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गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)  ने निगमन दिवस 2026 मनाया; भारत में डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अपना सहयोग जारी रखा

दिल्ली /सत्ता संदेश

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) अपना निगमन दिवस 2026 मना रहा है। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक खरीद के सहयोग में इसकी निरंतर भूमिका को दर्शाता है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी संस्था, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस स्पेशल पर्पस व्हीकल (जेम एसपीवी) को जेम प्लेटफॉर्म के विकास, प्रबंधन और रखरखाव के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 17 मई 2017 को स्थापित किया गया था। वर्षों से, जेम एक प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में उभरा है, जो देश भर के विक्रेताओं के लिए व्यापार में सुगमता और व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देता है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना के अनुरूप स्थानीय क्षमताओं को सरकारी खरीद के अवसरों से जोड़कर घरेलू उद्यमों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन, निर्माण उपकरण, फर्नीचर, वस्त्र और चिकित्सा वस्‍तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रथम श्रेणी के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी देखी गई है।  

आज, इस प्लेटफॉर्म पर 1.36 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और लगभग 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 72% सक्रिय विक्रेता सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, जेम पर मौजूद 11 लाख से अधिक एमएसई को 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए। महिला नेतृत्व वाले एमएसई को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के खरीद ऑर्डर मिले, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्टार्टअप्स को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर मिले, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और सरकारी खरीद तक ​​पहुंच बढ़ाने में जेम की भूमिका को दर्शाता है।

जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा, “जेम की स्थापना सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल खरीद मंच बनाने की परिकल्पना के  साथ की गई थी। आज, जेम घरेलू उद्यमों को खरीद के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।”

जेम निगमन दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हितधारकों के साथ जुड़ाव और ज्ञान साझा करने संबंधी कई पहल आयोजित कर रहा है। समारोह का शुभारंभ 15 मई 2026 को जेम विक्रेता मूल्यांकन कार्यशाला के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य संभावित ओईएम के लिए विक्रेता मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता बढ़ाना था।

इसके अलावा, जेम 21 मई 2026 को “जेम को समृद्ध बनाना” विषय के तहत “जेम मंथन” का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य जेम तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है। जेम 22 मई 2026 को रक्षा सेवाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श सत्र का भी आयोजन करेगा जिसमें रक्षा खरीद और परिचालन आवश्यकताओं के साथ तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रक्रिया सुधार और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 समावेशी शासन के लिए डेटा-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करता है

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

5,000 से अधिक टीमों की तरफ ससमाधान प्रस्तुत करने के साथ, यह डीपीआई इकोसिस्टम में सबसे बड़े डेटा नवाचार चुनौतियों में से एक बन गया

नई दिल्ली, 8 मई 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम में डिजिटल पहचान के क्षेत्र में छात्रों द्वारा किए गए उन बेहतरीन नवाचारों का उत्सव मनाया गया, जिनका उद्देश्य शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाना है।

डिजिटल पहचान डेटा के नवीन और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इस हैकाथॉन ने छात्रों और युवा पेशेवरों को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहां वे ऐसे बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और डेटा-आधारित समाधान विकसित कर सकें, जिनका लक्ष्य समावेशिता, कार्यकुशलता और शासन के परिणामों को बेहतर बनाना है।

लगभग 15,000 टीमों के पंजीकरण और 5,000 से ज़्यादा टीमों की तरफ से समाधान जमा करने के साथ, इस पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस तरह, यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) इकोसिस्टम में डेटा नवाचार के सबसे बड़े चैलेंज में से एक बन गया।

एक सख्त, कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद-जिसमें 5,000 से ज़्यादा प्रविष्टियों की जांच, 30 परियोजनाओं की शॉर्टलिस्टिंग और 15 फाइनलिस्ट टीमों का विस्तृत मूल्यांकन शामिल था-टॉप पांच टीमों को अंतिम समारोह में अपने समाधान पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, कोलकाता और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता की विजेता टीम ने यूआईडीएआई द्वारा साझा किए गए, इकट्ठा किए गए आधार नामांकन और अपडेट डेटासेट का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।

उनके काम से अलग-अलग क्षेत्रों, राज्यों और जनसांख्यिकीय समूहों में नामांकन के रुझानों और बायोमेट्रिक अपडेट के तरीकों के बारे में अहम जानकारी मिली, साथ ही सेवा देने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मिले।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्लेषण की बारीकियों को जनहित के मजबूत नजरिए के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नए प्रयोगों में नीतियों और कामकाज में सुधार को सीधे तौर पर मदद करने की क्षमता है; साथ ही उन्होंने शासन में सबको शामिल करने और कुशलता लाने के लिए डेटा के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के महत्व पर भी जोर दिया।

यूआईडीएआई के सीईओ ने इस पहल के लिए यूआईडीएआई के भविष्य के विजन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन को एक सालाना प्लेटफॉर्म के तौर पर संस्थागत रूप दिया जा सकता है, ताकि डिजिटल पहचान और सार्वजनिक डेटा के इस्तेमाल में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

हैकाथॉन के आने वाले संस्करणों में भी उम्मीद है कि इसमें सिर्फ छात्रों तक ही भागीदारी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शिक्षा जगत, शोधकर्ता, स्टार्ट-अप और अन्य गैर-शैक्षणिक योगदानकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे एक ज्यादा विविध और अलग-अलग विषयों वाला नवाचार इकोसिस्टम तैयार होगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026, यूआईडीएआई का मुक्त नवाचार, युवाओं को जोड़ने और प्रमाणों पर आधारित नीति-निर्माण के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है। प्रतिभागियों को असल दुनिया के डेटासेट पर काम करने का मौका देकर, इस पहल ने न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया, बल्कि ऐसे समाधानों को भी प्रोत्साहित किया जिनका सीधा असर जनता पर पड़े।

