ब्रेकिंग न्यूज़
भारत-दक्षिण अफ्रीका ने एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने भविष्य की प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने पर सहमति व्यक्त की है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार आधारित साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के अगले चरण की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में उभरकर सामने आई हैं।

यह सहमति केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और दक्षिण अफ्रीका की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार उपमंत्री डॉ. नोमालुंगेलो जीना के बीच नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान बनी। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति निर्माता और अधिकारियों ने भाग लिया।

नवाचार आधारित साझेदारी पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को पारंपरिक अनुसंधान सहयोग से आगे बढ़ाकर नवाचार-संचालित साझेदारी में बदलने की आवश्यकता है, जो आर्थिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव पैदा कर सके।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास पूरक क्षमताएं हैं, जिनका उपयोग कर विकासशील देशों के लिए किफायती, समावेशी और विस्तार योग्य तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, नवाचार एजेंसियों और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

एआई, क्वांटम तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर फोकस

बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर-भौतिक प्रणालियां, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्टार्टअप आधारित नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है और राष्ट्रीय स्तर पर चल रही विभिन्न तकनीकी पहलों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे ऐसे समाधानों में परिवर्तित किया जाना चाहिए जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाएं, रोजगार सृजित करें और अर्थव्यवस्था को मजबूती दें।

स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी और वैक्सीन अनुसंधान में नए अवसर

दोनों देशों ने जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, टीका विकास, स्वास्थ्य तकनीकों और महामारी तैयारी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के अनुभव ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और वैज्ञानिक साझेदारियों की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन निर्माण, किफायती स्वास्थ्य तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी में भारत की विशेषज्ञता दक्षिण अफ्रीका के साथ सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

उन्नत विनिर्माण और डिजिटल तकनीकों में साझेदारी

बैठक में उन्नत सामग्री, विनिर्माण, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना को भारत-दक्षिण अफ्रीका संयुक्त समिति के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। दोनों पक्षों ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाकर इन क्षेत्रों में ठोस परियोजनाएं विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।

दक्षिण अफ्रीका ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, स्वास्थ्य विज्ञान, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।

खगोल विज्ञान में सहयोग की समीक्षा

बैठक के दौरान दोनों देशों ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की भी समीक्षा की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्क्वायर किलोमीटर ऐरे (SKA) परियोजना को 21वीं सदी की सबसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक पहलों में से एक बताते हुए कहा कि यह वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना से वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, तकनीकी नवाचार और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिलेगा।

ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण की भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्षिण अफ्रीका को अगस्त 2026 में चेन्नई में आयोजित होने वाली ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सहयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, जल संसाधन प्रबंधन और सटीक कृषि जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

वहीं, दक्षिण अफ्रीका ने भारत को साइंस फोरम साउथ अफ्रीका-2026 में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जो अफ्रीका के प्रमुख वैज्ञानिक संवाद मंचों में से एक माना जाता है।

30 वर्षों से मजबूत वैज्ञानिक साझेदारी

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग की नींव वर्ष 1995 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते से पड़ी थी। तब से दोनों देश खगोल विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, भूविज्ञान और उन्नत सामग्रियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।

दोनों देशों ने अब तक लगभग 150 सह-वित्तपोषित अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया है और भविष्य में इस सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई है।

बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि भारत और दक्षिण अफ्रीका अनुसंधान उत्कृष्टता, प्रौद्योगिकी विकास, स्टार्टअप सहयोग और वैज्ञानिक आदान-प्रदान के माध्यम से एक मजबूत एवं भविष्य उन्मुख नवाचार साझेदारी का निर्माण करेंगे, जो दोनों देशों के विकास के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को भी नई दिशा देगी।

CCI ने दुबई एयरोस्पेस एंटरप्राइज द्वारा मैक्वेरी एयरफाइनेंस के अधिग्रहण को दी मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने वैश्विक विमान पट्टे क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण सौदे को मंजूरी प्रदान कर दी है। आयोग ने दुबई स्थित विमान लीजिंग कंपनी दुबई एयरोस्पेस एंटरप्राइज (DAE) लिमिटेड द्वारा मैक्वेरी एयरफाइनेंस लिमिटेड के अधिग्रहण को स्वीकृति दे दी है।

यह अधिग्रहण डीएई की सहायक कंपनी DAE Aercap Designated Activity Company के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित सौदे के तहत मैक्वेरी एयरफाइनेंस लिमिटेड के मौजूदा शेयरधारकों से कंपनी का अधिग्रहण किया जाएगा।

वैश्विक विमान लीजिंग क्षेत्र में बड़ा कदम

दुबई एयरोस्पेस एंटरप्राइज (DAE) दुनिया की प्रमुख विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों में शामिल है। कंपनी 80 से अधिक देशों में एयरलाइंस और विमानन ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करती है। इसके विमान पोर्टफोलियो में विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक विमान शामिल हैं, जिन्हें विश्वभर की एयरलाइंस को लीज पर दिया जाता है।

