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2019 से 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए: केंद्र सरकार का दावा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वर्ष 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, इस अवधि में भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए कानूनी, कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर व्यापक सुधार किए गए।

सरकार के मुताबिक, पहले की तुलना में अब भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी हुई है। इसके लिए वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति पर विशेष जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय का कहना है कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

नए कानूनों और तकनीक पर जोर

सरकार ने बताया कि वर्ष 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लागू किए गए। इसके बाद वर्ष 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 में पहली बार ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ (Trial in Absentia) का प्रावधान जोड़ा गया, जिससे भगोड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाया जा सके।

BHARATPOL और INTERPOL से बढ़ा समन्वय

सरकार के अनुसार, जनवरी 2025 में BHARATPOL पोर्टल लॉन्च किया गया, जिसके माध्यम से 1,400 से अधिक केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय घटकर कई मामलों में 3 से 10 दिन रह गया।

सरकार ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ INTERPOL रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का दावा किया गया है।

संपत्ति जब्ती और आर्थिक अपराध

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, PMLA के सख्त क्रियान्वयन के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े आर्थिक अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। वहीं 18,762 करोड़ रुपये की राशि सफलतापूर्वक वापस (Restitution) दिलाई गई, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों से संबंधित धन भी शामिल है।

ऑपरेशन त्रिशूल का भी उल्लेख

सरकार ने बताया कि ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे भगोड़ों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट, सर्विलांस और प्रोफाइल मैपिंग का उपयोग किया गया। इसके अलावा प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इन कदमों के कारण पिछले सात वर्षों में भारत भगोड़े अपराधियों की वापसी और आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई के मामले में अधिक प्रभावी हुआ है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 2019-2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए जाने का दावा
  • पिछले 3 वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी
  • 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
  • 18,762 करोड़ रुपये की राशि वापस (Restitution)
  • BHARATPOL से 1,400+ एजेंसियां इंटरपोल नेटवर्क से जुड़ीं
  • BNSS में पहली बार Trial in Absentia का प्रावधान
  • ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए तकनीक आधारित ट्रैकिंग
भारत टैक्सी की तर्ज पर शुरु होगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी,अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश के सहकारिता आंदोलन को नया जीवन देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत पहल की है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह में घोषणा की कि देश में सहकारी समितियों के विकास को तेज करने के लिए जल्द ही एक नई सहकारी लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) कंपनी का गठन किया जाएगा। 

उन्होंने साफ किया कि सहकारिता आंदोलन, जो कांग्रेस शासन के दौरान एक उपेक्षित आंदोलन बन चुका था, उसे इस मंत्रालय के गठन से एक महत्वपूर्ण ‘लाइफलाइन’ मिली है। देश के लगभग 8.5 लाख सहकारिता संगठनों और 30 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए यह पहल एक दूरगामी गेम-चेंजर साबित होने वाली है।

बीमा और परिवहन क्षेत्र में सहकारी मॉडल के विस्तार को लेकर सरकार की क्या योजना है?
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बताया कि देश में सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी का कामकाज बेहद शानदार रहा है और आगामी दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों में करने की ठोस तैयारी है। इसी मॉडल की तर्ज पर, बीमा क्षेत्र में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित की जाएगी।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि उर्वरक क्षेत्र की दिग्गज सहकारी संस्था इफको (आईएफएफसीओ) पहले से ही एक जापानी फर्म के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) के जरिए बीमा व्यवसाय में सक्रिय है। यह नई कंपनी सीधे तौर पर सहकारिता क्षेत्र को वित्तीय सुरक्षा के दायरे में लाकर उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करेगी।

ग्रामीण स्तर पर पैक्स (पीएसीएस) के डिजिटलीकरण और क्षमता निर्माण के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं?

सहकारिता क्षेत्र को पेशेवर, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • 50,000 ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) का शुभारंभ: ग्रामीण स्तर की वित्तीय रीढ़ कही जाने वाली 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) को डिजिटल तकनीक से लैस कर ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) में परिवर्तित कर दिया गया है। यह जमीनी स्तर के संस्थानों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
  • त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना: सहकारिता क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए गुजरात के आणंद में ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जो पेशेवर प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा।

कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किन बड़ी परियोजनाओं का अनावरण किया गया है?

किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए भंडारण और बेहतर सुविधाओं के उद्देश्य से कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया:

  • अनाज भंडारण क्षमता का विस्तार: कार्यक्रम के दौरान 75,000 टन की कुल क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण किया गया, 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ, तथा 47 अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया गया।
  • सहकार वन और टिश्यू कल्चर लैब: अमूल और एनसीसीएफ द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन किया गया। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन हुआ। साथ ही, बीज प्रणालियों को मजबूत करने के लिए बीबीएसएसएल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।

सहकारिता नीति को लेकर राज्यों की चिंताओं और आगामी विकास का क्या दृष्टिकोण है?
सहकारिता मंत्रालय के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप की शुरुआती आशंकाओं को खारिज करते हुए अमित शाह ने साफ किया कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी कांग्रेस शासित राज्य ने केंद्रीय हस्तक्षेप की शिकायत नहीं की है, क्योंकि यह मंत्रालय राज्यों के मामलों में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए है। 

उन्होंने यह भी कहा कि देश की डेयरी सहकारी प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है क्योंकि वर्तमान में डेयरी क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा असंगठित है, जिसे अधिक संगठित बनाया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सहकारी क्षेत्र को एक मजबूत आधारशिला बनाना है।

केंद्र का बड़ा एक्शन: 23 और व्यक्तियों को घोषित किया गया ‘आतंकवादी’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है. यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी आतंकी गतिविधि या उसके समर्थकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

मंत्रालय ने बताया कि ये व्यक्ति भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सहायता करने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने तथा आतंकवादियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं.

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और अन्य आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, ये कदम आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.

गृहमंत्रालय ने जिन 23 आतंकियों प्रतिबंधित किया है उनका विस्तृत डिटेल :

  • मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ्ती मसूद इलियास उर्फ मसूद इलियास उर्फ अबु मोहम्मद उर्फ एम. मसूद इलियास की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मौलाना मसूद अज़हर का विश्वासपात्र और कश्मीर में घुसपैठ का मुख्य समन्वयक है. वह सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने में सक्रिय है. उसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान में PDP कार्यालय के पास नाका पार्टी पर हुए हमले को अंजाम दिया था.
  • मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मनन उर्फ सज्जाद उर्फ हमज़ा उर्फ वाहिद ख़ान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है जो सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ कराता है. वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में शामिल रहा है. इसके अलावा, वह अयोध्या के आर.जे.बी. परिसर, नागपुर के आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों की टोह लेने में संलिप्त था.
  • मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान उर्फ अबू साद उर्फ साद जिमी की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह PoK में JeM का अमीर और सैन्य विंग का प्रमुख है. वह जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. वह मुज़फ्फराबाद में आतंकियों को जेहादी और सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए कैंप चलाता है.
  • हाफ़िज़ अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM) से संबंध रखता है. उसने नगरोटा सेना शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराई थी. उसने 1995/96 के दौरान अफगान युद्ध में भाग लिया था और वह आईएसआई (ISI) की मदद से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता है. वह JeM की शासी परिषद (शूरा) का सदस्य है.
  • अब्दुल्ला जिहादी उर्फ शाहनवाज़ उर्फ अल हिजामा की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मुफ्ती असगर खान का सह-षड्यंत्रकारी है और उत्तरी कश्मीर क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की सुविधा प्रदान करता है. उसने भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष फैलाने के प्रयास किए हैं. वह कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में स्थित कई लॉन्चिंग कैंपों का प्रबंधन संभालता था.
  • फ़िरदौस अहमद भट की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर है जो वर्ष 2018 में वैध दस्तावेजों के सहारे वाघा सीमा से पाकिस्तान चला गया था. वह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार विदेशी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित मार्ग का प्रबंधन करता है. इसके साथ ही, वह ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियार मुहैया कराने और दक्षिण कश्मीर के युवाओं को भड़काकर आतंक में भर्ती करने का काम करता है.
  • गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार उर्फ फरीद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखता है. उसने वर्ष 2001 से 2005 तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की थी. इसके बाद वह सितंबर 2008 में बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ. दिसंबर 2008 में उसे जम्मू से गिरफ्तार किया गया था और बाद में जुलाई 2019 में उसे पाकिस्तान वापस निर्वासित कर दिया गया.
  • हारून रशीद गनई उर्फ शुनू की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह मार्च 2018 में वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गया और वहां लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. वह कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकी रैंकों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति करता है.
  • बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – मुज़फ्फराबाद, PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंध रखता है. वह सीमा पार (पाकिस्तान/PoK) से बैठकर स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने की साजिश रचता है. इसके अलावा, वह कश्मीर घाटी में हथियारों, गोला-बारूद और रसद की अवैध आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल है.
  • आबिद कयूम लोन की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह फरवरी 2020 में अटारी चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान गया और वापस नहीं लौटा. वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने और लश्कर के लिए धन जुटाने का काम करता है. वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी करता है, जिससे प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है.
  • नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ अबू मनाज़िल की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – इस्लामाबाद, पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पार कर PoK चला गया था. उसने डोडा और किश्तवाड़ क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय युवाओं को भर्ती किया. वह ड्रोन का उपयोग करके सांबा और आर.एस. पुरा सेक्टर से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की खेप भेजने का मुख्य ऑपरेटर रहा है.
  • अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रौफ उर्फ हाफिज अब्दुर रौफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) / फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से संबंध रखता है. वह 1999 से लश्कर का एक वरिष्ठ नेता है और आतंकी हाफिज सईद की सीधी कमान के अधीन काम करता है. वह ‘फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’ (FIF) और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे धर्मार्थ संगठनों की आड़ में लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन और जनसमर्थन जुटाने का काम करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया है.
  • अशफाक अहमद उर्फ इशफाक अहमद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2000 में जैश में शामिल हुआ और बहावलपुर में ‘शुआबा हदीस’ और अल-रहमत ट्रस्ट (जैश का चैरिटी विंग) का प्रभारी है. उसे पाक-अधिकृत कश्मीर में जेहादी प्रशिक्षण मिला था. वह जनवरी 2016 के पठानकोट वायुसेना स्टेशन हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के ग्राहकों में से एक पाया गया था.
