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पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे आज होगें घोषित, सुबह 8 बजे से शुरु हुई वोटों गिनती

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में शुक्रवार को 8 नगर निगमों बठिंडा, अबोहर, बटाला, बरनाला, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और मोहाली के नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही 75 नगर कौंसिल, 20 नगर पंचायतों के नतीज भी आएंगे। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली में कांटे की टक्कर थी। 26 मई को इन चुनावों के लिए मतदान हुआ था।

आपको बता दें कि ईवीएम की जगह इस बार बैलेट पेपर से चुनाव कराया गया था। 35 लाख 45 हजार 567 वोटरों में से करीब 64% ने इस मतदान में हिस्सा लिया है। इस बार निकाय चुनाव में कुल 7555 उम्मीदवार मैदान में प्रत्याशी के तौर पर खड़े हुए। इसमें 1613 नगर निगम 5142 नगर कौंसिल और नगर पंचायत के लिए 800 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

मतगणना के लिए 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए

बता दें कि पंजाब में 26 मई को 8 नगर निगम, 75 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों समेत कुल 104 निकायों के लिए वोट डाले गए थे।मतगणना के लिए राज्यभर में 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी केंद्रों पर सुबह 8 बजे से गिनती शुरू हो गई है। आयोग का अनुमान है कि दोपहर 12 बजे तक अधिकांश निकायों के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे।

राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल

ये निकाय चुनाव राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल है। ऐसे में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए ये इलेक्शन काफी अहम है।उधर, विपक्षी दलों ने भी इस बार पूरी ताकत झोंकी. चुनाव प्रचार के दौरान जमकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर जुबानी जंग भी देखने को मिली। इस चुनाव में मुकाबला आम आदमी पार्टी की डबल इंजन सरकार की चाह और विपक्ष की घेराबंदी के बीच नजर आया।

रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए AAP के नेता

आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव परफॉर्मेंस टेस्ट से कम नहीं है क्योंकि करीब 7 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी ये भी देखना चाहती है कि उसके साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद शहरी वोटर्स के बीच पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत है। यही वजह है कि पार्टी के कई बड़े चेहरे रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए।

असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा- भारत विकास और आत्मविश्वास के नए दौर में

छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश आत्मविश्वास, सुरक्षा, सुशासन और विकास के नए युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को राष्ट्रसेवा और गरीब कल्याण को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और भारत की वैश्विक पहचान पहले से अधिक मजबूत हुई है।

साय ने अपने संदेश में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है। गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे कई अभियानों ने देश के विकास मॉडल को नई दिशा दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में दोबारा केंद्र की सत्ता संभाली और लगातार तीसरे कार्यकाल में भी उनकी सरकार विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…11-05-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में आज का दिन राजनीतिक हलचल, चुनावी बिगुल और प्रशासनिक कार्रवाइयों से भरा रहा। जहाँ एक ओर राज्य में निकाय चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, वहीं पंजाब बोर्ड के 10वीं के नतीजों ने छात्रों के चेहरों पर खुशी ला दी है। राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई का भाजपा में शामिल होना चर्चा का विषय बना रहा, तो वहीं पुलिस प्रशासन में अनुशासनहीनता और अपराध की कुछ दुखद घटनाओं ने भी सुर्खियां बटोरीं।

1. पंजाब में निकाय चुनाव का ऐलान; 26 मई को होगी वोटिंग पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने निकाय चुनावों की घोषणा कर दी है। राज्य के 8 नगर निगमों (मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट), 76 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों में 26 मई को वोट डाले जाएंगे। चुनाव के नतीजे 29 मई को आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 13 मई से शुरू होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

2. पंजाब बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जारी; लड़कियों ने मारी बाजी पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। इस साल फरीदकोट की हरleen शर्मा ने 650 में से 650 अंक हासिल कर राज्य में टॉप किया है। टॉप तीन स्थानों में से दो पर लड़कियों का कब्जा रहा। अमृतसर जिला 98.41% पास प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि लुधियाना का प्रदर्शन सबसे कम रहा।

3. CM भगवंत मान के भाई भाजपा में शामिल : मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह मान ने सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। ज्ञान सिंह इससे पहले आम आदमी पार्टी में लंबे समय तक सक्रिय रहे थे और संगरूर सांसद कार्यालय के प्रभारी भी रह चुके थे।

