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भारतीय नौसेना का ₹1 लाख करोड़ मेगा प्लान, 16 स्वदेशी युद्धपोतों से बढ़ेगी समुद्री ताकत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना आने वाले सालों में अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी कर रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक नौसेना करीब 1 लाख करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट 15C, 17B, 18A के तहत 16 नए स्वदेशी युद्दपोत बनाने की योजना आगे बढ़ रही है। इनमें नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, स्टेल्थ फ्रिगेट और विशाल सरफेस कॉम्बैटेंट शामिल होंगे।

क्यों जरूरी है यह मेगा प्रोजेक्ट?

पिछले एक दशक में चीन ने अपनी नौसेना का तेजी से विस्तार किया है. चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी भी लगातार बढ़ा रहा है. चीनी युद्धपोत, पनडुब्बियां और सर्विलांस जहाज नियमित रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में दिखाई देते हैं. जिबूती में उसका पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा पहले से सक्रिय है, जबकि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा और हिंद महासागर के अन्य बंदरगाहों में चीन का बढ़ता निवेश भारत के लिए रणनीतिक चुनौती माना जाता है.

ऐसे में भारतीय नौसेना के लिए सिर्फ अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखना पर्याप्त नहीं है. उसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अधिक आधुनिक, लंबी दूरी तक ऑपरेट करने वाले और मल्टी लेवल के युद्धपोतों की जरूरत है.

3 मेगा प्रोजेक्ट, तीन बड़ी ताकत

#प्रोजेक्ट-15C

इस परियोजना के तहत 50,000 करोड़ की लागत से 4 नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर बनाए जाएंगे. इन युद्धपोतों में अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता होगी. ये मौजूदा कोलकाता और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर से भी ज्यादा आधुनिक होंगे.

#प्रोजेक्ट-17B

इस परियोजना में 40,000 करोड़ को लागत से 6 स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जाएंगे. इनमें से 3 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) बनाएंगे. स्टेल्थ तकनीक के कारण दुश्मन के रडार पर इनकी पहचान करना कठिन होगा. इनका इस्तेमाल एस्कॉर्ट मिशन, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन, एयर डिफेंस और समुद्री निगरानी जैसे कई अभियानों में किया जाएगा.

#प्रोजेक्ट-18A

ये भारत का सबसे महत्वाकांक्षी सरफेस वॉरशिप प्रोजेक्ट माना जा रहा है. इसके तहत 6 विशाल युद्धपोत बनाए जाएंगे, जिनका वजन 14 से 15 हजार टन होगा. ये भारत में अब तक बने सबसे बड़े सतही युद्धपोतों में शामिल होंगे. इनमें लंबी दूरी तक ऑपरेशन, मजबूत एयर एवं मिसाइल डिफेंस, आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और भविष्य के हथियारों को शामिल करने की क्षमता होगी.

चीन के खिलाफ भारत की समुद्री रणनीति

भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ हिमालयी सीमा तक सीमित नहीं है. आने वाले सालों में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक इस प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बनेंगे. भारत के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार (मात्रा के आधार पर) और बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात समुद्री मार्गों से होते हैं. यदि हिंद महासागर में किसी प्रतिद्वंद्वी देश का दबदबा बढ़ता है तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.

चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत के लिए चिंता का विषय रहा है. ऐसे में नए युद्धपोत भारतीय नौसेना को समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, लंबी दूरी की तैनाती, कैरियर बैटल ग्रुप की रक्षा और किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से जवाब देने की क्षमता देंगे.

आत्मनिर्भर भारत को भी मिलेगा बड़ा फायदा

इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य भारत के रक्षा विनिर्माण को मजबूत करना भी है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसे सरकारी शिपयार्ड इन युद्धपोतों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे.

निर्धारित टाइमलाइन

• प्रोजेक्ट-15C: अगले एक साल में RFP जारी होने की संभावना, निर्माण लगभग तीन साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-17B: अगले 18 महीनों में RFP, निर्माण करीब चार साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-18A: अगले तीन सालों में RFP होगा, योजना अभी शुरुआती फेस में है.

हालांकि, ये तीनों योजना अभी शुरुआती चरण में है अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

यदि ये तीनों परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो भारतीय नौसेना को 16 अत्याधुनिक युद्धपोत मिलेंगे. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और डिटरेन्स मजबूत होगी, चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी का संतुलित जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी और भारत इंडो-पैसिफिक में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा.

