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ESIC ने अस्पतालों और औषधालयों में केंद्रीकृत ऑनलाइन रोगी फीडबैक प्रणाली शुरू की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने देशभर में अपने सभी अस्पतालों और औषधालयों में एक व्यापक केंद्रीकृत ऑनलाइन रोगी फीडबैक प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है।

यह डिजिटल पहल बीमित व्यक्तियों और रोगियों को अपने स्वास्थ्य सेवा अनुभवों को सहजता से साझा करने, विशिष्ट चिंताओं को उठाने और संस्थागत सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव देने में सक्षम बनाती है। यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण सेवा मापदंडों, विशेष रूप से सुविधा की स्वच्छता, चिकित्सा कर्मचारियों के व्यवहार और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर नागरिकों का सीधा फीडबैक प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

निर्बाध पहुंच और कई भाषाओं में सुविधा

व्यापक भागीदारी और पूर्ण सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, यह प्रणाली रोगियों के लिए कई फीडबैक चैनल प्रदान करती है:

  • स्वचालित एसएमएस लिंक: ईएसआईसी एचआईएस (धनवंतरी) मॉड्यूल के माध्यम से सेवाओं का लाभ उठाने के तुरंत बाद बीमित व्यक्ति को एसएमएस के माध्यम से एक सीधा फीडबैक लिंक भेजा जाता है।
  • ऑन-साइट क्यूआर कोड: लाभार्थी सभी ओपीडी और अस्पताल के विभिन्न स्थानों पर प्रमुखता से लगाए गए अनुकूलित, बहुभाषी पोस्टरों पर प्रदर्शित क्यूआर कोड को स्कैन करके अपना फीडबैक तुरंत साझा कर सकते हैं।
  • वेब पोर्टल: आधिकारिक ईएसआईसी वेबसाइट के माध्यम से भी सीधे फीडबैक भेजा जा सकता है।

उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस के तहत मरीजों को बस अपने मोबाइल उपकरणों का उपयोग करके क्यूआर कोड को स्कैन करना होता है, अपना आईपी नंबर दर्ज करना होता है, अपने अनुभव को रेट करना होता है और कुछ ही सेकंड में अपना फीडबैक भेजना (सबमिट) करना होता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सशक्त प्रौद्योगिकी

फीडबैक तंत्र की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए, सिस्टम में ओटीपी सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से आईपी विवरणों का तत्क्षण सत्यापन और डुप्लिकेट फीडबैक को रोकने के लिए सख्त तंत्र मौजूद हैं। इसके अलावा, यह फीडबैक प्लेटफॉर्म देश के विविध कार्यबल की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए व्यापक बहुभाषी सहायता प्रदान करता है।

स्तरीय निगरानी और त्वरित शिकायत निवारण

मरीजों के फीडबैक पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए, सिस्टम में मजबूत और भूमिका-आधारित डिजिटल डैशबोर्ड एकीकृत किए गए हैं। इससे तीन अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर निरंतर और तत्क्षण प्रदर्शन की निगरानी संभव हो पाती है:

  • मुख्यालय स्तर
  • क्षेत्रीय कार्यालय स्तर
  • स्थानीय ईएसआई स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिस्टम को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह 3 से कम सेवा रेटिंग को स्वचालित रूप से चिह्नित करके गंभीर समस्याओं की पहचान कर लेता है। यह स्वचालित चेतावनी तंत्र सुनिश्चित करता है कि संबंधित अधिकारी समय पर और लक्षित सुधारात्मक कार्रवाई कर सकें। इसके अतिरिक्त, यह प्लेटफॉर्म सभी स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रदर्शन रैंकिंग का समर्थन करता है, जिससे निरंतर सुधार, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सख्त संस्थागत जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

देश के कार्यबल के प्रति अपने मूल मिशन की पुष्टि करते हुए यह पहल ईएसआईसी के समर्पण का प्रमाण है, जो इस मूलमंत्र को प्रतिध्वनित करती है: “ईएसआईसी – बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रतिबद्ध।”

सावधान! 1 जून से बदल रहे हैं ये 6 बड़े आर्थिक नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली: जून का महीना आपकी आर्थिक जिंदगी में कई बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। टैक्स भरने से लेकर यूपीआई (UPI) पेमेंट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल तक, कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं जो सीधे आपके बजट को प्रभावित करेंगे।

