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लुधियाना के कारोबारी से 1 करोड़ की फिरौती की मांग; विदेशी नंबर से आई जान से मारने की धमकी

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला शहर के पॉश इलाके सराबभा नगर से सामने आया है, जहाँ एक कारोबारी को विदेशी नंबर से कॉल कर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है।

विदेशी नंबर से आया कॉल और मैसेज: शिकायतकर्ता गुरप्रीत सिंह ने पुलिस को बताया कि 10 फरवरी की शाम करीब 6:50 बजे उनके मोबाइल पर एक विदेशी नंबर (+1-619-606-0307) से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल कटने के तुरंत बाद उसी नंबर से एक मैसेज आया, जिसमें स्पष्ट रूप से 1 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। आरोपी ने चेतावनी दी है कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो कारोबारी और उसके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

दहशत में परिवार, पुलिस ने शुरू की जांच : गुरप्रीत सिंह, जो पहले वाटर प्लांट चलाते थे, वर्तमान में लुधियाना में अकेले रहते हैं जबकि उनका परिवार विदेश में है। इस धमकी के बाद पीड़ित परिवार और इलाके में दहशत का माहौल है।

सराबभा नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल इसकी गहनता से जांच कर रही है। पुलिस इस पहलू पर काम कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर है या किसी शरारती तत्व ने विदेशी वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल किया है।

लुधियाना सिविल हॉस्पिटल से पुलिस को चकमा देकर कैदी फरार, ओर फिर…

पंजाब डेस्क: लुधियाना सिविल हॉस्पिटल में सोमवार को उस समय भगदड़ मच गई जब एक कैदी पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। यह कैदी बोस्टल जेल में बंद था और उसे मेडिकल जांच के लिए हॉस्पिटल लाया गया था।

भीड़ का फायदा उठाकर भागा: रीडर ब्रांच SSP ऑफिस खन्ना में तैनात ASI हरभजन सिंह ने बताया कि वह और उनकी टीम कुल 6 कैदियों को मेडिकल जांच के लिए हॉस्पिटल लाए थे। जब पुलिस वाले एक कैदी को इलाज के लिए ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के पास ले जा रहे थे, तो हॉस्पिटल में मरीजों की भारी भीड़ थी। इसी भीड़ का फायदा उठाकर कैदी ने चालाकी से हथकड़ी से अपना हाथ निकाला और मौके से फरार हो गया।

पुलिस एक्शन और केस दर्ज: कैदी के भागने की खबर मिलते ही पुलिस डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए फरार कैदी की तलाश में जगह-जगह रेड शुरू कर दी है। ASI हरभजन सिंह के बयानों के आधार पर, आरोपी के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 262 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि पुलिस कस्टडी से कैदियों के भागने की घटनाओं को अक्सर सालाना रिपोर्ट में जेलब्रेक या कैदी भागने की कैटेगरी में रखा जाता है।