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पीएम मोदी ने चंडीगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन, चंडीगढ़ वासियों को दी बधाई

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

गुलाब चंद कटारिया, केंद्र में मेरे सहयोगी जेपी नड्डा , अश्विनी वैष्णव जीसंसद में मेरे साथी मनीष तिवारी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।

आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।

चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।

बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।

यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।

जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।

मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।

स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।

स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।

ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है।

गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।

हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।

हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।

हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।

रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

PMSMA का एक दशक: मैटरनल हेल्थ में बदलाव और सुरक्षित मदरहुड की ओर भारत की यात्रा को तेज़ करना

हर सुरक्षित प्रेग्नेंसी देश की महिलाओं के प्रति कमिटमेंट को दिखाती है। हमारे देश में हर साल लगभग 29 मिलियन प्रेग्नेंसी होती हैं। इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षित मदरहुड पक्का करने के लिए मज़बूत हेल्थ सिस्टम, लगातार पॉलिटिकल कमिटमेंट, समय पर दखल और अच्छी हेल्थ सर्विस तक सबके लिए बराबर पहुँच की ज़रूरत होती है।

देश में पिछले दशक में मैटरनल डेथ में काफ़ी कमी आई है। यह सबसे बड़ी पब्लिक हेल्थ अचीवमेंट्स में से एक है। इस प्रोग्रेस की नींव मैटरनल हेल्थ में लगातार इन्वेस्टमेंट, सर्विस डिलीवरी सिस्टम को मज़बूत करना और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन है। हम यह पक्का करने के लिए कमिटेड हैं कि हर महिला को उसकी प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी केयर मिले। इस बदलाव के सेंटर में प्रधानमंत्री सुरक्षित मैटरनल अभियान (PMSMA) है। यह कैंपेन पिछले 10 सालों से पूरे देश में सुरक्षित मदरहुड को बढ़ावा दे रहा है।

PMSMA माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक विज़न है जिसे 9 जून 2016 को लॉन्च किया गया था। यह प्रेग्नेंसी के दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान हर महीने की नौवीं तारीख को सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को मुफ़्त, पूरी और अच्छी एंटीनेटल केयर सर्विस देने के लिए एक देशव्यापी कैंपेन है। हर महीने के नौवें दिन को चुनने का एक गहरा महत्व है। प्रेग्नेंसी नौ कीमती महीनों का सफ़र है। इनमें से हर महीना नई उम्मीदें, अपेक्षाएं और ज़िम्मेदारियां लेकर आता है। हर महीने के नौवें दिन को मां की सेहत को समर्पित करके, PMSMA हमें याद दिलाता है कि हर प्रेग्नेंसी को एक स्वस्थ बच्चे के सुरक्षित आने तक पूरे नौ महीनों तक लगातार देखभाल, निगरानी और सपोर्ट की ज़रूरत होती है।

मैटरनल हेल्थ का सबसे ज़रूरी सबक यह है कि कोई भी प्रेग्नेंसी पूरी तरह से रिस्क-फ्री नहीं होती। आज जो प्रेग्नेंसी नॉर्मल लगती है, कल उसमें गंभीर कॉम्प्लिकेशन हो सकती हैं। PMSMA मानता है कि कोई भी प्रेग्नेंसी बिना किसी वॉर्निंग के हाई-रिस्क हो सकती है। इसलिए, यह कैंपेन रिस्क की जल्दी पहचान, करीबी मॉनिटरिंग और समय पर गाइडेंस और मैनेजमेंट पक्का करने का एक आसान लेकिन बदलाव लाने वाला तरीका अपनाता है। हर पहचानी गई हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी माँ की जान बचाने और प्रीमैच्योर बर्थ, बच्चे में कॉम्प्लिकेशन या ज़िंदगी भर की डिसेबिलिटी को रोकने का एक मौका है। यह कैंपेन कॉम्प्लिकेशन का इलाज करने के बजाय उन्हें रोकने पर फोकस करता है। इस तरह, इसने भारत के मैटरनल हेल्थ केयर सिस्टम को मज़बूत किया है और करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी को सुरक्षित बनाया है।

PMSMA की एक खास बात यह है कि यह एक तय दिन पर एक्सपर्ट की देखरेख में एंटीनेटल केयर पक्का करता है। इससे पूरे देश में मैटरनल हेल्थ सर्विसेज़ में प्रेडिक्टेबिलिटी, अकाउंटेबिलिटी और कंटिन्यूटी आई है। इस कैंपेन के तहत, प्रेग्नेंट महिलाओं की लगभग 25 हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी कंडीशन के लिए स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज, इन्फेक्शन और दूसरी कॉम्प्लिकेशन की स्क्रीनिंग शामिल है, जिनका अगर पता न चले, तो वे माँ और बच्चे के लिए जानलेवा हो सकती हैं।

क्योंकि इस बात के सबूत हैं कि PMSMA के तहत रेगुलर एंटीनेटल केयर के बाद भी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में किसी स्पेशलिस्ट/डॉक्टर द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की ज़रूरत होती है, इसलिए भारत सरकार ने 2022 में ‘एक्सटेंडेड PMSMA’ (e-PMSMA) लॉन्च करके इस प्रोग्राम को और बेहतर बनाया है।

e-PMSMA के तहत, हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं को रेगुलर PMSMA स्क्रीनिंग के अलावा एक्स्ट्रा फॉलो-अप विज़िट भी दी जाती हैं ताकि सुरक्षित डिलीवरी तक समय पर देखभाल पक्की हो सके। इस पहल के तहत, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की नाम-आधारित ट्रैकिंग शुरू की गई है और डिलीवरी के 45 दिन बाद तक फॉलो-अप काउंसलिंग के लिए इसे बेहतर बनाया गया है, ताकि यह पक्का हो सके कि कमज़ोर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के तुरंत बाद लगातार देखभाल मिले। एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग के लिए हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ जाने वाले एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ वर्कर्स (ASHA वर्कर्स) के लिए इंसेंटिव के प्रोविज़न ने रेफरल और देखभाल की कंटिन्यूटी के नियमों को और मज़बूत किया है।