  • हाफिज खालिद वालीद उर्फ हाफिज खालिद नाइक उर्फ खालिद वालिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद है और वर्ष 2003 से लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है. वह जून 2016 में हुए पम्पोर हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ जवान शहीद हुए थे. अगस्त 2012 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था.
  • मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की उर्फ मौलाना इमदाद उर्फ इमदाद भाई उर्फ मौलाना इमददुल्लाह की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह जैश के कैदियों के विंग (शोबा-ए-असीरन) का अमीर और संगठन के कानूनी मामलों का प्रमुख है. वह मौलाना मसूद अज़हर और उसके डिप्टी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असघर का बेहद करीबी सहयोगी है. वह जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने में शामिल था.
  • मौलाना सैफुल्लाह खालिद उर्फ वलियुल उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ वाजिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से संबंध रखता है. वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग का महासचिव है और पहले मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) का अध्यक्ष रह चुका है. उसने लश्कर और जमात-उद-दावा के कई विंग्स (जैसे प्रचार विभाग, नियंत्रण और सुधार विंग) के प्रमुख के रूप में कार्य किया है. अप्रैल 2018 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी (SDGT) सूची में शामिल किया था.
  • मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ समामा इल्यास उर्फ वारिस अली की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्तमान में इस्लामाबाद (चट्टा बख्तावर) से लश्कर के ऑपरेशन कमांडर के रूप में काम कर रहा है. वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर घाटी में सक्रिय अन्य लश्कर कैडरों के साथ वित्तीय और साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) सहायता का समन्वय करता है. इसके खिलाफ श्रीनगर के CI कश्मीर पुलिस स्टेशन में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के अधीन मामला दर्ज है.
  • मौलाना यूसुफ ताईबी उर्फ मोहम्मद यूसुफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. यह LeT/JuD का एक केंद्रीय नेता है जो वर्तमान में संगठन के नियंत्रण और सुधार (दावत-ओ-इस्लाह) विंग से जुड़ा हुआ है. वह पूर्व में कराची स्थित LeT/JuD से संबद्ध संस्था ‘जामिया अल-दीरासत अल-इस्लामिया ट्रस्ट’ (JADIAT) का प्रभारी रह चुका है. वर्तमान में वह लाहौर के ‘अल-क़दसिया इस्लामिक सेंटर’ से जुड़ा है और पंजाब के सरगोधा मरकज़ में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश (खुतबा) देने का काम करता है.
  • ओवैस फारूज़ उर्फ ओवैस अहमद मीर उर्फ ओवैस फारूज़ मीर की राष्ट्रीयता भारत है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह अप्रैल 2018 में वैध भारतीय पासपोर्ट पर वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया और LeT के आतंकवादी रैंक में शामिल हो. जनवरी 2023 में उसके भाई फरज़ान फिरोज़ को श्रीनगर पुलिस ने 450 ग्राम हेरोइन (कीमत लगभग 9.95 लाख रुपये) और LeT के लेटर पैड के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ NIA कोर्ट, पुलवामा ने धारा 82 CrPC के अधीन उद्घोषणा आदेश जारी किया है.
  • क़ारी याक़ूब शेख उर्फ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख उर्फ याक़ूब शेख उर्फ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब उर्फ मोहम्मद याकूब की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (PMML) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह JuD का एक केंद्रीय नेता और उसकी केंद्रीय ‘दवाती टीम’ का सदस्य है. उसने 2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वह सऊदी अरब में लश्कर और JuD के लिए फंड इकट्ठा करने के मिशनों में प्रमुखता से शामिल रहा है. अगस्त 2012 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था.
  • राणा इफ्तिखार उर्फ राणा वलीद आतिफ उर्फ राणा इफ्तिखार हैदर उर्फ राणा इफ्तिखार अहमद उर्फ हैदर खान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह LeT प्रमुख हाफिज़ सईद का अत्यंत करीबी और उसके कश्मीर ऑपरेशन्स के वित्त (Finance) का मुख्य प्रबंधक है. वह मारे गए और भारतीय जेलों में बंद आतंकियों के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने वाले विंग ‘शोबा-ए-असीरन’ का प्रभारी है. वर्ष 1993 में जम्मू-कश्मीर के मेंढर सेक्टर में एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था और यह 2004 तक भारतीय जेल में बंद रहा.
  • वसीम नूर जाट उर्फ क़ारी वसीम की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. यह जैश का एक लॉन्चिंग कमांडर है जो कोटली व्यवस्था संभालता है. वह वर्ष 2021-22 के दौरान ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने की गतिविधियों में शामिल रहा है. उसे पहले अक्टूबर 2008 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वह 2012 से 2015 तक कोट भलवाल सेंट्रल जेल, जम्मू में बंद था, जहाँ से रिहा होने के बाद उसे पाकिस्तान निर्वासित कर दिया गया था.
  • मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ मुहांदीस उर्फ ज़ाकिर की राष्ट्रीयता पाकिस्तान (मूल रूप से भारतीय, वर्तमान में रावलपिंडी में सक्रिय) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / अल-कायदा / ISIS से संबंध रखता है. वह वर्ष 2012 के बेंगलुरु LeT साजिश मामले और 2013 के नांदेड़ LeT मामले का मुख्य मास्टरमाइंड और हैंडलर है, जिसमें दक्षिणपंथी राजनेताओं और पत्रकारों की लक्षित हत्याओं (Target Killings) की साजिश रची गई थी. वह वर्ष 2013 में आतंकी फरहतुल्लाह गोरी की मदद से पाकिस्तान भाग गया. जांच के अनुसार, वह रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले (2024), मंगलुरु कुकर विस्फोट और अल-हिंद ISIS मॉड्यूल मामले में एक ऑनलाइन हैंडलर के रूप में शामिल रहा है. वह सोशल मीडिया और यूट्यूब /टेलीग्राम चैनलों (जैसे ‘सवत अल हक’) पर राष्ट्र-विरोधी और जिहादी वीडियो के जरिए युवाओं को भर्ती करने का काम करता है.
हरियाणा-राजस्थान के बीच हुआ जल समझौता, गृहमंत्री की मौजूदगी में MoU साइन

