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चिंतन शिविर: साझा दृष्टिकोण के ज़रिए भारत में खेलों के भविष्य को दिशा देना

श्री पुलेला गोपीचंद


दो चिंतन शिविरों का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त करने के बाद, मैं भरोसे के साथ कह
​​सकता हूँ कि यह आज भारतीय खेल जगत की सबसे सामयिक और असरदार पहलों में से
एक है। हम अपने राष्ट्र की खेल यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, एक ऐसा मोड़ जहाँ इरादा,
निवेश और प्रेरणा अभूतपूर्व रूप से एक साथ मिल रहे हैं।
पिछले एक दशक में, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत में खेल हाशिये से मुख्यधारा में आ गया
है। इसके महत्व के प्रति भी साफ तौर पर राष्ट्रीय जागरूकता देखी जा सकती है, न केवल एक
प्रतिस्पर्धी गतिविधि के रूप में, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव के साधन के रूप
में भी। आज, हम एक विशाल और विविध तंत्र देख रहे हैं, जहां राज्य सरकारें, गैर-सरकारी
संगठन, निगम, संघ और ज़मीनी स्तर के संस्थान सभी मिलकर खेलों के विकास में सक्रिय रूप
से योगदान दे रहे हैं।
चिंतन शिविर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाता
है। खेल अपने आप में कई क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जिनमें विनिर्माण, मनोरंजन, फिटनेस, मीडिया
और शिक्षा शामिल हैं। यह शिविर इन सभी क्षेत्रों को एक साथ लाने में मदद करता है, जिससे
एक साझा दृष्टिकोण बनता है, जो दीर्घकालिक सफलता के लिए बेहद ज़रुरी है। यह देश के
सामूहिक दृष्टिकोण को सामने लाता है और साथ ही विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को
प्रदर्शित करता है, जिससे अनुकरण और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलता है।
चिंतन शिविर महज एक सम्मेलन से कहीं बढ़कर, एक शिक्षण तंत्र है। यह इसमें शामिल होने
वाले लोगों को विचारों का आदान-प्रदान करने, चुनौतियों को समझने और मिलकर समाधान
विकसित करने का अवसर देता है। यह एक शक्तिशाली प्रेरक के रूप में भी काम करता है,

सफलता की तमाम कहानियों को सामने लाता है और इस विचार को और पुख्ता करता है कि
भारत में खेल महज़ विशिष्ट पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भागीदारी, समावेशिता
और राष्ट्र निर्माण भी शामिल है।
फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन और साइक्लिंग
प्रतियोगिताओं जैसी सामुदायिक गतिविधियों ने खेल के प्रति हमारे नज़रिए को नया रूप दिया
है। आज के वक्त में जोर “सभी के लिए खेल” के साथ-साथ, उच्चतम स्तर पर उत्कृष्टता पर
है। पदक जीतने की आकांक्षाएं और व्यापक भागीदारी अब अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं, बल्कि वे
एक ही प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
श्रीनगर में शिविर का आयोजन करने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस शहर की शांत
सुंदरता न केवल खेलों की विचारधारा के लिए एक मनोरम पृष्ठभूमि प्रदान करती है, बल्कि शांत
चिंतन का भाव भी देती है, जो सार्थक संवाद के लिए बेहद ज़रुरी है।
इस चिंतन शिविर का एक अहम केंद्र बिंदु श्रीनगर खेल संकल्प को अपनाना था। यह संकल्प
महज़ एक आशय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह एक एकीकृत ढांचा है, जो भारतीय खेल जगत
के सभी हितधारकों की आकांक्षाओं को एक साथ बांधता है। साझा लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और
जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करके, यह एक ऐसा रोडमैप तैयार करता है, जो विखंडन
के बजाय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
श्रीनगर खेल संकल्प की असली ताकत विभिन्न भागीदारों—सरकारों, संघों, निजी क्षेत्र और
नागरिक समाज को एक मंच पर लाने की क्षमता में निहित है। यह इस विचारधारा को और
पुख्ता करता है कि भारत के खेल जगत का उत्थान अलग-थलग प्रयासों से नहीं हो सकता।
इसके बजाय, इसे एक समन्वित, सहयोगात्मक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए, जहां
संसाधनों, ज्ञान और विशेषज्ञता को एक साथ लाया जाए।
भारत को 2036 तक ओलंपिक खेलों में शीर्ष 10 देशों में शामिल होने की अपनी दीर्घकालिक
महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए यह समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व स्तरीय एथलीट
तैयार करने के लिए न केवल प्रतिभा की ज़रुरत होती है, बल्कि एक सुचारू तंत्र की भी
आवश्यकता होती है, जिसमें जमीनी स्तर पर पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट
कोचिंग, प्रतिस्पर्धा का अनुभव और निरंतर वित्तीय एवं संस्थागत समर्थन शामिल हैं। संकल्प वही
रणनीतिक कड़ी है, जो इन सभी तत्वों को एक सुसंगत प्रणाली में जोड़ सकता है।

