प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर हुई चर्चा
बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ ईरान से जुड़े संघर्ष पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।
हॉर्मुज और ब्लैक सी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और भारतीय जहाजकर्मियों की स्थिति भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघर्षों के समाधान का सही रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।
INNOPROM India को लेकर भी चर्चा
दोनों नेताओं ने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) का स्वागत किया। यह प्रदर्शनी पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई। मोदी और पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा भी किया और इसमें भाग लेने वाले लोगों से बातचीत की।
दोनों नेताओं ने माना कि इस तरह के आयोजन भारत और रूस के बीच व्यापार एवं औद्योगिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
BRICS में भारत-रूस सहयोग पर जोर
बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर 2026 में भारत की अध्यक्षता में BRICS के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएम मोदी को पुतिन ने रूस आने का दिया निमंत्रण
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
दोनों देशों के बीच शिखर सम्मेलन की तारीख राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएगी। नेताओं ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूती दिखा रही है।
चीन के किंगदाओ शिपयार्ड में एक विदेशी मालवाहक जहाज में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे में करीब 30 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि चीन की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी के मुताबिक, जिस मालवाहक जहाज में आग लगी, वह मरम्मत के लिए किंगदाओ शिपयार्ड में खड़ा था। इसी दौरान अचानक जहाज में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसका ऊपरी हिस्सा आग की चपेट में आ गया। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की कई टीमों को मौके पर भेजा गया है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, आग लगने वाला जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला मालवाहक पोत ‘ओशन मेलोडी’ है। जहाज का इस्तेमाल किस कंपनी या ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा था, इस संबंध में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि जहाज को कुछ दिन पहले ही चीन के किंगदाओ लाया गया था और यहां इसकी मरम्मत का काम चल रहा था।
हादसे के बाद चीन के राष्ट्रपति भी सक्रिय हो गए हैं और राहत एवं बचाव अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली कियांग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश तेज करने और बचाव अभियान को पूरी गंभीरता से चलाने के निर्देश दिए हैं। आशंका है कि हादसे में प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या शिपयार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की हो सकती है।
घटना के बाद शिपयार्ड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सामने आई तस्वीरों में मालवाहक जहाज का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह जला हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां शिपयार्ड के बाहर तैनात नजर आ रही हैं। चीनी शिपयार्ड के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया के सवालों का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है।
किंगदाओ में चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन का प्रमुख जहाज निर्माण और मरम्मत परिसर मौजूद है। यहां व्यावसायिक जहाजों के निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत का काम किया जाता है। यह विशाल शिपयार्ड करीब 815 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाने के साथ-साथ लापता लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और हादसे में प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या का पता लगाना है।
नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। ऐसे में संभावित मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
18वें ब्रिक्स सम्मेलन की भारत में मेजबानी
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने की संभावना है। यदि उनका दौरा होता है तो गलवान हिंसा और उसके बाद पैदा हुए सीमा तनाव के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।
गलवान घाटी में जून 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी। सीमा पर तनाव के साथ-साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी।
हालांकि, पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी रही हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद कुछ तनाव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है।
सीमा विवाद के बीच बातचीत की कोशिश
गलवान के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों तथा राजनयिकों के स्तर पर लगातार बातचीत होती रही है। हाल ही में कजाकिस्तान के बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आए थे और दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया था। हालांकि, उस समय दोनों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।
ऐसे में यदि नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत होती है तो इसे भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। हालांकि, सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।
डोभाल की चीन यात्रा से बनी बातचीत की जमीन
शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म तथा दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत हुई है।
इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, लद्दाख में तनाव कम होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसके इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में गुटेरेस भी होंगे शामिल
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की संभावना है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में गुटेरेस 13 सितंबर को मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है।
गुटेरेस अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर दे सकते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां 1945 के दौर जैसी नहीं हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव जरूरी है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
वैशाली के लालगंज में भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-139डब्ल्यू पर निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरने से छह कर्मचारी घायल हो गए। दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बिहार / सत्ता संदेश
बिहार के वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के तहत बनाए जा रहे एनएच-139डब्ल्यू फोरलेन पर गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। निर्माण कार्य के दौरान एक निर्माणाधीन पुल का भारी-भरकम लॉन्चर अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से साइट पर काम कर रहे कई कर्मचारी घायल हो गए। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने घायलों को लालगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में छह घायल कर्मचारियों का इलाज किया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही घायलों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर भी जुट गए और हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों और घायलों के परिजनों ने निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निर्माण के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे और तकनीकी स्तर पर भी जरूरी सावधानियां नहीं बरती गईं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद परियोजना से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार मौके से चले गए। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी या निर्माण कार्य के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई। जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, उपकरणों और तकनीकी व्यवस्थाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट किया। इससे LVM3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 किलो न्यूटन (kN) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 9 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में किया गया।
इस सफल परीक्षण को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य के LVM3 मिशनों में पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले LVM3 मिशन के C32 अपर स्टेज के लिए निर्धारित CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN के बढ़े हुए थ्रस्ट पर फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफल रहा। परीक्षण के दौरान LOX टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) के प्रदर्शन को भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है।
CE20 इंजन LVM3 लॉन्च व्हीकल के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को शक्ति प्रदान करता है। इसरो भविष्य के LVM3 मिशनों के लिए 22 टन थ्रस्ट क्षमता वाले अपग्रेडेड C32 स्टेज पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य रॉकेट की पेलोड क्षमता को और बढ़ाना है, जिससे भविष्य में अधिक भारी उपग्रहों और अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता मजबूत होगी।
इस सफल परीक्षण से पहले मार्च 2026 में भी महेंद्रगिरी स्थित परीक्षण सुविधा में CE20 इंजन का 22 टन थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर हॉट टेस्ट किया गया था। उस परीक्षण में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का इस्तेमाल किया गया था। 165 सेकंड तक चले उस परीक्षण में इंजन और परीक्षण सुविधा ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था।
CE20 इंजन के हाई-एरिया-रेशियो नोजल की समुद्र तल पर टेस्टिंग तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन हो सकता है, जिससे तेज कंपन और थर्मल स्ट्रेस पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट अपग्रेडेड C32 स्टेज को आगामी LVM3 मिशनों में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इसरो की यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है, जब 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (EOS-05) का सफल प्रक्षेपण किया गया था। लगातार सफल परीक्षण और प्रक्षेपण भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पिछले करीब 12 वर्षों से लगातार आगे बढ़ रही है।
इस योजना के तहत देश के सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक यानी क्वाड्रुपल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री एवं माल यातायात के दबाव को संभालना है।
सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे के व्यापक ओवरहाल और आधुनिकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है। इसके तहत सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की ट्रैक क्षमता बढ़ाई जा रही है।
इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के चार मार्ग गोल्डन क्वाड्रिलेटरल का हिस्सा हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता इसके दो प्रमुख डायगोनल हैं। दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