यूआईडीएआई ने हैकाथॉन की सफलता में योगदान देने के लिए सभी प्रतिभागियों, जूरी सदस्यों और साझेदारों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की।

सिविल सेवा दिवस: डॉ. जितेंद्र सिंह बोले—PM उत्कृष्टता पुरस्कारों के आवेदन 1,216 से बढ़कर 2,035

दिल्ली/सत्ता संदेश

आईजीओटी कर्मयोगी पर 2,000 से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के साथ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा 88 लाख के पार: मंत्री

मंत्री ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा, सीपीजीआरएएमएस के माध्यम से शिकायत निवारण का विस्तार हुआ, यह 2014 में लगभग 2 लाख वार्षिक शिकायतों के निपटारे तक था जो वर्तमान में बढ़कर 25-30 लाख हो गया है जिसमें 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और समाधान की औसत अवधि 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गयी है

केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने चेहरे की पहचान पर आधारित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया जबकि डीएलसी प्रणालियों में कुल उपयोग 10 करोड़ के पारः डॉ. जितेंद्र सिंह

सिविल सेवा मूल्यांकन को प्रमुख कार्यक्रमों के परिणामों के आधार पर पुनर्गठित किया गया हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

देश के 750 से अधिक जिलों में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों की लोकप्रियता में तीव्र वृद्धि हुई है और प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। इसके लिए आवेदनों की संख्या 2023 में 1,216 थी जो बढ़कर 2024 में 1,588 और 2025 में 2,035 हो गई है। आईजीओटीकर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 88 लाख से अधिक अधिकारी जुड़ चुके हैं जिन्होंने 2,000 से अधिक पाठ्यक्रमों का लाभ उठाया है। शिकायत निवारण कार्यक्रम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से शिकायतों का निवारण 2014 में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख शिकायतों तक था जो अब बढ़कर 25-30 लाख हो गया है। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और समाधान की औसत अवधि 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गयी है। पेंशन सुधारों के अंतर्गत केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने चेहरे की पहचान पर आधारित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया जबकि विभिन्न प्रणालियों में इसका कुल उपयोग काफी बढ़ गया है।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इन रोचक आंकड़ों का उल्लेख किया। इस अवसर पर उन्होंने “नागरिक-केंद्रित, संस्थागत शासन” की ओर परिवर्तन पर प्रकाश डाला, सेवा प्रदान करने में सुधारों का उल्लेख किया तथा मिशन कर्मयोगी और इसके नए घटकों जैसी क्षमता-निर्माण पहलों के निरंतर विस्तार की घोषणा की। साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग के बजाय प्रतिस्पर्धी, कार्यक्रम-आधारित उत्कृष्टता की मानक कसौटी के माध्यम से प्रशासनिक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए पुनर्गठित ढांचे की भी घोषणा की।

मंत्री महोदय ने शासन में ऐसे संरचनात्मक बदलावों पर बल दिया जिनमें “व्यक्तिगत सेवा से संस्थागत सेवा की ओर” और “नियम-आधारित” प्रशासन से “भूमिका-आधारित” प्रशासन की ओर बढ़ना शामिल है। उन्होंने लगभग 2,000 पुराने नियमों को हटाने, कुछ भर्ती प्रक्रियाओं के लिए साक्षात्कार समाप्त करने और सिविल सेवा दिवस को अधिक ज्ञान-आधारित मंच के रूप में नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का उल्लेख किया। उत्कृष्टता पुरस्कारों के लिए मूल्यांकनके ढांचे को अधिकारियों के व्यक्तिगत प्रोफाइल के बजाय प्रमुख कार्यक्रमों के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पुनर्गठित किया गया है। इस अवसर पर सहायक सचिव कार्यक्रम, लगभग 90 प्रतिशत सरकारी कार्यों को कवर करने वाली डिजिटल शासन प्रणाली और वैश्विक प्रशासनिक कार्यक्रमों के आयोजन सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे संस्थागत नवाचारों का भी उल्लेख किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए मिशन कर्मयोगी और “कर्मयोगी प्रारंभ” जैसी पहलों के माध्यम से प्रशिक्षण और शासन सुधारों के विस्तार का संकेत दिया जिसका मुख्य उद्देश्य सिविल सेवकों को शासन संबंधी उभरती चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय प्रशासनिक मॉडलों में वैश्विक रुचि बढ़ रही है जिसके अंतर्गत मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सीपीजीआरएएमएस जैसी प्रणालियों का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यापक प्रयास “विकसित भारत: अंतिम व्यक्ति तक नागरिक-केंद्रित शासन और विकास” के मूलमंत्र के अनुरूप है जिसका उद्देश्य 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लिए अगली पीढ़ी के सिविल सेवकों को तैयार करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह बदलाव प्रशासन-केंद्रित शासन से नागरिक-केंद्रित शासन की ओर है।” उन्होंने यह भी कहा कि सुधारों का उद्देश्य “अधिकतम पारदर्शिता, अधिकतम उत्तरदायित्व और समयबद्धता का अनुशासन सुनिश्चित करना” है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों की बढ़ती संख्या असंतोष में वृद्धि के बजाय निवारण प्रणालियों में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

ये घटनाक्रम भारत के प्रशासनिक ढांचे में चल रहे परिवर्तन को रेखांकित करते हैं जिसमें लोक सेवा सुधार के केंद्रीय स्तंभों के रूप में डेटा-संचालित मूल्यांकन, डिजिटल शासन और बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है।

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में सरकार के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और डीएआरपीजी की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा भी मंच पर मौजूद थीं जो वार्षिक सिविल सेवा सम्मेलन में उच्च स्तरीय संस्थागत उपस्थिति को दर्शाती हैं।