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Tawang International Tourism Mart 2026: 29 अक्टूबर से होगा आयोजन, 22 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 29 से 31 अक्टूबर तक 14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन होगा। 22 देशों के 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है।

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

तपूर्वोत्तर भारत की पर्यटन संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए 29 से 31 अक्टूबर, 2026 तक अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश सरकार और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के सहयोग से आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम होटल विवांता, तवांग में होगा। इसमें देश-विदेश के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक भाग लेंगे और क्षेत्र में पर्यटन विकास तथा व्यावसायिक साझेदारियों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पर्यटन एवं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी तथा अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू 29 अक्टूबर को उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान नॉर्थ ईस्ट बाजार का उद्घाटन किया जाएगा और पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम आयोजित होंगे।

22 देशों के 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद

14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में 200 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा विक्रेताओं के भाग लेने की संभावना है। इनमें 22 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल होंगे। ऑस्ट्रेलिया, भूटान, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मलेशिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है।

इस आयोजन में पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और पर्यटन उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक स्थलों और एडवेंचर टूरिज्म को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाना है।

30 अक्टूबर को होंगे बी2बी सत्र

मार्ट के दूसरे दिन, 30 अक्टूबर को व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा पूर्वोत्तर के पर्यटन सेवा प्रदाताओं को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके माध्यम से पर्यटन व्यवसायों के बीच सहयोग बढ़ाने, नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने और स्थानीय उद्यमियों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विकास से जुड़े तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे। इनमें पूर्वोत्तर में लाइव कार्यक्रमों और संगीत समारोहों से जुड़ी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने तथा संरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्रों में पर्यटकों की पहुंच सुगम बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा रॉयल एनफील्ड की ओर से ‘गंतव्यों से परे: पूर्वोत्तर भारत में अनुभवपरक यात्राओं का सृजन’ विषय पर प्रस्तुति दी जाएगी।

स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और खान-पान का होगा प्रदर्शन

आयोजन में नॉर्थ ईस्ट बाजार के माध्यम से पूर्वोत्तर की पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, वस्त्रों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और क्षेत्रीय व्यंजनों के जरिए प्रतिनिधियों को आठों राज्यों की विविध परंपराओं और खान-पान से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

तवांग के प्रमुख पर्यटन स्थलों का करेंगे भ्रमण

मार्ट के दौरान प्रतिभागियों के लिए तवांग और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों के भ्रमण की योजना भी बनाई गई है। इनमें तवांग मठ, जसवंत गढ़ युद्ध स्मारक, जंग जलप्रपात, तवांग युद्ध स्मारक, छठे दलाई लामा की जन्मस्थली उर्ग्येलिंग गोम्पा, बुद्ध पार्क, पंकांग तेंग त्सो झील और शेरनुप गांव शामिल हैं।

इन भ्रमणों के माध्यम से प्रतिनिधियों को क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक दृश्यों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए परिचयात्मक भ्रमण भी निर्धारित किए गए हैं, जो 1 नवंबर, 2026 को गुवाहाटी से शुरू होंगे।

पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भी होगी

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट के साथ 30 अक्टूबर को पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन विकास को गति देने और राज्यों के बीच सहयोग मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का 14वां संस्करण 13 वर्ष बाद तवांग में आयोजित हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2013 में इस आयोजन का दूसरा संस्करण तवांग में हुआ था। मार्ट का पिछला संस्करण नवंबर 2025 में सिक्किम की राजधानी गंगटोक में आयोजित किया गया था। इस बार तवांग में होने वाले आयोजन से पूर्वोत्तर भारत के पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और क्षेत्र में पर्यटन आधारित व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

Delhi Yamuna Cruise Service: रेखा गुप्ता ने किया क्रूज सेवा का निरीक्षण, जानें किराया और सफर की पूरी जानकारी