इम्प्लीमेंटेशन, मॉनिटरिंग और अकाउंटेबिलिटी को और बेहतर बनाने के लिए, भारत सरकार ने एक सेंट्रलाइज़्ड PMSMA डिजिटल पोर्टल बनाया है, जो पूरे देश में प्रोग्राम मैनेजमेंट का मुख्य आधार है।

यह पोर्टल सर्विस डिलीवरी की रियल-टाइम रिपोर्टिंग, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की नाम-बेस्ड ट्रैकिंग, प्रोग्राम के परफॉर्मेंस की मॉनिटरिंग और नेशनल और स्टेट लेवल पर सबूतों के आधार पर फैसले लेने में मदद करता है। खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म प्राइवेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स और कम्युनिटी वॉलंटियर्स को भी प्रोग्राम में योगदान देने में मदद करता है, जिससे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘जन भागीदारी’ के विजन को और मजबूती मिलती है, जो PMSMA की मूल भावना है।

PMSMA की सफलता भारत के मैटरनल हेल्थ सिस्टम में अलग-अलग स्कीमों के बीच तालमेल के महत्व को भी दिखाती है। जननी सुरक्षा योजना (JSY), जननी शिशु सुरक्षा प्रोग्राम (JSSK), सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN), नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), आयुष्मान भारत और मिडवाइफ सर्विसेज़, ऑप्टिमाइजेशन ऑफ पोस्टनेटल केयर (OPNC) जैसी पहलों के साथ मिलकर काम करते हुए, PMSMA ने प्रेग्नेंसी, डिलीवरी और पोस्टनेटल पीरियड के दौरान महिलाओं की देखभाल का एक मजबूत कंटिन्यूअम बनाने में अहम योगदान दिया है। इस बदलाव के केंद्र में भारत के फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर हैं, जैसे एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ वर्कर (ASHA वर्कर), आंगनवाड़ी वर्कर, असिस्टेंट नर्स मिडवाइफ (ANM), कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, नर्स, मिडवाइफ और मेडिकल ऑफिसर। कम्युनिटी में हिस्सा लेने, काउंसलिंग, टेस्टिंग, रेफरल और फॉलो-अप कंसल्टेशन में उनकी लगातार कोशिशों से यह पक्का हुआ कि मैटरनल हेल्थ सर्विस देश के सबसे दूर-दराज और पिछड़े इलाकों की महिलाओं तक भी पहुंचे।

इन मिलकर की गई कोशिशों का असर नेशनल हेल्थ नतीजों में तेज़ी से देखा जा रहा है। साल 2022-24 के लिए लेटेस्ट सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के अनुमानों के मुताबिक, भारत का मैटरनल मॉर्टेलिटी रेश्यो (MMR) घटकर 1,00,000 जीवित जन्मों पर 87 हो गया है। इससे देश 2030 तक मैटरनल मॉर्टेलिटी रेश्यो को 70 प्रति लाख जीवित जन्मों से कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल को पाने के बहुत करीब आ गया है।
ये सुधार मैटरनल हेल्थ से जुड़े बड़े इंडिकेटर्स में भी दिख रहे हैं। हाल ही में जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6, 2023-24) के अनुसार, इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी (इंस्टीट्यूशन/हॉस्पिटल में होने वाली डिलीवरी) की दर NFHS-5 (2019-21) में 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गई है, जबकि एंटीनेटल केयर का कवरेज NFHS-5 में 92.6% से बढ़कर NFHS-6 में 95.9% हो गया है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि पहले के मुकाबले अब बहुत ज़्यादा महिलाएं ज़रूरी मैटरनल हेल्थ सर्विसेज़ का फ़ायदा उठा रही हैं, जिससे कॉम्प्लीकेशंस का जल्दी पता लगाने और समय पर सही इलाज के अच्छे मौके मिल रहे हैं। दुनिया में नए जन्मे बच्चों के सबसे बड़े ग्रुप में से एक को मैनेज करते हुए यह तरक्की हासिल की गई है।

कर्ण भारत के मैटरनल हेल्थ प्रोग्राम के स्केल और असर को दिखाते हैं।
पिछले एक दशक में PMSMA का दायरा और पहुंच पहले कभी नहीं देखी गई। 2016 में इसके लॉन्च के बाद से, इस प्रोग्राम के तहत देश भर में 75 मिलियन से ज़्यादा एंटीनेटल केयर विज़िट की गई हैं। खास बात यह है कि PMSMA ने 11.7 करोड़ से ज़्यादा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करने में मदद की है।
ये उपलब्धियां सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं। ये उन लाखों मांओं को दिखाती हैं जिनकी हेल्थ से जुड़ी दिक्कतों का जल्दी पता चल गया, जिनकी प्रेग्नेंसी पर करीब से नज़र रखी गई और जिनकी जान और उनके नए जन्मे बच्चों की जान अच्छी क्वालिटी की हेल्थ सर्विस समय पर मिलने से बच गई।
हर मां के लिए, प्रेग्नेंसी उम्मीद का एक नया सफ़र है। हर परिवार के लिए, यह एक नई शुरुआत का वादा है। फिर भी, दुनिया भर में कई महिलाओं के लिए, प्रेग्नेंसी ऐसे रिस्क पैदा करती है जिनसे बचा जा सकता है। PMSMA एक आसान लेकिन दमदार सोच के साथ शुरू हुआ कि बच्चे को जन्म देते समय किसी भी महिला की जान न जाए और किसी भी परिवार को प्रेग्नेंसी से जुड़ी किसी दिक्कत की वजह से मां न खोनी पड़े। देश में PMSMA के दस साल पूरे होने पर, यह सिर्फ़ एक पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम की सफलता नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज़्यादा है। हम लाखों सुरक्षित प्रेग्नेंसी, ज़्यादा सेहतमंद मांओं, नए जन्मे बच्चों के लिए मज़बूत शुरुआत और हेल्थ वर्कर्स, कम्युनिटीज़ और परिवारों की मिली-जुली कोशिशों का जश्न मनाते हैं, जिन्होंने इस बदलाव में योगदान दिया है।

