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स्वच्छता ही सेवा 6.0: पीआईबी-सीबीसी चंडीगढ़ ने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए चलाया स्वच्छता अभियान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से पत्र सूचना कार्यालय (PIB) चंडीगढ़ और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) चंडीगढ़ की ओर से ‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ के तहत विभिन्न स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

पीआईबी चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह ने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष अवसरों या एक-दिवसीय अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक आदत और सामूहिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, कार्यस्थल, आसपास के क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाता है, तो इससे अनुशासन, जिम्मेदारी और अपने परिवेश के प्रति सम्मान की संस्कृति विकसित होती है।

पीआईबी चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने भी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप से किए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ संदेश के साथ लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

अभियान के तहत कार्यालय परिसर में स्वच्छता, जागरूकता और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कई गतिविधियां आयोजित की गईं। 18 सितंबर को बैठक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई। इसके अलावा बेसमेंट में रखे पुराने अखबारों को व्यवस्थित कर वहां सफाई की गई। कर्मचारियों और सफाई मित्रों को डेटॉल हैंडवॉश, मास्क, दस्ताने और डस्टर वितरित किए गए। कार्यालय की अलमारियों एवं स्टोरेज क्षेत्रों की सफाई और व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छता जागरूकता के लिए पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।

अभियान के दौरान सफाई मित्रों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। उन्हें बैग, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर कार्यस्थलों एवं सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में उनकी सेवाओं को सराहा गया।

जनभागीदारी और युवाओं की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ ने माई भारत (MY Bharat) के सहयोग से युवाओं के साथ भी संवाद किया। चैतन्य टेक्नो स्कूल, सेक्टर-44, चंडीगढ़ के पास स्थित सार्वजनिक मैदान में विद्यार्थियों के साथ स्वच्छता अभियान, स्वच्छता शपथ और जागरूकता रैली आयोजित की गई। इस दौरान विद्यार्थियों को अपने घरों, शिक्षण संस्थानों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान के आगामी चरण में पार्किंग क्षेत्र और कार्यालय परिसर के प्रवेश द्वार के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत कार्यालय परिसर में 10 पौधे लगाए जाएंगे। ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सेक्टर-10 स्थित लीजर वैली में भी स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा।

अभियान के तहत एकत्र किए गए पुराने अखबारों को रीसाइक्लिंग के लिए बेचने की भी योजना है। इसके माध्यम से जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और कचरे के उत्पादक उपयोग का संदेश दिया जाएगा।

‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ की गतिविधियां 2 अक्टूबर को संपन्न होंगी। पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे नागरिकों की दैनिक आदत और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है।

स्वच्छता ही सेवा 2026: चंडीगढ़ सेक्टर-17 के गलियारों में चला सफाई अभियान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में सफाई अभियान चलाया गया। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सेक्टर-17 बी शाखा के स्टाफ सदस्यों ने मिलकर सेक्टर-17 के गलियारों की सफाई की।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार देशभर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है। अभियान का उद्देश्य स्वच्छता, जनभागीदारी और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना ने बताया कि अभियान के तहत सेक्टर-17 में सफाई गतिविधि आयोजित की गई। सफाई के बाद आम नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई और दैनिक जीवन में स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

मुख्य प्रबंधक सुनील कुमार ने बताया कि 1 अक्टूबर को सुबह 8 बजे “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” के आह्वान के साथ देशभर में श्रमदान गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वहीं, 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाएगा।

पीएनबी सेक्टर-17 बी शाखा के शाखा प्रबंधक शिवराज विज ने बताया कि अभियान के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

इस अवसर पर सुनील कुमार, शिवराज विज, बिन्नी भाटिया, रजनी वालिया, दलीप कुमार, निधि शर्मा, शिखा तंवर सहित विभिन्न लोग मौजूद रहे।