सरकार इन सातों कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से चार-ट्रैक करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर रेल लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
10,783 करोड़ रुपये की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट समिति ने रेलवे मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ेगी। इससे प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ने और परिचालन में सुधार की उम्मीद है।
इन रेलवे रूटों पर होगा काम
मंजूर की गई परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन बनाई जाएगी।
अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इन मार्गों पर ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही भीड़भाड़ कम होगी और रेलवे की परिचालन दक्षता तथा सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।
पांच राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक, ये तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी।
परियोजनाओं के माध्यम से रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इससे लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इन गांवों में करीब 56 लाख लोगों की आबादी रहती है।
पीएम गति शक्ति के तहत होगा विकास
इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करना है।
सरकार का कहना है कि एकीकृत योजना और विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ समन्वय के जरिए इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर परिवहन नेटवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर
रेल नेटवर्क के विस्तार से कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थान शामिल हैं।
इससे धार्मिक पर्यटन और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कोयला, सीमेंट और स्टील की ढुलाई को मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार, ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और इस्पात जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिहाज से बेहद अहम हैं।
रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने के बाद इन मार्गों पर करीब 27 MTPA यानी 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल यातायात की संभावना है। इससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने के साथ लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण को भी होगा लाभ
रेलवे को ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम बताते हुए सरकार ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभों पर भी जोर दिया है।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। साथ ही लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है। सरकार ने इस पर्यावरणीय लाभ को करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया है।
कुल मिलाकर, इन परियोजनाओं से रेलवे की क्षमता बढ़ाने, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाने, माल ढुलाई को गति देने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्कूली बच्चों के आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) को लेकर चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी मिशन-मोड अभियान में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अभियान के तहत देशभर में 2 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे किए जा चुके हैं।
सितंबर 2025 में शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत अब तक 1.56 लाख से अधिक स्कूलों को कवर किया जा चुका है। अभियान का उद्देश्य बच्चों के आधार में समय पर बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट कराना और इस प्रक्रिया को स्कूल स्तर पर ही आसान एवं सुविधाजनक बनाना है।
UDISE+ के तकनीकी एकीकरण से अभियान को मिली गति
UIDAI ने शिक्षा मंत्रालय के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के साथ तकनीकी एकीकरण किया है। इसके माध्यम से स्कूलों में बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो रही है।
UIDAI और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के समन्वय से स्कूलों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को आधार अपडेट कराने के लिए अलग से केंद्रों पर जाने की जरूरत कम हुई है और सेवा सीधे स्कूलों तक पहुंच रही है।
5 और 15 वर्ष की उम्र में MBU जरूरी
पांच वर्ष से कम उम्र में आधार बनाते समय बच्चों की जनसांख्यिकीय जानकारी और फोटो दर्ज की जाती है। इस उम्र में उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली जैसी बायोमेट्रिक जानकारी सामान्यतः दर्ज नहीं की जाती, क्योंकि बच्चों में ये बायोमेट्रिक्स अभी विकसित हो रहे होते हैं।
5 वर्ष की आयु पूरी होने पर और फिर 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) कराया जाना जरूरी है। समय पर अपडेट होने से आगे चलकर आधार प्रमाणीकरण में आने वाली संभावित परेशानियों को कम किया जा सकता है।
30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 साल के बच्चों के लिए MBU मुफ्त
बच्चों और अभिभावकों को समय पर MBU कराने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से UIDAI ने शुल्क में राहत दी है। तकनीकी रूप से 30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट निःशुल्क है।
UIDAI के अनुसार, 7 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए MBU शुल्क 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए माफ किया गया था, जबकि 5-7 वर्ष और 15-17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए MBU पहले से ही निःशुल्क है।