आगे का रास्ता साफ़ है। हमें अच्छी क्वालिटी की एंटीनेटल केयर, ज़्यादा रिस्क वाली प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग, मिडवाइफरी से जुड़ी सर्विस, डिजिटल इनोवेशन और मैटरनल हेल्थ केयर तक सही और बराबर पहुंच को मज़बूत करना जारी रखना होगा। PMSMA के अनुभव ने एक बार फिर एक सीधी सी बात साबित कर दी है: जब हर प्रेग्नेंसी पर नज़र रखी जाती है, हर रिस्क की जल्दी पहचान हो जाती है और हर महिला को समय पर, इज्ज़तदार और अच्छी क्वालिटी की देखभाल मिलती है, तो बच्चे के जन्म के दौरान मां की मौत को रोका जा सकता है, यह ज़रूरी नहीं है।
इसलिए, PMSMA के दस साल पूरे होना सिर्फ़ एक इवेंट का जश्न नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि जब पॉलिटिकल कमिटमेंट, मज़बूत वर्कर्स, डिजिटल इनोवेशन, पब्लिक पार्टिसिपेशन और अच्छी क्वालिटी की हेल्थ सर्विस एक ही लक्ष्य – ‘हर मां को सुरक्षित और हर नए जन्मे बच्चे को स्वस्थ रखना’ के लिए मिलकर काम करते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है। (लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं)

भारतीय स्वास्थ्य प्राधिकरण-इंडिया एआई मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस : 8–9 मई को AB PM-JAY हैकाथॉन फिनाले

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण 8-9 मई को बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के एवी रामाराव सभागार में एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन के भव्य फिनाले और शोकेस का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम इंडियाएआई मिशन और आईआईएससी बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

देशव्यापी हैकाथॉन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। यह उत्साहपूर्ण भागीदारी भारत की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने में नवप्रवर्तकों, प्रौद्योगिकीविदों और शोधकर्ताओं की बढ़ती रुचि को रेखांकित करती है।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य दावों के प्रबंधन के अगले चरण को आकार देने वाले अत्याधुनिक नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए एक गतिशील मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है। फाइनलिस्ट टीमें उन्नत एआई/एमएल-आधारित समाधान प्रस्तुत करेंगी जो नैदानिक ​​दस्तावेज़ वर्गीकरण और एसटीजीएस के अनुपालन, रेडियोलॉजिकल छवि-आधारित सत्यापन और जाली या एआई-जनित चिकित्सा दस्तावेजों का पता लगाने जैसे महत्वपूर्ण समस्या क्षेत्रों को संबोधित करते हैं।

“दावों के निपटारे का भविष्य” शीर्षक से एबी पीएम-जेएवाई कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, अंतरसंचालनीय डिजिटल प्लेटफार्मों और डेटा-संचालित शासन ढांचे के एकीकरण के माध्यम से एक तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह दावा प्रणाली को कैसे सक्षम बनाया जाए इस विषय पर भी एक अन्य पैनल चर्चा की जाएगी।

लगभग 40,000 दावों का प्रतिदिन 1,900 से अधिक उपचार पैकेजों के तहत निपटान करने वाली एबी पीएम-जेएवाई विश्व स्तर पर सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है और दावा प्रबंधन के लिए एआई-आधारित दृष्टिकोण अपनाने में अग्रणी है। हैकाथॉन शोकेस, एनएचए द्वारा चिकित्सा पैकेजों और विशिष्टताओं की एक विस्तृत श्रृंखला में स्वतः निर्णय लेने की क्षमताओं का विस्तार करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पीजीआईएमईआर के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, जेपी नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

जेपी नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

जेपी नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

जेपी नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक एम्स और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का किया उद्घाटन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नवाचार और समावेशिता पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया: कहा, सर्वोत्तम प्रथाएं भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार दे रहीं हैं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में समग्र स्वास्थ्य सेवा की दिशा में हुए परिवर्तनकारी बदलावों का उल्‍लेख किया, अग्रिम पंक्ति सेवा वितरण और स्वास्थ्य परिणाम सुदृढ़ करने की पहल का शुभारंभ

आयुष्मान आरोग्य मंदिर निवारक देखभाल को सुदृढ़ बनाते हैं; केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पर जोर देते हुए मृत्यु दर और रोग भार में कमी का उल्लेख किया

मजबूत और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली स्‍थापित करने के लिए गैर-संचारी रोगों की उपचरात्‍मक प्रक्रिया मजबूत बनाना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का कार्यान्वयन बढ़ाना और अंतिम छोर तक प्रभावी स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केयर अभियान, डिजिटल स्वास्थ्य विस्तार और निवेश वृद्धि के माध्यम से हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा बदलाव का उल्‍लेख किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें दौर के निष्कर्षों में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर जेब से होने वाला औसत व्यय शून्य हो गया है, जिससे नि:शुल्‍क स्वास्थ्य सेवा पहुंच मजबूत हुई है:

10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहल आरंभ किए गए, जिनमें सर्वश्रेष्ठ अभ्यास संकलन, 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत और जननी पोर्टल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम दूसरा चरण शामिल हैं

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव की उपस्थिति में नवाचार एवं समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।

यह सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विशिष्ट नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथा प्रदर्शित करने का प्रमुख मंच है, जिसका उद्देश्य देश भर में समावेशी, सुलभ और सस्ते दर पर स्वास्थ्य सेवा विस्तारित करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में सम्मेलन की मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त करते हुए और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने में राज्य की सराहना की। श्री नड्डा ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दर्शाता है कि व्यावहारिक, जमीनी स्तर पर संचालित रणनीतियां सामूहिक रूप से प्रभावी और दायित्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दे सकती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर आरंभ किए गए पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए कामकाज सुगम बनाना, सेवा वितरण बेहतर बनाना और स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इनका लक्ष्य कुशल, एकीकृत और सेवा प्रदाताओं एवं लाभार्थियों दोनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील प्रणालियों को सक्षम बनाना है।

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्‍होंने कहा कि इस यात्रा में एक अहम पड़ाव उपचारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और समग्र स्वास्थ्य सेवा ढांचे की ओर बदलाव है। उन्होंने बताया कि 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, पर 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति से स्वास्थ्य सेवा के निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और उपशामक पहलुओं को शामिल कर उल्‍लेखनीय बदलाव आया है, जिससे अधिक समावेशी और जन-केंद्रित प्रणाली सुनिश्चित हुई है।