दिल्ली में यमुना रिवर सफारी का ट्रायल शुरू। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोनिया विहार से जगतपुर तक क्रूज सेवा का निरीक्षण किया। जानें संभावित किराया, सफर की अवधि और शुरुआत की तारीख।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में यमुना नदी पर पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सोनिया विहार से जगतपुर तक विकसित की जा रही यमुना क्रूज सेवा का ट्रायल रन और निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन व्यवस्था और यात्रियों के लिए तैयार की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। सरकार की योजना छठ महापर्व से पहले इस सेवा को शुरू करने की है, जबकि औपचारिक शुभारंभ नवंबर के पहले सप्ताह में किए जाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्लीवासियों का मां यमुना के साथ गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। यमुना रिवर सफारी इस जुड़ाव को नया आयाम देने के साथ राजधानी में पर्यटन और मनोरंजन की नई संभावनाएं खोलेगी। इससे लोगों को नदी के किनारे प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने और परिवार के साथ क्रूज यात्रा का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।

6 किलोमीटर के जलमार्ग पर चलेगा क्रूज

सोनिया विहार से जगतपुर तक लगभग 6 किलोमीटर के जलमार्ग पर क्रूज सेवा विकसित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को दिल्लीवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए फूड कियोस्क, रेस्टोरेंट, बच्चों के लिए किड्स जोन और अन्य जनसुविधाएं तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ यमुना की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि लोग नदी के प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें और इसके संरक्षण के प्रति भी जागरूक हों।

30 यात्रियों की क्षमता, 35 से 45 मिनट का सफर

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल 30 यात्रियों की क्षमता वाली क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी है। सोनिया विहार से जगतपुर स्थित शनि मंदिर तक आने-जाने में लगभग 35 से 45 मिनट लगने का अनुमान है। यात्रा पूरी होने के बाद यात्री अपने शुरुआती स्थान पर लौट सकेंगे।

क्रूज सेवा का ट्रायल लगभग एक सप्ताह तक चलाने की योजना है। इसके बाद नवंबर के पहले सप्ताह में औपचारिक शुरुआत की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी की जानी बाकी है।

क्या होगा यमुना क्रूज का किराया?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना परिसर में प्रवेश शुल्क 50 रुपये और क्रूज की एक पूरी यात्रा के लिए प्रस्तावित किराया 500 रुपये रखा गया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर जाने से पहले अंतिम टिकट दरों, बुकिंग व्यवस्था और संचालन समय की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि कर लें।

केंद्र और दिल्ली सरकार के समन्वय से तैयार हो रही परियोजना

यमुना रिवर सफारी परियोजना में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड सहित कई एजेंसियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से राजधानी में पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी यमुना रिवर सफारी को महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उनके अनुसार, बोट राइड, म्यूजिक फाउंटेन, वाटर स्पोर्ट्स और फूड पार्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से दिल्लीवासियों और पर्यटकों को नया अनुभव देने की योजना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और NGT के मानकों के पालन पर भी जोर दिया।

छठ महापर्व से पहले शुरुआत की तैयारी

दिल्ली सरकार की योजना यमुना रिवर सफारी को छठ महापर्व से पहले जनता के लिए खोलने की है। इसके साथ ही यमुना तट पर छठ पूजा के आयोजन की तैयारियां भी की जा रही हैं। यदि परियोजना निर्धारित समय पर शुरू होती है, तो दिल्लीवासियों को त्योहारों के मौसम में पर्यटन का एक नया विकल्प मिल सकता है।

यमुना क्रूज सेवा की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यात्रियों की सुरक्षा, नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों का कितनी प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है। इसके अलावा, किराये और संचालन संबंधी अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही लोग इस नई सुविधा का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

PM Modi Laddakh Visit : लद्दाख को मिलेगी 3,350 करोड़ की सौगात! नया एयरपोर्ट टर्मिनल, रणनीतिक सड़क और 40 गांवों में जल संरक्षण परियोजना

पीएम नरेंद्र मोदी लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपये की पांच विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें लेह एयरपोर्ट टर्मिनल, निम्मु-पदुम-दारचा सड़क, हाइड्रो प्रोजेक्ट और जल संरक्षण योजनाएं शामिल हैं।

लद्दाख / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन कर उन्हें देश को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इन परियोजनाओं में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रणनीतिक सड़क संपर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, प्राचीन विरासत का संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य लद्दाख में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करना और क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना है।

लेह एयरपोर्ट पर बनेगा आधुनिक सुविधाओं वाला नया टर्मिनल

इन प्रमुख परियोजनाओं में लेह के कुशोक बकुला रिम्पोचे एयरपोर्ट पर लगभग 640 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नई पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग शामिल है। करीब 23,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस आधुनिक टर्मिनल को सालाना 35 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस टर्मिनल में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जियोथर्मल ऊर्जा के इस्तेमाल की व्यवस्था की गई है। आधुनिक सुविधाओं और लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत के मेल से तैयार यह टर्मिनल यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के साथ क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