NEET, JEE और CUET समेत कई परीक्षाओं में हो सकती है जरूरत
UIDAI ने अभिभावकों से बच्चों के आधार में समय पर MBU पूरा कराने की अपील की है। आधार में बायोमेट्रिक अपडेट नहीं होने पर कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा NEET, JEE, CUET जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं के दौरान आधार प्रमाणीकरण में कठिनाई आ सकती है।
UIDAI का कहना है कि समय पर MBU पूरा कराने से बच्चों की शिक्षा, उच्च शिक्षा और विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने के दौरान आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अधिक सुचारू रहने में मदद मिलेगी।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की ओर से 18 अगस्त यानि की मंगलवार को यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में ‘एग्री-स्टार्टअप स्टेकहोल्डर्स कनेक्ट’ का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देशभर से एग्री-स्टार्टअप, सरकारी प्रतिनिधि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट, शोधकर्ता, NGO, किसान उत्पादक संगठन (FPO), इनक्यूबेटर, शिक्षाविद और छात्र शामिल होंगे।
आपको बता दें कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के MANAGE-सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एग्रीप्रेन्योरशिप (MANAGE-CIA) के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से विकसित हो रहे एग्री-इनोवेशन और एग्रीप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
देशभर के एग्री-स्टार्टअप होंगे शामिल
इस कार्यक्रम की खासियत देश के अलग-अलग हिस्सों से एग्री-स्टार्टअप की भागीदारी होगी। इन्हें सरकारी अधिकारियों, निवेशकों, इंडस्ट्री विशेषज्ञों, इनक्यूबेटर, FPO प्रतिनिधियों, NGO और शोधकर्ताओं के साथ सीधे संवाद और नेटवर्किंग का मौका मिलेगा।
इस कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में उभरती तकनीकों, उद्यमिता, बाजार के अवसरों, संस्थागत सहयोग, इनोवेशन और टिकाऊ कृषि समाधानों जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
स्टार्टअप और कृषि इकोसिस्टम के बीच सहयोग पर जोर
‘एग्री-स्टार्टअप स्टेकहोल्डर्स कनेक्ट’ का उद्देश्य स्टार्टअप और व्यापक कृषि इकोसिस्टम के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत ज्ञान साझा करने, नेटवर्किंग, मेंटरिंग और संभावित साझेदारी के मौको को बढ़ावा दिया जाएगा।
MANAGE-CIA की ओर से ऐसे स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्टार्टअप्स को कृषि संस्थानों और इकोसिस्टम पार्टनर्स से जोड़ने पर जोर दिया जाता है, ताकि उन्हें आवश्यक ज्ञान, संसाधनों और सहयोग के अवसरों तक बेहतर पहुंच मिल सके।
LPU में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा
LPU अपने उद्यमिता इकोसिस्टम और इनक्यूबेशन सुविधाओं के माध्यम से स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दे रहा है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवा इनोवेटर्स और उद्यमियों को अपने विचारों को व्यावहारिक एवं सफल उद्यमों में बदलने के लिए आवश्यक वातावरण और सहयोग उपलब्ध कराना है।
ऐसे में ‘एग्री-स्टार्टअप स्टेकहोल्डर्स कनेक्ट’ कृषि क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स, विशेषज्ञों, संस्थानों और अन्य हितधारकों के बीच नेटवर्किंग, ज्ञान साझा करने और संभावित साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन देश के सामने रखा. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को नई ऊर्जा और नई दिशा की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने भारत की सात प्रमुख शक्तियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सामर्थ्य बढ़ाकर भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलानी होगी.
सप्तधारा की पहली शक्ति- मैन्युफैक्चरिंग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘शक्ति की सप्तधारा’ में पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग पावर है. भारत को डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करनी होगी. उन्होंने कहा कि भारत को लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के वैश्विक मानकों पर खरा उतरते हुए दुनिया के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर बनना होगा.
दूसरी शक्ति- कृषि और खाद्य उत्पादन
सप्तधारा की दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार भारत के लिए खुल रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए नए बाजारों तक पहुंच बढ़ रही है. भारत के मसाले और मोटे अनाज यानी मिलेट्स दुनिया में भारतीय ब्रांड के रूप में पहचान बनाने चाहिए.
तीसरी शक्ति- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
प्रधानमंत्री ने सप्तधारा की तीसरी शक्ति टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बताया. उन्होंने कहा कि यह रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस और डेटा सेंटर का दौर है. भारत को उभरती तकनीकों में वैश्विक इनोवेशन हब बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
उन्होंने कहा कि यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है. अब देश को नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में अगली छलांग लगाने की जरूरत है.
चौथी शक्ति- गति शक्ति
सप्तधारा की चौथी शक्ति गति शक्ति है. प्रधानमंत्री मोदी ने तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए कहा कि शहरों को हाई-स्पीड रेल से जोड़ना होगा. इसके साथ ही पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि देश की आर्थिक गतिविधियों को और गति मिल सके.