वहीं, डबलिन (आयरलैंड) मुख्यालय वाली मैक्वेरी एयरफाइनेंस लिमिटेड भी वैश्विक स्तर पर सक्रिय विमान लीजिंग कंपनी है और 45 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी का विमानन वित्त और विमान लीजिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

विमानन क्षेत्र में बढ़ेगी वैश्विक उपस्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अधिग्रहण के बाद डीएई की वैश्विक विमान लीजिंग क्षमता और बाजार हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही कंपनी को नए ग्राहकों, व्यापक विमान पोर्टफोलियो और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी।

विमान लीजिंग उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह सौदा वैश्विक विमानन वित्त क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण अधिग्रहणों में से एक माना जा रहा है।

विस्तृत आदेश बाद में जारी करेगा आयोग

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा है कि प्रस्तावित लेनदेन की समीक्षा के बाद इसे मंजूरी दे दी गई है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आदेश और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी।

सीसीआई की मंजूरी मिलने के साथ ही इस अधिग्रहण प्रक्रिया को नियामकीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण मंजूरी प्राप्त हो गई है, जिससे सौदे को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

कैबिनेट ने बिहार में NH-31 और NH-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के उन्नयन को मंजूरी दी, लागत ₹3,936 करोड़

दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड (143.529 किलोमीटर) को बीओटी (टोल) मोड पर 3936.05 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन मानक में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है।

बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों के शहरी क्षेत्रों में विद्यमान गंभीर भौगोलिक खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत पूर्णिया शहर के लिए 6.729 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय लगभग दो घंटे कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आवागमन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना पूरे बिहार में प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड को निर्बाध रूप से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर 5 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 टैक्सटाइल क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 2 मत्स्य और समुद्री खाद्य पार्क) और 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (4 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 1 हवाई अड्डा, 4 राष्ट्रीय राजमार्ग, 2 राष्ट्रीय राजमार्ग) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

माय भारत ने सीमावर्ती गांवों में युवा सशक्तिकरण के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 शुरू किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने मेरा युवा भारत के माध्यम से विकसित जीवंत ग्राम कार्यक्रम 2026 के पहले चरण का शुभारंभ किया है। यह एक अग्रणी युवा नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर भागीदारी को सुदृढ़ करना, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और भारत के सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। यह कार्यक्रम दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुल 500 ‘एमवाई भारत’ स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। इनका चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया था। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है। प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे।

यह कार्यक्रम युवा नागरिकों को सीमावर्ती गांवों में रहने और स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। गांववासियों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के साथ परस्पर बातचीत के माध्यम से, प्रतिभागी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, सांस्कृतिक विरासत, विकासात्मक आकांक्षाओं और रणनीतिक महत्व से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे।

सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, शासन, सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, ग्राम विकास योजना, स्वयंसेवा और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयगत क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है। स्वयंसेवक घरेलू सर्वेक्षण करेंगे, ग्राम सभा की गतिविधियों में भाग लेंगे, स्वच्छता और पर्यावरण अभियानों में योगदान देंगे और गांवों में विकास के अवसरों की पहचान करने में सहायता करेंगे।

यह कार्यक्रम गृह मंत्रालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है और राष्ट्र निर्माण की पहलों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना के अनुरूप है।

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 भारत सरकार की युवा नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, भारत के युवाओं और इसके जीवंत सीमावर्ती गांवों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक संबंधों को सुदृढ़ करता है।

IEPFA और सेबी 5 जून को भोपाल में ‘निवेशक शिविर’ का आयोजन करेंगे

दिल्ली / सत्ता संदेश

आईईपीएफए का उद्देश्य इस ‘शिविर’ के माध्यम से निवेशकों को सशक्त बनाना और उनकी शिकायतों के निवारण तथा बिना दावे वाले लाभांश प्रक्रिया को सरल बनाना

दिल्ली / सत्ता संदेश

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष प्राधिकरण (आईईपीएफए) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भोपाल में 5 जून को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक एक दिवसीय ‘निवेशक शिविर’ का आयोजन करेंगे।

‘शिविर’ निवेशकों को बिना दावा किए गए लाभांश और शेयरों से संबंधित मुद्दों को हल करने में सहायता करने के लिए एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं प्रदान करने वाले मंच के रूप में कार्य करेगा। साथ ही, निवेशक सेवाओं और जमीनी स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र तक सीधी पहुंच को सक्षम करेगा।

निवेश शिविर के माध्यम से आईईपीएफए का लक्ष्य निम्नलिखित प्रदान करना है:

  • छह से सात वर्षों से लंबित बिना दावा किए गए लाभांश और शेयरों की रिकवरी के लिए प्रत्यक्ष सहायता
  • मौके पर ही केवाईसी अपडेट और नामांकन संबंधी सेवाएं
  • लंबित आईईपीएफए ​​दावों से संबंधित मुद्दों में तत्काल सहायता और समाधान

निवेशक शिविर मॉडल निवेशकों, कंपनियों और रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) के बीच सीधे और मध्यस्थ-मुक्त संपर्क को बढ़ावा देता है। शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए कार्यक्रम स्थल पर विशेष सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। बड़ी मात्रा में लाभांश का दावा न किए गए खातों वाली हितधारक कंपनियां निवेशकों से जुड़ने और उनकी चिंताओं को कुशलतापूर्वक दूर करने के लिए सक्रिय रूप से भाग लेंगी।

भोपाल शिविर, आईईपीएफए ​​के राष्ट्रव्यापी निवेशक संपर्क और जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बिना दावा किए गए निवेशों को वापस पाने की प्रक्रिया को सरल बनाना है।

यह कार्यक्रम वृंदावन गार्डन, होशंगाबाद रोड (एनएच-12), आर्यन विंग्स कॉलोनी, श्री रामेश्वरम, बागमुगलिया, मिसरोद, भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

यह पहल पूरे देश में एक सुरक्षित, सुलभ और निवेशक-केंद्रित वित्तीय इको सिस्टम के निर्माण के प्रति आईईपीएफए की प्रतिबद्धता को दोहराती है। आईईपीएफए सतत वित्तीय साक्षरता पहलों और देशव्यापी सहयोगात्मक लोक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग 17 लोगों की मौत 38 घायल

दिल्ली / सत्ता संदेश

बुधवार की सुबह दिल्ली के मालवीय नगर के हौजरानी स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में भीषण आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 10 गाड़ियां तुरंत मौके के लिए रवाना हुईं। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मौके पर दमकल विभाग की गाडियां मौजूद हैं। इस आग की वजह से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 38 घायल हैं। 

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली फायर सर्विस टीम को मालवीय नगर में लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। जिसके तुरंत बाद दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट के बेसमेंट से ये आग लगनी शुरू हुई। रेस्टोरेंट के बेसमेंट से गंभीर हालत में लोगों को रेस्क्यू किया गया। इस आग की वजह से अब तक 17 लोगों की मौत हो गई है और 38 लोग घायल हैं। घायलों को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

AAP विधायक सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

आम आदमी पार्टी के विधायक सोमनाथ भारती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र हौज रानी में एक बहुमंजिला इमारत में सुबह करीब 8:30 बजे भीषण आग लगी। उन्होंने हताहतों की आशंका जताते हुए कहा कि इसमें मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीकी नागरिक फंसे हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इस समय भी कुछ लोग रेस्टोरेंट के अंदर फंसे हुए हैं जिन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। राजधानी दिल्ली में इस तरह का अग्निकांड कोई पहली बार देखने को नहीं मिला है। इससे पहले भी दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में इसी तरह की भीषण आग लग चुकी है।

बता दें कि यह घटना दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में मंगलवार की सुबह एक इमारत ढहने के एक दिन बाद हुई है, जिसमें संदिग्ध एलपीजी सिलिंडर विस्फोट के कारण दस लोग घायल हो गए थे। 

महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मिली नई गति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि के रूप में महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।

महाराष्ट्र में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। यह देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में से एक में हुई तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों ओर की पटरियों के लिए हाल ही में बनकर तैयार हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि द्वारा की गई। निर्माण के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

खुदाई की पूरी प्रक्रिया की अवधि में संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और सटीक निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ सहित वास्तविक समय की निगरानी व्यवस्थाओं द्वारा कंपन, सुरंग की गतिविधि और आसपास की संरचनाओं पर निरंतर नजर बनाई रखी गई। सुरंग निर्माण कार्यों के दौरान वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण सहित व्यापक श्रमिक सुरक्षा उपायों में कोई भी ढील नहीं दी गई।

यह सफलता परियोजना के महाराष्ट्र खंड में पहले हासिल की गई उपलब्धियों पर आधारित है। 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग (एमटी-05) का निर्माण 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास पूरा हुआ। यह उपलब्धि महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग निर्माण के रूप में सामने आई। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग (एमटी-06) का निर्माण हुआ, इसमें न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके 454 मीटर लंबी सुरंग खोदी गई। इस तरह पालघर जिले में लगभग एक महीने के भीतर दो सफल निर्माण पूरे हुए।

