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एम्स बठिंडा के दीक्षांत समारोह में बोले जेपी नड्डा, ‘स्वस्थ भारत से ही बनेगा विकसित भारत’

दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की आबादी स्वस्थ और उत्पादक होगी।

अपने संबोधन में नड्डा ने एम्स बठिंडा की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी और 600 आईपीडी मरीजों को सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संस्थान आसपास के 59 गांवों में नियमित आयुष्मान स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है, जहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच की जाती है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब स्वास्थ्य सेवाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोकथाम, पुनर्वास और बुजुर्गों की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नड्डा ने बताया कि देशभर में 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों लोगों की कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की जांच की जा चुकी है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो चुकी है। मेडिकल सीटों में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और सरकार अगले पांच वर्षों में 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एम्स बठिंडा में अत्याधुनिक पीईटी-सीटी सुविधा, दूसरी हाई एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर इकाई, बर्न आईसीयू, बाल विकास एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (सीडीईआईसी) तथा जिम एवं वेलनेस सेंटर का उद्घाटन भी किया। इन सुविधाओं से कैंसर उपचार, गंभीर मरीजों की देखभाल और बच्चों के स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

पीएम मोदी ने 594 किमी लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन

दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिलें में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्‍होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तेज गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।


इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए पीएम ने कहा कि लगभग 600 किमी लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।


एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।


अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए मोदी ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह राज्‍य भविष्‍य की एआई आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में अग्रणी बन रहा है।


उन्‍होंने राज्‍य में कनेक्टिविटी के व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें सं‍चालित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्‍होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्‍लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।


उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्‍य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्‍यवस्‍था एक मिसाल बन गई है। मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।


भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।


गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्‍तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब- विकसित भारत के संकल्प के साथ” विषय-वस्‍तु पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

केंद्र और राज्य सरकारें तीन दिवसीय शिविर में सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करेंगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में चिंतन शिविर की अध्यक्षता करेंगे

शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्‍माइल ऐप्स सहित कई प्रमुख ऐप्स लॉन्च किए जाएंगे
चंडीगढ़, 23 अप्रैल, 2026: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब– विकसित भारत @2047” विषय-वस्‍तु पर तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। यह विषय-वस्‍तु अमृत काल और विकसित भारत के विजन के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिए पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्‍माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्‍टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्‍यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।

प्रत्येक समूह कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा नवोन्‍मेषी समाधानों को साझा करेगा। समूह निर्धारित समयसीमाओं के साथ अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है ताकि चर्चाएं संरचित, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख रहें।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्‍मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। समापन दिवस पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें प्रमुख परिणामों और भविष्‍य की रणनीति को साझा किया जाएगा।