298 किलोमीटर लंबी निम्मु-पदुम-दारचा सड़क होगी समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से बनाई गई 298 किलोमीटर लंबी निम्मु-पदुम-दारचा सड़क भी देश को समर्पित करेंगे। यह सड़क लेह के निम्मु को हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ती है और लद्दाख के लिए एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराती है।

हिमालय के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और ऊंचे शिंकुन ला दर्रे से गुजरने वाली यह सड़क रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे सेना की आवाजाही और आवश्यक सैन्य रसद पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जंस्कार क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए बेहतर संपर्क मिल सकता है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करेंगे हानू हाइड्रो प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइन

लद्दाख में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री 9 मेगावाट क्षमता वाली हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खालत्सी ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन करेंगे।

इन परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने और क्षेत्र के विद्युत नेटवर्क की विश्वसनीयता बेहतर होने की उम्मीद है। लद्दाख में उपलब्ध जलविद्युत संसाधनों का उपयोग बढ़ाने की दिशा में भी इन्हें महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सिंधु घाट पर भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क

लद्दाख की प्राचीन सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री लेह में सिंधु घाट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन करेंगे।

लद्दाख में प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों के अनेक स्थल मौजूद हैं। इन पर जंगली जानवरों, मानव आकृतियों और विभिन्न प्रतीकों की नक्काशी देखने को मिलती है। ये कलाकृतियां हजारों साल पुराने मानव जीवन, संस्कृति और इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। संरक्षण पार्क के माध्यम से इस विरासत को सुरक्षित रखने और इसके महत्व को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ से 40 गांवों को मिलेगा जल संरक्षण का लाभ

जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के तहत 40 गांवों में तैयार किए गए 40 जल निकायों का भी उद्घाटन करेंगे। यह पहल ‘मिशन अमृत सरोवर’ के उद्देश्यों के अनुरूप लद्दाख की विशेष भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए शुरू की गई है।

लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता और जरूरत के बीच मौसमी असंतुलन एक बड़ी चुनौती है। बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से पानी आने के दौरान इसकी उपलब्धता बढ़ जाती है।

‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के तहत बनाए गए जल निकायों का उद्देश्य उपलब्ध पानी को संरक्षित करना और जरूरत के समय उसका उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे सिंचाई में सहायता मिलने, कृषि आधारित आजीविका को बनाए रखने और लंबे समय में क्षेत्र की जल सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

लद्दाख के विकास को मिलेगी नई गति

एयरपोर्ट, रणनीतिक सड़क, बिजली, विरासत संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़ी ये परियोजनाएं लद्दाख के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिल सकती है, जबकि बिजली और जल संरक्षण से क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके संचालन, रखरखाव और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनसे लद्दाख के लोगों को परिवहन, रोजगार, खेती और बुनियादी सेवाओं के क्षेत्र में कितना लाभ मिलता है।

उत्तराखंड से दिल्ली-NCR तक भूकंप के झटके, चमोली रहा केंद्र; नोएडा-मुरादाबाद में भी महसूस हुई कंपन

देहरादून / नई दिल्ली / सत्ता संदेश

उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन की सतह से करीब 13 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

भूकंप के झटके मंगलवार रात करीब 10:24 बजे महसूस किए गए। उत्तराखंड में गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में लोगों ने धरती में कंपन महसूस किया। बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ सहित कई क्षेत्रों में झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नोएडा में भी महसूस हुई धरती में कंपन

दिल्ली-NCR के नोएडा में भी मंगलवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। शहर के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। सेक्टर-122 निवासी भूषण शर्मा के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी और कंपन कुछ सेकेंड तक ही महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि उस समय वह परिवार के साथ खाना खा रहे थे और डाइनिंग टेबल पर रखा सामान हिलने लगा।

वहीं, सेक्टर-122 की निवेदिता ने बताया कि वह बेड पर आराम कर रही थीं, तभी अचानक बेड हिलने लगा। इसके बाद उन्हें भूकंप आने का अहसास हुआ।

मुरादाबाद में घरों से बाहर निकले लोग

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी भूकंप के झटकों के बाद लोगों में घबराहट देखी गई। धरती हिलने का अहसास होते ही कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। कुछ समय तक लोगों के बीच भूकंप को लेकर चर्चा होती रही। आसपास के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए जाने की सूचना सामने आई।

क्यों आता है भूकंप?

भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल है। पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या उनके बीच दबाव बढ़ता है, तो भूगर्भ में ऊर्जा जमा होने लगती है।

जब यह दबाव एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है तो चट्टानों और प्लेटों में हलचल या टूटने की स्थिति पैदा हो सकती है। इस दौरान निकलने वाली ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में धरती की सतह तक पहुंचती है और हमें भूकंप के झटकों के रूप में महसूस होती है।

क्या होता है भूकंप का केंद्र और तीव्रता?

भूकंप के फोकस या हाइपोसेंटर को पृथ्वी के अंदर वह स्थान कहा जाता है, जहां से भूकंपीय ऊर्जा निकलती है। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को एपिसेंटर (भूकंप का केंद्र) कहा जाता है।

एपिसेंटर से दूरी बढ़ने के साथ आम तौर पर भूकंप के कंपन का प्रभाव कम होता जाता है। हालांकि भूकंप का असर केवल तीव्रता पर ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई, स्थानीय भूगर्भीय संरचना और भूकंपीय तरंगों की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।

रिक्टर स्केल पर कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की मैग्नीट्यूड को मापने के लिए रिक्टर स्केल का पारंपरिक रूप से उल्लेख किया जाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में कई मामलों में Moment Magnitude Scale (Mw) का भी इस्तेमाल किया जाता है। मैग्नीट्यूड से भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा का अंदाजा लगाया जाता है।

भूकंप की तीव्रता जितनी अधिक होती है, सामान्य तौर पर उसके प्रभाव और नुकसान की संभावना भी उतनी ही बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप कितनी गहराई पर आया, उसका केंद्र कहां था, प्रभावित क्षेत्र की जमीन कैसी है और वहां बनी इमारतें कितनी मजबूत हैं।

फिलहाल उत्तराखंड के चमोली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके उत्तराखंड के कई जिलों के साथ-साथ दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए।

आकाशवाणी भवन में बिना अनुमति प्रवेश पर राहुल गांधी-प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, 8 घंटे चला था धरना

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली पुलिस ने इंडिया ब्लॉक के मंगलवार को किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति प्रवेश को लेकर मिली शिकायत के आधार पर की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को समाप्त करने की मांग को लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक के 19 दलों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च निकाला था। संसद मार्ग पर पुलिस द्वारा मार्च को रोके जाने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर वहां धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारी सांसदों ने कहा कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात किए बिना धरना समाप्त नहीं करेंगे। करीब 8 घंटे तक चले धरने के बाद रात करीब 8 बजे पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसदों को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप पहुंचाया।

इसके बाद रात करीब 10 बजे राहुल गांधी समेत सभी हिरासत में लिए गए सांसदों को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एफआईआर दर्ज की है।

इंडिया ब्लॉक के इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग रही। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग और सरकार इस प्रक्रिया को चुनावी सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बताते हैं।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में AISA, SFI, AISF, CJP, ASAP, सहित विभिन्न छात्र संगठनों की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता का मुख्य उद्देश्य 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाना और अधिक से अधिक नागरिकों, छात्रों तथा युवाओं को इसमें शामिल होने की अपील करना था।

प्रेस वार्ता में छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि वे चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने इस पहल का नेतृत्व करते हुए कहा कि विभिन्न छात्र संगठन एकजुट होकर अपनी मांगों को मजबूती से उठाएंगे।

छात्र संगठनों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग छात्रों की चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहा है। संगठनों ने चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों और कथित खामियों पर निर्वाचन आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान संगठनों ने हाल के चुनावों की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने की मांग की। उनका कहना है कि 10 अक्टूबर का प्रदर्शन छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।

छात्र संगठनों ने नागरिकों, युवाओं और छात्रों से जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन को समर्थन देने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन के माध्यम से सरकार और निर्वाचन आयोग तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएंगी तथा चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।