पांचवीं शक्ति- रक्षा शक्ति
प्रधानमंत्री ने पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति को बताया. उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब भारत के लिए जरूरी है. भारत केवल दुनिया के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता, बल्कि उसे रक्षा क्षेत्र में वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
उन्होंने कहा कि नेक्स्ट जेनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित कर भारत को हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक समेत अत्याधुनिक क्षेत्रों में नेतृत्व हासिल करने का प्रयास करना चाहिए.
छठी शक्ति- ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी
सप्तधारा की छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में काम करना होगा. उन्होंने ब्लू इकोनॉमी में मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक को बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया. प्रधानमंत्री के मुताबिक इन क्षेत्रों से भारत के विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं.
सातवीं शक्ति- भारत का सॉफ्ट पावर
सप्तधारा की सातवीं और अहम शक्ति भारत का सॉफ्ट पावर है. प्रधानमंत्री मोदी ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि योग दुनिया के लिए ऊर्जा और भारत के लिए विश्वास का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है.
विकसित भारत के लिए नई धारा का आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता को पहले ‘सप्तसिंधु’ के रूप में जाना और समझा जाता था. अब विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को ‘शक्ति की सप्तधारा’ के साथ आगे बढ़ना होगा. मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन- ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर को मजबूत कर भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेना होगा.
बुड्ढे नाले की जल्द होगी सफाई, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना के हैबोवाल में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट की रखी आधारशिला
सीबीजी प्लांट से बुड्ढे नाले में कूड़ा-कचरा जाने पर लगेगी रोक: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
यह परियोजना बुड्ढे नाले में सीवरेज जाम होने की समस्या के समाधान और प्रदूषण कम करने में मदद करेगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मिशन के तहत 435 डेयरी मालिकों को पशुओं के गोबर से आय के नए स्रोत पैदा करने में मिलेगी मदद: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
डेयरी कॉम्प्लेक्स में प्रतिदिन पैदा होने वाले 300 टन पशुओं के गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
2.5 एकड़ में स्थापित किया जा रहा 65 करोड़ रुपये की लागत वाला यह सीबीजी प्लांट सितंबर 2027 तक चालू हो जाएगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
यह प्लांट प्रतिदिन लगभग 5 टन सीबीजी का उत्पादन करेगा और इसमें जैविक खाद तैयार की जाएगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पंजाब भर में ऐसे और प्लांट लगाए जाएंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पिछली सरकारों ने कई कार्यक्रम शुरू किए, लेकिन पंजाब का विकास करने के बजाय विकास के फंड अपनी जेबों में डाल लिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
‘आप’ पंजाब में दोबारा सरकार बनाएगी और विपक्ष की जमानतें जब्त हो जाएंगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
लुधियाना / सत्ता संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज हैबोवाल में 65 करोड़ रुपये की लागत वाले कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) प्लांट की आधारशिला रखी, जिससे बुड्ढे नाले में कूड़ा-कचरा जाने से रोकने में मदद मिलेगी और पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके साथ ही यह प्लांट सीवरेज जाम होने की समस्या के समाधान और बुड्ढे नाले में प्रदूषण कम करने में भी मदद करेगा। यह परियोजना 2.5 एकड़ में बनाई जा रही है और सितंबर 2027 तक इसके चालू होने की संभावना है। इस प्लांट में ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मिशन के तहत डेयरी कॉम्प्लेक्स से प्रतिदिन पैदा होने वाले 300 टन पशुओं के गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा और 435 डेयरी मालिकों को सीधे लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लांट प्रतिदिन लगभग पांच टन सीबीजी और जैविक बायो-खाद का उत्पादन करेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के लिए पूरे राज्य में ऐसे और प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