हरियाणा / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा और राजस्थान के बीच जल बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ।

दोनों राज्यों की सरकारों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी मौजूद रहे। समझौते के तहत मानसून के दौरान हरियाणा पाइप लाइन के जरिए राजस्थान को पानी भेजेगा। 

समझौते के तहत वर्ष 1994 में हुए अपर यमुना रिवर बोर्ड के जल बंटवारा समझौते के अनुसार राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे लंबे समय से लंबित जल वितरण से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

इस समझौते के बाद रेणुका डैम, किशाऊ डैम और लखवार डैम जैसी बहुप्रतीक्षित बांध परियोजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भी तेजी आने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पेयजल उपलब्धता, सिंचाई क्षमता और जल संरक्षण को बड़ा लाभ मिलेगा।

केंद्र सरकार ने इस समझौते को राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। माना जा रहा है कि इससे जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, अंतरराज्यीय समन्वय और भविष्य की जल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया
  • श्री अमित शाह ने‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है
  • ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में NCB द्वारा जारी Vision Document on Narcotics Control का उद्देश्य सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट नेटवर्क, सीमा पार तस्करी और नए खतरों के खिलाफ संस्थागत क्षमता को और मजबूत बनाना है
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम ड्रग्स के कारोबार के पूरे इकोसिस्टम पर अगले 3 वर्षों में ऐसा प्रहार करेंगे, कि यह दशकों तक उठ न पाए
  • ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ की नीति से ह्यूमन व टेक्नोलॉजी इंटेलिजेंस व कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए सोर्स से लेकर किंगपिन तक नार्को के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा
  • हमें ड्रग्स के व्यापारियों के प्रति ruthless अप्रोच और पीड़ित युवाओं के प्रति Sympathetic अप्रोच रखना होगा
  • बड़े NDPS मामलों में वित्तीय जांच, अपराध की कमाई को फ्रीज़ और सीज़ करना हमारी प्राथमिकता
  • सभी राज्य ANTF को फुल-टाइम, डेडिकेटेड, इक्विप्ड और अकाउंटेबल यूनिट बनाए
  • विदेश में छिपे ड्रग तस्करों और गैंगस्टरों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस, प्रत्यर्पण और CBI के माध्यम से कार्रवाई तेज करने के लिए राज्य एक तंत्र विकसित करें
  • डिमांड रिडक्शन के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों व मंत्रालयों की भागीदारी से ड्रग्स फ्री जोन बनाए व जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे
  • बड़े मामलों में जल्द सजा सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट की दिशा में कार्यरत, राज्य भी अपने हाई कोर्ट में एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट के गठन करें
  • सीमा, पोर्ट, एयरपोर्ट, गांव, कम्युनिटी पुलिसिंग और क्राइम मैपिंग के जरिए हर ड्रग नेटवर्क की पहचान करनी होगी
  • ड्रग कार्टेल की फाइनेंसिंग, नेतृत्व और पूरे नेटवर्क पर हमला करना होगा, बड़े मामलों में ED के जरिए वित्तीय जांच अनिवार्य हो
  • ड्रग्स की लड़ाई के खिलाफ हमारा रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित- एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस व ऑपरेशंस; प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग कंट्रोल; डिमांड रिडक्शन व रिहैबिलिटेशन; कैपेसिटी बिल्डिंग व कोऑर्डिनेशन
  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। श्री अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हमारा देश नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां पर आने वाले 3 साल यह तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के आने वाले 100 वर्ष के भविष्य के लिए यह लड़ाई हमें दृढ़ता के साथ संयुक्त प्रयास से जीतनी चाहिए। यह लड़ाई कोई एक विभाग, राज्य, सरकार याव्यक्ति नहीं लड़ सकता बल्कि इसके लिए सभी राज्यों और उनके संबंधित विभागों को एक साथ एक मंच पर आना होगा। इस लड़ाई में हमें जनता को प्रेरित करने वाले संतों, देश का भविष्य तय करने वाले युवाओं और हमारी मातृशक्ति को भी जोड़ना पड़ेगा, तभी इस लड़ाई में हम पूरी तरह से सफल हो सकेंगे। श्री शाह ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, आर्थिक हितों की रक्षा और हमारी युवा पीढ़ी और उसके माध्यम से देश के भविष्य के साथ जुड़ी हुई समस्या है। इस समस्या पर संपूर्ण विजय प्राप्त करना भारत के सभी राज्यों का एक सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है। नार्को ऑफेंडर्स आज टेक्नोलॉजी से सक्षम बन कर नेटवर्क आधारित बन चुके हैं और मल्टी-डोमेन अपराध के रूप में आज हमारे सामने खड़े हैं। इस कठिन लड़ाई के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी सामूहिक और संगठित, रोडमैप आधारित और आधुनिक और इंटेलिजेंस लीड-बेस्ड होनी चाहिए। हमारी अप्रोच टेक्नोलॉजी ड्रिवन होनी चाहिए और हमें रूथलेस अप्रोच के साथ नेटवर्क-सेंट्रिक लड़ाई लड़नी होगी तभी हम इस समस्या के खिलाफ विजय प्राप्त कर सकते हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमें ड्रग का व्यापार करने वालों के प्रति ruthless अप्रोच रखनी है और ड्रग के विक्टिम के प्रति sympathetic अप्रोच रखनी है। उन्होंने कहा कि हमारी सद्भावना ही उन विक्टिम बच्चों को फिर से सामान्य जीवन के साथ जोड़ सकती है और हमें उनकी अंगुली पकड़ कर सही रास्ते पर ले जाने का काम करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज यहां पर किए गए प्रस्तुतिकरण में बहुत स्पष्ट रूप से चार स्तंभों के अंदर हमारी लड़ाई को व्याख्यायित किया गया है और हर स्तंभ के अंदर उसके उपस्तंभ भी तय किए गए हैं। हर उपस्तंभ के अंदर लक्ष्य और इसे प्राप्त करने की तिथि को भी चिन्हित कर दिया गया है। एक साल बाद इस योजना का हम पुनरीक्षण करेंगे और इसे रीडिफाइन कर अंतिम 2 साल की लड़ाई के लिए हम आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज यहां एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया है। इसके साथ-साथ नशामुक्त भारत के रोडमैपके विजन डॉक्यूमेंट का भी आज विमोचन हुआ है। एनसीबी के गुवाहाटी और जम्मू ज़ोनल कार्यालयों का भी आज लोकार्पण किया गया। आज तक ज़िलास्तरीय एनकॉर्ड की 15876 बैठक हो चुकी हैं, राज्य स्तर की 266 बैठक हो चुकी हैं, एग्जीक्यूटिव स्तर पर सात बैठक कर चुके हैं और शीर्ष स्तर पर आज हम 10वीं बैठक कर रहे हैं। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख एनकॉर्ड बैठकों को परिणामलक्षित बनाने के लिए भी प्रयास करें।