4. नशे की डिलीवरी लेते ASI सस्पेंड : फाजिल्का के अबोहर में एक ASI बलविंदर सिंह को नशीला पदार्थ (चिट्टा) खरीदने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। एक सोशल मीडिया वीडियो में वह डायल 112 की सरकारी गाड़ी में बैठकर दो युवकों से 500 रुपये देकर नशीली वस्तु लेते हुए दिखाई दे रहे थे। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

5. लुधियाना में निहंग बाणा उतारने पर युवक की पिटाई : लुधियाना के ढोलनवाल में एक युवक द्वारा निहंगों की पारंपरिक वेशभूषा (बाणा) उतारकर पायजामा-टीशर्ट पहनने पर निहंग जत्थे ने उसकी पिटाई कर दी। निहंगों का आरोप था कि युवक ने मर्यादा का उल्लंघन किया है। बाद में युवक ने माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने का आश्वासन दिया।

6. फरीदकोट में विवाहिता से गैंगरेप; वीडियो वायरल करने की धमकी फरीदकोट के गांव मल्ला में 20 वर्षीय विवाहिता के साथ दो युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपियों ने महिला की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे प्रताड़ित किया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

7. लुधियाना में पिता ने बेटे को मारी गोली, फिर खुद किया सुसाइड: लुधियाना में एक पूर्व फौजी सुरिंदर सिंह ने घरेलू विवाद के चलते अपने इकलौते बेटे गुरशरण सिंह की बीच सड़क पर गोलियां मारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद पिता ने खुद भी जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। विवाद की वजह पिता की दूसरी शादी करने की इच्छा बताई जा रही है।

8. क्रिकेटर अर्शदीप सिंह गर्लफ्रेंड के साथ नजर आए : भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह और मॉडल समरीन कौर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दोनों को चंडीगढ़ एयरपोर्ट और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की गलियों में एक साथ देखा गया है। अर्शदीप ने खुद भी सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें साझा की थीं, जिससे उनकी रिलेशनशिप को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

9. मनीला में पंजाबी महिला की गोली मारकर हत्या: फिलीपींस की राजधानी मनीला में फरीदकोट की सुखवीर कौर बराड़ की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सुखवीर कौर अपने पति के साथ वहां फाइनेंस का कारोबार करती थीं। जब वह कलेक्शन के लिए बाजार जा रही थीं, तब हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

10. टोल बचाने के लिए बने ‘नकली पुलिसवाले’, 3 युवक गिरफ्तार: पठानकोट पुलिस ने तीन ऐसे युवकों को पकड़ा है जो टोल टैक्स और पुलिस नाकों से बचने के लिए खुद को पंजाब पुलिस का कांस्टेबल बताते थे। आरोपियों के पास से एक फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है, जिसे वे असली बताकर इस्तेमाल कर रहे थे। तीनों युवक होशियारपुर के रहने वाले हैं।

आम आदमी पार्टी ने अपने 7 बागी राज्यसभा सांसदों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई; सदस्यता रद्द करने की मांग

पंजाब डेस्क: आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए अपने सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने सभापति से अपील की है कि इस मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए।

दलबदल की घटना: ये सातों सांसद 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी से विद्रोह कर भाजपा में शामिल हो गए थे।कानूनी आधार: पार्टी ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

विशेषज्ञों की सलाह: आप नेता संजय सिंह ने बताया कि पार्टी ने इस मुद्दे पर देश के प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचार्य जैसे संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है, जिनका मानना है कि इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

गंभीर आरोप: संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इन सांसदों को सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करके और डरा-धमकाकर तोड़ा गया है, जो पंजाब के जनादेश और देश के संविधान के साथ एक बड़ा धोखा है।

मुख्यमंत्री की पहल: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय भी मांगा था ताकि सांसदों को वापस बुलाने (recall) पर बात की जा सके, हालांकि संविधान में सांसदों को वापस बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।वर्तमान में कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है, क्योंकि कुछ का मानना है कि यदि दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं, तो विलय की अनुमति होती है। अब सभी की नजरें राज्यसभा सभापति के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