अपने एक्स अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज हैबोवाल, लुधियाना में 65 करोड़ रुपये की लागत वाले कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) प्लांट की आधारशिला रखी, जो सितंबर 2027 तक चालू हो जाएगा। ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मिशन के तहत यह प्लांट प्रतिदिन पशुओं के 300 टन गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करेगा। यह कूड़े-कचरे को बुड्ढे नाले में जाने से रोकेगा, सीवरेज जाम होने की समस्या को हल करने में मदद करेगा और इससे 435 डेयरी मालिकों को सीधा लाभ होगा। पंजाब के जल स्रोतों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारी सरकार की जनहितैषी सोच हमारे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी रहेगी।”
हैबोवाल में सीबीजी प्लांट की आधारशिला रखने के बाद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि यहां कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट की आधारशिला रखी जा रही है। मैं इस परियोजना को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एचपीसीएल (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड) के अधिकारियों का धन्यवाद करता हूं। यह पहल बुड्ढे नाले के पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। यह परियोजना 65 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी और सितंबर 2027 तक इसके चालू होने की संभावना है।”
इस परियोजना के क्रियान्वयन में पंजाब सरकार की भूमिका को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए 2.5 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई गई है और हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स में प्रतिदिन पैदा होने वाले लगभग 300 टन पशुओं के गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस और निस्तारित किया जाएगा। यह परियोजना बुड्ढे नाले में बिना उपचारित गोबर और कचरे को जाने से रोकेगी, जिससे जल प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण में सुधार आएगा। यह परियोजना डेयरी कॉम्प्लेक्स और इसके आसपास स्वच्छता में भी बड़े स्तर पर सुधार करेगी।”
परियोजना के आर्थिक लाभों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इस परियोजना से ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ के तहत क्षेत्र के लगभग 435 डेयरी मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा। पशुओं के गोबर के वैज्ञानिक उपयोग से डेयरी किसानों के लिए आय के नए स्रोत पैदा होंगे। यह प्लांट जैविक बायो-खाद भी तैयार करेगा, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्लांट प्रतिदिन लगभग पांच टन कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन करेगा और युवाओं के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा, “हमारी सरकार पंजाब को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह परियोजना पंजाब में पर्यावरण अनुकूल निवेश को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी। यह सिर्फ एक गैस प्लांट नहीं है; यह पंजाब को प्रदूषण मुक्त, हरा-भरा और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”
स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्रदूषण के खतरे को रोकने के लिए पंजाब भर में ऐसे और प्लांट लगाए जाएंगे। मैं लोगों से यह भी अपील करता हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि राज्य के जल स्रोतों में गंदा पानी न डाला जाए, ताकि मानव कल्याण के लिए इन स्रोतों की शुद्धता बरकरार रखी जा सके।”
उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य का पानी अब पीने योग्य नहीं रहा और अधिकांश क्षेत्र डार्क जोन में जा रहे हैं। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब राज्य में सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन आज यह 88 प्रतिशत से अधिक हो गया है।”
नहरी सिंचाई के विस्तार के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने के लिए 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई हैं, जो कनाडा और बाघापुराना के बीच की दूरी के बराबर है। इसके अलावा, इस वर्ष के अंत तक और 7,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी। हमने राज्य के हर कोने में किसानों की सुविधा के लिए पाइपलाइनें बिछाई हैं और खालों को बहाल किया है। इससे किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतें पूरी हो रही हैं, जिससे उन्हें बहुत लाभ मिल रहा है। नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं, ताकि पानी का स्तर बढ़ाया जा सके। इन प्वाइंट्स के माध्यम से 21 लाख क्यूसेक पानी रिचार्ज किया गया है, जिससे जल स्तर में दो से चार मीटर तक वृद्धि हुई है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “हमारी सरकार द्वारा 43,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है, जिनके रखरखाव के लिए ठेकेदार जिम्मेदार होंगे।”