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा। डार्क वेब मॉनिटरिंग, हवाला, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, पोर्ट और एयरपोर्ट के उपयोग पर हमारी सभी वित्तीय एजेंसियों को अपनी पूरी क्षमता के साथ समन्वित तरीके से काम कर एक साझा कार्यक्रम तैयार करना पड़ेगा। Disrupt के तहत नशे का व्यापार करने वालों के सोर्स ट्रांजिट, फाइनेंस और लीडरशिप के हर लेवल पर हमें कानून के तहत आघात करना पड़ेगा। अवैध फसलों को नष्ट करने के लिए हमें एक अभियान चलाना होगा। अवैध प्रयोगशालाओं को ढूंढने का एक तंत्र एजेंसियों को विकसित करना पड़ेगा और उन्हें कठोरता के साथ नष्ट करना पड़ेगा। नई पद्धति के कंट्रोल डिलीवरी ऑपरेशन का हमें उपाय भी ढूंढना पड़ेगा और इस उपाय में सतत पर्वर्तन करते हुए इसकी मॉनिटरिंग कर हमें इसे लॉजिकल एंड तक ले जाना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि PMLA और ED के माध्यम से नशे के व्यापारियों के फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को भी हमें बहुत रूथलेसली करना पड़ेगा और इसके माध्यम से उनके नेटवर्क को छिन्न-भिन्न करने की जिम्मेदारी भी हमारी है। Destroy के तहत ध्वस्त किया गया नेटवर्क दोबारा खड़ा ना हो, इस तरह से हम इसे रूथलेसली समाप्त करें। जो पकड़ा गया जो kingpin है वो छूटना नहीं चाहिएऔर इसके लिए हमारे कानूनों में सभी प्रावधान उपलब्ध हैं। De-addiction और rehabilitation के माध्यम से हमें सप्लाई साइड को कम कर इनको डिस्ट्रॉय करने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा। Detect, Disrupt और Destroy इन तीन शब्दों के आधार पर इस पूरे रोडमैप की रचना की गई है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, राज्यों और सभी विभागों को नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ना पड़ेगा। बड़े NDPS के मामले में वित्तीय जांच को राज्य के पुलिस प्रमुखों को अनिवार्य करना होगा। Proceed of Crime, उसकी पहचान, फ्रीज करना, seize करना और उसे जेल से बाहर न आने देने तक की पूरी प्रक्रिया को एविडेंस बेस्ड और आधुनिक तकनीक से लैस करनी होगी। गृह मंत्रालय ने सभी हाई कोर्ट के साथ भी इस विषय को उठाया है कि स्पेशल कोर्ट्स बनें, कोर्ट्स के न्यायमूर्ति की संख्या पर्याप्त हो और सजा तय करने के लिए बड़े केस की प्रतिदिन सुनवाई करने को प्राथमिकता दी जाए। जब तक रियल टाइम शेयरिंग सुनिश्चित नहीं करते हैं तब तक follow the money trail हम नहीं कर पाएंगे और इसीलिए रियल टाइम शेयरिंग को हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि Precursors और साइकोट्रॉपिक पदार्थ की शेड्यूलिंग को भी हमें एक बार देखना होगा और नार्को फाइनेंस के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही भी हमें सुनिश्चित करनी पड़ेगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नशामुक्त भारत अभियान और जन जागरूकता अभियान, सामुदायिक सहभागिता और उपचार पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना होगा तभी हम मांग को कम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल डायवर्जन और ऑनलाइन फार्मेसी की निगरानी को स्वास्थ्य मंत्रालय को सुनिश्चित करना होगा। शिक्षा मंत्रालय के तहत माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षाविभागों को ड्रग-फ्री कैंपस का फ्रेमवर्क अडॉप्ट करना होगा। सबकी सहमति से इस कांसेप्ट को आगे बढ़ाते हुए अभिभावकों औरशिक्षकों की जागरूकता को भी हमेंसुनिश्चित करनाहोगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि NCRB, NFSU, DFSS, I4C और NATGRID को कार्टेल आइडेंटिफिकेशन के लिए अपने-अपने स्तर पर बहुत सारे काम करने होंगे। राज्यों को ANTFs को फुल टाइम बनाना चाहिए औरdedicated, resourced, equipped और accountable यूनिट के रूप में इसे परिवर्तित करने के लिए राज्यों के पुलिस प्रमुख को काम करना चाहिए। ड्रग्स की commercial quantity के मामले में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन तथा backward-forward linkage हमारी इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा होना चाहिए क्योंकि इसके बिना हम तंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। राज्य और ज़िला स्तरीय NCORD बैठकों को output-oriented बनाना चाहिए और इसकी मॉनिटरिंग भी बहुत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। Strong chargesheet और effective prosecution के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर रखने की दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए और exclusive NDPS कोर्ट के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख, अपने गृह विभाग के माध्यम से हाई कोर्ट को अप्रोच कर आगे बढ़ें। Demand reduction, treatment, rehabilitation, awareness, अभिभावकों, प्राध्यापकों और शिक्षकों की जागरूकताके लिए भी राज्यों को हर विभाग में एक नोडल अधिकारी तय करना चाहिए। इसके साथ ही, CBI के माध्यम से हमने भगोड़ों को वापस लाने का एक अभियान शुरू किया है जिसमें हमें बहुत अच्छी सफलता मिली है। राज्य सरकारों से भी अनुरोध है जो आपके राज्य के ड्रग्स या गैंगस्टर का काम करने वाले लोग विदेश में छिप कर बैठे हैं, उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर, सीबीआई का उपयोग कर और एजेंसियों के माध्यम से उनको वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 तक 40000 करोड़ रूपए के मूल्य की 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग जब्त किए गए थे जबकि 2014 से 2026 तक 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई, यह बताता है कि हमारा अभियान सफलता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।2004 से 2014 में 8000 करोड़ रूपए मूल्य की 3,26,000 किलोग्रामड्रग्स को नष्ट किया गया जबकि 2014 से 2026 के बीच 89,896 करोड़ रूपए मूल्य की 42,47,000 किलोग्राम ड्रग को हमने नष्ट किया। इसी प्रकार अवैध खेती के विनष्टीकरण को हमने लगातार बढ़ाया है। 2020 में 10,000 एकड़ अवैध अफीम की खेती विनष्ट की गई 2025 में हमने 42,282 एकड़ अवैध खेती को विनष्ट किया। 2004 से 2014 तक 173000 केस हुए थे जिनमें 195000 गिरफ्तारियां की गई थीं। 2014 से 2026 में 8,75,000 केस रजिस्टर किए गए हैं और 10,97,000 लोगों की गिरफ्तारियां हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि जब हम प्रयास करते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी। मोदी सरकार ने प्रयास को स्पेसिफिक किया है, लक्ष्य को केंद्रित किया है, टाइम बाउंड भी किया है और ड्रग के खिलाफ लड़ाई के सभी प्रकार के बिंदुओंको आइडेंटिफाई कर हमने यह रोडमैप बनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अगर हम इस लड़ाई को मिलकर और एकजुट होकर लड़ते हैं तो निश्चित रूप से विजय हमारी होगी। तीन साल के अंदर हम भारत में ड्रग्स के नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में बहुत आगे बढ़ जाएंगे। इन तीन साल में हम सब एक लक्ष्य को तय कर सामूहिक प्रयास से मेहनत करें, समयसीमा और साझा रणनीति के साथ लक्ष्य तय करें तो हमारी विजय सुनिश्चित है।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की, ‘मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है।