स्पेन : आवासीय संकट के बीच PM पेड्रो सांचेज ने समय से पहले चुनाव का किया ऐलान

वर्ल्ड डेस्क / स्पेन / सत्ता संदेश

स्पेन में बढ़ते आवासीय संकट के बीच प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए समय से पहले आम चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। संसद में सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों और आपातकालीन उपायों पर मिली करारी हार के बाद सांचेज ने सोमवार को चुनाव की तारीख का ऐलान किया। स्पेन में अब 29 नवंबर को आम चुनाव होंगे।

प्रधानमंत्री का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में किफायती आवास की मांग को लेकर सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ समय से स्पेन के कई शहरों में महंगे किराए, घरों की बढ़ती कीमतों और बेदखली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

आवासीय संकट को लेकर बढ़ा जनता का गुस्सा

स्पेन में लोगों की सबसे बड़ी मांग किफायती और सुलभ आवास उपलब्ध कराने की है। पिछले महीने मैड्रिड में एक 87 वर्षीय महिला को घर से बेदखल किए जाने की घटना ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। इस घटना का वीडियो टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और मकानों की कीमतों के बीच आम लोगों के लिए घर खरीदना या किराए पर लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। सरकार से आवास संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है।

संसद में सरकार को मिली बड़ी हार

पेड्रो सांचेज की सरकार को पिछले सप्ताह संसद में उस समय बड़ा झटका लगा, जब दक्षिणपंथी विपक्षी दलों ने सरकार के दो आपातकालीन आदेशों को रोक दिया। इन उपायों में बेदखली पर नियंत्रण और रियल एस्टेट में सट्टेबाजी को कम करने से जुड़े प्रावधान शामिल थे।

संसद में मिली इस हार के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई थीं कि प्रधानमंत्री सांचेज निर्धारित समय से पहले चुनाव करा सकते हैं। आखिरकार उन्होंने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए 29 नवंबर को चुनाव कराने की घोषणा कर दी।

2018 से प्रधानमंत्री हैं पेड्रो सांचेज

54 वर्षीय पेड्रो सांचेज वर्ष 2018 से स्पेन के प्रधानमंत्री हैं। लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण वे यूरोप के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। हालांकि, मौजूदा आवासीय संकट और संसद में सरकार की कमजोर स्थिति ने उनके सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

पीएम सांचेज ने की जनता से समर्थन की अपील

चुनाव की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों से समर्थन की अपील की। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता किफायती घर, सार्वजनिक सेवाएं और सामाजिक अधिकार हैं।

सांचेज ने स्पेन की जनता से एकजुट होने और आगामी चुनाव में उनकी पार्टी को संसद में मजबूत करने की अपील की। अब 29 नवंबर का चुनाव यह तय करेगा कि स्पेन की जनता आवासीय संकट और सरकार की नीतियों के बीच किस राजनीतिक विकल्प पर भरोसा जताती है।

खरगे ने रखीं कांग्रेस की 3 ‘गैर-समझौतावादी’ मांगें, CEC के इस्तीफे से बैलेट पेपर तक उठाया मुद्दा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को चुनावी प्रक्रिया को लेकर पार्टी की तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। खरगे ने कहा कि इन मांगों पर कांग्रेस का कोई समझौता नहीं होगा। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को रद्द करना और बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग शामिल है।

खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी इन तीनों मुद्दों को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर आंदोलन कर रहे नागरिक समाज के सदस्यों और युवा संगठनों के साथ कांग्रेस खड़ी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में कहा कि पार्टी की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। दूसरी मांग SIR प्रक्रिया को रद्द करने की है, जबकि तीसरी मांग चुनाव बैलेट पेपर से कराने की है। खरगे के मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

महिला पत्रकारों से जुड़े मामले पर भी खरगे ने उठाए सवाल

खरगे ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटना को लेकर चिंता जताई और बीजेपी पर महिला पत्रकारों के उत्पीड़न का आरोप लगाया।

यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने शिकायतें मिलने की पुष्टि की है और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। जांच में CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी देखा जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा लागू थी और प्रदर्शनकारियों को जगह खाली करने के लिए कहा गया था। पुलिस का कहना है कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों और संबंधित पत्रकारों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जारी है।

खरगे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली और मुंबई समेत कई स्थानों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

अमेरिकी पैसिफिक कमांडर एडमिरल पापारो भारत दौरे पर, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर होगी अहम बातचीत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

