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दिल्ली में प्रदूषण से जंग के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, 65% फंड देगा वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोग्राम का ऐलान किया है। इस प्रोग्राम के लिए 65 फीसदी धनराशि वर्ल्ड बैंक दे रही है और 35 फीसदी फंड दिल्ली सरकार से मिलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ टाइटल वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इसका मकसद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और पूरे शहर में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती करना है। तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर के बीच कोऑर्डिनेशन में सुधार के लिए 10 जुलाई को एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “वर्कशॉप में कई विभागों और एजेंसियों की भूमिकाओं को परिभाषित करेगी और परियोजना के प्रभावी और समय पर इम्प्लीमेंटेशन के लिए रोडमैप पर चर्चा होगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान को गति देगा, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के टारगेट्स में मदद करेगा और विकसित भारत 2047 उद्देश्य की मदद करेगा।

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल ‘सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक लंबे वक्त का इन्वेस्टमेंट’ है, जिसका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज्यादा टिकाऊ शहरी माहौल देना है। उन्होंने कहा कि यह पहल दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: हवा की क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।

पहले हिस्से के तहत, सरकार एक खास प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाएगी, एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करेगी, डेटा एनालिटिक्स क्षमताएं तैयार करेगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में इंडो-गैंगेटिक प्लेन के राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक प्लानिंग, जन-जागरूकता अभियान और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की योजना भी शामिल है।

दूसरा हिस्सा पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के लिए एडवांस्ड ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रोग्राम को पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, ट्रांसपोर्ट विभाग, पब्लिक वर्क्स विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर लागू करेंगे. आर्थिक मामलों का विभाग और वर्ल्ड बैंक भी इसमें मुख्य पार्टनर होंगे।

साफ हवा को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजधानी में हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक, समन्वित और टिकाऊ समाधानों के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का नया प्रोग्राम हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से निपटने और शहर में पब्लिक हेल्थ के उपायों को मजबूत करने के लंबे वक्त के प्रयास के लिए अलग-अलग विभागों के बीच फंडिंग, टेक्नोलॉजी और तालमेल को एक साथ लाएगा।

केंद्र का बड़ा एक्शन: 23 और व्यक्तियों को घोषित किया गया ‘आतंकवादी’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है. यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी आतंकी गतिविधि या उसके समर्थकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

मंत्रालय ने बताया कि ये व्यक्ति भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सहायता करने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने तथा आतंकवादियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं.

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और अन्य आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, ये कदम आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.

गृहमंत्रालय ने जिन 23 आतंकियों प्रतिबंधित किया है उनका विस्तृत डिटेल :

  • मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ्ती मसूद इलियास उर्फ मसूद इलियास उर्फ अबु मोहम्मद उर्फ एम. मसूद इलियास की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मौलाना मसूद अज़हर का विश्वासपात्र और कश्मीर में घुसपैठ का मुख्य समन्वयक है. वह सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने में सक्रिय है. उसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान में PDP कार्यालय के पास नाका पार्टी पर हुए हमले को अंजाम दिया था.
  • मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मनन उर्फ सज्जाद उर्फ हमज़ा उर्फ वाहिद ख़ान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है जो सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ कराता है. वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में शामिल रहा है. इसके अलावा, वह अयोध्या के आर.जे.बी. परिसर, नागपुर के आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों की टोह लेने में संलिप्त था.
  • मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान उर्फ अबू साद उर्फ साद जिमी की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह PoK में JeM का अमीर और सैन्य विंग का प्रमुख है. वह जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. वह मुज़फ्फराबाद में आतंकियों को जेहादी और सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए कैंप चलाता है.
  • हाफ़िज़ अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM) से संबंध रखता है. उसने नगरोटा सेना शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराई थी. उसने 1995/96 के दौरान अफगान युद्ध में भाग लिया था और वह आईएसआई (ISI) की मदद से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता है. वह JeM की शासी परिषद (शूरा) का सदस्य है.
  • अब्दुल्ला जिहादी उर्फ शाहनवाज़ उर्फ अल हिजामा की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मुफ्ती असगर खान का सह-षड्यंत्रकारी है और उत्तरी कश्मीर क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की सुविधा प्रदान करता है. उसने भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष फैलाने के प्रयास किए हैं. वह कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में स्थित कई लॉन्चिंग कैंपों का प्रबंधन संभालता था.
  • फ़िरदौस अहमद भट की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर है जो वर्ष 2018 में वैध दस्तावेजों के सहारे वाघा सीमा से पाकिस्तान चला गया था. वह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार विदेशी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित मार्ग का प्रबंधन करता है. इसके साथ ही, वह ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियार मुहैया कराने और दक्षिण कश्मीर के युवाओं को भड़काकर आतंक में भर्ती करने का काम करता है.
  • गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार उर्फ फरीद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखता है. उसने वर्ष 2001 से 2005 तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की थी. इसके बाद वह सितंबर 2008 में बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ. दिसंबर 2008 में उसे जम्मू से गिरफ्तार किया गया था और बाद में जुलाई 2019 में उसे पाकिस्तान वापस निर्वासित कर दिया गया.
  • हारून रशीद गनई उर्फ शुनू की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह मार्च 2018 में वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गया और वहां लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. वह कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकी रैंकों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति करता है.
  • बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – मुज़फ्फराबाद, PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंध रखता है. वह सीमा पार (पाकिस्तान/PoK) से बैठकर स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने की साजिश रचता है. इसके अलावा, वह कश्मीर घाटी में हथियारों, गोला-बारूद और रसद की अवैध आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल है.
  • आबिद कयूम लोन की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह फरवरी 2020 में अटारी चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान गया और वापस नहीं लौटा. वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने और लश्कर के लिए धन जुटाने का काम करता है. वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी करता है, जिससे प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है.
  • नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ अबू मनाज़िल की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – इस्लामाबाद, पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पार कर PoK चला गया था. उसने डोडा और किश्तवाड़ क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय युवाओं को भर्ती किया. वह ड्रोन का उपयोग करके सांबा और आर.एस. पुरा सेक्टर से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की खेप भेजने का मुख्य ऑपरेटर रहा है.
  • अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रौफ उर्फ हाफिज अब्दुर रौफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) / फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से संबंध रखता है. वह 1999 से लश्कर का एक वरिष्ठ नेता है और आतंकी हाफिज सईद की सीधी कमान के अधीन काम करता है. वह ‘फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’ (FIF) और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे धर्मार्थ संगठनों की आड़ में लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन और जनसमर्थन जुटाने का काम करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया है.
  • अशफाक अहमद उर्फ इशफाक अहमद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2000 में जैश में शामिल हुआ और बहावलपुर में ‘शुआबा हदीस’ और अल-रहमत ट्रस्ट (जैश का चैरिटी विंग) का प्रभारी है. उसे पाक-अधिकृत कश्मीर में जेहादी प्रशिक्षण मिला था. वह जनवरी 2016 के पठानकोट वायुसेना स्टेशन हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के ग्राहकों में से एक पाया गया था.
  • हाफिज खालिद वालीद उर्फ हाफिज खालिद नाइक उर्फ खालिद वालिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद है और वर्ष 2003 से लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है. वह जून 2016 में हुए पम्पोर हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ जवान शहीद हुए थे. अगस्त 2012 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था.
  • मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की उर्फ मौलाना इमदाद उर्फ इमदाद भाई उर्फ मौलाना इमददुल्लाह की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह जैश के कैदियों के विंग (शोबा-ए-असीरन) का अमीर और संगठन के कानूनी मामलों का प्रमुख है. वह मौलाना मसूद अज़हर और उसके डिप्टी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असघर का बेहद करीबी सहयोगी है. वह जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने में शामिल था.
  • मौलाना सैफुल्लाह खालिद उर्फ वलियुल उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ वाजिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से संबंध रखता है. वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग का महासचिव है और पहले मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) का अध्यक्ष रह चुका है. उसने लश्कर और जमात-उद-दावा के कई विंग्स (जैसे प्रचार विभाग, नियंत्रण और सुधार विंग) के प्रमुख के रूप में कार्य किया है. अप्रैल 2018 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी (SDGT) सूची में शामिल किया था.
  • मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ समामा इल्यास उर्फ वारिस अली की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्तमान में इस्लामाबाद (चट्टा बख्तावर) से लश्कर के ऑपरेशन कमांडर के रूप में काम कर रहा है. वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर घाटी में सक्रिय अन्य लश्कर कैडरों के साथ वित्तीय और साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) सहायता का समन्वय करता है. इसके खिलाफ श्रीनगर के CI कश्मीर पुलिस स्टेशन में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के अधीन मामला दर्ज है.
  • मौलाना यूसुफ ताईबी उर्फ मोहम्मद यूसुफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. यह LeT/JuD का एक केंद्रीय नेता है जो वर्तमान में संगठन के नियंत्रण और सुधार (दावत-ओ-इस्लाह) विंग से जुड़ा हुआ है. वह पूर्व में कराची स्थित LeT/JuD से संबद्ध संस्था ‘जामिया अल-दीरासत अल-इस्लामिया ट्रस्ट’ (JADIAT) का प्रभारी रह चुका है. वर्तमान में वह लाहौर के ‘अल-क़दसिया इस्लामिक सेंटर’ से जुड़ा है और पंजाब के सरगोधा मरकज़ में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश (खुतबा) देने का काम करता है.
  • ओवैस फारूज़ उर्फ ओवैस अहमद मीर उर्फ ओवैस फारूज़ मीर की राष्ट्रीयता भारत है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह अप्रैल 2018 में वैध भारतीय पासपोर्ट पर वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया और LeT के आतंकवादी रैंक में शामिल हो. जनवरी 2023 में उसके भाई फरज़ान फिरोज़ को श्रीनगर पुलिस ने 450 ग्राम हेरोइन (कीमत लगभग 9.95 लाख रुपये) और LeT के लेटर पैड के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ NIA कोर्ट, पुलवामा ने धारा 82 CrPC के अधीन उद्घोषणा आदेश जारी किया है.
  • क़ारी याक़ूब शेख उर्फ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख उर्फ याक़ूब शेख उर्फ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब उर्फ मोहम्मद याकूब की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (PMML) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह JuD का एक केंद्रीय नेता और उसकी केंद्रीय ‘दवाती टीम’ का सदस्य है. उसने 2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वह सऊदी अरब में लश्कर और JuD के लिए फंड इकट्ठा करने के मिशनों में प्रमुखता से शामिल रहा है. अगस्त 2012 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था.
  • राणा इफ्तिखार उर्फ राणा वलीद आतिफ उर्फ राणा इफ्तिखार हैदर उर्फ राणा इफ्तिखार अहमद उर्फ हैदर खान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह LeT प्रमुख हाफिज़ सईद का अत्यंत करीबी और उसके कश्मीर ऑपरेशन्स के वित्त (Finance) का मुख्य प्रबंधक है. वह मारे गए और भारतीय जेलों में बंद आतंकियों के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने वाले विंग ‘शोबा-ए-असीरन’ का प्रभारी है. वर्ष 1993 में जम्मू-कश्मीर के मेंढर सेक्टर में एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था और यह 2004 तक भारतीय जेल में बंद रहा.
  • वसीम नूर जाट उर्फ क़ारी वसीम की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. यह जैश का एक लॉन्चिंग कमांडर है जो कोटली व्यवस्था संभालता है. वह वर्ष 2021-22 के दौरान ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने की गतिविधियों में शामिल रहा है. उसे पहले अक्टूबर 2008 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वह 2012 से 2015 तक कोट भलवाल सेंट्रल जेल, जम्मू में बंद था, जहाँ से रिहा होने के बाद उसे पाकिस्तान निर्वासित कर दिया गया था.
  • मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ मुहांदीस उर्फ ज़ाकिर की राष्ट्रीयता पाकिस्तान (मूल रूप से भारतीय, वर्तमान में रावलपिंडी में सक्रिय) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / अल-कायदा / ISIS से संबंध रखता है. वह वर्ष 2012 के बेंगलुरु LeT साजिश मामले और 2013 के नांदेड़ LeT मामले का मुख्य मास्टरमाइंड और हैंडलर है, जिसमें दक्षिणपंथी राजनेताओं और पत्रकारों की लक्षित हत्याओं (Target Killings) की साजिश रची गई थी. वह वर्ष 2013 में आतंकी फरहतुल्लाह गोरी की मदद से पाकिस्तान भाग गया. जांच के अनुसार, वह रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले (2024), मंगलुरु कुकर विस्फोट और अल-हिंद ISIS मॉड्यूल मामले में एक ऑनलाइन हैंडलर के रूप में शामिल रहा है. वह सोशल मीडिया और यूट्यूब /टेलीग्राम चैनलों (जैसे ‘सवत अल हक’) पर राष्ट्र-विरोधी और जिहादी वीडियो के जरिए युवाओं को भर्ती करने का काम करता है.
ई-जागृति: डिजिटल भारत में उपभोक्ता न्याय के लिए नई परिकल्पना  