17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान, बैंकों की ओर से जनभागीदारी पर जोर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत देशभर के बैंकों द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना के अनुसार, अभियान के दौरान पंजाब में नागरिकों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक स्थलों, अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों और क्लीननेस टारगेट यूनिट्स (CTUs) में विशेष स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करना और स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही ‘कबाड़ से जुगाड़- वेस्ट टू वेल्थ’ और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को बैंक कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता की शपथ के साथ की गई। अभियान के दौरान समावेशिता और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित विभिन्न स्वच्छता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

वहीं, 1 अक्टूबर को सुबह 8 बजे “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” के आह्वान के साथ श्रमदान गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाएगा।

अभियान के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन शिविरों में स्वास्थ्य जांच, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का वितरण और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

अभियान के सफल संचालन के लिए आम नागरिकों से भी स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। लोगों से सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया है।

नारी शक्ति का दशक, विकसित भारत का उत्कर्ष

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश के किसी भी गाँव, बस्ती या सुदूर इलाके में जाइए- हर घर की रसोई में एक जैसी बदली हुई हवा महसूस होगी l चूल्हे के जिस काले धुएँ ने कभी नई दुल्हन की आँखों में आँसू भरे थे, उज्ज्वला की नीली लौ ने उसे विदा कह दिया है। जो माँ कभी कोसों दूर से पानी ढोती थी, आज उसकी बेटी के पास ‘हर घर जल’ का अपना नल है। खेत के पीछे की वह शर्मनाक मजबूरी अब इतिहास है- आँगन में स्वच्छ भारत का शौचालय गरिमा के साथ खड़ा है। सिर पर पक्की छत है, और उसके मालिकाना हक पर पहली बार- घर की महिला का नाम लिखा है। पर्स में जन-धन की पासबुक है और फोन में यूपीआई का ऐप है।


यह किसी पोस्टर पर छपी कोई काल्पनिक तस्वीर नहीं, बल्कि मोदी सरकार के बारह वर्षों में महिला सशक्तिकरण का एक ऐसा सच है, जिसे देश की करोड़ों महिलाएँ हर रोज़ जी रही हैं। यह उस दौर की दास्तान है जिसमें Women Led Development के विजन के साथ भारतीय नारी विकसित भारत की शिल्पकार बन रही है। इस बदलाव की विशालता को समझने के लिए एक दशक पीछे लौटिए। एक समय मातृ मृत्यु दर 212 थी। निर्भया जैसी घटना पर देश का आक्रोश सड़कों पर था, लेकिन व्यवस्था में नीतिगत इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती थी। महिला आरक्षण विधेयक 1996 से चार बार अधर में लटका रहा और ट्रिपल तलाक पर दशकों तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। चूल्हा साँसों में कालिख घोलता था। दूरस्थ हैंडपंप रोज़मर्रा की बेबसी का प्रतीक था l भारतीय नारी एक नई सुबह की प्रतीक्षा में अपने हिस्से की उम्मीद बचाए हुए थी l


शुरुआत करते हैं सबसे पवित्र आँकड़े—जीवन का अधिकार से। देश में मातृ मृत्यु दर तेजी से घटकर 212 से 88 पर आ गई है। UN-MMEIG के अनुसार जहाँ वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु दर में महज़ 48% की कमी आई, वहीं भारत ने 86% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। संस्थागत प्रसव 38.7% से बढ़कर 90.6% हो चुका है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने चार करोड़ से अधिक माताओं के बैंक खातों में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक सीधे हस्तांतरित कर सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन की नींव मजबूत की है।


देश में बने 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों ने महिलाओं को गरिमा दी l10.5 करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शनों ने धुएँ से मुक्ति दी। आज 16 करोड़ से अधिक घरों तक नल का पानी पहुँच चुका है—जबकि 2014 में महज 17% परिवारों के पास यह सुविधा थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के लगभग 4 करोड़ घरों में से 73% घर महिलाओं के नाम पर हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार सरकारी रिकॉर्ड्स पर माँ-बहनों का नाम गर्व से दर्ज है।