शाह, राजनाथ आज बंगाल में भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे

कोलकाता, दो मार्च (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार दोपहर को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने अभियान को तेज कर रही है।

शाह दोपहर दो बजे दक्षिण 24 परगना के रायदीघी से रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि सिंह लगभग उसी समय हावड़ा से यात्रा की शुरुआत करेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर दो बजे उत्तर 24 परगना के संदेशखालि से यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मालदा और इस्लामपुर से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की प्रदेश इकाई ने रविवार को कई जिलों से 5,000 किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर को तेज करना और जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियों का आकलन करना है।

रविवार को कूच बिहार से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए नवीन ने आगामी विधानसभा चुनावों में ‘परिवर्तन’ का आह्वान किया और कहा कि भाजपा अपना संदेश राज्य के हर बूथ और घर तक पहुंचाएगी।

सपा और कांग्रेस में भारत की आस्था के प्रति सम्मान नहीं : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 16 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आक्रांताओं का महिमामंडन और देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है तथा इन दलों की प्रवृत्ति यह दिखाती है कि उनमें ‘भारत की आस्था’ के प्रति कोई सम्मान नहीं है।

योगी ने विधान परिषद में अपने संबोधन में कहा कि ‘भारत की आस्था’ उत्तर प्रदेश में निवास करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रदेश अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है और विरासत से युक्त विकास ही एक उज्जवल भविष्य की आधारशिला होता है, लेकिन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अगर कोई उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता है, जिन्होंने भारत की आत्मा पर प्रहार किया और ‘भारत की आस्था’ को रौंदने का कार्य किया तो आज का नया उत्तर प्रदेश इसको स्वीकार करने को तैयार नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ”आक्रांताओं का महिमामंडन करना, देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है।”

योगी ने कहा, ”अगर हम आक्रांताओं का महिमामंडन कर रहे हैं और राष्ट्र के प्रतीकों यानी तिरंगे और राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं, तो एक प्रकार से हम संविधान की अवहेलना कर रहे हैं।”

उन्होंने सवाल किया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक तरफ संविधान के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं।

योगी ने आरोप लगाया, ‘‘ सपा और कांग्रेस के सदस्य धड़ल्ले से बोल रहे हैं कि वह वंदे मातरम के लिए नहीं खड़े होंगे। यानी हिंदुस्तान में रहोगे और भारत के राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय गीत को गाने में दिक्कत होती है? यह चीज नहीं चल सकती हैं।’’

उन्होंने कहा, ”मुझे आश्चर्य होता है कि समाजवादी पार्टी के लोग गाजी (सूफी संत सैयद सालार गाजी) के मेले का समर्थन करते हैं। गाजी भारत की परंपरा और संस्कृति को रौंदने के लिए आया था। श्रावस्ती के तत्कालीन नरेश महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने उसको रौंद डाला। सम्मान तो सुहेलदेव को मिलना चाहिए था और हमें आनंद की अनुभूति होती है कि हमारी ‘डबल इंजन’ की सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर बहराइच में उनका भव्य स्मारक बनाया है।”

योगी ने समाजवादी पार्टी पर लोकमाता अहिल्याबाई के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आजादी के बाद लोकमाता अहिल्याबाई को ‘डबल इंजन’ की सरकार ने सम्मान दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता अहिल्याबाई की एक भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है लेकिन समाजवादी पार्टी लोकमाता के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। यह लोग राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का विरोध करते हैं या उसी तरह के तत्वों को प्रश्रय देते हैं। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि इनके मन में भारत की आस्था के प्रति कोई सम्मान नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर अपने शासनकाल में जन्माष्टमी के आयोजन, कांवड़ यात्रा और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोकने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि कांग्रेस ने तो उच्चतम न्यायालय में कहा था कि राम और कृष्ण दोनों मिथक हैं।

योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने समय में राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थी और मंदिर निर्माण के मार्ग में बाधा पैदा करने के लिए अपने अधिवक्ता तैयार किए थे, लेकिन हिंदुस्तान में कोई भारत की आस्था को कैद करके नहीं रख सकता। वह आखिरकार विजयी हुई और अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया।