श्री नड्डा ने 1 लाख 85 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो अब करोड़ों के लिए प्राथमिक संपर्क केन्‍द्र के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को काफी मजबूत बनाया है, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा) जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की बड़े पैमाने पर जांच शामिल है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने समेकन और गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 50 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के तहत प्रमाणित किया गया है, फिर भी गुणवत्ता प्रमाणन को और अधिक बढ़ाने और लगातार बेहतर प्रदर्शन और सकारात्‍मक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए नियमित आकलन मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख स्वास्थ्य उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसवों (मान्यता प्राप्त चिकित्सा केंद्र-अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव) में 79 प्रतिशत से 89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है। उन्‍होंने कहा मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है और पिछले कई वर्षों से इसमें निरंतर प्रगति रही है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने हाल के वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी की है। उन्होंने रोग नियंत्रण में भी भारत की प्रगति का लेख किया। उन्‍होंने कहा कि विश्व की लगभग एक-छठीं जनसंख्या होने के बावजूद, भारत में वैश्विक मलेरिया के बोझ का केवल छोटा हिस्सा है। इसी प्रकार, भारत में तपेदिक के मामलों में वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गिरावट आई है और उपचार दायरा 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

श्री नड्डा ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जाना, 2015 में नवजात शिशुओं में होने वाले टिटनेस का उन्मूलन और ट्रेकोमा (बैक्टीरिया से होने वाला आंखों के अत्यंत संक्रामक संक्रमण है, का जन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय न होना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, भारत अब ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में काला-अजार के उन्मूलन की दिशा में अग्रसर है।

उभरती चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ बोझ की चर्चा की और प्रभावी जांच, समय पर निदान और निरंतर देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि देश भर में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग (निवारक स्वास्थ्य प्रक्रिया जिसके द्वारा रोग के कोई लक्षण न होने पर भी, किसी आबादी में बीमारी की संभावना या शुरुआती संकेतों का पता लगाया जाता है) की गई है, लेकिन अब समय पर अनुवर्ती कार्रवाई, उपचार और रेफरल तंत्र (रोगी को कम सुविधाओं वाले केंद्र से बेहतर विशेषज्ञों, संसाधनों या सेवाओं वाले उच्च केंद्र में भेजा जाना) सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

श्री नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बेहतर योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित जमीनी स्तर के अधिकारियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने उत्‍तरदायित्‍व और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समय पर निधियों के उपयोग, हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल और जन प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन सफलता का राज उनके प्रभावी और समयबद्ध उपयोग में निहित है। सुदृढ़ शासन, बेहतर संचार और अंतिम छोर तक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भारत के लिए सशक्त, समावेशी और भविष्योन्‍मुखी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़़ बनाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और आपसी ज्ञान को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में शिखर सम्मेलन के महत्व का उल्‍लेख किया

हरियाणा की पहल की चर्चा करते हुए, उन्होंने केयर अभियान की जानकारी दी, जिसके तहत 188 केंद्रों में मरीजों के परिवारों को घर पर देखभाल में सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने ई-संजीवनी माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य में राज्य की प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसके तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ने वाले प्रतिदिन लगभग 2 हजार टेलीकंसल्टेशन आयोजित किए जा रहे हैं।

श्री सैनी ने बताया कि हरियाणा ने अपने स्वास्थ्य बजट में 32.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो लगभग 14 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा बुनयादी ढांचे के विस्तारित किए जाने का भी उल्‍लेख किया, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 के 6 से बढ़कर अब 17 हो गई है और एमबीबीएस की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 पहुंच गई हैं।

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पर जोर देते हुए उन्होंने कि राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने सेवा वितरण में हासिल प्रमुख उपलब्धियों की भी चर्चा की, जिनमें सभी जिला अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग की स्थापना, आपातकालीन देखभाल के लिए 500 एम्बुलेंस के नेटवर्क और 22 जिला अस्पतालों में नि:शुल्‍क डायलिसिस सेवाएं (रक्त से हानिकारक विषाक्त पदार्थों, अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को साफ करती है) उपलब्ध कराना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने सबके लिए सुलभ, कम खर्च वाले और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मजबूत बनाने की लिए राज्य की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ बनाना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और नि:शुल्‍क दवाओं तक पहुंच में सुधार शामिल है।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के सहयोग के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कदम के रूप में ह्यूमन पेपिलोमावायरस टीकाकरण के कार्यान्वयन की भी चर्चा की। श्रीमती आरती सिंह राव ने राज्‍य का स्वास्थ्य बजट में 2014 के 2,640 करोड़ रुपये से बढ़कर 14 हजार करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया और बड़े पैमाने पर गैर-संचारी रोगों की जांच पर राज्य के केन्द्रित ध्‍यान की चर्चा की। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाने की हरियाणा की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित, संदर्भ-विशिष्ट समाधानों को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज है। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्‍लेख किया जो स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन सूचना प्रणाली, जननी और ई-संजीवनी जैसे प्लेटफार्मों पर आभा आईडी के एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिससे दक्षता में सुधार होता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

केन्द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने कहा कि स्वस्थ भारत पोर्टल कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही अंतरसंचालनीय मंच में शामिल कर अभिसरण की दिशा में बड़ा कदम है, जबकि जननी प्लेटफॉर्म वास्तविक समय निगरानी और डिजिटल एकीकरण द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल मजबूत बनाने में सहायक है।

17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्यों को जन भागीदारी और कार्यान्वयन मजबूत करने के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करती है। उन्होंने गैर-संक्रामक रोगों में हो रही वृद्धि से निपटने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का दूसरा चरण और बच्चों के लिए मधुमेह संबंधी दिशानिर्देश शीघ्र निदान और निरंतर देखभाल में सहायक होंगे।