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

न्याय में देरी, लंबे समय से भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी निराशाओं में से एक रही है। चाहे वह खराब उत्पाद हो, ऑनलाइन खरीदी गई वस्तु का न मिल पाना हो, या अनुचित सेवा अनुबंध हो, शिकायत दर्ज करने से लेकर राहत पाने तक की प्रक्रिया अक्सर धीमी, बोझिल और डराने वाली रही है। हालांकि, भारत की उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था समय के साथ लगातार विकसित हुई है, लेकिन इसे समर्थन देने वाली प्रणाली तेज़ी से डिजिटल होती अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं के साथ कदम मिलाते हुए आगे नहीं बढ़ पायी।          

आज, उपभोक्ता ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ऑनलाइन बाज़ार में बड़े पैमाने पर लेन-देन करते हैं। उपभोक्ता न्याय की पारंपरिक व्यवस्था—जो भौतिक रूप से दाखिल करने, व्यक्ति द्वारा एक-एक कर जांच करने, अलग-अलग सॉफ़्टवेयर प्लेटफार्म का उपुओग करने और आमने-सामने की सुनवाई के इर्द-गिर्द बनायी गयी थी—धीरे-धीरे अपर्याप्त सिद्ध होने लगी। डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकार सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी सुधार ही पर्याप्त नहीं थे; इसके लिए न्याय देने के तरीके में पूरी तरह से बदलाव करने की जरूरत थी।

यहीं पर ई-जागृति एक महत्वपूर्ण बदलाव लाती है। यह सिर्फ़ एक तकनीक प्लेटफ़ॉर्म नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था के केंद्र में पहुंच, पारदर्शिता और दक्षता को रखकर उपभोक्ता विवाद समाधान के तरीके की नए सिरे से परिकल्पना करने का प्रयास है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में एक आधुनिक फ्रेमवर्क की परिकल्पना की गयी थी, जो बाज़ार की उभरती वास्तविकताओं के अनुरूप काम करने में सक्षम हो। हालाँकि, कानून की भावना को प्रभावी सार्वजनिक सेवा में बदलने के लिए कई अलग-अलग पुरानी प्रणालियों को हटाकर एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम को अपनाने की जरूरत थी। पुराने प्लेटफॉर्म में एकरूपता की कमी, पुरानी संरचना, एक-दूसरे से जुड़कर काम करने की सीमित सुविधा और भौतिक प्रक्रियाओं पर अधिक निर्भरता जैसी समस्याएँ थीं। कई उपभोक्ताओं के लिए—विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और अनिवासी भारतीय —न्याय पाने की प्रक्रिया की लागत अक्सर एक बड़ी बाधा बन जाती थी।

ई- जागृति उपभोक्ता शिकायत की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर इन संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करती है। ओटीपी आधारित पंजीकरण और ऑनलाइन दाखिल करने से लेकर डिजिटल जाँच, इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, वर्चुअल सुनवाई, बहुभाषी आदेश और वास्तविक समय में मामले की निगरानी तक, यह प्लेटफ़ॉर्म नागरिकों को किसी भौगोलिक या प्रक्रियात्मक जटिलता की बाधा के बिना न्याय पाने में मदद करता है।

ऐसे बदलाव का महत्व केवल सुविधा तक ही सीमित नहीं है। यह नागरिकों और सार्वजनिक संस्थानों के बीच रिश्ते को मौलिक रूप से बदल देता है। डिजिटल वर्कफ़्लो कागजी काम को कम करते हैं, अलग-अलग अधिकार-क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को एक जैसा बनाते हैं, विवेकाधीन देरी को कम करते हैं और पारदर्शिता बढ़ाते हैं। मामलों की स्वचालित सूची, ऑनलाइन डैशबोर्ड और तुरंत सूचना सुनिश्चित करती है कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता को हर जानकारी मिलती रहे, जिससे प्रणाली में जनता का भरोसा मजबूत होता है।

इस प्लेटफ़ॉर्म ने न्याय को और अधिक समावेशी बनाने के लिए उभरती तकनीकों को भी अपनाया है। एआई-सहायता प्राप्त मामला विश्लेषण, वॉइस-टू-टेक्स्ट कार्यप्रणाली, टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा, बहुभाषी इंटरफेस, उन्नत सर्च क्षमता और पहुँच प्राप्त करने के उपकरण जैसी विशेषताओं के जरिए समाज के विभिन्न हिस्सों से अधिक लोगों की भागीदारी संभव हुई है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और राज्य उपभोक्ता आयोगों में हाइब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का देश भर में लागू होना भी उतना ही अहम रहा है, जिससे वर्चुअल सुनवाई उपभोक्ता न्याय दिलाने की प्रक्रिया का एक ज़रूरी हिस्सा बन गई है। दूरदराज के जिलों या विदेशों में रहने वाले नागरिकों के लिए, इससे कानूनी लड़ाई की वित्तीय और लॉजिस्टिक लागत दोनों काफी हद तक कम हो गई हैं।

फिर भी, इस स्तर के तकनीकी बदलाव में चुनौतियाँ हमेशा मौजूद रहती हैं। डिजिटल सुधार अक्सर संस्थानों को स्थापित प्रथाओं पर फिर से सोचने के लिए मजबूर करते हैं और उपयोगकर्ताओं को अपरिचित प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ई-जागृति की शुरुआत के दौरान, डेटा स्थानान्तरण, भुगतान गेटवे एकीकरण, इंटरफेस की उपयोगिता और लंबे समय से चल रहे मैनुअल प्रक्रियाओं में बदलाव को लेकर चिंताएँ उभरीं। कानूनी पेशेवरों और अन्य हितधारकों के कुछ हिस्सों ने नई डिजिटल व्यवस्था को अपनाते समय कुछ चिंताएं जाहिर कीं।

इन चिंताओं को बाधा मानने की बजाय, कार्यान्वयन प्रक्रिया ने उन्हें निरंतर सुधार के मौकों के तौर पर देखा। उपभोक्ता आयोगों, कानूनी पेशेवरों, तकनीकी विशेषज्ञों और राज्य सरकारों के साथ व्यापक परामर्श से इस प्लेटफ़ॉर्म को बेहतर बनाने में मदद मिली। नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रम, क्षेत्रीय कार्यशालाएं, वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र, साप्ताहिक शिकायत निवारण संवाद और लगातार तकनीकी समर्थन से हितधारकों का नई प्रणाली में धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा। इस अनुभव से एक महत्वपूर्ण सबक मिला: डिजिटल परिवर्तन केवल इसलिए सफल नहीं होता कि तकनीक लागू की गई है, बल्कि इसलिए सफल होता है, क्योंकि संस्थाएं उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया के प्रति संवेदनशील रहती हैं और निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध रहती हैं।

