्ष की घेराबंदी के बीच नजर आया।

रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए AAP के नेता

आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव परफॉर्मेंस टेस्ट से कम नहीं है क्योंकि करीब 7 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी ये भी देखना चाहती है कि उसके साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद शहरी वोटर्स के बीच पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत है। यही वजह है कि पार्टी के कई बड़े चेहरे रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए।

असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा- भारत विकास और आत्मविश्वास के नए दौर में

छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश आत्मविश्वास, सुरक्षा, सुशासन और विकास के नए युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को राष्ट्रसेवा और गरीब कल्याण को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और भारत की वैश्विक पहचान पहले से अधिक मजबूत हुई है।

साय ने अपने संदेश में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है। गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे कई अभियानों ने देश के विकास मॉडल को नई दिशा दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में दोबारा केंद्र की सत्ता संभाली और लगातार तीसरे कार्यकाल में भी उनकी सरकार विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…11-05-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में आज का दिन राजनीतिक हलचल, चुनावी बिगुल और प्रशासनिक कार्रवाइयों से भरा रहा। जहाँ एक ओर राज्य में निकाय चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, वहीं पंजाब बोर्ड के 10वीं के नतीजों ने छात्रों के चेहरों पर खुशी ला दी है। राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई का भाजपा में शामिल होना चर्चा का विषय बना रहा, तो वहीं पुलिस प्रशासन में अनुशासनहीनता और अपराध की कुछ दुखद घटनाओं ने भी सुर्खियां बटोरीं।

1. पंजाब में निकाय चुनाव का ऐलान; 26 मई को होगी वोटिंग पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने निकाय चुनावों की घोषणा कर दी है। राज्य के 8 नगर निगमों (मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट), 76 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों में 26 मई को वोट डाले जाएंगे। चुनाव के नतीजे 29 मई को आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 13 मई से शुरू होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

2. पंजाब बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जारी; लड़कियों ने मारी बाजी पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। इस साल फरीदकोट की हरleen शर्मा ने 650 में से 650 अंक हासिल कर राज्य में टॉप किया है। टॉप तीन स्थानों में से दो पर लड़कियों का कब्जा रहा। अमृतसर जिला 98.41% पास प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि लुधियाना का प्रदर्शन सबसे कम रहा।

3. CM भगवंत मान के भाई भाजपा में शामिल : मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह मान ने सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। ज्ञान सिंह इससे पहले आम आदमी पार्टी में लंबे समय तक सक्रिय रहे थे और संगरूर सांसद कार्यालय के प्रभारी भी रह चुके थे।

4. नशे की डिलीवरी लेते ASI सस्पेंड : फाजिल्का के अबोहर में एक ASI बलविंदर सिंह को नशीला पदार्थ (चिट्टा) खरीदने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। एक सोशल मीडिया वीडियो में वह डायल 112 की सरकारी गाड़ी में बैठकर दो युवकों से 500 रुपये देकर नशीली वस्तु लेते हुए दिखाई दे रहे थे। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

5. लुधियाना में निहंग बाणा उतारने पर युवक की पिटाई : लुधियाना के ढोलनवाल में एक युवक द्वारा निहंगों की पारंपरिक वेशभूषा (बाणा) उतारकर पायजामा-टीशर्ट पहनने पर निहंग जत्थे ने उसकी पिटाई कर दी। निहंगों का आरोप था कि युवक ने मर्यादा का उल्लंघन किया है। बाद में युवक ने माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने का आश्वासन दिया।

6. फरीदकोट में विवाहिता से गैंगरेप; वीडियो वायरल करने की धमकी फरीदकोट के गांव मल्ला में 20 वर्षीय विवाहिता के साथ दो युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपियों ने महिला की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे प्रताड़ित किया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

7. लुधियाना में पिता ने बेटे को मारी गोली, फिर खुद किया सुसाइड: लुधियाना में एक पूर्व फौजी सुरिंदर सिंह ने घरेलू विवाद के चलते अपने इकलौते बेटे गुरशरण सिंह की बीच सड़क पर गोलियां मारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद पिता ने खुद भी जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। विवाद की वजह पिता की दूसरी शादी करने की इच्छा बताई जा रही है।