भारतीय सेना को मिलेंगे 840 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, टाटा और निबे को 1600 करोड़ का ऑर्डर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंत्रालय ने सेना के लिए 1,600 करोड़ रुपये के टेंडर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को ‘लोइटरिंग म्यूनिशंस’ की सप्लाई के लिए चुना है। इस टेंडर के तहत सेना को 100 किलोमीटर की रेंज वाले 840 आधुनिक ड्रोन मिलेंगे।

​टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा को मिला है. टाटा इसके तहत अपनी पूरी तरह से स्वदेशी ‘ALS सीरीज’ के लोइटरिंग सिस्टम की सप्लाई करेगा।

निबे डिफेंस का ऑर्डर 36% हिस्सा निबे डिफेंस के खाते में गया है। निबे इसके लिए ‘वायु अस्त्र’ ड्रोन की सप्लाई करेगी, जो असल में इजरायल की कंपनी एलबिट सिस्टम्स के ‘स्काईस्ट्राइकर’ का रीब्रांडेड वर्जन है।

जानकारी के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और उससे सेना की जरूरत का 64 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करने की उम्मीद है। वहीं निबे दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) बनकर उभरी है और उससे बाकी बचे 36 प्रतिशत लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई करेगा।

ये पूरी डील ‘फास्ट-ट्रैक’ रूट के जरिए की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले 6 महीने के भीतर ड्रोन की डिलीवरी शुरू करनी होगी. इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ के लिए किया जाएगा, जिससे दुश्मनों के ठिकानों पर बेहद सटीक और लंबी दूरी के हमले किए जा सकें।

यहां टाटा का सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है, वहीं निबे का ड्रोन इजरायली तकनीक पर आधारित है. इसे रक्षा खरीद में घरेलू विकास के मिले-जुले स्तर के रूप में तैयार किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना ने वॉरफेयर एंड एयरोस्पेस स्ट्रेटेजी प्रोग्राम के पांचवें संस्करण का हुआ समापन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

29 जून को वॉरफेयर एंड एयरोस्पेस स्ट्रेटेजी प्रोग्राम WASP के सफल समापन के अवसर पर ‘कैपस्टोन सेमिनार’ के पांचवें संस्करण का आयोजन किया गया। यह कैपस्टोन सेमिनार सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज, नई दिल्ली और कॉलेज ऑफ एयर वॉरफेयर, हैदराबाद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित छह महीने के गहन बौद्धिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम का समापन है। इस वर्ष प्रतिभागी दलों ने दो महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत व गहन अध्ययन प्रस्तुत किए।

पहला विषय था, “एयरोस्पेस शक्ति का विकास: पारंपरिक रणनीति से वर्तमान के सीमित संघर्षों तक”, जबकि दूसरा विषय “भविष्य के लिए एयरोस्पेस शक्ति को तैयार करना: नवाचार, एकीकरण और बल संरचना” रखा गया।

WASP भारतीय वायु सेना के मिड-रैंकिंग अधिकारियों के लिए तैयार किया गया एक विशिष्ट कार्यक्रम है। इसमें तीनों सेनाओं के अधिकारियों तथा रक्षा मंत्रालय के असैन्य अधिकारियों को भी भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाता है। भविष्य में वैश्विक सहयोग की भावना को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम हेतु भारत के मित्र देशों के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने की परिकल्पना की गई है।

एआई के दौर में भी वॉरफेयर एंड एयरोस्पेस स्ट्रेटेजी प्रोग्राम व्यापक अध्ययन, गहन समझ और महत्वपूर्ण ग्रंथों एवं शोध-पत्रों के गंभीर विश्लेषण के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

कार्यक्रम का उद्देश्य देश के भावी नेतृत्व में रणनीतिक सोच विकसित करना, उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विमर्श को संस्थागत स्वरूप प्रदान करना है। इस पहल की सफलता इसके पूर्व प्रतिभागियों की उपलब्धियों से स्पष्ट होती है, जो आज सरकार, प्रमुख नीति अनुसंधान संस्थानों और सैन्य शिक्षण संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं।

वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने प्रतिभागियों को उनकी उत्कृष्ट सहनशक्ति, समर्पण और शैक्षणिक अनुशासन के लिए बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों से अपने पूरे सेवा-काल के दौरान निरंतर ज्ञान अर्जित करने, अपनी पेशेवर कार्य कुशलता को लगातार विकसित करने और भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए देशभर में रणनीतिक चिंतन व नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर आयोजित सेमिनार के दौरान पहली बार WASP–CAWजर्नल का विमोचन भी किया गया।

