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कैबिनेट ने बिहार में NH-31 और NH-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के उन्नयन को मंजूरी दी, लागत ₹3,936 करोड़

दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड (143.529 किलोमीटर) को बीओटी (टोल) मोड पर 3936.05 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन मानक में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है।

बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों के शहरी क्षेत्रों में विद्यमान गंभीर भौगोलिक खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत पूर्णिया शहर के लिए 6.729 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय लगभग दो घंटे कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आवागमन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना पूरे बिहार में प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड को निर्बाध रूप से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर 5 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 टैक्सटाइल क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 2 मत्स्य और समुद्री खाद्य पार्क) और 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (4 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 1 हवाई अड्डा, 4 राष्ट्रीय राजमार्ग, 2 राष्ट्रीय राजमार्ग) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर लंबे


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की गुणवत्ता और रखरखाव की समीक्षा की

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आज नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टमटा और श्री हर्ष मल्होत्रा ​​के साथ-साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी और परियोजना के संवेदक उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान, श्री गडकरी ने टिकाऊ और कुशल राजमार्ग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यान्वयन, गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मजबूत सड़क नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

श्री गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोकथाम के उपायों को लागू करते हुए पूरे नेटवर्क में सड़क सुरक्षा और स्थायित्व बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रत्‍युत्तर प्रणाली स्थापित करके मानसून की व्यापक तैयारियों को सुनिश्चित करें।

भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

रेलवे ने जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड पर 238 करोड़ रुपए की लागत से महत्वपूर्ण ढलान स्थिरीकरण, सुरंगों के पुनर्निर्माण और पुलों के संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी

जम्मू /सत्ता संदेश

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने की परियोजना: अश्विनी वैष्णव

रेलवे ने उत्तरी रेलवे के जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड पर 238 करोड़ रुपये की लागत से महत्वपूर्ण ढलान स्थिरीकरण, सुरंग पुनर्निर्माण और पुलों के संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी है। इन कार्यों में जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर पुनर्निर्माण, सुरंगों से रिसाव की समस्या का समाधान और अन्य संबंधित सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ये कार्य देश के सबसे चुनौतीपूर्ण भूभागों में सुरक्षित और विश्वसनीय संपर्क सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि कटिंग, पुलों और सुरंगों के विस्तृत मूल्यांकन के बाद संरक्षण और पुनर्वास कार्यों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस खंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता मजबूत होगी।

कठिन भूभाग, प्रतिकूल भूवैज्ञानिक स्थितियों और प्रतिकूल मौसम के कारण इस खंड को कई इंजीनियरिंग और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि रेलवे ने समय-समय पर क्रियान्वयन और मजबूत बुनियादी ढांचा विकास के माध्यम से इन चुनौतियों पर लगातार काबू पाया है। मौजूदा बुनियादी ढांचे के लिए नए संरक्षण और पुनर्वास कार्यों की मंजूरी के साथ, यह मार्ग पहले से अधिक बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा और हर साल लाखों यात्रियों को अधिक सुरक्षा और विश्वास के साथ सेवा प्रदान करने के लिए तैयार है।

भगवान वाल्मीकि तीर्थ सथल को मिलेगी नई पहचान, पंजाब सरकार ने 17.73 करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू किए

अमृतसर/ सत्ता संदेश

वाल्मीकि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध — हरभजन सिंह ईटीओ

अमृतसर स्थित पावन भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल सरायन बोर्ड के चेयरमैन और पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में पावन वाल्मीकि तीर्थ को नई पहचान देने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्यों की शुरुआत की गई। पंजाब सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा करवाए जा रहे इन कार्यों का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य Balbir Singh Seechewal, कैबिनेट मंत्री Harbhajan Singh ETO, विधायक Jasbir Singh Sandhu और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं द्वारा किया गया।

इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि भगवान वाल्मीकि जी के पावन तीर्थ स्थल के विकास के लिए पंजाब सरकार बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान देश-विदेश से आने वाली संगतों की आस्था का केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान, कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ और स्थानीय विधायकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जारी किए गए फंड से श्रद्धालुओं की जरूरतें पूरी होंगी और तीर्थ स्थल की सुंदरता में भी बढ़ोतरी होगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि जब से वाल्मीकि तीर्थ एडवाइजरी बोर्ड का गठन हुआ है, तब से यहां विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि मार्च महीने में हुई बैठक के बाद सभी कार्यों का अनुमान तैयार करके मुख्यमंत्री को भेजा गया था, जिसके बाद पंजाब सरकार द्वारा 17 करोड़ 73 लाख रुपये जारी किए गए।

उन्होंने कहा कि यह राशि तीर्थ स्थल के सुधार, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने में इस्तेमाल की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर महीने में यहां राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा सामाजिक भाईचारे की भलाई के लिए प्रतिबद्ध रही है और वाल्मीकि समाज की भावनाओं का पूरा सम्मान करती है।

समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के प्रमुख लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने पंजाब सरकार के इस प्रयास की सराहना की।

पीएम मोदी ने 594 किमी लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन

दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिलें में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्‍होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तेज गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।


इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए पीएम ने कहा कि लगभग 600 किमी लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।


एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।


अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए मोदी ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह राज्‍य भविष्‍य की एआई आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में अग्रणी बन रहा है।


उन्‍होंने राज्‍य में कनेक्टिविटी के व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें सं‍चालित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्‍होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्‍लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।


उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्‍य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्‍यवस्‍था एक मिसाल बन गई है। मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।


भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।


गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्‍तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।

विधायक छिना ने वार्ड 43 में विकास कार्यों का उद्घाटन किया

लुधियाना/सत्ता संदेश

दक्षिण लुधियाना विधानसभा क्षेत्र की विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने आज अपोलो अस्पताल के पास वार्ड 43 में आरएमसी द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण विकास कार्यों का उद्घाटन किया। सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है।

विधायक छिना ने बताया कि इस परियोजना के तहत लगभग 97.84 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

विधायक छिना ने कहा कि पिछली सरकारों से लोगों को केवल अधूरा काम, टूटी सड़कें और खोखले वादे ही मिले थे, लेकिन वर्तमान सरकार लोगों से किए गए हर वादे को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सेवा भावना से काम कर रही है, न कि राजनीति से, जिसके कारण आज विकास न केवल कागजों पर दिखाई दे रहा है बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रत्यक्ष रूप से हो रहा है। विधायक छिना ने आगे कहा कि सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र के हर इलाके को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है और यह विकास यात्रा आने वाले समय में भी निरंतर जारी रहेगी।

इस अवसर पर क्षेत्र के निवासियों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय बाद इस क्षेत्र में वास्तविक विकास कार्य शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि पहले टूटी-फूटी सड़कों और खराब रास्तों के कारण दैनिक जीवन बहुत कठिन था, लेकिन अब इस परियोजना से उन्हें काफी राहत मिलेगी। क्षेत्र के निवासियों ने विधायक छिना को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब वे वास्तव में बदलाव महसूस कर रहे हैं और भविष्य के लिए उनकी उम्मीदें भी मजबूत हो गई हैं।

पुनात्सांगचू-I परियोजना का संक्षिप्त विवरण (11 अप्रैल, 2026 की स्थिति में)भारत द्वारा वित्तपोषित भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना पर 7 वर्षों के बाद काम फिर से शुरू हुआ

दिल्ली / सत्ता संदेश
10 अप्रैल, 2026 को कंक्रीट डालने का समारोह अगले पांच वर्षों में परियोजना के पूरा होने की दिशा में  महत्वपूर्ण उपलब्धि
यह परियोजना जलविद्युत परियोजनाओं और सतत विकास में भारत-भूटान की मित्रता और सहयोग का प्रतीक

● पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना (पीएचईपी-I) पश्चिमी भूटान के वांगडुफोड्रंग जोंगखाग में पुनात्सांगचू नदी पर  रन-ऑफ-द-रिवर योजना है। पीएचईपी-I की स्थापित क्षमता 1200 मेगावाट है और यह प्रति वर्ष औसतन 5670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी।
● पीएचईपी-I भूटान में चल रही सबसे बड़ी परियोजना है। एक बार पूरा हो जाने पर इससे भूटान की जलविद्युत क्षमता में लगभग 30% की वृद्धि होगी और यह लगभग 4700 मेगावाट हो जाएगी और प्रति वर्ष औसतन 5,670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।
● भारत सरकार इस परियोजना को वित्तपोषित कर रही है। वित्तपोषित राशि में 40% अनुदान और 60% ऋण शामिल है।
● पीएचईपी-I द्वारा उत्पादित अतिरिक्त बिजली भारत को दोनों देशों द्वारा निर्धारित मूल्य पर बेची जाएगी जिस पर परियोजना आरंभ होने के समय सहमति होगी।
● निर्माण कार्य 11 नवंबर 2008 को शुरू हुआ था और आरंभिक तौर पर परियोजना से उत्पादन आरंभ  होने का समय नवंबर 2015 निर्धारित किया गया था।
● हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान, सतह और भूमिगत कार्यों में महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसके कारण डिजाइन में कई बदलाव करने पड़े। 2013 से बांध के दाहिने किनारे की ढलान के अस्थिर होने के कारण बांध के निर्माण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप  बांध के जारी कार्यों को 2019 से निलंबित कर दिया गया।
● दोनों सरकारों और संबंधित एजेंसियों ने कई बैठकों में और अध्ययनों के द्वारा इन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। 31 जुलाई 2025 को दोनों सरकारें बांध निर्माण को फिर से शुरू करने और दाहिने किनारे की ढलान को स्थिर करने पर सहमत हुईं।
● लगभग सात वर्षों के बाद, 10 अप्रैल 2026 को वांगडू फोड्रंग में 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना का काम बांध निर्माण आरंभ होने के साथ फिर शुरू हो गया है। विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग ने 10 अप्रैल 2026 को शिलान्यास समारोह में भाग लिया – जो इस विशाल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रमुख भूवैज्ञानिक चुनौतियों के कारण 2019 से बांध निर्माण कार्य रुका हुआ था।
● बांध निर्माण और दाहिने तटबंध ढलान स्थिरीकरण कार्यों के पूरा होने पर अगले पांच वर्षों के भीतर परियोजना से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
● भौतिक और वित्तीय प्रगति (28 फरवरी 2026 तक):
➢ सीसीईए द्वारा अनुमोदित लागत (दिसंबर 2013 पीएल): रु. 9375.57 करोड़
➢ वित्तीय प्रगति: 8785.19 करोड़ रुपये (93.70%), भौतिक प्रगति: 87.75%
संशोधित लागत अनुमान (आरसीई) सीईए और सीडब्ल्यूसी के साथ जांच के अधीन है।

धांधारी कलां में 3.75 करोड़ रुपये की लागत से 20 मेगावाट का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया

– विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन किया

लुधियाना, 01 अप्रैल (000) – लुधियाना दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 32, धांधारी कलां के अंतर्गत 66 केवी उप-स्टेशन पावर हाउस में एक नया 20 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया, जिसका औपचारिक उद्घाटन विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने किया।

विधायक छीना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 3.75 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.

इस अवसर पर ‘आग’ सुखदेव सिंह गरचा, जगतार सिंह और किशन कुमार भी उपस्थित थे।

विधायक छिना ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से सिंगला चौक, मंडी कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति से संबंधित समस्याओं से लोगों को काफी राहत मिलेगी।

विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रही है और लुधियाना दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में भी विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

बाद में, कंगनवाल स्थित 66 केवी उप-स्टेशन के अंतर्गत 11 केवी ग्रीन फीडर, 11 केवी कैलाश इस्पात फीडर और 11 केवी दशमेश फीडर भी चालू किए गए। लगभग 85 लाख रुपये की लागत से बने इन फीडरों से जुड़े क्षेत्रों को काफी राहत मिलेगी।

इस मौके पर गुरनामदीप सिंह सेखों (एडिशनल एसई), इंजी. सहित बिजली बोर्ड के अधिकारी मौजूद थे। अमित कुमार धवन (एईई टेक.), इंजी. अश्वनी कुमार (जेई) एवं इंजी. राहुल पटेलिया (जेई) भी उपस्थित थे।