स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में हुए सुधारों की भी चर्चा की। जिनमें 48 हजार से अधिक भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक-अनुरूप और 50 हजार से अधिक राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक-प्रमाणित सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही उन्‍होंने तपेदिक मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने अग्नि सुरक्षा ऑडिट (इमारत या कार्यस्थल में आग के खतरों से संबंधित व्यवस्थित और तकनीकी मूल्यांकन जिसमें अग्निशमन प्रणालियों की जांच करना, शॉर्ट सर्किट, ज्वलनशील सामग्री जैसे संभावित खतरों की पहचान और नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना), लू से निपटने के उपाय और रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के प्रयासों सहित मजबूत तैयारियों के उपायों को भी रेखांकित किया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के स्वास्थ्य पर घरेलू उपभोग के 80वें दौर के सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल के लिए जेब से होने वाला औसत व्यय अब शून्य है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए नि:शुल्‍क और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख पहल का शुभारंभ किया गया, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रतिरूपणीय नवाचारों पर सर्वोत्तम अभ्यास संकलन, 17वीं सामान्य समीक्षा मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण के साथ ही बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर एक मार्गदर्शन दस्तावेज शामिल हैं

17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट

(भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रमुख वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट

सीआरएम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक वार्षिक निगरानी गतिविधि है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और संबंधित प्रासंगिक कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन के लिए प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।

इस वर्ष, सीआरएम का 17वां चरण सत्रह राज्यों – आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आयोजित किया गया। यह व्यापक अभ्यास कॉमन रिव्यू मिशन प्रक्रिया की समावेशिता को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विभिन्न संदर्भों का प्रतिनिधित्व हो और देश भर में निगरानी में नवाचार शामिल किए जाएं। एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल कर मिशन उत्‍तरदायित्‍व बढ़ाता है, अंतर-शिक्षण को बढ़ावा देता है और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

स्वस्थ भारत पोर्टल

यह एक एकीकृत मंच है जिसे कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस पर प्राप्‍त करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें बार-बार लॉगिन करने और डेटा दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त की गई है जिससे यह पोर्टल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर प्रशासनिक बोझ में कमी लाकर सभी स्तरों पर सेवा वितरण में दक्षता बढ़ाता है।

आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और चिकित्सा अधिकारी सहित भारत के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी कार्यक्रम रिपोर्टिंग में कई अनुप्रयोगों के उपयोग में प्राय: काफी समय लगाते हैं। स्वस्थ भारत पोर्टल एकीकृत मंच प्रदान करके इस चुनौती का समाधान करता है, जिससे डेटा तक आसान पहुंच, उसका विश्लेषण और स्थानीय स्तर पर निगरानी और साक्ष्य-आधारित योजना के लिए उनका उपयोग संभव हो पाता है। यह पोर्टल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप है और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जिससे रोगी स्वास्थ्य अभिलेखों का निर्बाध और सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होता है। इसे व्यापक और अंतःसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने के लिए तैयार किया गया है, जो आगे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों के साथ एकीकृत होगा।

जननी पोर्टल

जननी – प्रसवपूर्व, प्रसव और नवजात शिशु की एकीकृत देखभाल की यात्रा – सेहत के साथ, देखभाल का हर कदम, हेतु एक सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ढांचे के अनुरूप है और इसे देश भर में प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य डेटा के विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। जननी गर्भावस्था से पूर्व, गर्भावस्था, प्रसव और बचपन तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाता है। यह एप्लिकेशन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों पर वास्तविक समय का उच्च-गुणवत्ता पूर्ण डेटा संग्रह करता है, जिससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों वाले बच्चों सहित कमजोर समूहों की शीघ्र पहचान करने और समय पर सहायता करायी जाती है। सेवा वितरण को डिजिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ एकीकृत कर जननी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों और नीति निर्माताओं दोनों को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को मजबूत करने, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति सशक्त बनाता है।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता टीम के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण इस आधार को सुदृढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न कार्यक्रम-आधारित प्रशिक्षणों को एक ही, संरचित और योग्यता-उन्मुख ढांचे में संयोजित कर यह पहल सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाती है और साथ ही अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाती है। यह उन्हें रोकथाम और प्रारंभिक पहचान से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक व्यापक देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाती है, जिससे लोगों को सही समय पर, उनके घरों के करीब, सही देखभाल सुनिश्‍चित होता है। भारत की तकनीकी प्रगति के अनुरूप, आई गॉट कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म निरंतर सीखने को सक्षम बनाएंगे, जिससे कार्यबल अधिक अनुकूलनीय और भविष्य अनुरूप तैयार हो सकेगा।

यह पहल दो महत्वपूर्ण मायनों में विश‍िष्‍ठ है। यह सामुदायिक कार्यबल की क्षमता मजबूत करती है ताकि वे सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और उच्च गुणवत्ता पूर्ण देखभाल प्रदान कर सकें। दूसरा, यह उन महिलाओं को सशक्त बनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। इस कार्यबल का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं, जिनमें आशा कार्यकर्ता, सहायक नर्स और दाई और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति के महत्व पर लगातार जोर दिया है , और यह पहल उस दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण है। अग्रिम पंक्ति में महिलाओं को शामिल कर भारत समुदायों में परिवर्तनकारी बदलाव ला रहा है।

एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों को समग्र, जन-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाएंगे, साथ ही समुदायों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच विश्वास मजबूत करेंगे। यह केवल प्रशिक्षण सुधार नहीं बल्कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण कदम है।

बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण और मार्गदर्शन दस्तावेज़

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण दिशानिर्देश 2013 के ढांचे से एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं, जो जन्मजात दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक विलंब – इन चार विषमताओं के दृष्टिकोण को सुदृढ़ और विस्तारित करते हैं। नए दिशानिर्देश बच्चों में उभरती हुई स्थितियों और गैर-संक्रामक रोगों सहित, बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएं

– अतिरिक्त जन्मजात स्थितियों, विकासात्मक और व्यवहार संबंधी चिंताओं और बचपन के गैर-संचारी रोगों को शामिल करते हुए विस्तारित दायरा
– बाल विकास संबंधी निगरानी, ​​बेहतर रेफरल प्रणाली और कार्यक्रम निगरानी के लिए सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म
– शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी सेवा वितरण तंत्रों को सुदृढ़ बनाना
– सामुदायिक जांच, सुविधाओं और दीर्घकालिक प्रबंधन के बीच मजबूत संबंधों के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को बढ़ाना