8. क्रिकेटर अर्शदीप सिंह गर्लफ्रेंड के साथ नजर आए : भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह और मॉडल समरीन कौर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दोनों को चंडीगढ़ एयरपोर्ट और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की गलियों में एक साथ देखा गया है। अर्शदीप ने खुद भी सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें साझा की थीं, जिससे उनकी रिलेशनशिप को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

9. मनीला में पंजाबी महिला की गोली मारकर हत्या: फिलीपींस की राजधानी मनीला में फरीदकोट की सुखवीर कौर बराड़ की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सुखवीर कौर अपने पति के साथ वहां फाइनेंस का कारोबार करती थीं। जब वह कलेक्शन के लिए बाजार जा रही थीं, तब हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

10. टोल बचाने के लिए बने ‘नकली पुलिसवाले’, 3 युवक गिरफ्तार: पठानकोट पुलिस ने तीन ऐसे युवकों को पकड़ा है जो टोल टैक्स और पुलिस नाकों से बचने के लिए खुद को पंजाब पुलिस का कांस्टेबल बताते थे। आरोपियों के पास से एक फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है, जिसे वे असली बताकर इस्तेमाल कर रहे थे। तीनों युवक होशियारपुर के रहने वाले हैं।

आम आदमी पार्टी ने अपने 7 बागी राज्यसभा सांसदों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई; सदस्यता रद्द करने की मांग

पंजाब डेस्क: आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए अपने सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने सभापति से अपील की है कि इस मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए।

दलबदल की घटना: ये सातों सांसद 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी से विद्रोह कर भाजपा में शामिल हो गए थे।कानूनी आधार: पार्टी ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

विशेषज्ञों की सलाह: आप नेता संजय सिंह ने बताया कि पार्टी ने इस मुद्दे पर देश के प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचार्य जैसे संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है, जिनका मानना है कि इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

गंभीर आरोप: संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इन सांसदों को सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करके और डरा-धमकाकर तोड़ा गया है, जो पंजाब के जनादेश और देश के संविधान के साथ एक बड़ा धोखा है।

मुख्यमंत्री की पहल: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय भी मांगा था ताकि सांसदों को वापस बुलाने (recall) पर बात की जा सके, हालांकि संविधान में सांसदों को वापस बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।वर्तमान में कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है, क्योंकि कुछ का मानना है कि यदि दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं, तो विलय की अनुमति होती है। अब सभी की नजरें राज्यसभा सभापति के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

शाह, राजनाथ आज बंगाल में भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे

कोलकाता, दो मार्च (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार दोपहर को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने अभियान को तेज कर रही है।

शाह दोपहर दो बजे दक्षिण 24 परगना के रायदीघी से रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि सिंह लगभग उसी समय हावड़ा से यात्रा की शुरुआत करेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर दो बजे उत्तर 24 परगना के संदेशखालि से यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मालदा और इस्लामपुर से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की प्रदेश इकाई ने रविवार को कई जिलों से 5,000 किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर को तेज करना और जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियों का आकलन करना है।

रविवार को कूच बिहार से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए नवीन ने आगामी विधानसभा चुनावों में ‘परिवर्तन’ का आह्वान किया और कहा कि भाजपा अपना संदेश राज्य के हर बूथ और घर तक पहुंचाएगी।

सपा और कांग्रेस में भारत की आस्था के प्रति सम्मान नहीं : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 16 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आक्रांताओं का महिमामंडन और देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है तथा इन दलों की प्रवृत्ति यह दिखाती है कि उनमें ‘भारत की आस्था’ के प्रति कोई सम्मान नहीं है।

योगी ने विधान परिषद में अपने संबोधन में कहा कि ‘भारत की आस्था’ उत्तर प्रदेश में निवास करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रदेश अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है और विरासत से युक्त विकास ही एक उज्जवल भविष्य की आधारशिला होता है, लेकिन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अगर कोई उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता है, जिन्होंने भारत की आत्मा पर प्रहार किया और ‘भारत की आस्था’ को रौंदने का कार्य किया तो आज का नया उत्तर प्रदेश इसको स्वीकार करने को तैयार नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ”आक्रांताओं का महिमामंडन करना, देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है।”

योगी ने कहा, ”अगर हम आक्रांताओं का महिमामंडन कर रहे हैं और राष्ट्र के प्रतीकों यानी तिरंगे और राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं, तो एक प्रकार से हम संविधान की अवहेलना कर रहे हैं।”

उन्होंने सवाल किया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक तरफ संविधान के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं।