एप्सटीन फाइल’ के मामले पर स्पष्टीकरण दें प्रधानमंत्री: कांग्रेस
   नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका में जारी “एप्सटीन फाइल” में हुए “खुलासों” के बाद रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
 कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पोस्ट किया, “एप्सटीन फाइल के नए बैच की रिपोर्ट इस बात की बड़ी चेतावनी हैं कि किस तरह के लोगों की प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच है और वह विदेशी दबाव/हेरफेर के प्रति कितने संवेदनशील हैं।”
  उन्होंने कहा, “कांग्रेस मांग करती है कि प्रधानमंत्री स्वयं इन खुलासों पर सामने आकर सच बताएं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं।”
   कांग्रेस नेता ने सवाल किया, “क्या उन्होंने जेफ्री एप्सटीन से मुलाकात की? या उन्होंने किसी को उससे मिलने भेजा? एप्सटीन के साथ उनकी बातचीत में क्या-क्या शामिल था?”
  वेणुगोपाल ने दावा किया कि उतनी ही चिंताजनक एक रिपोर्ट यह भी है कि जब भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव हो रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन जैसे “दागी” लोगों की धुन पर “नाच-गा रहे” थे।
 उनका कहना है, “भारत के लोगों को जवाब चाहिए।”
 कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री को स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
  कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल किया कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव के आसपास प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन संपर्क में थे।
 भाजपा ने शनिवार को कांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप लगाया था और कहा था कि कांग्रेस ने जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी जांच फाइलों के एक सामान्य ईमेल अंश को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की है।
 विदेश मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से संबंधित जांच फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी के संदर्भ को शनिवार को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘‘एक दोषी अपराधी के तुच्छ चिंतन से अधिक कुछ नहीं’’ करार दिया।   
प्रधानमंत्री मोदी ने संत रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को संत रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि करुणा और न्याय पर उनके विचार सरकार के कल्याणकारी कदमों का मूल आधार है।
 प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन।’’
 मोदी ने कहा, ‘‘उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।’’
 प्रधानमंत्री संत रविदास के अनुयायियों, रविदासिया समुदाय के एक पवित्र स्थान डेरा सचखंड बल्लां का दौरा कर रहे हैं।
 उनका डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से भी बातचीत का कार्यक्रम है, जिन्हें हाल ही में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
लोकसभा में ‘जी राम जी बिल’ पर 14 घंटे बहस: BJP ने किया सपोर्ट, विपक्ष बोला, यह ‘महात्मा गांधी का अपमान’

नेशनल डेस्क: बुधवार को लोकसभा में ‘विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन) अमेंडमेंट बिल’ पर 14 घंटे लंबी बहस हुई, जो सुबह 1.35 बजे तक चली। इस बहस में कुल 98 सांसदों ने हिस्सा लिया।जहां सत्ताधारी BJP ने इस बिल का पूरा सपोर्ट किया और इसे 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम बताया, वहीं विपक्ष (INDIA गठबंधन) ने इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की पुरजोर मांग की। कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज, गुरुवार को इस बहस का जवाब देंगे।

विपक्ष की आपत्ति: महात्मा गांधी का नाम हटाना ‘अपमान’विपक्ष मुख्य रूप से मौजूदा स्कीम (MGNREGA) से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर हमला कर रहा है। RSP नेता एनके प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि यह बिल केंद्र की मोदी सरकार के पतन की शुरुआत है, क्योंकि कोई भी किसी भी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने को स्वीकार नहीं करेगा। भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भी आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रपिता का अपमान कर रही है।कांग्रेस समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के कई सांसद आज, गुरुवार सुबह 10.15 बजे संसद परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के पास इस बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में कानून पास कर रही है और यह नया बिल राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ भी डालता है।

BJP का रुख: ‘भ्रष्टाचार’ रोकना ज़रूरीदूसरी ओर, अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे समेत BJP नेताओं ने बिल का ज़ोरदार समर्थन किया। BJP नेता निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस घबराई हुई है क्योंकि नए बिल से कड़े नियमों के कारण भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और वह महात्मा गांधी के नाम पर पैसा नहीं कमा पाएगी। बिल का समर्थन करते हुए, BJP MP जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रस्तावित कानून मौजूदा स्कीम में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी देता है। BJP MP बसवराज एस. बोम्मई ने कहा कि यह कानून विपक्ष को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।