1. एडवांस टैक्स की समयसीमा (15 जून): यदि आपकी अनुमानित टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से अधिक है, तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करने की आखिरी तारीख 15 जून है। आपको कुल टैक्स का कम से कम 15 फीसदी हिस्सा इस तारीख तक चुकाना होगा, अन्यथा 1% अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

2. पुरानी टैक्स व्यवस्था में बड़ी राहत: पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने वालों के लिए अच्छी खबर है। हॉस्टल भत्ता अब 9,000 रुपये प्रति माह और बच्चों की शिक्षा का भत्ता 3,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसके अलावा, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों को 50% एचआरए (HRA) छूट वाली सूची में शामिल किया गया है।

3. यूपीआई (UPI) होगा और सुरक्षित: ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए अब क्यूआर कोड स्कैन करने या नंबर डालने पर बैंक में दर्ज व्यक्ति का सत्यापित (Verified) नाम स्क्रीन पर दिखेगा। साथ ही, ईपीएफओ (EPFO) अब यूपीआई के जरिए पीएफ का पैसा तुरंत निकालने की सुविधा का परीक्षण कर रहा है।

4. महंगे होंगे क्रेडिट कार्ड के नियम: क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए खर्च बढ़ने वाला है। कोटक महिंद्रा बैंक अब किराये या शिक्षा के भुगतान पर 1% शुल्क लेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने ब्याज दर बढ़ाकर 3.75% कर दी है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने अमेजन पे कार्ड पर किराये के भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट बंद कर दिए हैं। एचडीएफसी बैंक अब 100 रुपये से ऊपर के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर ही एसएमएस (SMS) अलर्ट भेजेगा।

5. शेयर बाजार में 50:50 मार्जिन नियम: फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए सेबी (SEBI) का 50:50 मार्जिन नियम अब पूरी तरह अनिवार्य हो गया है। अब ट्रेडर्स को अपने मार्जिन का कम से कम आधा हिस्सा नकद या उसके समान साधनों में रखना होगा।

6. सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत में वृद्धि: अब सरकारी सब्सिडी वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में केवल एएलएमएम (ALMM) सूची के सोलर मॉड्यूल का ही इस्तेमाल हो सकेगा। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन शुरुआती तौर पर सोलर सिस्टम लगवाना महंगा हो सकता है।

वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा: आर्थिक गतिविधियों में नरमी की आशंका, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण मजबूत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Ministry of Finance ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि आने वाले महीनों में सामान्य से कम मानसून और कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की संभावित सुस्ती के कारण उपभोग मांग पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का निकट भविष्य का परिदृश्य सतर्क आशावाद के साथ मजबूत बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में आय और उपभोग का स्तर काफी हद तक मानसून पर निर्भर करता है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्यों और ग्रामीण बाजारों पर देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव, ऊर्जा कीमतों में बदलाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की धीमी वृद्धि जैसी परिस्थितियां वैश्विक आर्थिक वातावरण को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।

समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया कि देश में बुनियादी ढांचा निवेश, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, सेवा क्षेत्र की मजबूती और सरकारी पूंजीगत व्यय आर्थिक वृद्धि को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। सार्वजनिक निवेश के साथ-साथ निजी निवेश में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार और बढ़ती उपभोक्ता मांग है। हालांकि यदि मानसून कमजोर रहता है, तो ग्रामीण खपत पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित हो सकती है।

वित्त मंत्रालय ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतें, मौसम की स्थिति और वैश्विक कमोडिटी बाजार आने वाले महीनों में महंगाई के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार और नीति निर्माता मूल्य स्थिरता बनाए रखने तथा विकास को गति देने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और तकनीकी क्षेत्र में निवेश जैसे कारक भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कुछ अल्पकालिक चुनौतियां अवश्य हैं, लेकिन व्यापक आर्थिक संकेतक अभी भी सकारात्मक बने हुए हैं। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, बढ़ता निवेश और सरकारी सुधार कार्यक्रम विकास को सहारा दे सकते हैं।

कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय का आकलन यह दर्शाता है कि मानसून और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है और निकट भविष्य में वृद्धि की संभावनाएं बरकरार हैं, हालांकि नीति निर्माताओं को सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