राज्य सरकार द्वारा पैदा किए जा रहे रोजगार के व्यापक अवसरों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने पंजाब के युवाओं को बिना किसी सिफारिश या भ्रष्टाचार के पूरी तरह योग्यता के आधार पर 69,000 से अधिक नौकरियां प्रदान की हैं। ‘आप’ सरकार भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से पैदा हुई है और आम लोगों को सशक्त बनाने के लिए अथक मेहनत कर रही है। हमारी सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए काम कर रही है और बदले की राजनीति या लोगों अथवा विपक्ष के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करवाने में विश्वास नहीं रखती।”
लोगों के पैसे के उचित इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आप सरकार सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए कर रही है। पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और आज किसानों को भी दिन के समय बिजली मिल रही है, जो राज्य सरकार की क्रांतिकारी पहल है। लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है और हम इसे पूरी समझदारी के साथ उनकी भलाई पर खर्च कर रहे हैं। लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों तक वापस पहुंच रहा है।”
लोगों द्वारा सरकार की पहलों को मिल रहे भरपूर समर्थन के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “राज्य सरकार द्वारा की गई शानदार पहलों के कारण पंजाब भर के लोग मुझे प्यार दे रहे हैं, जबकि वे विपक्षी नेताओं से हाथ मिलाने से भी परहेज कर रहे हैं। लुधियाना मेरी कर्मभूमि है, क्योंकि मैं 1992 में पहली बार यहां आया था।”
मावां-धीयां सत्कार योजना पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार ने अपनी तरह की पहली मावां-धीयां सत्कार योजना शुरू की है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की पंजाब की सभी महिलाएं इस योजना का लाभ लेने के योग्य हैं। अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये मिल रहे हैं, जबकि बाकी वर्गों की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये मिल रहे हैं। एक करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है और 72.13 लाख लाभार्थी इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस योजना के तहत 97 प्रतिशत से अधिक महिलाएं लाभ ले रही हैं, जिससे यह योजना देश की सबसे व्यापक महिला-केंद्रित सामाजिक सुरक्षा पहलों में शामिल हो गई है।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह योजना पंजाब के प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा उपचार प्रदान करती है। यह बेहद गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज प्रदान करने वाला पहला भारतीय राज्य है, जिसने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करते हुए जनता पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम किया है। इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य राज्य के सभी परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है और इसके तहत लोगों ने अब तक 937 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त उपचार प्राप्त किया है।”
2027 के चुनाव में भी आएंगी सरकार
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछली सरकारें केवल ऐसी परियोजनाओं की योजना बनाती रहीं, लेकिन विकास के लिए पैसा खर्च करने के बजाय उन्होंने इस पैसे को अपनी जेब में डाल लिया, जिससे राज्य के विकास को नुकसान पहुंचा। आम आदमी पार्टी (आप) 2027 में दोबारा सरकार बनाएगी और विपक्ष की जमानतें जब्त हो जाएंगी।”
इससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का स्वागत करते हुए और परियोजना के लाभों के बारे में बात करते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि हैबोवाल सीबीजी प्लांट डेयरी कॉम्प्लेक्स में पैदा होने वाले पशुओं के गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करेगा और पर्यावरण संरक्षण तथा बुड्ढे नाले के पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और हरदीप सिंह मुंडियां, राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
सीबीजी प्लांट का होगा उत्पादन
65 करोड़ रुपये की लागत वाला यह कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट पंजाब सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए 2.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और यह प्लांट हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स में प्रतिदिन पैदा होने वाले लगभग 300 टन पशुओं के गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करेगा। इस प्लांट के सितंबर 2027 तक चालू होने की संभावना है। यह प्लांट प्रतिदिन लगभग पांच टन सीबीजी और जैविक बायो-खाद का उत्पादन करेगा। इससे बिना उपचारित गोबर और कचरा बुड्ढे नाले में नहीं जाएगा, जिससे डेयरी कॉम्प्लेक्स और इसके आसपास स्वच्छता में भी बड़े स्तर पर सुधार होगा।
इस परियोजना से पशुओं के गोबर का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जाएगा, जिससे लगभग 435 डेयरी मालिकों को सीधे लाभ मिलेगा। इसके साथ ही आय के नए अवसर पैदा होंगे, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल निवेश को बढ़ावा मिलेगा।