गरिमा से स्वामित्व आया, और स्वामित्व ने निर्णय लेने का आत्मविश्वास दिया। आर्थिक भागीदारी का यह विस्तार बैंक खाते से शुरू होकर उद्यमिता तक पहुँचा है l लगभग 56 करोड़ जन-धन खातों में 56% खाते महिलाओं के नाम पर हैं।


विश्व बैंक मानता है- भारत ने एक दशक में खाता-स्वामित्व के जेंडर गैप को शून्य पर ला दिया है, जो वैश्विक वित्तीय समावेशन के इतिहास में अभूतपूर्व है। मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक जमानत-मुक्त ऋणों में से 68% ऋण महिलाओं को मिले हैं। स्टैंड-अप इंडिया ने महिला उद्यमियों को 43,000 करोड़ रुपये से अधिक दिए हैं और दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत 91 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है।” निर्धारित समय से पहले 3 करोड़ बहनें ‘लखपति दीदियाँ’ बन चुकी हैं।


यह बदलाव शिक्षा और रोजगार में भी स्पष्ट है l देश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह भागीदारी 47.6% तक पहुँच चुकी है । सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ खातों में 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है । उच्च शिक्षा में हमारा जेंडर समानता सूचकांक (GPI) 1 के पार है और STEM शिक्षा में बेटियों की भागीदारी 43% है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है। यह परिवर्तन केवल अनुभवों में नहीं, SRS, NFHS, PLFS, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र—हर रिपोर्ट एक ही दिशा की ओर इशारा करती है: भारतीय महिला के लिए पहुँच बढ़ी है और आत्मनिर्भरता का नया आसमान खुला है।


इसी आर्थिक-सामाजिक चेतना का विस्तार राजनैतिक और लोकतांत्रिक भागीदारी में दिख रहा है। वर्ष 2019 के आम चुनावों में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया—यह वैश्विक स्तर पर महिलाओं की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक भागीदारी थी l इसी के फलस्वरूप दशकों से लंबित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद में ऐतिहासिक सर्वसम्मति से पास हुआ। आजजमीनी स्तर पर 14.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं। देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में भी महिलाएँ राफेल उड़ा रही हैं और नौसेना की कमान संभाल रही हैं।


मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने ट्रिपल तलाक पर प्रभावी रोक लगाई, जिससे ऐसे मामलों में 82% की कमी आई है।देशभर में स्थापित 973 वन स्टॉप सेंटर्स पर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी सहायता और काउंसलिंग मिल रही है l Women Helpline-181 ने अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं की मदद की है । मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आँगनवाड़ी—ये नारी-नेतृत्व वाले भारत की रीढ़ हैं। बेशक, महिला सशक्तिकरण की राह में अभी भी चुनौतियाँ हैं, जिन पर सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। इसके साथ ही, नारी शक्ति वंदन अधिनियम आगामी परिसीमन की प्रक्रिया की प्रतीक्षा में है।


हमारे गणतंत्र के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला अब नीति निर्धारण के पटल पर केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी सक्रिय ‘सह-निर्माता’ है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में वह अब राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया की सहयात्री है, सहभागी है और सूत्रधार भी।
(SHGs) ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है।” निर्धारित समय से पहले 3 करोड़ बहनें ‘लखपति दीदियाँ’ बन चुकी हैं।


यह बदलाव शिक्षा और रोजगार में भी स्पष्ट है l देश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह भागीदारी 47.6% तक पहुँच चुकी है । सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ खातों में 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है । उच्च शिक्षा में हमारा जेंडर समानता सूचकांक (GPI) 1 के पार है और STEM शिक्षा में बेटियों की भागीदारी 43% है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है। यह परिवर्तन केवल अनुभवों में नहीं, SRS, NFHS, PLFS, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र—हर रिपोर्ट एक ही दिशा की ओर इशारा करती है: भारतीय महिला के लिए पहुँच बढ़ी है और आत्मनिर्भरता का नया आसमान खुला है।