कपास उद्योग को बड़ी राहत: सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 तक आयात शुल्क से दी छूट

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने देश के वस्त्र और कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क से 30 अक्टूबर 2026 तक छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अगले पांच महीनों तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा कपास की कीमतों को नियंत्रित रखना है।

सरकार के इस फैसले से कपड़ा, धागा और परिधान उद्योग को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत लंबे समय से कपास की उपलब्धता और बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहा था। ऐसे में आयात शुल्क हटाए जाने से विदेशी बाजारों से कपास खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों और वैश्विक मांग में बदलाव के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ा था। आयात शुल्क में छूट से कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर होने और उत्पादन लागत कम होने की संभावना है।भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू मांग और निर्यात आवश्यकताओं को देखते हुए समय-समय पर आयात की जरूरत भी पड़ती है। कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उद्योग संगठनों का मानना है कि इस निर्णय से सूती धागे और कपड़ों के निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। इससे निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि कम लागत पर उत्पादन होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

हालांकि कुछ किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि सस्ते आयात से घरेलू किसानों को कीमतों के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कपास आयात पर शुल्क छूट से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले महीनों में कपड़ा क्षेत्र की वृद्धि को नई गति मिलेगी।

जून 2026 में 11 दिन बंद रहेंगे बैंक, कामकाज निपटाने से पहले देख लें RBI की पूरी लिस्ट

बिजनेस डेस्क : जून का महीना शुरू होने वाला है और अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम जैसे चेक बुक, पासबुक अपडेट या लोन संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार, जून 2026 में देशभर में कुल 11 दिन बैंक बंद रहेंगे।-साप्ताहिक छुट्टियाँ और शनिवार का अवकाश जून महीने में रविवार और शनिवार की छुट्टियों के कारण बैंकिंग कामकाज कई दिन ठप रहेगा:

-रविवार: 7, 14, 21 और 28 जून को साप्ताहिक अवकाश रहेगा।

-दूसरा और चौथा शनिवार: 13 जून (दूसरा शनिवार) और 27 जून (चौथा शनिवार) को देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे।

-क्षेत्रीय और त्योहारों की छुट्टियाँ महीने के दौरान मुहर्रम और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक अवकाश रहेगा:

-15 जून (सोमवार): राजा संक्रांति और YMA डे के अवसर पर ओडिशा और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे।

-25 जून (गुरुवार): मुहर्रम के कारण आंध्र प्रदेश में छुट्टी रहेगी।-26 जून (शुक्रवार): मुहर्रम के चलते उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे।

-29 जून (सोमवार): संत गुरु कबीर जयंती पर हिमाचल प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

-30 जून (मंगलवार): रेमना नि के कारण मिजोरम में अवकाश रहेगा।

डिजिटल सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर : भले ही बैंक की शाखाएं 11 दिन बंद रहेंगी, लेकिन आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। ग्राहक UPI, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM का उपयोग बिना किसी बाधा के कर सकेंगे। हालांकि, शाखा जाकर किए जाने वाले कामों के लिए ग्राहकों को अपना समय पहले से प्लान कर लेना चाहिए, विशेषकर महीने के अंत में जहां शनिवार और रविवार के कारण लंबा वीकेंड पड़ रहा है।

आरबीआई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: वित्तीय संस्थानों में 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के वित्तीय संस्थानों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़े 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट ने बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में बढ़ते साइबर जोखिम तथा वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आरबीआई के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ऋण लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई वित्तीय अनियमितताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से कई मामलों का संबंध पुराने ऋण खातों और पूर्व अवधि की अनियमितताओं से भी है, जिन्हें अब रिपोर्ट किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में तेजी आने से ग्राहकों को सुविधा तो मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी, फर्जीवाड़ा और डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में तकनीकी सुरक्षा और निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को जोखिम प्रबंधन प्रणाली मजबूत करने, साइबर सुरक्षा उपायों को उन्नत करने और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को भी सतर्क रहने और अनजान लिंक, कॉल या डिजिटल भुगतान अनुरोधों से बचने की सलाह दी है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़ी रकम से जुड़े धोखाधड़ी मामलों का असर केवल संबंधित संस्थानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे निवेशकों और आम ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय पर पहचान, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी के मामलों का जल्दी पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगी।

हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज का मुनाफा 79.9 प्रतिशत बढ़ा, चौथी तिमाही में 61.17 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Happiest Minds Technologies ने वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की इस कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 79.9 प्रतिशत बढ़कर 61.17 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी के इस मजबूत प्रदर्शन को आईटी सेवाओं की बढ़ती मांग, डिजिटल समाधान कारोबार में विस्तार और परिचालन क्षमता में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में लाभ में यह उल्लेखनीय वृद्धि निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों की बढ़ती मांग ने आईटी कंपनियों के कारोबार को मजबूती प्रदान की है। हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज भी इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही है।

कंपनी ने हाल के वर्षों में वैश्विक ग्राहकों के साथ साझेदारी बढ़ाने और नई तकनीकी सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे उसके राजस्व और लाभप्रदता दोनों में सुधार देखने को मिला है।

आईटी उद्योग से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियां तकनीकी सेवाओं और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। विशेष रूप से मध्यम आकार की टेक कंपनियां नए बाजारों और विशेषीकृत सेवाओं के जरिए तेजी से विकास कर रही हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों से कंपनी के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। हालांकि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, विदेशी ग्राहकों का खर्च और मुद्रा विनिमय दरें आने वाले समय में आईटी क्षेत्र की वृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।

फिलहाल कंपनी का यह प्रदर्शन भारतीय आईटी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी निवेश और डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बदल रही है।

आरबीआई का बही-खाता 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, सोना और निवेश बने प्रमुख कारण

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India का बही-खाता (बैलेंस शीट) वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। केंद्रीय बैंक की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के बही-खाते का आकार 31 मार्च 2025 को 76,25,421.93 करोड़ रुपये था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार एक वर्ष में इसमें 15,71,699.15 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि इस वृद्धि के पीछे घरेलू निवेश, सोने के भंडार और विदेशी निवेश में हुई बढ़ोतरी प्रमुख कारण रहे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने में निवेश और विदेशी परिसंपत्तियों के मूल्य में बढ़ोतरी ने आरबीआई की कुल संपत्ति को मजबूत किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट उसकी वित्तीय क्षमता, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और मौद्रिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। आरबीआई की बैलेंस शीट में यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारत की वित्तीय प्रणाली और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में हैं।

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि केंद्रीय बैंक ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम जारी रखे। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सोने के भंडार में वृद्धि केंद्रीय बैंकों की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है, क्योंकि इसे आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। भारत सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक हाल के वर्षों में अपने स्वर्ण भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी निवेश और घरेलू परिसंपत्तियों के मूल्य में सुधार से आरबीआई की आय और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई की मजबूत बैलेंस शीट देश की बैंकिंग और मौद्रिक प्रणाली के लिए भरोसे का संकेत है। इससे वित्तीय बाजारों में स्थिरता और निवेशकों का विश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

फिलहाल आर्थिक जगत की नजर इस बात पर भी है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजारों की स्थिति, तेल कीमतें और ब्याज दरों का आरबीआई की नीतियों और बैलेंस शीट पर क्या प्रभाव पड़ता है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तेजी, अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और United States के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत “उत्साहजनक” दिशा में आगे बढ़ रही है और एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है।

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहमति के करीब पहुंच चुके हैं और जल्द ही एक अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता का उद्देश्य शुल्क, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश से जुड़े मुद्दों को सरल बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौता होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिल सकती है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीक, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है।

फिलहाल व्यापार जगत की नजर इस संभावित अंतरिम समझौते पर टिकी है, क्योंकि इससे निवेश माहौल और निर्यात क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

तेल कीमतों में नरमी से शेयर बाजार को सहारा, सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में चढ़े

मुंबई / सत्ता संदेश

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों से समर्थन मिला।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को 60 दिन और बढ़ाने पर सहमति बनने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता कम होती है, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है। इसके अलावा आईटी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी भी बाजार की तेजी का प्रमुख कारण रही।

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में मजबूती के चलते भारतीय बाजार में भी शुरुआती कारोबारी सत्र में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और तेल कीमतों की दिशा आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बाजार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई, जबकि कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में सीमित उतार-चढ़ाव रहा। निवेशकों की नजर अब घरेलू आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।