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सी-डॉट ने “साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म के सहयोगात्मक विकास” के लिए जंप्स ऑटोमेशन के साथ साझेदारी की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य साइबर जागरूकता पैदा करना और संगठनों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना है

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने सी-डॉट कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम (सीसीआरपी) के तहत जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और उद्यमों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवोन्‍मेषी गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म विकसित करना है।

एक समारोह के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदक, बोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना और पारंपरिक प्रशिक्षण को एक आकर्षक, संवादमूलक और प्रभावी शिक्षण अनुभव में बदलना है। इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर से बचाव और समय सीमा के भीतर संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित वास्तविक सिमुलेशन परिदृश्य शामिल होंगे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगठन साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

इस सॉल्‍यूशन में एक सशक्त पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग प्रणाली के साथ-साथ एक एआई-संचालित व्यवहार विश्लेषण इंजन शामिल होगा जो उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करेगा, चुनौती की जटिलता को गतिशील रूप से समायोजित करेगा और उभरते साइबर खतरों के साथ सामग्री को अपडेट रखेगा। इसे जंप्स ऑटोमेशन की एआई और स्वचालन विशेषज्ञता एवं सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार तथा सुरक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं के संयोजन से बनाया जाएगा।

यह भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सामाजिक प्रभाव डालने और साइबर सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित सी-डॉट सुविधाओं में संपूर्ण सत्यापन के साथ एक संरचित विकास, परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करेगी। इस प्लेटफॉर्म को भविष्य में उद्यमों के साथ एकीकृत करने के प्रावधानों के साथ एक वाणिज्यिक-स्तरीय एसएएएस सॉल्‍यूशन के रूप में तैनात किए जाने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने एक प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता मंच विकसित करने में इस सहयोग के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मनिर्भर भारत के विजन के प्रति सी-डॉट की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने, घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सक्षम बनाना है, जिससे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता और लचीलेपन की संस्कृति को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर श्री रोहन चंदक ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को संवादमूलक और प्रभावशाली बनाने में प्लेटफॉर्म की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक परिवर्तन लाना और मानव-संबंधित साइबर जोखिमों को कम करना है।

सी-डॉट के बारे में:

टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और तैनाती से जुड़ा है। सी-डॉट ने उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी के माध्यम से दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सी-डॉट सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम (सीसीआरपी) आरंभ किया है। इस सहयोगी अनुसंधान एवं विकास नीति ढांचे के तहत, सी-डॉट अपने नेतृत्व वाली परियोजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप, संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आमंत्रित करता है। फंडों के अतिरिक्‍त, सी-डॉट स्वदेशी अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सूत्रधार, एकीकरणकर्ता और संसाधन प्रदाता के रूप में कार्य करता है।

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के बारे में:

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी एक प्रौद्योगिकी सॉल्‍यूशन कंपनी है जिसकी एआई, स्वचालन और अनुकूलित उद्यम एआई सॉफ्टवेयर विकास में विशेषज्ञता है। कंपनी जटिल व्यावसायिक और सामाजिक चुनौतियों को हल करने के लिए नवोनमेषी, डेटा-संचालित समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

भारत मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभरा है : नैसकॉम अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं खंडित आपूर्ति शृंखलाओं के कारण वैश्विक कंपनियां अब केवल लागत दक्षता के बजाय भरोसे तथा मजबूती को प्राथमिकता दे रही हैं जिससे भारत एक मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभर रहा है।

‘नैसकॉम ग्लोबल कॉन्फ्लुएंस 2026’ में नांबियार ने कहा कि निर्यात पर काफी हद तक निर्भर प्रौद्योगिकी उद्योग असाधारण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के पुनर्गठन ने देशों एवं कंपनियों के प्रौद्योगिकी साझेदारी के तरीके को मूल रूप से बदल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ पहले सभी केवल लागत एवं दक्षता को ही प्राथमिकता देते थे… अब वह दौर खत्म हो चुका है। दक्षता महत्वपूर्ण है लेकिन यह निर्णायक कारक नहीं है। मजबूती अब कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन सभी प्राथमिकताओं के बीच भारत एक उपयुक्त स्थिति में है जो इसे कारोबार के लिए एक बेहद सक्षम देश बनाता है।’’

नांबियार ने कहा कि दुनिया भर के देश और कंपनियां अब यह मूल प्रश्न पूछ रही हैं कि उनका भरोसेमंद साझेदार कौन होगा और किस देश के साथ वे दीर्घकालिक साझेदारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक ‘‘विश्वसनीय लोकतंत्र’’ होने के साथ-साथ अपने विशाल आकार और विविध जनसंख्या के कारण नवाचार के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला भी है।

भारत की ताकत का एक प्रमुख आधार उसका डिजिटल प्रतिभा भंडार है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 60 लाख पेशेवर और व्यापक उद्योग में अतिरिक्त 30-40 लाख लोग शामिल हैं। यह परिवेश अब कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, उत्पाद अभियांत्रिकी एवं साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहा है।

नांबियार ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की वैश्विक संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उन्होंने आधार एवं यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) जैसे मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके मूल सिद्धांत जैसे उपयोगकर्ता की सहमति, गोपनीयता, विस्तार क्षमता एवं परस्पर संचालन..दुनिया के लिए उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई के साथ मिलकर डीपीआई एक बड़ी शक्ति बन सकता है।’’

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में भारत के देर से शुरुआत करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नांबियार ने कहा, ‘‘ अंततः भारत के पसंदीदा साझेदार बनने की कहानी केवल प्रौद्योगिकी की नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों एवं साझा आकांक्षाओं की भी है। प्रौद्योगिकी के इस नए दौर में कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता।’’