शुरुआती परिणाम उत्साहवर्धक हैं। थोड़े ही समय में, ई-जागृति ने लाखों उपभोक्ताओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ला दिया है, दो लाख से अधिक मामलों के दाखिले की सुविधा दी है, उच्च समाधान दर हासिल की है और साठ से अधिक देशों के उपभोक्ताओं को भारत के उपभोक्ता विवाद निवारण व्यवस्था तक पहुंचने में सक्षम बनाया है। मानकीकृत डिजिटल वर्कफ़्लो ने दक्षता में सुधार किया है और उन प्रक्रियात्मक अड़चनों को कम किया है, जो पहले की प्रणाली की विशेषता थी।   

राष्ट्रीय ई-शासन पुरस्कार 2026 में रजत पुरस्कार के माध्यम से मान्यता, न केवल एक संस्थागत उपलब्धि के रूप में, बल्कि सरकारी प्रक्रिया की सफल पुनः डिज़ाइन की स्वीकृति के रूप में महत्वपूर्ण है। यह पुरस्कार इस बात को मान्यता देता है कि सार्थक डिजिटल शासन केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को कंप्यूटरीकृत करने के बारे में नहीं है; यह उन्हें सरल, तेज़ और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए फिर से डिज़ाइन करने के बारे में है।

भारत की व्यापक डिजिटल इंडिया यात्रा ने दिखाया है कि जब मजबूत संस्थागत प्रतिबद्धता हो, तो तकनीक सार्वजनिक सेवा अदायगी को बदल सकती है। डिजिटल पहचान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से लेकर ऑनलाइन कराधान और स्वास्थ्य देखभाल प्लेटफार्मों तक, देश ने शासन में तकनीक की भूमिका का लगातार विस्तार किया है। अब उपभोक्ता न्याय भी उन क्षेत्रों की सूची में शामिल हो गया है, जिसमें संरचनात्मक डिजिटल सुधार हो रहे हैं। 

‘ई-जागृति’ की सफलता भविष्य के शासन सुधारों के लिए भी महत्वपूर्ण सबक देती है। डिजिटल प्लेटफार्मों को संस्थाओं के बजाय नागरिकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए। पहुंच को बाद में सोची जाने वाली बात के बजाय एक मूल सिद्धांत के रूप में लिया जाना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को निष्पक्षता से समझौता किए बिना पारदर्शिता और कुशलता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सबसे बढ़कर, तकनीक को न्याय को सरल बनाना चाहिए, न कि उसमें जटिलता की नई परतें जोड़नी चाहिए।

जैसे-जैसे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था बढ़ती जा रही है, उपभोक्ता का विश्वास उन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर अधिक निर्भर करेगा, जो उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करती हैं। प्रभावी विवाद समाधान अब केवल एक प्रशासनिक उद्देश्य नहीं रहा; यह एक आर्थिक आवश्यकता बन गया है, जो बाजारों में भरोसे को मजबूत करता है और जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं को बढ़ावा देता है।

ई-जागृति प्लेटफार्म दिखाता है कि सोच-समझकर किया गया डिजिटल बदलाव कानूनी इरादे और नागरिक अनुभव के अंतर को कम कर सकता है। उपभोक्ता न्याय को तेज़, अधिक पारदर्शी और अधिक समावेशी बनाकर, यह एक सरल लेकिन शक्तिशाली सिद्धांत को मजबूत करता है—कि डिजिटल लोकतंत्र में, न्याय तक पहुंच भी सेवा तक पहुंच जितनी ही सहज होनी चाहिए। यही शायद इक्कीसवीं सदी में “ग्राहक देवो भव” का सबसे सार्थक रूप है।  

(लेखक केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं)

Parliament Monsoon Session : 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। संसदीय परिपाटी के मुताबिक मानसून सत्र दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी कराई जाएगी। करीब तीन सप्ताह के इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान में क्या?

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर लिखा, भारत सरकार की अनुशंसा पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 में संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की स्वीकृति दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।

किन मुद्दों पर हंगामा कर सकता है विपक्ष?

बीते दिनों मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का चढ़ावा चोरी विवाद जैसे कई मामले लगातार सुर्खियों में है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान हंगामा होने की आशंका है। इन मामलों के अलावा तृणमूल के दो फाड़ होने का मुद्दा भी चर्चा में है। नजरें स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। कांग्रेस अंडमान की ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी लगातार हमलावर है। ऐसे में हंगामे और नारेबाजी से सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है।

बजट सत्र में कितना कामकाज हुआ?

इससे पहले संसद का बजट सत्र विगत 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था। 28 जनवरी, 2026 को शुरू हुए संसद के बजट सत्र में कई अहम विधेयक पारित कराए गए थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के मुताबिक सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं। लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा कराई गई थी। 

बजट सत्र के दौरान कौन से विधेयक पारित हुए थे?

  • औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
  • वित्त विधेयक, 2026
  • दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026
  • जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026

93 प्रतिशत उत्पादकता, चर्चा में कितने सदस्यों ने भाग लिया?

सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने बताया था कि सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पुरःस्थापित किए गए और 09 विधेयक पारित किए गए। 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026; संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026; और परिसीमन विधेयक, 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट तक चर्चा हुई। इस चर्चा में 131 सदस्यों ने भाग लिया था। कुल कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही थी।

पीएम मोदी ने पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन किया

राजस्थान / सत्ता संदेश

राजस्थान के औद्योगिक इतिहास में आज का दिन एक नए युग की शुरुआत के रूप में हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बालोतरा जिले के पचपदरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड को राष्ट्र को समर्पित किया. करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह परियोजना केवल राजस्थान की पहली रिफाइनरी नहीं है, बल्कि देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है. प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी की महिला कर्मचारियों से की बात उनके साथ फोटो भी खिंचवाया. प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी कंट्रोल रूम में जाकर पूरी तकनीक की जानकारी भी कर्मचारियों से ली।

राजस्थान रिफाइनरी का लोकार्पण करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान की इस धरती से भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है. ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी. आज का दिन साक्षी है कि बीजेपी सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ केवल शिलान्यास करके नहीं छोड़ती है. हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं. दो महीने पहले यहां जो हादसा हुआ, उसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना परिश्रम की परिकाष्ठा का उदाहरण है. नया भारत अपने संकल्प से न पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।

तेल संकट पर भारत के प्रयास पड़े भारीः उन्होंने तेल का संकट का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है, इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, 21वीं सदी के सबसे ऊर्जा संकट पर भारत के प्रयास भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए. संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई. भारत के संसाधनों का सही प्रयोग किया, तब जाकर भारत संकट से ऊबर पाया है. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी तब देश में दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो प्रयास, धैर्य, नीतिगत, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम अभूतपूर्व है।

जनता पर भार नहीं पड़ने दियाः पीएम ने कहा कि एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ने दिया, जो हालात थे उसमें घरेलू गैस की कीमत दो हजार तक जा सकती थी. रसोई गैस के विषय में हम सभी जानते हैं कि हमारी जरूरतों की 60 फीसदी एलपीजी दूसरे देशों से आयात होती है. इसमें से 90 प्रतिशत एलपीजी गल्फ देशों से आ रही थी, होर्मुज होते हुए. अचानत उत्पन्न हुई संकट ने उस सप्लाई को बंद कर दिया, लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है. हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर काम किया. तीन महीनों के भीतर एलपीजी के उत्पादन की बढ़ोतरी हुई, पहले 35 हजार मेट्रिक टन उत्पादन होता था, वो बढ़कर 54 हजार मेट्रिक टन हो गया. रसोई गैस का पूरा लोड एलपीजी पर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा, पीएनजी गैस कनेक्शन का अभियान चलाया गया. बहुत कम समय में 11 लाख कनेक्शन पीएनजी से जोड़ दिया गया. घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया. हमारे यहां अभी भी घरेलू सिलेंडर 950 रुपए से कम में दिया जा रहा है।

तेल संकट पर भारत के प्रयास पड़े भारीः उन्होंने तेल का संकट का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है, इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, 21वीं सदी के सबसे ऊर्जा संकट पर भारत के प्रयास भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए. संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई. भारत के संसाधनों का सही प्रयोग किया, तब जाकर भारत संकट से ऊबर पाया है. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी तब देश में दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो प्रयास, धैर्य, नीतिगत, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम अभूतपूर्व है।

जनता पर भार नहीं पड़ने दियाः पीएम ने कहा कि एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ने दिया, जो हालात थे उसमें घरेलू गैस की कीमत दो हजार तक जा सकती थी. रसोई गैस के विषय में हम सभी जानते हैं कि हमारी जरूरतों की 60 फीसदी एलपीजी दूसरे देशों से आयात होती है. इसमें से 90 प्रतिशत एलपीजी गल्फ देशों से आ रही थी, होर्मुज होते हुए. अचानत उत्पन्न हुई संकट ने उस सप्लाई को बंद कर दिया, लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है. हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर काम किया. तीन महीनों के भीतर एलपीजी के उत्पादन की बढ़ोतरी हुई, पहले 35 हजार मेट्रिक टन उत्पादन होता था, वो बढ़कर 54 हजार मेट्रिक टन हो गया. रसोई गैस का पूरा लोड एलपीजी पर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा, पीएनजी गैस कनेक्शन का अभियान चलाया गया. बहुत कम समय में 11 लाख कनेक्शन पीएनजी से जोड़ दिया गया. घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया. हमारे यहां अभी भी घरेलू सिलेंडर 950 रुपए से कम में दिया जा रहा है।

कांग्रेस पर साधा निशानाः पीएम ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए काम नहीं किया, बीजेपी हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है. हमने जब गुजरात में पानी संकट पर काम किया तो उस समय बिना किसी वाद-विवाद गुजरात से नर्मदा का पानी राजस्थान के साथ साझा किया. आज राजस्थान और हरियाणा में बीजेपी सरकार है तो आपसी सहमति से समाधान निकाले गए. दोनों राज्य मिलकर शेखावटी को पानी पिलाएंगे. इसका लाभ सीकर, झुंझुनू, चूरू समेत आसपास के क्षेत्र को लाभ मिलने वाला है. इस पर 34 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