इन वार्ताओं से जो बात सबसे अधिक उभरकर सामने आई है, वह है इस व्यवस्था में मौजूद
आशावाद। सभी का यह मानना ​​है कि भारत का खेल भविष्य उज्ज्वल है और सहयोग से हम
एक सशक्त, समावेशी और उच्च प्रदर्शन वाली खेल संस्कृति का निर्माण कर सकते हैं।
चिंतन शिविर कई मायनों में एक अनूठा प्रयोग है, लेकिन यह पहले से ही सफल साबित हो रहा
है। यह संवाद, समन्वय और आपसी समझ के महत्व को दर्शाता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण
देश के लिए, ऐसे मंच न केवल लाभकारी हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं।
अगर हम वैश्विक खेल मंच पर अपनी महत्वाकांक्षाओं को सही मायने में साकार करना चाहते हैं,
तो इन संवादों का जारी रहना और इन्हें सामूहिक कार्रवाई से मदद मिलना भी ज़रुरी है। श्रीनगर
खेल संकल्प हमें वह दिशा प्रदान करता है। चिंतन शिविर हमें वह मंच प्रदान करता है। ये दोनों
मिलकर भारत को अपनी खेल संबंधी आकांक्षाओं को स्थायी ओलंपिक सफलता में बदलने के
लिए एक सशक्त आधार प्रदान करते हैं।
(लेखक भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच हैं)

अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026: 50 दिन पहले 6 हजार लोगों ने भुजंगासन कर बनाया एशिया रिकॉर्ड

हैदराबाद/सत्ता संदेश

मोतियों की नगरी हैदराबाद में योग महोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य आयोजन हुआ जिसमें हजारों उत्साही लोग एकत्रित हुए। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के मुख्य आयोजन से 50 दिन पहले के कार्यक्रम से जुड़ा था। आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शांत आध्यात्मिक केंद्र, कान्हा शांति वनम में हुआ।

कान्हा शांति वनम में 6000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन का अभ्यास किया जिससे एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना और यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई क्योंकि इस आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में एक साथ आसन करने वाले सबसे बड़े समूह के रूप में दर्ज किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी.किशन रेड्डी उपस्थित थे। मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत को 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और अनुशासित समाज का निर्माण करना होगा। योग तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली और प्रदूषण जैसी आधुनिक चुनौतियों का व्यावहारिक और किफायती समाधान प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पीएम मोदी के नेतृत्व में योग समग्र कल्याण के लिए एक वैश्विक आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है।”

योग महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण सामान्य योग प्रणाली का सामूहिक प्रदर्शन था। सत्र का नेतृत्व एमडीएनआईवाई के निदेशक डॉ. काशीनाथ समागंडी ने एमडीएनआईवाई के योग प्रशिक्षकों के साथ मिलकर किया। सीवाईपी अभ्यास के बाद दाजी द्वारा हार्टफुलनेस मेडिटेशन सत्र का संचालन किया गया।

कजाकिस्तान, लेसोथो, बुल्गारिया, क्यूबा, ​​नामीबिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित 20 से अधिक देशों के दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों ने इस योग कार्यक्रम में भाग लिया, जो योग के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

कान्हा शांति वनम में आयोजित योग महोत्सव, अतंर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जो योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और सतत जीवन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।