मेजर जनरल भारत महतानी को एन सी सी निदेशालय हेडक्वार्टर से कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर तैनात किया गया है।

भारत / सत्ता संदेश

मेजर जनरल भारत महतानी अभी एन सी सी निदेशालय में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़  के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने 1 नवंबर, 2025 को यह प्रतिष्ठित कमान संभाली थी, और निवर्तमान अधिकारी, मेजर जनरल जगदीप सिंह चीमा से पारंपरिक बैटन लिया था।      7 महीने के सफल और प्रभावशाली कार्यकाल के बाद, यह जनरल ऑफिसर बेंगलुरु में कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर कमान संभालने जा रहे हैं।

मेजर जनरल भारत महतानी अपने नए पद पर व्यापक अनुभव लेकर आए हैं। एन सी सी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल का पद संभालने से पहले, उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, झारखंड और बिहार सब-एरिया में और पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। अपनी विशिष्ट सेवा के लिए, उन्हें GOC-in-Chief, पश्चिमी कमान प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है।

उनके प्रभावशाली कार्यकाल, नेतृत्व और युवा विकास में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए, एन सी सी निदेशालय ने इस जनरल ऑफिसर के लिए एक औपचारिक विदाई समारोह आयोजित किया।

पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर लागू होगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’ तकनीक, अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि देश में अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाया जाएगा। इसमें हाई-टेक कैमरे, सेंसर, ड्रोन, रडार और रियल टाइम निगरानी प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे घुसपैठ, तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।

गृह मंत्री ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पारंपरिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित आधुनिक प्रणाली में बदला जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना से सीमा सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमता बढ़ने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

घुसपैठ रोकने के लिए भारत का बड़ा कदम, पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर बनेगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि अवैध घुसपैठ और सीमा पार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भारत जल्द ही पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करेगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें हाई-टेक निगरानी प्रणाली, सेंसर, ड्रोन, कैमरे और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाना तथा घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना है।

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और आधुनिक तकनीक के जरिए सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

सरकार का मानना है कि नई तकनीक आधारित यह व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

हिंद महासागर का जहाज सागर कोलंबो बंदरगाह पर सफल ठहराव के बाद रवाना

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना का हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर , तीन दिवसीय सफल बंदरगाह यात्रा के बाद 18 मई 2026 को कोलंबो, श्रीलंका से रवाना हुआ , जिससे भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली और भारत के महासागर – पारस्परिक और समग्र क्षेत्रीय विकास के विजन को आगे बढ़ाया गया।

इस यात्रा के दौरान, आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की और समुद्री सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर केंद्रित चर्चा की।

आईओएस सागर पर आयोजित स्वागत समारोह ने नौसैनिक कर्मियों और विशिष्ट अतिथियों के बीच राजनयिक जुड़ाव और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस कार्यक्रम ने जहाज के चालक दल के बहुराष्ट्रीय स्वरूप को उजागर किया और तैनाती में निहित क्षेत्रीय सहयोग की भावना को रेखांकित किया।

आउटरीच गतिविधियों के एक भाग के रूप में, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों का जहाज पर स्वागत किया, जिससे उन्हें जहाज की परिचालन क्षमताओं और जहाज पर जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव करने का अवसर मिला।

इस यात्रा में सौहार्द और आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी शामिल थीं। श्रीलंका नौसेना और आईओएस सागर के कर्मियों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच ने टीम भावना को बढ़ावा दिया और दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी संबंधों को मजबूत किया। इसके अलावा, बहुराष्ट्रीय दल ने गाले और कैंडी की सांस्कृतिक यात्राएँ कीं, जिससे उन्हें श्रीलंका की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की गहरी समझ प्राप्त हुई।

कोलंबो से प्रस्थान करते समय, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के जहाज एसएलएनएस नंदीमित्रा के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लिया । इस अभ्यास में समन्वित सामरिक युद्धाभ्यास और संचार अभ्यास शामिल थे, जिनका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता, नौकायन कौशल और परिचालन समन्वय को बढ़ाना था।

आईओएस सागर इस समय कोच्चि के रास्ते में है और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदार देशों के बीच समुद्री सहयोग, अंतरसंचालनीयता और मित्रता को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।