जिसका शिलान्यास करते हैं उसका लोकार्पण भी करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2015 में हमने रिफाइनरी के लिए एमओयू साइन किया था, लेकिन 2018 से 2023 तक कांग्रेस सरकार होने से असहयोग होने से काम ठप हो गया। राजस्थान में डबल इंजन की सरकार आई तो काम तेजी से बढ़ा, आज इसका लोकार्पण कर रहे हैं। ‘मेरी कार्यशैली है कि जिसका शिलान्यास करते हैं, उसका लोकार्पण भी करते हैं। इस दौरान यूरिया का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध से यूरिया की कीमत बढ़ने के बावजूद किसानों को 300 रुपए में खाद देते रहे।

सरकार ने प्याज की खरीद कीमत 13% बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए प्याज की खरीद मूल्य में 13 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। संशोधित खरीद मूल्य 4 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है। सरकार के मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए NAFED और NCCF के माध्यम से प्याज की खरीद जारी है। संशोधित खरीद मूल्य से प्याज किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा और साथ ही बफर खरीद प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। उत्पादन अनुमानों को देखते हुए, फिलहाल प्याज की कुल उपलब्धता चिंता का विषय नहीं है, हालांकि कीमतों में सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव के अनुरूप मामूली वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का भंडार पर्याप्त है। फिलहाल, भंडारित प्याज की कमी के कोई संकेत नहीं हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर दैनिक मंडी आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है, जबकि महाराष्ट्र में यह आवक 30,000 मीट्रिक टन से अधिक है, और औसत खुदरा मूल्य लगभग 18 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेहतर गुणवत्ता वाला स्टॉक भंडार में बना हुआ है और मंदी के दौर में इसके जारी होने की उम्मीद है। अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 31 रुपये प्रति किलोग्राम है।

मानसून के आगमन में देरी और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा के कारण व्यापारियों के एक वर्ग द्वारा सट्टेबाजी के आधार पर खरीदारी की जा रही है, हालांकि प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों में मौजूदा कीमतों पर कोई खास मांग नहीं है। उपभोक्ता बाजारों में सकारात्मक माहौल के बावजूद, नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों जैसे उत्पादन केंद्रों में सट्टेबाजी की गतिविधियां देखी जा रही हैं, जो मजबूत वास्तविक मांग के बजाय भविष्य में बाजार में सुधार की उम्मीदों पर आधारित हैं।

प्याज का निर्यात सामान्य है, जून 2026 के दौरान लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ। हालांकि, व्यापारियों को उम्मीद है कि प्याज के निर्यात की गति थोड़े समय के लिए धीमी हो सकती है, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि पाकिस्तान और चीन से ताजा फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व जैसे प्रमुख निर्यात स्थलों में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हैं।

जहां महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ की बुवाई में लगभग 15 दिन की देरी दर्ज की गई है, वहीं कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे क्षेत्रों में बुवाई की प्रगति सामान्य स्तर से लगभग 60 प्रतिशत होने का अनुमान है।

जोधपुर को मिला नया एयरपोर्ट टर्मिनल, पीएम मोदी ने लॉन्च की संशोधित ‘उड़ान’ योजना

राजस्थान / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।

नए टर्मिनल का किया निरीक्षण

प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

480 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ टर्मिनल

यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

राजस्थान की विरासत और हरित निर्माण पर विशेष जोर

राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

संशोधित ‘उड़ान’ योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए का प्रावधान

पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित होंगे

योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। 

Uttarakhand : QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी परीक्षा केंद्रों की लोकेशन, UKPSC ने तैयार किया सिस्टम

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं को अब दर-दर भटककर परीक्षा केंद्र तलाशने की जरूरत नहीं होगी। एडमिट कार्ड पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उन्हें परीक्षा केंद्र की लोकेशन मिल जाएगी। वहीं, दोनों आयोग के लिए परीक्षा केंद्र का चयन करना चुटकियों का काम होगा। इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग ने परीक्षा केंद्र प्रबंधन सिस्टम तैयार किया है।

आयोग ने जो सिस्टम तैयार किया है, उसमें परीक्षा केंद्रों का एक बार पोर्टल पर पंजीकरण होगा। प्रत्येक परीक्षा के लिए दोनों आयोग को बार-बार पंजीकरण करने की जरूरत नहीं होगी। इन केंद्रों का वर्गीकरण बैठक क्षमता, तकनीकी सुविधाओं एवं उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाएगा। इससे दोनों आयोग परीक्षा की आवश्यकता व संवेदनशीलता के हिसाब से परीक्षा केंद्रों का चयन कर सकेंगे।

