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ईरान युद्द और होर्मुज स्ट्रेट बढ़ते खतरे के बाद खाड़ी देश तेल निर्यात के लिए कर रहे है नए रस्ते तैयार

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

ईरान-होर्मुज संकट के बीच खाड़ी देशों ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों पर तेज किया काम, अरबों डॉलर के निवेश की तैयारी

ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच खाड़ी देशों ने ऊर्जा निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इराक, ओमान और कुवैत तेल एवं गैस आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नई पाइपलाइन परियोजनाओं, रेल कॉरिडोर और विशाल ऊर्जा भंडारण केंद्रों में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य किसी कारणवश बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए खाड़ी देश अपनी निर्यात व्यवस्था को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

होर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन करोड़ों बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। दशकों से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल निर्यात इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशिया, यूरोप और अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंचता रहा है।

हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसके चलते क्षेत्र के देशों ने वैकल्पिक बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

यूएई की नई वेस्ट-टू-ईस्ट पाइपलाइन योजना

संयुक्त अरब अमीरात ने अबू धाबी से फुजैरा तक नई वेस्ट-टू-ईस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन परियोजना को गति दी है। फुजैरा बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, जिससे तेल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यूएई की तेल निर्यात क्षमता वर्ष 2027 तक लगभग दोगुनी हो सकती है। इसके अतिरिक्त यूएई ऐसी नई पाइपलाइन पर भी विचार कर रहा है, जिसके माध्यम से केवल कच्चा तेल ही नहीं बल्कि पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन जैसे परिष्कृत उत्पादों का भी परिवहन किया जा सके।

कुवैत-सऊदी-यूएई ऊर्जा कॉरिडोर पर चर्चा

कुवैत, सऊदी अरब और यूएई के बीच एक संभावित पाइपलाइन कॉरिडोर पर भी बातचीत जारी है। इस परियोजना का उद्देश्य कुवैत के तेल को पाइपलाइन के माध्यम से सऊदी अरब या यूएई के बंदरगाहों तक पहुंचाना है, जहां से उसे वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जा सके।

हालांकि परियोजना का अंतिम मार्ग अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन इसे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इराक तैयार कर रहा नए निर्यात मार्ग

इराक भी होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक निर्यात नेटवर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत बसरा से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह तक एक नई पाइपलाइन प्रस्तावित है, जिसकी क्षमता लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है।

इसके अलावा इराक बसरा से ओमान के दुक्म बंदरगाह तक एक अन्य पाइपलाइन विकल्प पर भी विचार कर रहा है। यह मार्ग इराकी तेल को सीधे समुद्री निर्यात केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करेगा। साथ ही, इराक और तुर्किये के बीच मौजूद किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को भी पुनर्जीवित और आधुनिक बनाने का कार्य जारी है।

ओमान बन सकता है क्षेत्रीय ऊर्जा हब

ओमान अपने रणनीतिक बंदरगाहों को तेल और गैस भंडारण तथा निर्यात के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। कुवैत और ओमान के बीच होर्मुज के बाहर नई स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करने को लेकर भी चर्चा चल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं सफल होती हैं तो संकट की स्थिति में खाड़ी देशों को निर्यात जारी रखने के लिए मजबूत वैकल्पिक आधार मिल सकेगा।

गैस परिवहन के नए विकल्पों की तलाश

प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में अभी किसी नई परियोजना की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लंबे समय से प्रस्तावित गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर गंभीर चर्चा चल रही है। यह रेल नेटवर्क पेट्रोलियम उत्पादों और ऊर्जा सामग्री के परिवहन में सहायक हो सकता है।

इसके अलावा कतर से सऊदी अरब, जॉर्डन और तुर्किये तक गैस पाइपलाइन विकसित करने के विचार पर भी चर्चा जारी है। यदि यह परियोजना साकार होती है तो खाड़ी क्षेत्र की गैस सीधे यूरोपीय बाजारों तक पहुंच सकेगी।

ऊर्जा सुरक्षा बना प्रमुख लक्ष्य

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों का मुख्य उद्देश्य ऐसा बहु-आयामी नेटवर्क तैयार करना है, जो किसी भी भू-राजनीतिक संकट के दौरान तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित न होने दे। इसके लिए पाइपलाइन, रेल नेटवर्क, भंडारण सुविधाएं और वैकल्पिक बंदरगाहों का विकास तेजी से किया जा रहा है।

आने वाले वर्षों में खाड़ी क्षेत्र में और भी नई पाइपलाइन तथा परिवहन परियोजनाओं की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी अधिक स्थिरता मिल सकती है।