अमित शाह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

गुजरात : केंद्रीय मंत्री ने भुज में सीमा संबंधी विषयों पर बैठक की अध्यक्षता की

दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे गुजरात के सीमावर्ती एवं तटीय जिलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी विषयों पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी सहित राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा कच्छ, वाव थराद और पाटन के DM और SP उपस्थित थे।

बैठक के दौरान केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बॉर्डर फेंसिंग, समुद्री सीमा सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से गुजरात के सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है और राज्य में घुसपैठ तथा बॉर्डर पर तस्करी पूरी तरह बंद हो गई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर क्षेत्र में हर अनधिकृत अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस अप्रोच रखकर उसे समाप्त किया जाए। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में Radicalization के केंद्रों पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जिला मजिस्ट्रेट को जनसांख्यिकी परिवर्तन की सख्त मॉनिटरिंग एवं नियमित रिपोर्टिंग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के आने के कारण हो रहा रिवर्स माइग्रेशन स्वागतयोग्य है। श्री शाह ने कहा कि पहले से बसे घुसपैठियों को वापस भेजने के कार्य में पुलिस स्टेशन से लेकर पटवारी तक, सब एकजुट होकर आगे आएं। उन्होंने कहा कि हर सीमावर्ती जिले की चुनौतियों और जरूरतों के आधार पर स्थानीय प्रशासन SOPs तैयार करे, जिसमें पहले से बसे घुसपैठियों, ड्रोन और नार्को की पहचान करना सुनिश्चित हो।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हर जिले में सुरक्षा समन्वय समूह बनाए जाएं, जिसमें BSF, तटरक्षक बल, आयकर विभाग, ED और लीड बैंक के मैनेजर को शामिल किया जाए। श्री शाह ने कहा कि इनकम टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग और कस्टम कानूनों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी DM, SP और IG, बॉर्डर रेंज की होनी चाहिए।

श्री अमित शाह ने सीमावर्ती जिलों में हवाला ट्रांजैक्शन, लेनदेन, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियों, संदिग्ध वाहनों और GST कलेक्शन पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध से निपटने वाली एजेंसियों को सीमा क्षेत्रों के बारे में कड़ाई से सूचित किया जाए और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, आरबीआई के साथ मिलकर सर्वे की मुहिम चलाए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा से निकटता को ध्यान में रखते हुए तटीय सुरक्षा और भारतीय तटरक्षक बल के साथ प्रभावी समन्वय पर जोर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज के साथ-साथ भारत सरकार और राज्य सरकार की हर योजना का सीमांत गांवों में 100% सैचुरेशन सुनिश्चित हों।

अमित शाह ने भुज में G-7 बॉर्डर पोस्ट पर जवानों से संवाद किया, G-7 और G-13 BOP का लोकार्पण किया