योगी ने आरोप लगाया, ‘‘ सपा और कांग्रेस के सदस्य धड़ल्ले से बोल रहे हैं कि वह वंदे मातरम के लिए नहीं खड़े होंगे। यानी हिंदुस्तान में रहोगे और भारत के राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय गीत को गाने में दिक्कत होती है? यह चीज नहीं चल सकती हैं।’’

उन्होंने कहा, ”मुझे आश्चर्य होता है कि समाजवादी पार्टी के लोग गाजी (सूफी संत सैयद सालार गाजी) के मेले का समर्थन करते हैं। गाजी भारत की परंपरा और संस्कृति को रौंदने के लिए आया था। श्रावस्ती के तत्कालीन नरेश महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने उसको रौंद डाला। सम्मान तो सुहेलदेव को मिलना चाहिए था और हमें आनंद की अनुभूति होती है कि हमारी ‘डबल इंजन’ की सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर बहराइच में उनका भव्य स्मारक बनाया है।”

योगी ने समाजवादी पार्टी पर लोकमाता अहिल्याबाई के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आजादी के बाद लोकमाता अहिल्याबाई को ‘डबल इंजन’ की सरकार ने सम्मान दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता अहिल्याबाई की एक भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है लेकिन समाजवादी पार्टी लोकमाता के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। यह लोग राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का विरोध करते हैं या उसी तरह के तत्वों को प्रश्रय देते हैं। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि इनके मन में भारत की आस्था के प्रति कोई सम्मान नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर अपने शासनकाल में जन्माष्टमी के आयोजन, कांवड़ यात्रा और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोकने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि कांग्रेस ने तो उच्चतम न्यायालय में कहा था कि राम और कृष्ण दोनों मिथक हैं।

योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने समय में राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थी और मंदिर निर्माण के मार्ग में बाधा पैदा करने के लिए अपने अधिवक्ता तैयार किए थे, लेकिन हिंदुस्तान में कोई भारत की आस्था को कैद करके नहीं रख सकता। वह आखिरकार विजयी हुई और अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया।

एप्सटीन फाइल’ के मामले पर स्पष्टीकरण दें प्रधानमंत्री: कांग्रेस
   नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका में जारी “एप्सटीन फाइल” में हुए “खुलासों” के बाद रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
 कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पोस्ट किया, “एप्सटीन फाइल के नए बैच की रिपोर्ट इस बात की बड़ी चेतावनी हैं कि किस तरह के लोगों की प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच है और वह विदेशी दबाव/हेरफेर के प्रति कितने संवेदनशील हैं।”
  उन्होंने कहा, “कांग्रेस मांग करती है कि प्रधानमंत्री स्वयं इन खुलासों पर सामने आकर सच बताएं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं।”
   कांग्रेस नेता ने सवाल किया, “क्या उन्होंने जेफ्री एप्सटीन से मुलाकात की? या उन्होंने किसी को उससे मिलने भेजा? एप्सटीन के साथ उनकी बातचीत में क्या-क्या शामिल था?”
  वेणुगोपाल ने दावा किया कि उतनी ही चिंताजनक एक रिपोर्ट यह भी है कि जब भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव हो रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन जैसे “दागी” लोगों की धुन पर “नाच-गा रहे” थे।
 उनका कहना है, “भारत के लोगों को जवाब चाहिए।”
 कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री को स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
  कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल किया कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव के आसपास प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन संपर्क में थे।
 भाजपा ने शनिवार को कांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप लगाया था और कहा था कि कांग्रेस ने जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी जांच फाइलों के एक सामान्य ईमेल अंश को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की है।
 विदेश मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से संबंधित जांच फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी के संदर्भ को शनिवार को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘‘एक दोषी अपराधी के तुच्छ चिंतन से अधिक कुछ नहीं’’ करार दिया।   
प्रधानमंत्री मोदी ने संत रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को संत रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि करुणा और न्याय पर उनके विचार सरकार के कल्याणकारी कदमों का मूल आधार है।
 प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन।’’
 मोदी ने कहा, ‘‘उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।’’
 प्रधानमंत्री संत रविदास के अनुयायियों, रविदासिया समुदाय के एक पवित्र स्थान डेरा सचखंड बल्लां का दौरा कर रहे हैं।
 उनका डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से भी बातचीत का कार्यक्रम है, जिन्हें हाल ही में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।