यूएस पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच Major Defense Partnership को आगे बढ़ाना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

भारत यात्रा के दौरान एडमिरल पापारो भारतीय रक्षा अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत करेंगे। चर्चा में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, उभरती तकनीक, रणनीतिक स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर फोकस

एडमिरल पापारो की यात्रा में Maritime Security यानी समुद्री सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

दोनों पक्ष रक्षा क्षेत्र में Emerging Technologies और तेजी से बदल रहे Technology Landscape के बीच सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार करेंगे। इसके अलावा रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

Defence Energy Resilience भी बातचीत का अहम मुद्दा

यात्रा के दौरान Defence Energy Resilience यानी रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की मजबूती से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग अब पारंपरिक सैन्य साझेदारी से आगे बढ़कर नई तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री डोमेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है।

हिंद महासागर क्षेत्र पर भी नजर

एडमिरल पापारो का भारत दौरा Indian Ocean Region में अमेरिकी रणनीतिक प्राथमिकताओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री शक्ति है और दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है।

इस यात्रा के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों और हिंद-प्रशांत में रणनीतिक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

कौन हैं एडमिरल सैमुअल पापारो?

एडमिरल सैमुअल जे. पापारो अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं और United States Indo-Pacific Command के कमांडर हैं। यह कमांड दुनिया के सबसे बड़े भौगोलिक सैन्य कमांड क्षेत्रों में से एक की जिम्मेदारी संभालता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कमांड के दायरे में करीब 4 लाख सैन्य और असैन्य कर्मी, लगभग 5 एयरक्राफ्ट कैरियर, 200 युद्धपोत और 1,000 से अधिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और समुद्री क्षेत्रों में आता है।

एडमिरल पापारो की भारत यात्रा के दौरान होने वाली बातचीत से दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी, नई सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग के आगे के रोडमैप को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को देशभर होगा प्रदर्शन… अभिजीत दीपके का ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

लोकतंत्र में चुनाव और वोट को सबसे अहम माना जाता है, लेकिन जब चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठते हैं तो विवाद भी गहरा जाता है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर में प्रदर्शन का एलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि 2 अक्तूबर से मुंबई के शिवाजी पार्क से आंदोलन शुरू होगा। उनका कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों कर रही सीजेपी?
मुंबई प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। दीपके ने कहा कि सीजेपी का विरोध केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी का कहना है कि 2 अक्तूबर को शिवाजी पार्क से प्रदर्शन शुरू करने के बाद इसे देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।


किन राज्यों में प्रदर्शन की तैयारी है?
सीजेपी संस्थापक ने बताया कि आंदोलन को कई राज्यों तक ले जाने की योजना है। पार्टी के मुताबिक प्रदर्शन इन जगहों पर किए जाएंगे। दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो अक्तूबर के अंत से जंतर-मंतर पर भी आंदोलन किया जाएगा।

  • गोवा
  • कर्नाटक
  • पश्चिम बंगाल
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • झारखंड

सीजेपी ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर क्या मांग रखी?
सीजेपी ने केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ही नहीं की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने इसमें नागरिक समाज की भागीदारी की मांग भी रखी। इसके अलावा उन्होंने 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने की बात कही। उनका कहना है कि मतदाता सूची में अब आगे किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।


मतदाता सूची और एसआईआर को लेकर विवाद क्या है?
ज्ञानेश कुमार को लेकर यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। इनपुट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। इनमें से कुछ फैसलों के बारे में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। इसी मुद्दे को लेकर कई विपक्षी दलों ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
वहीं, चुनाव आयोग ने इन दावों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि तीन सदस्यीय आयोग ने एसआईआर समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं। यानी आयोग के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर कोई ऐसा मतभेद नहीं था, जैसा कि रिपोर्टों में सामने आया। ऐसे में एक तरफ सीजेपी और कुछ विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग अपने सभी फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है।

क्या मुंबई में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन होगा?
चुनाव आयोग को लेकर महाराष्ट्र में भी विरोध की तैयारी है। सीजेपी ने 2 अक्तूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने का एलान किया है। वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना (यूबीटी) की ओर से भी 4 अक्तूबर को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा निकालने की बात कही गई है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि युवाओं का यह आंदोलन व्यवस्था में बदलाव और मतदान के अधिकार को लेकर है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।