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम विश्व स्तर पर सबसे बड़े बाल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं।

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में तकनीकी सत्र, पैनल परिचर्चा और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण वित्तीय सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी सहित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार पोर्टल के द्वारा चयनित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा ज्ञानवर्धन और संभावित कार्यान्वयन हेतु प्रदर्शित किया जा रहा है।

जेपी नड्डा चंडीगढ़ में 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़/सत्ता संदेश
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में बेहतर और अनुकरणीय प्रथाओं तथा नवाचारों पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन 30 अप्रैल से 1 मई तक चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।


इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में किया जाएगा।


इस कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रबंधन के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।


राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, स्वास्थ्य मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई नवोन्मेषी और प्रभावशाली पद्धतियों को प्रदर्शित करना, मान्यता देना और उनका दस्तावेजीकरण करना है। यह आपसी ज्ञानवर्धन के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है और देश भर में सफल और व्यापक रूप से लागू किए जा सकते है। और आने वाले मॉडलों के अनुकरण को सुगम बनाता है। वार्षिक शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवोन्मेषी, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है, जिनसे स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।


2013 में अपनी स्थापना के बाद से, इस पहल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया है। शिखर सम्मेलन का 9वां संस्करण मार्च 2025 में पुरी में आयोजित किया गया था।


मौजूदा वर्ष के लिए, 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू हुई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार के माध्यम से अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों को प्रस्तुत किया। सभी प्रस्तुतियां मंत्रालय के संबंधित कार्यक्रम प्रभागों द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और अंक प्रदान किए गए। इन मूल्यांकनों के आधार पर, कार्यक्रम प्रभागों से प्राप्त सुझावों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहायक एवं निदेशक मंडल की अध्यक्षता में विस्तृत समीक्षा के बाद शिखर सम्मेलन के लिए कुल 13 मौखिक प्रस्तुतियां और 32 पोस्टर प्रस्तुतियां चयनित की गई हैं।


प्रस्तुतियों के अलावा, शिखर सम्मेलन में नवंबर 2025 में 17 राज्यों में आयोजित 17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट का प्रसार भी किया जाएगा। इस कार्य के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों, अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, विकास भागीदारों और मंत्रालय के सलाहकारों से युक्त 17 बहु-विषयक टीमों का गठन किया गया था। सीआरएम के निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के कामकाज में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं और भविष्य की नीति एवं कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेपों को दिशा देने में सहायक होंगे।


इस शिखर सम्मेलन में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों और सेवा वितरण प्रणालियों में सुधार जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित पूर्ण सत्र, विषयगत चर्चाएं और प्रदर्शनियां होंगी। ये प्रयास आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी प्रमुख पहलों के अनुरूप हैं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें सर्वे में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव और प्रगति उजागर

दिल्ली/सत्ता संदेश

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें दौर के घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्ष देश भर में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में महत्वपूर्ण वृद्धि को उजागर करते हैं, जो लक्षित सरकारी हस्तक्षेपों, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बीमा कवरेज में वृद्धि द्वारा समर्थित है।
देश भर के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को कवर करते हुए, सर्वेक्षण में 1,39,732 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया – जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 76,296 और शहरी क्षेत्रों में 63,436 परिवार शामिल थे – जिससे स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, सामर्थ्य और उपयोग के पैटर्न में ठोस, जमीनी स्तर की अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई।
एनएसओ के 80वें दौर के निष्कर्ष सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्षों से किए जा रहे सार्वजनिक निवेश में निरंतर वृद्धि पर आधारित हैं। बजट आवंटन में वृद्धि से प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है, मानव संसाधन मजबूत हुए हैं और निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित प्रमुख पहलों को बढ़ावा मिला है। सार्वजनिक व्यय में स्वास्थ्य को दी जाने वाली यह निरंतर प्राथमिकता देश भर में परिवारों पर स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तीय बोझ को कम करने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और वितरण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण रही है।
वर्ष 2025 में प्रति अस्पताल में भर्ती होने पर औसत चिकित्सा व्यय 11,285 रुपये दर्ज किया गया है, जो दर्शाता है कि देश में आधे से अधिक अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में अपेक्षाकृत कम खर्च होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल कुछ ही मामलों में अधिक खर्च के कारण औसत में वृद्धि देखी गई है। इससे पता चलता है कि अधिक खर्च व्यापक नहीं है, बल्कि विशेष उपचार की आवश्यकता वाले विशिष्ट मामलों तक ही सीमित है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती होने वाले आधे से अधिक मामलों में ओओपीई केवल 1,100 रुपये है। सरकार की 2015 में शुरू की गई मुफ्त दवा सेवा पहल और मुफ्त निदान पहल ने देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी लोगों को मुफ्त दवाएं और निदान सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। प्राथमिक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में आए इस महत्वपूर्ण बदलाव में देश भर में स्थित 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी योगदान है।
आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और विभिन्न राज्य योजनाओं सहित सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा कवरेज के तेजी से विस्तार के साथ वित्तीय जोखिम सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश में इन सरकारी स्वास्थ्य वित्तपोषित/बीमा योजनाओं के अंतर्गत आने वाली जनसंख्या का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 12.9 प्रतिशत से बढ़कर 45.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हो गया है, जो तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह स्वास्थ्य संबंधी भारी खर्चों से कमजोर आबादी की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सर्वेक्षण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति को भी दर्शाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव 2017-18 में 90.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 95.6 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी अवधि में यह 96.1 प्रतिशत से बढ़कर 97.8 प्रतिशत हो गए हैं। यह सरकार द्वारा गुणवत्ता आश्वासन, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग दो-तिहाई (66.8 प्रतिशत) प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत (लगभग आधा) है।

भारत के अंतिम छोर पर स्थित स्वास्थ्य एवं कल्याण इकोसिस्टम को मजबूत बनाना
  • श्री प्रतापराव जाधव

अब जबकि भारत सभी के लिए न्यायसंगत, समावेशी और समग्र स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमें एक मौलिक प्रश्न पूछना होगा: हम अंतिम गांव के अंतिम व्यक्ति तक सही समय पर गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचना कैसे सुनिश्चित करें?