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से, एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 में अब तक खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एमटी-08 (350 मीटर) में 5 अक्टूबर 2023 को खुदाई का काम पूरा हो गया था, एमटी-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है, एमटी-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में काम लगातार जारी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल आठ पर्वतीय सुरंगों में से सात महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आती हैं और एक गुजरात के वलसाड जिले में है और उस सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच तीनों पर्वतीय सुरंगों की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वहां के निर्माण कार्य तेजी से प्रगति हो रही है। इन दोनों शहरों के बीच के मार्ग में तीन (03) पर्वतीय सुरंगें (एमटी 08, एमटी -07 और एमटी-06) शामिल हैं।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना उन्नत सुरंग, निगरानी और निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य के लिए रेल परिवहन की नींव रखे जाने से देश की हाई-स्पीड रेल अवसंरचना में क्षमताएं मजबूत हो रही हैं।

सीधी में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत पर NHRC सख्त, मध्य प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वर्ष के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 महिलाओं की मृत्यु हुई। इन मौतों के पीछे जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को प्रमुख कारण बताया गया है।

एनएचआरसी ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृत महिलाओं की औसत आयु 26 वर्ष थी और इनमें से अधिकांश पहली या दूसरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। स्वास्थ्य विभाग की सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य रैंकिंग में भी सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है।

खबरों में यह भी सामने आया है कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में डॉक्टरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। बेहतर इलाज के लिए मरीजों को अक्सर रीवा भेजना पड़ता है, जिससे रास्ते में जोखिम बढ़ जाता है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में सड़क संपर्क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के लिए दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है। मानसून के दौरान यह समस्या और भी बढ़ जाती है।

अब सभी की नजरें मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्ट पर हैं, जिसके आधार पर एनएचआरसी आगे की कार्रवाई तय करेगा।

स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत से जनता का भरोसा साबित: जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत को जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि चार जिलों में हुए चुनावों में मंडी, सोलन और धर्मशाला में पार्टी की जीत यह दर्शाती है कि लोगों का विश्वास लगातार बीजेपी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सबसे निचले स्तर का चुनाव होता है और इसमें जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना संदेश दिया है। उनके अनुसार सरकार ने चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे नहीं किए, जिसके कारण लोगों में नाराजगी है।

हिमाचल में लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोगों के पंजाब से पारिवारिक और सामाजिक संबंध हैं, लेकिन इस तरह का टैक्स लगाने से पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब की ओर से भी हिमाचल के वाहनों पर टैक्स लगाने की बात सामने आई है, जिससे दोनों राज्यों के बीच आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

सरकारी नौकरियों में डोप टेस्ट को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्णय लेने का तरीका काफी अलग है। उन्होंने माना कि प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर होती जा रही है और अब ड्रग्स गांवों तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान और टास्क फोर्स का गठन किया गया है, लेकिन अब नौकरी से पहले डोप टेस्ट लागू करने का निर्णय लिया गया है।

हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारियों की हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। मुख्यमंत्री पहले ही वेतन हर महीने की पहली तारीख को देने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, जिसके कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

मानसून की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार आगामी बारिश के मौसम के लिए तैयार नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की आपदा के बाद सड़कों पर पड़ा मलबा अभी तक नहीं हटाया गया है। ऐसे में मानसून के दौरान यह मलबा फिर सड़कों पर आ सकता है, जिससे सड़कें बंद होने और लोगों को परेशानियों का सामना करने की आशंका बढ़ जाएगी।

गुरदासपुर जोन 2 में धान बुवाई का काम शुरू, किसानों ने सुनाई आपबीती

गुरदासपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : लवप्रीत सिंह

पंजाब में धान का सीजन 15 मई से शुरू हो गया था। धान के सीजन में अलग-अलग जिलों को पांच जोन में बांटा गया है। वहीं जिला गुरदासपुर को जोन 2 में रखा गया है। जहां धान की बुआई का काम शुरू हो गया है।

गुरदासपुर की बात करें तो यहां ज्यादातर किसानों ने पौधे लगा दिए हैं और खेतों को समतल करने (कद्दू) का काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन लेबर की कमी के कारण अभी तक धान की बुआई शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि किसान इस बात से खुश हैं कि सरकार ने बिजली की सप्लाई शुरू कर दी है और उम्मीद है कि यह सप्लाई बिना रुके जारी रहेगी, लेकिन साथ ही खाद की कमी किसानों के लिए परेशानी बनती जा रही है।

किसानों का कहना है कि ज्यादातर खाद स्टोर किसानों को खाद नहीं दे रहे हैं और अगर देते भी हैं तो उन्हें फालतू दवाइयां देकर खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि इस बार ज़्यादा समय और बारिश होने से उम्मीद है कि किसानों की मुश्किलें कम होंगी और पैदावार भी अच्छी होगी। किसानों ने यह भी कहा कि हालांकि बासमती से पानी की बचत होती है, लेकिन बासमती की मार्केटिंग में मुश्किलें आती हैं, इसलिए किसान धान की कम समय वाली किस्मों को प्राथमिकता दे रहे है।