गुजरात / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पर जवानों से संवाद और G-7 एवं G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ ने स्थापना से लेकर अब तक बीते 60 साल में देश की दो सबसे कठिन सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई है। उन्होंने कहा कि इन सीमाओं पर तैनात बीएसएफ जवानों को -45 डिग्री से लेकर +45 डिग्री से अधिक तापमान तक हर परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। कहीं कच्छ का दुर्गम रेगिस्तान है, सरक्रीक और हरामी नाले की दलदली जमीन है, तो कहीं राजस्थान के रेत के टीलों के बीच तैनात रह कर बीएसएफ जवानों को काम करना पड़ता है। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर की बर्फीली चोटियों और सुंदरबन के जंगलों के बीच गंगासागर के किनारे से लेकर मेघालय और असम के पहाड़ी और वन क्षेत्रों तक बीएसएफ ने बीते छह दशकों में फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस का दायित्व बहुत अच्छे तरीके से निभाया है। बल के 2000 जवानों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इसी कारण भारत सरकार और देश की 140 करोड़ जनता हमेशा बीएसएफ के प्रति आदर का भाव रखती है और चैन की नींद भी सोती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बनासकांठा में एक केन्द्र बनाया गया है, ताकि आम जनता को बीएसएफ जवानों की कठिन ड्यूटी का पता चल सके। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने में लगभग 2.5 लाख से ज्यादा लोगों ने इस केन्द्र में जाकर बीएसएफ की ड्यूटी के बारे में जाना-समझा है। श्री शाह ने कहा कि शुरू में फीडबैक फॉर्म के जरिए एक सर्वे करवा कर लोगों से बीएसएफ की ड्यूटी के बारे में उनके विचार पूछे गए थे। उस समय कई महिलाओं ने लिखा था कि अगर उनके बेटे-बेटियां बड़े होकर बीएसएफ में जाएं तो उन्हें गर्व होगा। देश के लिए इतना कठिन जीवन जीना बहुत बड़ी बात है। देश की जनता के लिए फीडबैक फॉर्म को ऑनलाइन कर दिया गया है।

अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ की स्थापना के 60वें साल में हमने बीएसएफ की सीमा सुरक्षा की अवधारणा को पूरी तरह बदलने का निर्णय किया है। हम आने वाले दिनों में एक ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ बनाएंगे और बॉर्डर की सुरक्षा की जगह ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’ का नया कॉन्सेप्ट लॉन्च करेंगे। उन्होंने कहा कि इसमें जनता, सिविल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और मिलिट्री के साथ ही बीएसएफ जवानों की भी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। श्री शाह ने कहा कि हम स्मार्ट बॉर्डर सिक्युरिटी प्रोजेक्ट के तहत सीमा पर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। इसमें हजारों करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है और उन्हें विश्वास है कि ड्रोन, रेडार, वॉच टावर, अत्याधुनिक तकनीक और जवानों की तैनाती से एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड खड़ी होगी। इसके बाड़ कोई हमारी सरहद को भेदने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हम नए क्षेत्रों को भी बीएसएफ को देने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुरक्षा ग्रिड में सबसे बड़ी कमी बंगाल में बॉर्डर पर अधूरी फेंसिंग थी। भौगोलिक परिस्थिति को तो नहीं बदला जा सकता, लेकिन जहां जमीन है और बॉर्डर फेंस बन सकती है, वहां भी हमें जमीन नहीं मिली थी। लेकिन पिछले दिनों बंगाल की जनता के आशीर्वाद से बंगाल में हमारी पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री जी ने एक सप्ताह के भीतर ही बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए जमीन देने का फैसला सैद्धांतिक तौर पर कर दिया है और कुछ जमीन दे भी दी है। उन्होंने कहा कि फेंसिंग पूरी होते ही हम घुसपैठ रोकने में सफल होंगे। जंगल एवं नदी-नालों के रास्ते घुसपैठ रोकने के लिए वहाँ भी तकनीकी फेंसिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। आने वाले दिनों में बीएसएफ के जवानों के पराक्रम, साहस और कर्तव्य निष्ठा के कारण पूरा बॉर्डर सुरक्षित होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

BSF के जवानों का सम्मान, राष्ट्र के प्रति अडिग निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है

मोदी सरकार अगले एक साल में ड्रोन, राडार, आधुनिक कैमरा और तकनीकों से लैस ‘Smart Border Project’ लाकर अभेद्य बॉर्डर ग्रिड बनाएगी

त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए संकल्पित सरकारें हैं, BSF इनके साथ मिलकर काम करें

गृह मंत्री ने त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में BSF को जिला प्रशासनों, पुलिस थानों, पंचायत और पटवारियों के साथ मिलकर घुसपैठ रोकने के लिए काम करने के निर्देश दिए

बॉर्डर सिक्योरिटी आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है

मोदी सरकार का इंटरनल सिक्योरिटी का विजन – समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकना है, ‘नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ समाप्त होगी’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा साइबर थ्रेट्स, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन वॉरफेयर से निपटने के लिए ‘नई बॉर्डर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी’ लायेंगे

मोदी सरकार बॉर्डर पर ‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड’ खड़ी करने का रोडमैप तैयार कर रही है

वह जमाना चला गया, जब आतंकी हमले और नक्सलवादी बेखौफ नरसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं, यह नई डिफेंस डॉक्ट्रिन है, मोदी डॉक्ट्रिन है

मोदी जी ने High Powered Demography Mission की घोषणा की, जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा

हम भारत में Unnatural Demographic Change नहीं होने देंगे, एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे

दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार सभी CAPF जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लेकर आएगी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।  

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और  बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर लागू होगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’ तकनीक, अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि देश में अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाया जाएगा। इसमें हाई-टेक कैमरे, सेंसर, ड्रोन, रडार और रियल टाइम निगरानी प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे घुसपैठ, तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।

गृह मंत्री ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पारंपरिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित आधुनिक प्रणाली में बदला जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना से सीमा सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमता बढ़ने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।