इसका जवाब केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार या उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग में ही नहीं, बल्कि उन प्रणालियों को मजबूत करने में भी निहित है जो स्वाभाविक रूप से सुलभ, सस्ती और समुदायों के भरोसे पर खरे उतरते हों। इस संदर्भ में, होम्योपैथी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ-साथ एक मौन लेकिन शक्तिशाली ताकत के रूप में उभर रही है और जमीनी स्तर पर समग्र स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को बदल रही है।

हम यह दिखाई दे रहा है कि होम्योपैथी कैसे जनजातीय क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण कमियों को दूर कर रही है। इसके प्रभाव का पता केवल व्यापकता से ही नहीं, बल्कि सबसे अधिक जरूरत वाले स्थानों – यानी अंतिम छोर – तक पहुंचने की क्षमता से भी चल रहा है।

अब जबकि हर वर्ष 10 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ करीब है, यह इस बात पर विचार करने का एक सही मौका है कि यह प्रणाली केवल व्यक्तिगत कल्याण ही नहीं बल्कि समग्र कल्याण का एक ऐसा मॉडल बनाने में भी योगदान दे रही है जो किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और सामाजिक रूप से समावेशी हो। इस वर्ष विश्व होम्योपैथी दिवस की थीम “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है।

18वीं शताब्दी में सैमुअल हैनिमैन द्वारा विकसित और 19वीं शताब्दी में भारत लाई गई, होम्योपैथी “सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंचर” यानी “समान से समान का उपचार” के सिद्धांत पर आधारित है। दशकों से एक समग्र और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए, यह भारत की बहुआयामी स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रणाली का एक अभिन्न अंग बन गई है।

जमीनी स्तर पर होम्योपैथी की सबसे बड़ी खूबी इसकी निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने की क्षमता है। कई पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवा टुकड़ों में बिखरी हुई नहीं होती, बल्कि निरंतर  और रिश्तों से सचालित होती है। होम्योपैथी का व्यक्ति-केन्द्रित उपचार का दृष्टिकोण, खासतौर पर पुरानी बीमारियों, बार-बार होने वाले संक्रमणों और जीवनशैली संबंधी विकारों के प्रबंधन के क्रम में चिकित्सक और रोगी के बीच दीर्घकालिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है। यह निरंतरता उपचार के प्रति रोगी के समर्पण और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में उल्लेखनीय सुधार करती है।

आज भारत में 290 से अधिक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हैं। साथ ही, देशभर में चिकित्सकों का एक विशाल नेटवर्क भी उपलब्ध है। फिर भी, होम्योपैथी के असली प्रभावों को संस्थानों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर – झारखंड के जनजातीय जिलों, छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में और हिमाचल प्रदेश की दूरदराज की बस्तियों में – बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। वहां एक अकेला चिकित्सक भी सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में बदलाव ला सकता है।

होम्योपैथी की प्रमुख खूबियों में से एक इसकी सरलता भी है। दवाइयां किफायती होती हैं, इन्हें लाना-ले जाना आसान होता है और इनके भंडारण के लिए किसी जटिल भंडारण संरचना की जरूरत ही नहीं होती है। कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और सीमित स्वास्थ्य सेवा कर्मियों वाले इलाकों में, होम्योपैथी की ये विशेषताएं अनमोल हो जाती हैं।

जनजातीय समुदायों, जो हमारी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अक्सर बीमारियों का बेमेल बोझ झेलते हैं, के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सांस्कृतिक रूप से भी अनुकूल होना चाहिए। होम्योपैथी का सौम्य और गैर-आक्रामक रवैया पारंपरिक उपचार पद्धतियों के अनुरूप है, जिससे यह अपेक्षाकृत अधिक स्वीकार्य और सुलभ हो जाता है।

इसी क्षमता को पहचानते हुए, भारत सरकार ने होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं साथ जोड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत, 12,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) स्थापित किए गए हैं, जो सामुदायिक स्तर पर होम्योपैथी सहित व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होम्योपैथी भारत में गैर-संक्रामक रोगों से निपटने में भी योगदान दे रही है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने मधुमेह, हृदय रोग और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से निपटने से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में होम्योपैथी को जोड़ा है। यह प्राथमिक देखभाल से परे इसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।

आपूर्ति के नए-नए मॉडल भी उतने ही उत्साहजनक हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अंतर्गत सेवाओं के एक ही स्थान पर उपलब्ध होने की सुविधा ने पहुंच और विश्वास दोनों को बेहतर बनाया है। चलंत चिकित्सा इकाइयां जहां दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही हैं, वहीं सामुदायिक सहायता से जुड़ी पहलों और महामारी से निपटने से संबंधित कार्यक्रमों ने विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्यों में होम्योपैथी की अनुकूलता को प्रदर्शित किया है।

शायद सबसे कारगर मॉडल बुनियादी होम्योपैथी में प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का है। सही ज्ञान और रेफरल सिस्टम के सहयोग से, ये कार्यकर्ता न्यूनतम लागत पर स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार कर सकते हैं। स्वास्थ्य रक्षा जैसे कार्यक्रम और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीसीआरएच) द्वारा संचालित संपर्क संबंधी पहलों ने पहले ही दिखा दिया है कि समुदाय-आधारित दृष्टिकोण सार्थक नतीजे दे सकते हैं।

भविष्य को देखते हुए, सतत स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों का बढ़ता बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु ऐसे समाधानों की जरूरत है जो न केवल कारगर हों बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से व्यवहारिक भी हों।

होम्योपैथी इस दृष्टिकोण के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है। इसके कम लागत वाले उपचार परिवारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर वित्तीय बोझ को कम करते हैं। जबकि इसका न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी कार्यप्रणालियों का समर्थन करता है।

अब हमारा ध्यान इन प्रयासों को व्यापक स्तर पर कार्यान्वित करने पर होना चाहिए।  इन प्रयासों में कम सुविधा वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण को मजबूत करना, दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, गहन अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना शामिल है।

विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब भौगोलिक स्थिति या सामाजिक-आर्थिक हैसियत की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचेगी। होम्योपैथी, अपने गहरे सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ, इस लक्ष्य को हासिल  करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की असली पहचान उसकी अत्याधुनिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि हाशिए  पर रहने वाले लोगों की सेवा करने की उसकी क्षमता में निहित है। जब एक सरल और किफायती उपाय किसी दूरदराज के गांव में एक परिवार को राहत पहुंचाता है, तो यह इस    सशक्त विचार को पुष्ट करता है – कि भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अधिक समावेशी, अधिक मानवीय और वास्तव में सार्वभौमिक होती जा रही हैं।

[लेखक आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं]

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है”

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है” — प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआरपीजीआईएमईआर ने 14वीं AMRIT फार्मेसी के साथ बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान — देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में सर्वाधिक संख्या

चंडीगढ़, 30 मार्च 2026: AMRIT फार्मेसी को “मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम” बताते हुए, प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने आज कहा, “आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह कार्य करते हुए पीजीआईएमईआर में भारी मरीज भार को संभालने और बनाए रखने में सक्षम बना रहा है, जबकि AMRIT उपचार को किफायती बनाकर इसकी रीढ़ का कार्य करता है।” यह बात उन्होंने संस्थान की 14वीं AMRIT (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी के उद्घाटन अवसर पर कही, जो देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में इस प्रकार की सर्वाधिक संख्या है।

नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक स्थित इस सुविधा का उद्घाटन प्रो. विवेक लाल द्वारा प्रो. आर.के. राठो, डीन (एकेडमिक्स); प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च); श्री पंकज राय, उप-निदेशक (प्रशासन); प्रो. संदीप बंसल, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक; विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, नर्सिंग अधिकारियों एवं पीजीआईएमईआर के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया।

श्री राजेश नायर, उपाध्यक्ष, AMRIT फार्मेसी, भी अपनी टीम के साथ इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो AMRIT पहल के निरंतर सहयोग और समन्वय को दर्शाता है।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. विवेक लाल ने AMRIT पहल को मरीज-केंद्रित देखभाल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के समर्थन में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, “हर मरीज गुणवत्तापूर्ण और किफायती उपचार का हकदार है। AMRIT के माध्यम से हम प्रतिष्ठित और मानक कंपनियों की दवाइयों को काफी रियायती दरों पर उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल मरीज देखभाल की रीढ़ बन चुकी है।”

सेवाओं के व्यापक दायरे और दबाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “आयुष्मान भारत मरीजों तक पहुंच सुनिश्चित कर रहा है, बड़ी संख्या में मरीजों का समर्थन कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि आर्थिक बाधाएं उपचार में बाधा न बनें। AMRIT इस व्यवस्था को किफायती और सुलभ बनाकर इसे और मजबूत करता है।”

विस्तार योजनाओं का उल्लेख करते हुए निदेशक पीजीआईएमईआर ने बताया कि वर्तमान में 14 AMRIT आउटलेट्स कार्यरत हैं और संस्थान निकट भविष्य में 2 से 3 और आउटलेट्स स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि किफायती दवाओं की अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा, “कार्डियोलॉजी और आपातकालीन सेवाओं जैसे उच्च भार वाले क्षेत्रों में AMRIT आउटलेट्स को 24×7 उपलब्धता के साथ स्थापित किया जा रहा है, जहां आयुष्मान भारत लाभार्थियों के लिए विशेष सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। यह कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक मरीज कल्याण आंदोलन है।”

AMRIT को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए उन्होंने कहा, “यह मरीजों के लिए सबसे प्रभावी हस्तक्षेपों में से एक है। हम भारत सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने इस तरह की जनहितकारी और प्रेरणादायक पहल को बढ़ावा दिया है।”

संचालन संबंधी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए प्रो. लाल ने निरंतर सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा, “कोई भी प्रणाली 100 प्रतिशत परिपूर्ण नहीं होती, लेकिन हम अधिकतम दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उपलब्धता और रिफंड जैसी चुनौतियों को सक्रिय रूप से संबोधित किया जा रहा है तथा प्रक्रियाओं को और सुगम बनाने के लिए मंत्रालय से संवाद जारी है।”

उन्होंने बढ़ते मरीज भार को संभालने के लिए मजबूत प्रणालियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। “मरीजों की संख्या को देखते हुए हम AMRIT आउटलेट्स की निर्बाध कार्यप्रणाली और पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि विशेष रूप से आयुष्मान भारत के तहत मरीज सेवाएं प्रभावित न हों,” उन्होंने कहा।

पीजीआईएमईआर की विरासत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “1963 से पीजीआईएमईआर मरीज देखभाल का एक सशक्त स्तंभ रहा है। हमारी सेवाओं का स्तर विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के समकक्ष है और हम निरंतर बुनियादी ढांचे और प्रणालियों को सुदृढ़ कर रहे हैं।”

संस्थागत सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “परिवर्तन के मार्ग में अदृश्य बाधाएं होती हैं, लेकिन हम दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। जो पहलें पहले कठिन लगती थीं—जैसे AMRIT को क्रिटिकल केयर क्षेत्रों तक विस्तार देना—आज वे वास्तविकता बन चुकी हैं। ये बदलाव शांत लेकिन प्रभावशाली हैं।”

भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रो. लाल ने बताया कि माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री 27 अप्रैल 2026 को पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे। इस अवसर पर न्यूरोसाइंसेज सेंटर, एडवांस्ड मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन अपेक्षित है।

निदेशक पीजीआईएमईआर ने प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में सुधार की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “हाल के महीनों में वित्तीय प्रक्रियाएं अधिक सुगम हुई हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया तेज हुई है और सेवा वितरण में सुधार आया है। इससे AMRIT आउटलेट्स के विस्तार और कुशल संचालन में भी मदद मिली है।”

14वीं AMRIT फार्मेसी का उद्घाटन पीजीआईएमईआर की किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जहां AMRIT और आयुष्मान भारत मिलकर बढ़ते मरीज भार को संभालने और जेब से होने वाले खर्च को कम करने में एक सशक्त पूरक व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं।