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सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई की मांग को लेकर ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रदर्शन, वॉटर कैनन पर चढ़े प्रदर्शनकारी

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को वारिस पंजाब दे के नेताओं और पुलिस आमने सामने आ गए।

प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ बाॅर्डर पर रोक जाने के बाद बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया तो उन्होंने वाटर कैनन का मुंह मोड़ दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सीएम आवास की तरफ बढ़ गए हैं। 

वारिस पंजाब दे के नेता अमृतपाल सिंह और अन्य बंदी सिखों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने बुधवार के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार सुबह से मोहाली बॉर्डर (बुड़ैल जेल के पीछे) से सेक्टर-50/51 चौक और वहां से सेक्टर-44/45 लाइट प्वाइंट तक सरोवर पथ पर वाहनों की आवाजाही आंशिक रूप से डायवर्ट और प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा सेक्टर-43/44/51/52 चौक (आईएसबीटी चौक) से सेक्टर-44/45 चौक (गौशाला चौक) होते हुए सेक्टर-45/46-49/50 चौक तक विकास मार्ग पर भी ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। सेक्टर-43/44 और सेक्टर-45/46 लाइट प्वाइंट पर भी यातायात प्रभावित रहने की संभावना है।विज्ञापन

चंडीगढ़ यातायात पुलिस ने अंतरराज्यीय बसों को सेक्टर-43 आईएसबीटी पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे जाम से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करें और ट्रैफिक अपडेट के लिए चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखें। पुलिस ने लोगों से किसी भी तरह से शांति न भंग करने की अपील की है।

असम में बाढ़ का कहर : PM ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक विधायकों को 1 महीने का वेतन देने का किया ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने असम के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त बाढ़ की स्थिति पर राज्य के सांसदों के साथ बैठक की। इसके साथ ही आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पीएम मोदी ने क्या बताया? 

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने एक्स पर लिखा,’असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कुशल मंगल की कामना करता हूं। 

असम में क्या है हालात?

इस बीच, असम के शिवसागर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है क्योंकि नौजान गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया और सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवार आश्रय, भोजन और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं।


वहीं, असम के विधायकों ने एक बड़ा फैसला लिया है। रायजोर दल को छोड़कर सभी विधायकों ने मंगलवार को राज्य के बाढ़ पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने क्या एलान किया?

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने कहा कि वह और उपाध्यक्ष हब्बे टेरोन बाढ़ राहत के लिए एक महीने का वेतन दान करेंगे। उन्होंने घोषणा की, ‘हमारे अलावा, विधानसभा सचिवालय के सभी कर्मचारी पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए एक दिन का वेतन दान करेंगे।’

संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा? 

इस पहल का स्वागत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि भाजपा के सभी विधायक भी एक महीने का वेतन दान करेंगे। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक शेरमन अली अहमद ने भी ऐसा ही किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

वायुसेना की ओर से राहत अभियान जारी

भारतीय वायुसेना की ओर से असम और नागालैंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी हुई है। मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उसके हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ में फंसे 458 लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाला है।

वायुसेना के मुताबिक अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में हवाई मार्ग से 9 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई गई है। वायुसेना के अधिकारी व जवान रहात अभियान के दौरान लगातार दुर्गम और जलमग्न क्षेत्रों में उड़ान भर रहे है।

बता दे कि कुल 631 गांव अभी भी जलमग्न हैं। वहीं, राहत कार्य 184 शिविरों और वितरण केंद्रों के माध्यम से जारी हैं, जहां लगभग 28,700 लोगों को आश्रय दिया गया है। 

Himachal Pradesh : लाहौल-स्पीति में बड़ा हादसा, मलबे में दबी टैक्सी, 13 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर कडू नाला के पास अचानक पहाड़ दरकने से कुल्लू से पांगी जा रही एक टैक्सी मलबे में दब गई. हादसे में 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इसकी पुष्टि खुद घटनास्थल पहुंचे भरमौर विधायक डॉ. जनक राज ने की. उन्होंने बताया कि मृतकों में छह महीने की एक मासूम बच्ची भी शामिल है. टैक्सी में कुल 15 लोग सवार थे, जिनमें से एक घायल को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

जानकारी के अनुसार, हादसा उदयपुर-किलाड़ सड़क मार्ग पर कडू नाला के पास हुआ. कुल्लू से पांगी जा रही टैक्सी जैसे ही इस स्थान से गुजर रही थी, तभी अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा. भारी मलबा सीधे टैक्सी पर गिरने से वाहन पूरी तरह दब गया और यात्रियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला.

सड़क खुलने के बाद शुरू हुआ था सफर

बताया जा रहा है कि उदयपुर-किलाड़ सड़क मार्ग एक दिन पहले लैंडस्लाइड के कारण बंद कर दिया गया था. इस वजह से सभी यात्री तिंदी क्षेत्र में रुके हुए थे. शुक्रवार को सड़क खुलने के बाद टैक्सी पांगी के लिए रवाना हुई, लेकिन कुछ ही दूरी पर कडू नाला के पास यह भीषण हादसा हो गया.

हादसे में 13 लोगों की मौत

घटनास्थल पर मौजूद भरमौर विधायक डॉ. जनक राज ने बताया कि टैक्सी में कुल 15 लोग सवार थे. हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों में छह महीने की एक मासूम बच्ची भी शामिल है. एक घायल को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला, लेकिन इनमें से कोई जिंदा नहीं बचा था.

बारिश के मौसम में बढ़ा लैंडस्लाइड का खतरा

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ गई हैं. प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. वहीं हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन, NDRF और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंच गए. जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाकर राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी पेपर लीक की सुनवाई, PM मोदी का फैसला

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई इसी कोर्ट में होगी. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। केस के तुरंत निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होगी।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिया गया है। हमारे लिए युवाओं से बढ़कर कुछ नहीं है। विद्यार्थियों के हित सुरक्षित करने के लिए ये एक बड़ा कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि दो दिन पहले यानी 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी नीट पेपर लीक मामले का जिक्र किया। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित कर बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर क्या कहा। रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे. पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी. उन्होंने इसे घोर पाप बताया। पीएम ने कहा कि मामला सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई. 13 लोगों को अरेस्ट किया गया। परीक्षा रद्द करने के बाद फिर से परीक्षा कराई गई। पीएम मोदी ने ये भी कहा कि आगे से कोई पेपर लीक न हो, इस बात का ध्यान रखा जाए।

पेपल लीक के मुद्दे पर संसद भी विरोध प्रदर्शन

बता दें कि पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहे थे कि वो इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, कुछ बोल नहीं रहे हैं, कोई बड़ा एक्शन नहीं ले रहे हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में अपनी चुप्पी 21 जुलाई को ही तोड़ दी थी। उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्ष दल इसका समर्थन कर रहे हैं. विपक्षी दल अलग से भी इसको लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। विपक्ष इस पर लगातार चर्चा की मांग कर रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

स्काईरूट के विक्रम-1 का हुआ ‘आगमन’, भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ने रचा इतिहास

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने इतिहास रचते हुए अपना पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। 

  • स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया।
  • विक्रम-1 रॉकेट श्रीहरिकोटा से दोपहर 12.05 बजे सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ।
  • यह लॉन्च भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को इतिहास रच दिया। कंपनी ने भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से दोपहर 12.05 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। पहले राकेट को सुबह 11.30 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन आखिरी वक्त पर काउंटडाउन रोका दिया गया।

    कुछ देर के लिए रुका काउंटडाउन दोबारा शुरू होने के बाद रॉकेट को तय समय पर लॉन्च किया गया। इस मिशन का नाम “मिशन आगमन” रखा गया था। मौसम खराब और नेविगेशन की दिक्कत के कारण लॉन्च 35 मिनट देर से हुआ।

    ‘मिशन आगमन’ दिया नाम

    हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा किए गए इस टेस्ट फ़्लाइट लॉन्च का नाम “मिशन आगमन” रखा और यह देश के कमर्शियल स्पेस सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

    लगभग 16 मिनट की शुरुआती यात्रा के बाद, विक्रम-1 के घरेलू और विदेशी पेलोड को 450 km की ऊंचाई और 60 डिग्री के झुकाव पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने की उम्मीद है।

    विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में 5 गुना हल्का होता है, जिससे रॉकेट का वजन कम हुआ और ईंधन दक्षता बढ़ी।

    रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें 3 सॉलिड-फ्यूल स्टेज और 1 लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगा है।

    • 3 सॉलिड स्टेज- रॉकेट को जमीन से उठाकर लो अर्थ ऑर्बिट तक धकेलते हैं।
    • लिक्विड मॉड्यूल- अंतरिक्ष में पहुंचकर सैटेलाइट को सही कक्षा में स्थापित करता है।

    कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km x 450 km की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा तक जाएगा। यही ऑर्बिट है जहां इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी 450 किमी की ऊंचाई पर चक्कर लगाता है। ज्यादातर कॉमर्शियल और मौसम वाले सैटेलाइट इसी ऑर्बिट में होते हैं।

    ‘मिशन आगमन’ सिर्फ टेक्नोलॉजी का मिशन नहीं, कला का भी संगम है। रॉकेट अपने साथ कई पेलोड्स ले गया

    • ग्रह स्पेस का टेक्नोलॉजी पेलोड
    • कॉस्मोसर्व स्पेस का पेलोड
    • डीक्यूब्ड का स्पेस रिसर्च पेलोड
    • स्काईरूट का अपना इन-हाउस स्कोप पेलोड

    इसके साथ 18 कैरेट सोने से बनी कलाकृतियां भी भेजी गईं। कॉस्मोस डायमंड्स की “कॉस्मिक ब्लूम”। एक माइक्रो-आर्ट पीस- 18 कैरेट सोने का छोटा रॉकेट, जिस पर सर सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं।

    इससे पहले स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था जो 89.5 KM तक गया था।

    पीएम मोदी ने हरियाणा के जींद में 14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन
    • प्रधानमंत्री ने कहा, जींद में आकर प्रसन्नता हो रही है, स्वच्छ परिवहन, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक विरासत सुदृढ़ करने वाली परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर कहा, ये सभी परियोजनाएं ‘जीवन की सुगमता’ बढ़ाकर हरियाणा के विकास को गति देंगी
    • श्री मोदी ने कहा आज जींद और हरियाणा ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है, आज यहीं से देश को अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला है
    • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन पूर्णतया प्रदूषण मुक्त होने के साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ की एक उल्लेखनीय सफलता का प्रमाण है
    • रेल हो या सड़क मार्ग, संपर्क साधन में ऐसी प्रगति सुविधा बढ़ाने के साथ ही विकास की गति कई गुना बढ़ाती है
    • प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने एक नई राष्ट्रीय खेल नीति, ‘खेलो भारत’ नीति तैयार की है; ‘खेलो इंडिया’ अभियान से लेकर ‘टॉप्स’ योजना तक, आज खिलाड़ियों को अभूतपूर्व सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं

    हरियाणा / सत्ता संदेश

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर पहुंचकर अपार प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक, पराक्रम से भरे और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख किया, जिसे शक्ति पीठ माता जयंती का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है। श्री मोदी ने दशकों पहले संगठन के कार्यों से शहर की अपनी प्रारंभिक यात्राओं का स्मरण करते हुए, मुर्रा भैंस के दूध, देसी बूरा और घेवर जैसे स्थानीय व्यंजनों से जुड़े अविस्मरणीय स्नेहिल घटनाओं को याद किया। श्री मोदी ने कहा, यह साधारण भूमि नहीं, बल्कि इतिहास, वीरता, धर्म और अपार गौरव की समृद्ध भूमि है।

    प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय बदलाव के साथ ही यहां की चिरस्थायी स्थानीय विशेषताओं का तुलनात्मक वर्णन करते हुए, इस शहर को सुशासन मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने इस पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा प्रगति के नए पथ पर दृढ़ता से अग्रसर हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम सरकार के इस मिशन को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो हो जाएगा। मुंबई और ठाणे के बीच ऐतिहासिक पहली ट्रेन यात्रा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की उन्नत हरित परिवहन की चर्चा में भी यह कॉरिडोर अमर हो जाएगा। श्री मोदी ने कहा कि भारतीय रेल के अत्याधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण कदम के लिए मैं आप सभी को और पूरे देश को बधाई देता हूं।

    प्रधानमंत्री ने अवसंरचनात्मक विकास के व्यापक विकास का उल्लेख करते हुए, रेल, राजमार्गों और सांस्कृतिक धरोहरों से संबंधित 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं की चर्चा की, जो राज्य के कल्याण के लिए प्रत्यक्ष तौर पर समर्पित हैं। स्वास्थ्य सेवा के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के साथ ही नारनौल में राव तुलाराम अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया। इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवर जीवन बनाने के इच्छुक लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना है। श्री मोदी ने कहा कि ये नए संस्थान हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी सशक्त और सुलभ बनाएंगे।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों के समर्पित नागरिक सेवा भाव की सराहना करते हुए, उनके आगमन से पहले स्वच्छता अभियान प्रदर्शित कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने स्वच्छता अभियान में समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर अपार संतोष व्यक्त करते हुए इस जमीनी स्तर पर निरंतर जारी रखने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि हमें स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा 