उत्तराखंड में 8.39 लाख वोट काटने की तैयारी, Pre SIR में पहले ही कट चुके 4.53 वोट

किस जिले में कितने परीक्षा केंद्र पंजीकृत

आयोग के परीक्षा केंद्र प्रबंधन सिस्टम के तहत प्रदेशभर से 200 परीक्षा केंद्र अब तक पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें अल्मोड़ा के दो, बागेश्वर के नौ, चमोली के 24, चंपावत के 33, देहरादून के 31, हरिद्वार के आठ, नैनीताल के 17, पौड़ी के 21, पिथौरागढ़ के छह, रुद्रप्रयाग के 13, टिहरी का एक, ऊधमसिंह नगर के 19 और उत्तरकाशी के 16 परीक्षा केंद्र शामिल हैं। अभी और केंद्र इसमें पंजीकृत होने बाकी हैं।

इस डिजिटल प्रणाली से कागजी कार्रवाई में कमी आएगी। परीक्षा केंद्रों के साथ समन्वय बेहतर होगा। परीक्षा संचालन अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी होगा। परीक्षा केंद्रों के चयन में आयोग की ऊर्जा बचेगी। -अशोक कुमार पांडेय, सचिव, राज्य लोक सेवा आयोग

उत्तराखंड में 8.39 लाख वोट काटने की तैयारी, Pre SIR में पहले ही कट चुके 4.53 वोट

देहरादून / सत्ता संदेश

चुनाव आयोग की प्री एसआईआर में मृत, शिफ्ट या अनुपस्थित होने के चलते 4.53 लाख मतदाताओं के वोट कटने के बाद अब एसआईआर में 8.39 लाख वोट और काटने की तैयारी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये भी ऐसे लोगों के वोट हैं, जो या तो मर चुके हैं या फिर कहीं शिफ्ट हो चुके हैं। ऐसे भी हैं जो कि दोहरे मतदाता थे या पते पर मौजूद नहीं मिले। 14 जुलाई को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से इनको अलग कर दिया जाएगा।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ.विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि राज्य में एक जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर आठ जून से सात जुलाई तक प्रदेश में गणनापत्रों के वितरण और डिजिटाइज का कार्य पूरा होना है। 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं के सापेक्ष 70 लाख 98 हजार 501 मतदाताओं के फार्म डिजिटाइज कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 लाख 39 हजार 486 मतदाता अनकलेक्टेड श्रेणी में शामिल हैं। जिसके तहत 1 लाख 23 हजार 836 मृत, 4 लाख 77 हजार 148 स्थायी रूप से शिफ्ट, 61,764 पहले से पंजीकृत, 1 लाख 68 हजार 259 अनुपस्थित और 8479 मतदाता अन्य कारणों से शामिल हैं।

14 जुलाई को वोटर लिस्ट से अलग कर दिए जाएंगे

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा। जो भी मतदाता अनकलेक्टेड श्रेणी के हैं, वे इस मतदाता सूची से अलग कर दिए जाएंगे। उनकी अलग से सूची राजनैतिक दलों व अन्य जगहों पर उपलब्ध कराई जाएगी। 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच दावे एवं आपत्तियों को दर्ज करने का समय दिया गया है। 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक नोटिस की अवधि एवं दावे आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर को किया जाएगा। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों से शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स नियुक्त करने की अपील की। 11,733 पोलिंग बूथ के सापेक्ष 23,102 बीएलए तैनात हैं।

4.53 लाख मतदाता प्री एसआईआर में कटे

उत्तराखंड में पिछले साल छह जनवरी को जारी मतदाता सूची में 84,29,459 मतदाता थे। इस साल जनवरी में नई सूची जारी नहीं हुई। इसके बजाए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एएसडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक) सूची पर काम किया। नतीजतन प्री एसआईआर के बाद जो डाटा सामने आया, उसमें प्रदेश में 4,53,459 मतदाता हटा दिए गए थे। कुल संख्या करीब 79 लाख की बची थी। अब इसमें से करीब आठ लाख मतदाता और कटने के बाद संख्या 70 लाख तक बचेगी।

6 जुलाई से 3 देशों के दौरे पर जाएंगे PM मोदी, राष्ट्रपति प्रबोवो ने दिया इंडोनेशिया आने का न्यौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। दौरे के दौरान रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, रक्षा, साइबर सुरक्षा, नई तकनीक, सांस्कृतिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नई मजबूती देने पर फोकस रहेगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का उद्देश्य हिंद महासागर के पूर्वी क्षेत्र में भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है।

साथ ही सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, व्यापार, साइबर सुरक्षा, नई तकनीकों और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नई धार देना भी है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी  6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे।

वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी होने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित भी करेंगे। इसके अलावा वह योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। भारत और इंडोनेशिया इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण के लिए संयुक्त योजना पर भी काम कर रहे हैं। 

ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे

8 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचेंगे। यहां वह प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बैठक में साइबर सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने और उभरती तकनीकों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

40 वर्षों में भारतीय पीएम की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी

10 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ऑकलैंड पहुंचेंगे। पिछले करीब 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक में व्यापार, वाणिज्य और रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों, खेल जगत की हस्तियों और भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।