इसी आर्थिक-सामाजिक चेतना का विस्तार राजनैतिक और लोकतांत्रिक भागीदारी में दिख रहा है। वर्ष 2019 के आम चुनावों में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया—यह वैश्विक स्तर पर महिलाओं की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक भागीदारी थी l इसी के फलस्वरूप दशकों से लंबित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद में ऐतिहासिक सर्वसम्मति से पास हुआ। आजजमीनी स्तर पर 14.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं। देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में भी महिलाएँ राफेल उड़ा रही हैं और नौसेना की कमान संभाल रही हैं।


मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने ट्रिपल तलाक पर प्रभावी रोक लगाई, जिससे ऐसे मामलों में 82% की कमी आई है।देशभर में स्थापित 973 वन स्टॉप सेंटर्स पर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी सहायता और काउंसलिंग मिल रही है l Women Helpline-181 ने अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं की मदद की है । मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आँगनवाड़ी—ये नारी-नेतृत्व वाले भारत की रीढ़ हैं।


बेशक, महिला सशक्तिकरण की राह में अभी भी चुनौतियाँ हैं, जिन पर सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। इसके साथ ही, नारी शक्ति वंदन अधिनियम आगामी परिसीमन की प्रक्रिया की प्रतीक्षा में है। हमारे गणतंत्र के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला अब नीति निर्धारण के पटल पर केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी सक्रिय ‘सह-निर्माता’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में वह अब राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया की सहयात्री है, सहभागी है और सूत्रधार भी।


(लेखिका भारत सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं।)

नीतिगत गतिरोध से विकसित भारत तक: मोदी युग ने भारत को नए सिरे से परिभाषित किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वर्ष 2014 के बाद से, भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसकी अर्थव्यवस्था कहीं अधिक मजबूत हुई है। बुनियादी ढांचा निश्चित रूप से बेहतर हुआ है। महिलाएं बेहद सशक्त हुईं हैं। किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और गरीब अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हुए हैं। इन तमाम बदलावों में एक ही बात साझा है: प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि और उनका नेतृत्व।

भारत के लोगों ने उनके दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व का भरपूर समर्थन किया है और उन्हें देश का सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला निर्वाचित प्रधानमंत्री बनाया है। बीते 10 जून को उन्होंने राष्ट्र की सेवा में 4,399 दिन पूरे किए और अपनी पहली चुनावी जीत के बाद जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। देश के लोगों ने ऐसे समय में 2014 में मोदी सरकार को भारी बहुमत से सत्ता सौंपी, जब अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी और यूपीए सरकार के बदनाम कार्यकाल के दौरान नीतिगत गतिरोध, भ्रष्टाचार, घोटालों एवं विवादों को लेकर जनता में निराशा लगातार बढ़ रही थी।

संवेदनशील नेतृत्व – 2014 से देश निरंतर बदलाव की यात्रा पर है। मोदी सरकार ने 81 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त अनाज की व्यवस्था की, 58 करोड़ जन धन बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन को संभव बनाया और 16 करोड़ घरों तक नल के पानी का कनेक्शन पहुंचाया। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, ‘आयुष्मान भारत’ के जरिए 12 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की गारंटी मिल रही है। 

कई युवा भारतीयों के लिए यह कल्पना करना मुश्किल हो सकता है कि मोदीजी द्वारा – पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में – लाए गए बड़े बदलावों से पहले जीवन कितना चुनौतीपूर्ण था। उनके निर्णायक नेतृत्व और नेक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण ने देश को ‘विकसित भारत 2047’ मिशन की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस मिशन में भारत की विरासत पर गर्व और विकास का एक महत्वाकांक्षी एजेंडा शामिल है।