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक रेल क्षेत्र के तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए स्मरण दिलाया कि कैसे 19वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां मुख्य रूप से भाप इंजनों द्वारा चालित थीं, जबकि 20वीं शताब्दी ये विद्युत शक्ति से चालित बन गईं। भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण दर्शाते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां हाइड्रोजन परिवहन द्वारा चालित होंगी, और इसी की आधिकारिक शुरुआत जींद और सोनीपत के बीच नवनिर्मित 90 किलोमीटर लंबे मार्ग से हो रही है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय रेल ने 21वीं सदी की इस तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसे भविष्य में विस्तारित किये जाने की अपार संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देश की इस उपलब्धि को रखते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक विश्व स्तर पर व्यावहारिक रूप से केवल 7-8 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी केवल कुछ ही गिने-चुने देशों के पास ऐसी रेलगाड़ियां चलाने की क्षमता है और वे भी अभी प्रारंभिक चरण में ही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस नवनिर्मित भारतीय हाइड्रोजन ट्रेन की वास्तविक क्षमताओं के बारे में सुनकर आपको अत्यंत गर्व होगा।

    प्रधानमंत्री ने इस नए परिवहन चमत्कार की तकनीकी विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि नई लॉन्च की गई ट्रेन विश्व स्तर पर अपनी तरह की सबसे शक्तिशाली ट्रेन है, जिसकी क्षमता 3,200 हॉर्सपावर है और जिसमें दस कोच लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी रेलगाड़ियों में जिनमें आमतौर पर केवल तीन से चार कोच होते हैं, उनसे तुलना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश ने अपने पहले ही प्रयास में यह साहसिक परिचालन क्षमता हासिल की है। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने दस डिब्बे वाली हाइड्रोजन ट्रेन सफलतापूर्वक चलाकर अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।

    इस हरित परिवहन उपलब्धि की स्वदेशी प्रकृति पर गर्व वयक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णतया धुआं रहित यह ट्रेन घरेलू विनिर्माण पहल की ठोस और उल्लेखनीय सफलता है। इस उन्नत प्रणाली का डिजाइन करने वाले प्रतिभाशाली घरेलू इंजीनियरों और इसके त्रुटिहीन निर्माण के लिए स्थानीय विनिर्माण कंपनियों को उन्होंने इसका श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा कि यह मेक इन इंडिया पहल का एक अत्यंत सफल और गौरवपूर्ण उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री ने इस उन्नत तकनीक की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को समझाते हुए बताया कि हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए पूरी तरह अलग बुनियादी ढांचे और विशेष, सहायक प्रणालियों की आवश्यकता होती है। निकट भविष्य में इन विशिष्ट नेटवर्क की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए नए कारखाने और संबंधित सुविधाएं तेजी से स्थापित किए जाने की संभावना देखते हुए उन्होंने व्यापक स्थानीय आर्थिक लाभ की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि यह उन्नत ट्रेन नेटवर्क हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न करने की गारंटी है।

    प्रधानमंत्री ने प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए, पिछले बारह वर्षों में भारतीय रेल में हुए व्यापक बदलाव से हासिल किए गए प्रचालन लाभों का उल्लेख किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की आपूर्ति के लिए आवश्यक समुद्री मार्ग महीनों से गंभीर रूप से लगातार बाधित हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से भारत बड़ी मात्रा में आवश्यक ईंधन और कृषि सामग्री आयात करता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले अगर ऐसा वैश्विक ईंधन संकट आया होता तो इसके विनाशकारी प्रभाव से डीजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पूरी तरह ठप्प हो जाता। उन्होंने कहा कि जहां 1925 से 2014 के बीच केवल 30 प्रतिशत रेल मार्गों का विद्युतीकरण हुआ था, वहीं सरकार के प्रयासों से अब राष्ट्रीय रेल ग्रिड का लगभग 99 प्रतिशत और राज्य के सभी ट्रैक का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्ण विद्युतीकरण से गंभीर वैश्विक तेल संकट के बाद भी हमारी रेलगाड़ियां निर्बाध रूप से चलती रहीं।

    प्रधानमंत्री ने बेहतर संपर्क साधनों के दोहरे सामाजिक-आर्थिक लाभों पर जोर देते हुए कहा कि विस्तृत सड़क और रेल नेटवर्क लोगों की सुविधा बढ़ाते हुए क्षेत्रीय विकास को तेजी से गति देते हैं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के स्थानीय खंड, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग और अंबाला-काला अंब चार-लेन परियोजना का आधिकारिक शुभारंभ करते हुए, उन्होंने इन अंतरराज्यीय प्रचालनों से कई लाभों की चर्चा की। श्री मोदी ने कहा कि इस तरह के व्यापक संपर्क मार्गों से अपार सुविधा के साथ ही समग्र विकास की गति में भी काफी वृद्धि होती है।

    प्रधानमंत्री ने जींद जिले के संभार-तंत्र संबंधी बदलावों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि शहर अब महत्वपूर्ण रूप से पांच अलग-अलग राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ गया है। इसके अपार आर्थिक लाभों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसान और पशुपालक अब कम किराए में प्रमुख वाणिज्यिक बाजारों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री मोदी ने कहा कि ये सुदृढ़ संपर्क साधन उद्योगों को सक्रिय रूप से सशक्त बनाएंगे, पर्यटन को बढ़ावा देंगे और व्यापक तौर पर नए रोजगार उत्पन्न करेंगे।

    प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी हाल की सफल यात्रा की चर्चा करते हुए, भारत द्वारा किए गए कई अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय समझौतों का उल्लेख किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण, लेकिन कम चर्चित रणनीतिक विषय पर विशेष ध्यान दिलाया, जिससे क्षेत्र की युवा आबादी प्रत्यक्ष और गहराई से जुड़ी है। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा के युवाओं से संबंधित एक विशिष्ट विषय है खेल, जिस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।

    प्रधानमंत्री ने विदेश की सरकारों के साथ महत्वपूर्ण वार्ताओं का विस्तार से वर्णन करते हुए खेल और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में व्यापक बदलाव के उद्देश्य से आगामी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की जानकारी दी। खेल क्षेत्र और विशिष्ट एथलीटों के प्रशिक्षण पद्धतियों पर केंद्रित संयुक्त पहल की संभावना व्यक्त करते हुए उन्होंने इससे स्थानीय खेल कौशल के लाभान्वित होने की आशा व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि इन देशों के साथ मिलकर हम आने वाले समय में खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    प्रधानमंत्री ने घरेलू स्तर पर खेल बुनियादी ढांचे में किए गए सुधारों का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि खेलों को सक्रिय और व्यवस्थित रूप से फिटनेस और रोजगार दोनों के प्रमुख और कारगर माध्यम में बदला जा रहा है। नई राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए उन्होंने खेलो इंडिया और ओलंपिक पदक जीतने की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी अत्यंत प्रभावी योजनाओं द्वारा खिलाड़ियों को प्रदान की गई वित्तीय और संस्थागत सहायता की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा सरकार भी खेलों और समर्पित खिलाड़ियों को निरंतर और काफी प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

    बुनियादी ढांचे से जुड़ी उपलब्धियों से हटकर प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों को सीधे संबोधित करते हुए आगामी विशाल वैश्विक प्रतिस्पर्धी मंचों की ओर रुख किया। उन्होंने 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की तैयारियों और 2036 ओलंपिक खेलों के लिए महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय बोली की घोषणा और अहमदाबाद में विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों के आयोजन की चर्चा की। श्री मोदी ने स्थानीय खिलाड़ियों से पूरी लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे विश्वास दिलाते हैं कि सरकार खिलाड़ियों की कड़ी तैयारी के लिए हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराएगी।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय शासन प्रणाली की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समावेशी विकास के मंत्र का कड़ाई से पालन करने के लिए राज्य प्रशासन की भी प्रशंसा की। रिश्वतखोरी या भाई-भतीजावाद से मुक्त, पारदर्शी और योग्यता-आधारित रोजगार प्रक्रियाओं के कड़ाई से कार्यान्वयन को ज़रूरी बताते हुए उन्होंने इस तरह के प्रणालीगत सुधार लागू करने में आने वाली अपार राजनीतिक बाधाओं की भी चर्चा की।

    किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट संरचनात्मक प्रतिबद्धता दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने स्थानीय बाजार को राज्य के सबसे बड़े बाजारों में से एक बताया और किसानों को सीधे मिलने वाले व्यापक लाभों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगभग 8 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें स्थानीय किसानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि केवल जींद में ही हमारे मेहनती किसानों को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रत्यक्ष हस्तांतरित की गई है।

    प्रधानमंत्री ने देश की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना का उल्लेख करते हुए, इस क्षेत्र को इस समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का विशाल और जीवंत केंद्र बताया। महाराजा रणजीत सिंह की गौरवशाली विरासत और पांडवों की पवित्र आस्था का उल्लेख करते हुए, उन्होंने उन पूजनीय स्थानीय तीर्थ स्थलों की चर्चा की, जहां आज भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। श्री मोदी ने कहा कि यही वह गौरवशाली आस्था और आध्यात्मिकता की विरासत है जिसे आधुनिक भारत आज सक्रिय से संरक्षित कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अतीत के इस गहन श्रद्धा को भविष्य के शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र अपने इतिहास को पूर्ण सम्मान के साथ अगली पीढ़ी तक पहुंचाने को पूर्णतया प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने इस लक्ष्य को साकार करने हेतु कुरुक्षेत्र में एक नए सिख संग्रहालय की आधारशिला रखने की आधिकारिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नया संग्रहालय भारत की महान गुरु परंपरा को आगामी पीढ़ियों तक सफलतापूर्वक और गर्व से पहुंचाएगा।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन को विराम देते हुए राज्य को कृषि और उद्योग के दोहरे आर्थिक पहियों पर समान रूप से सवार, तीव्र विकास पथ पर अग्रसर बताया। नव-उद्घाटित परियोजनाओं के प्रति मंगल कामना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये इस विकास गति में और तेज़ी लाएंगी। उन्होंने राष्ट्र की विकास यात्रा में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा का यह तीव्र विकास निस्संदेह औऱ सशक्त रूप से पूर्ण विकसित भारत की यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

    आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर? 38 इमारतें अवैध घोषित | पूरा विवाद क्या है?

    रामपुर / सत्ता संदेश

    उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियां में है। कभी इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता था, लेकिन अब यही यूनिवर्सिटी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने करने का आदेश जारी किया है। इन इमारतों में कई एकेडमिट डिपार्टमेंट, लेबोरेटरी और अन्य सुविधाएं हैं। इससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    इस बीच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है। विभाग ने यूनिवर्सिटी के निर्माण की लागत लगभग 496 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि ट्रस्ट का दावा है कि निर्माण पर केवल 46 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट निर्माण लागत और फंडिंग को लेकर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भी जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जौहर यूनिवर्सिटी पर एक साथ इतनी कार्रवाई क्यों हो रही है और इसके पीछे कानूनी आधार क्या है?

    2006 में रखी गई थी यूनिवर्सिटी की नींव

    जौहर यूनिवर्सिटी की नींव साल 2006 में रखी गई थी। इसे मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने स्थापित किया और धीरे-धीरे यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य एकेडमिक बिल्डिंग्स तैयार किए गए। करीब 98 एकड़ में फैला यह परिसर उत्तर प्रदेश के बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटी परिसरों में गिना जाता है। साल 2012 में इसका उद्घाटन हुआ और बाद में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। हालांकि, समय के साथ इस प्रोजेक्ट पर जमीन विवाद, निर्माण की मंजूरी, पैसों में गड़बड़ी और सरकारी नियमों के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगते रहे।

    1. क्या 38 इमारतें अवैध हैं- प्रशासन का दावा है कि इन भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए, इसलिए इन्हें अवैध माना गया है।
    2. क्या तुरंत बुलडोजर चलेगा- नहीं, पहले ट्रस्ट को 15 दिन का समय दिया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
    3. क्या ट्रस्ट के पास बचाव का मौका है- हां, ट्रस्ट इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकता है।
    4. निर्माण लागत पर विवाद क्या है- इनकम टैक्स का दावा है कि निर्माण पर 496 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि ट्रस्ट 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कह रहा है।
    5. क्या इससे पढ़ाई प्रभावित होगी- अगर कार्रवाई होती है, तो कुछ विभाग और सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. अंतिम स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

    अब सबसे बड़ा विवाद 38 भवनों के नक्शे को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का नक्शा कभी पास नहीं कराया गया, इसलिए इन्हें अवैध निर्माण माना गया है. दूसरी ओर ट्रस्ट का कहना है कि वह कानूनी विकल्प अपनाएगा और आदेश को अदालत में चुनौती देगा. ऐसे में यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि निर्माण नियमों, प्रशासनिक प्रक्रिया और कानून के पालन का भी बन गया है.

    जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में क्यों है?

    रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों के नक्शे संबंधित प्राधिकरण से कभी स्वीकृत नहीं कराए गए. जांच के दौरान यह पाया गया कि मेडिकल कॉलेज और कुछ एकेडमिक बिल्डिंग्स को छोड़कर ज्यादातर निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है. इसी आधार कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया.

    क्या हर निर्माण के लिए मंजूरी जरूरी है?

    किसी भी बड़े निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से भवन का नक्शा पास कराना जरूरी होता है. जब जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था, तब यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता था. उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 (संशोधित 1994) की धारा 239 के अनुसार, निर्माण से पहले अनुमति लेना जरूरी था. प्रशासन का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने सभी भवनों के लिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं की.

    निर्माण की मंजूरी किससे लेनी थी?

    साल 2015 में रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन हुआ, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी वाला क्षेत्र सितंबर 2024 में उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया. उससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी जिस सिंगनखेड़ा गांव में स्थित था, वह जिला पंचायत के अधीन आता था. इसलिए शुरुआती निर्माण के समय जिला पंचायत से मंजूरी आवश्यक थी. बाद में 38 भवनों के नक्शा न पास होने की शिकायत की गई थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया.

    निर्माण में कितना खर्च आया?

    निर्माण में कितना पैसा लगा, यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा है. जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर कितना खर्च हुआ, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं. कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. समाजवादी पार्टी सरकार के समय श्रम विभाग ने इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई थी. वहीं, बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने CPWD से निर्माण लागत का आकलन कराया, जिसमें खर्च करीब 494 करोड़ रुपये बताया गया.

    इसके आधार पर अप्रैल 2025 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जौहर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भेजा. विभाग का आरोप था कि ट्रस्ट के खातों में सिर्फ 100 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है, जबकि असल निर्माण लागत करीब 450 करोड़ रुपये है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दोनों के बीच 350 करोड़ रुपये के अंतर को कथित बेनामी निवेश मानते हुए ब्याज सहित वसूली का नोटिस जारी किया. अलग-अलग आंकड़ों की वजह से ये विवाद और बढ़ गया है.

    38 इमारतें कब गिराई जाएंगी?

    रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, नियमानुसार ट्रस्ट को पहले 15 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके. अगर निर्धारित समय में ऐसा नहीं किया जाता, तो रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.

    जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द हुआ?

    इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है. डिपार्टमेंट का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां जनहित के अनुरूप नहीं थीं और कई वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में आरोप लगा कि ट्रस्ट ने चंदा जुटाने में गड़बड़ी की, कुछ डमी ट्रस्टी बनाए और निर्माण लागत कम दिखाकर टैक्स से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया. ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें 9 लोग शामिल हैं. इन लोगों में 5 आजम खान के परिवार के ही सदस्य हैं.

    अब ट्रस्ट के पास क्या है विकल्प?

    ट्रस्ट इस आदेश के खिलाफ अदालत जा सकता है. वह निचली अदालत या इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. अगर कोर्ट से राहत मिलती है, तो फिलहाल इमारतें गिराने की कार्रवाई रुक सकती है. आगे क्या होगा, इसका फैसला अदालत के आदेश के बाद ही तय होगा.

    सोनम वांगचुक की हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

    नई दिल्ली / सत्ता संदेश

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीती 28 जून से आमरण अनशन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक द्वारा की जा रही भूख हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खण्डपीठ सुनवाई कर रही थी।

    याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए। दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को वांगचुक को जबरन खाना खिलाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

    बता दें कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनके भूख हड़ताल को 18 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। पार्टी संस्थापक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए।

    वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, मांसपेशियों में दर्द है और उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं।

    उधर, सीजेपी ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। सीजेपी ने देश भर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।

    प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी को हाईकोर्ट में दी चुनौती
    जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की कथित निरंतर निगरानी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि विरोध स्थल पर अंधाधुंध फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी टावर का संचालन असंवैधानिक घोषित किया जाए, साथ ही ऐसी निगरानी को निलंबित करने और सार्वजनिक प्रदर्शनों में निगरानी को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया जाए।

    PM Modi Chandigarh Visit: SPG ने संभाली सुरक्षा की कमान, 1200 पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

    चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे से पहले शहर हाई अलर्ट पर है। प्रधानमंत्री के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) और पीजीआई में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) ने सुरक्षा तैयारियों की कमान संभाल ली है।

    सोमवार को एसपीजी की टीम ने दोनों कार्यक्रम स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया जबकि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर आतंकी हमले जैसी स्थिति से निपटने के लिए मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज आयोजित की। 

    दौरे के दौरान चंडीगढ़ पुलिस के करीब 1200 जवान तैनात रहेंगे। इनके अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और अन्य अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां कार्यक्रम स्थलों, संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौराहों पर मोर्चा संभालेंगी।

    एसपीजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को पीजीआई और पेक परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान प्रवेश एवं निकास मार्ग, वीवीआईपी मूवमेंट, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, सुरक्षा घेरा और अन्य संवेदनशील बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यूटी के मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद के साथ बैठक कर सुरक्षा तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, जिम्मेदारियों के बंटवारे और अंतिम तैयारियों को लेकर रणनीति तय की गई।

    एयरपोर्ट पर मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज 

    प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सोमवार को चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज भी आयोजित की। अभ्यास के दौरान एयरपोर्ट पर आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति बनाई गई, ताकि विभिन्न एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखा जा सके। इस मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ, भारतीय सेना, पंजाब पुलिस, कस्टम विभाग और एयरपोर्ट पब्लिक हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टीमों ने हिस्सा लिया।

    जल्द ही विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी होगी

    वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से एडवाइजरी का पालन करने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की है।

    एसपीजी ने सौंपा संयुक्त सिक्योरिटी एक्शन प्लान

    एसपीजी ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा एक्शन प्लान साझा कर दिया है। इसके तहत कार्यक्रम स्थल, एयरपोर्ट, वीवीआईपी रूट, पार्किंग, प्रवेश द्वार और आसपास के क्षेत्रों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड, क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी), स्नाइपर और निगरानी टीमों की भी तैनाती रहेगी। पूरे सुरक्षा तंत्र पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    प्रधानमंत्री करेंगे दो सेंटरों का उद्घाटन, एक का शिलान्यास

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पीजीआई के दो बड़े सेंटरों का उद्घाटन करेंगे। वह एक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का शिलान्यास भी रखेंगे। पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सेंटरों से मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

    उद्घाटन किए जाने वाले सेंटरों में एडवांस मैटरनल चाइल्ड केयर सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइन सेंटर शामिल हैं। प्रत्येक सेंटर में 300 बेड की सुविधा होगी। क्रिटिकल केयर ब्लॉक में 150 बेड होंगे, जिसका शिलान्यास किया जाएगा। इन सभी सुविधाओं पर लगभग 1250 करोड़ रुपये की लागत आई है। इन सेंटरों में अत्याधुनिक ओटी, वेंटिलेटर और स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा।

    सेंटरों की सुविधाएं और आयुष्मान योजना

    न्यूरोसाइन सेंटर में ओपीडी पहले से चल रही है। बाकी सुविधाएं अगले तीन से छह महीनों में शुरू होंगी। सिटी स्कैन की सुविधा अगस्त में शुरू होगी, जबकि एमआरआई की सुविधा जनवरी तक उपलब्ध हो जाएगी। मदर एंड चाइल्ड सेंटर में अभी आईपीडी बना है, ओपीडी ब्लॉक फेज टू में बनेगा। प्रोफेसर विवेक लाल ने आयुष्मान भारत योजना को दुनिया की सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवा पहल बताया। पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग खत्म हो गई है, और यह आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त में किया जा रहा है। डोनर मिलने के साथ ही ट्रांसप्लांट की डेट दे दी जा रही है।

    भारत-नेपाल के बीच काठमांडू में होगी बैठक, ऊर्जा सहयोग पर करेंगे चर्चा

    नई दिल्ली / सत्ता संदेश

    भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस हफ्ते काठमांडू में संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त संचालन समिति की बैठकें आयोजित की जाएंगी. एक अधिकारी ने रविवार को जानकारी दी कि ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव ने बताया कि सचिव स्तर की इन बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी करेंगी.

    उन्होंने बताया कि संयुक्त कार्य समूह की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारत के ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे. वहीं, संयुक्त संचालन समिति की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव हिस्सा लेंगे.

    काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर बैठकें

    दरअसल एक अधिकारी ने बताया कि भारत और नेपाल इस हफ्ते काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ और ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठकें करने वाले हैं. ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव के अनुसार, पावर सेक्रेटरी स्तर की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय की सेक्रेटरी सरिता दवाडी करेंगी.

    दोनों देशों के उर्जा विभागों के सचिव होंगे शामिल

    ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव शामिल होंगे. अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों में नेपाल और भारत के बीच एनर्जी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी.

    रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर

    इससे पहले, जनवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की नेपाल यात्रा के दौरान, नेपाल ने भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौते और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे, और संयुक्त रूप से तीन क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन किया था.