नारी शक्ति

प्रधानमंत्री के लिए महिलाएं केवल सहायता की लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता हैं। सबसे पहले उनकी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया गया: स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। इससे उनकी सुरक्षा और सम्मान में वृद्धि हुई। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे महिलाओं को धुएं से भरी रसोई के खतरों से मुक्ति मिली।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की पहल ने बेटियों की शिक्षा एवं उनके कल्याण के महत्व को और ठोस बनाया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए, प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए देश की विधायिकाओं में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की है।

किसानों का कल्याण

किसानों का कल्याण प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का एक मुख्य आधार रहा है। किसानों के योगदान को मान्यता देते हुए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के जरिए उन्हें सीधे आय संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत बांटे गए कुल 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि से लगभग 10 करोड़ किसान परिवारों को लाभ हुआ है।

सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी काफी बढ़ोतरी की है, जो अब उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना है। साथ ही, किफायती दरों पर फसलों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराकर किसानों को वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी से बचाया गया है।

युवाओं के लिए अवसर

युवा भारतीयों के लिए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी प्रमुख पहलें शुरू की गई हैं। ‘कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय’ के रूप में एक समर्पित मंत्रालय के गठन से जहां युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल कौशल से लैस करने में मदद मिली है, वहीं भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में उभरती हुई क्रांति का लाभ उठाने के लिए तैयार भी किया गया है।

‘स्टार्टअप इंडिया’ और नवाचार को दिए गए व्यापक समर्थन ने कई युवाओं को नौकरी खोजने वाला से हटकर नौकरी देने वाला बनने में मदद की है। इन पहलों ने उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की एक ऐसी नई लहर की नींव रखी है, जिसमें आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के मामले  में अहम योगदान देने की क्षमता है।

अर्थव्यवस्था और जीवनयापन में सुगमता

वर्ष 2014 से पहले, भारत की गिनती दुनिया की “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच) अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में होती थी। निवेशकों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था। साहसिक सुधारों, निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियों, वित्तीय अनुशासन और अपेक्षाकृत कम महंगाई के सहारे, भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यह कारोबार व निवेश का एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।

भारत ने विभिन्न विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इससे हमारे युवाओं, किसानों, छोटे व्यवसायों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खुले हैं। और ऐसा भारत के हितों से समझौता किए बिना किया गया है। यह यूपीए सरकार द्वारा किए गए कुछ लापरवाही भरे समझौतों से बिल्कुल अलग है।

सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और करों की कम दरों जैसे बड़े सुधारों के जरिए  कारोबार जगत और मध्यम वर्ग का भरोसा भी बढ़ाया है। इंटरनेट की पैठ और डिजिटल भुगतान प्रणाली के तेज विस्तार के साथ मिलकर, ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालने के साथ-साथ नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को भी आसान बनाया है।

कई पुराने एवं मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने तथा अनुपालन के अनावश्यक बोझ को कम करने से कारोबार जगत को और भी अधिक लाभ हुआ है। मध्यम वर्ग को भी काफ़ी राहत मिली है और 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय को आयकर से छूट दे दी गई है।

आधुनिक बुनियादी ढांचा

मोदी सरकार देश के बुनियादी ढांचे में तेजी से बदलाव ला रही है। सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या 74 थी और अब यह 160 से अधिक हो गई है।

बड़े पैमाने पर रेलवे के विद्युतीकरण, महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्गों  व एक्सप्रेसवे के तेज विस्तार ने देश के कई हिस्सों के बुनियादी ढांचे को दुनिया के बेहतरीन बुनियादी ढांचों की बराबरी में ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का वास्तविक महत्व कार्यकाल के दिनों की गिनती में नहीं, बल्कि किए गए व्यापक बदलावों में निहित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने गरीबों एवं  किसानों के कल्याण, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं और उभरते भारत की महत्वाकांक्षाओं को शासन के केन्द्र में रखा है।

अब जबकि देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के नए संकल्प के साथ बदलाव की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।