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पंजाब में बिजली संकट: सरकार ने शेड्यूल्ड कट किए रद्द, बढ़ती मांग और हड़ताल ने बढ़ाई मुसीबत

पंजाब डेस्क : पंजाब में भीषण गर्मी और बिजली की बढ़ती मांग के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में बार-बार लग रहे अघोषित कटों के कारण हो रही किरकिरी के बाद अब 30 अप्रैल तक सभी शेड्यूल्ड शटडाउन (Scheduled Shutdowns) रद्द कर दिए गए हैं। विभाग ने आदेश जारी किया है कि बिना जोनल ऑफिस की लिखित मंजूरी के 11 kV या उससे ऊपर का कोई भी काम (PTW) नहीं किया जाएगा ताकि सप्लाई बहाल रहे।

जनता का गुस्सा और प्रदर्शन: शुक्रवार रात को पूरे पंजाब में 2 से 4 घंटे के कट लगे, जिससे 40 डिग्री से अधिक तापमान में लोग सो नहीं सके। इसके विरोध में मानसा और बुढलाडा में लोगों ने बिजली दफ्तरों का घेराव किया, वहीं बठिंडा के कोटसमीर और तुंगवाली गांव में ग्रामीणों ने बिजली ग्रिड पर पहुंचकर प्रदर्शन किया।

मांग और आपूर्ति का गणित: पंजाब में बिजली की डिमांड तेजी से बढ़ते हुए 12,130 मेगावाट तक पहुंच गई है। राज्य में उत्पादन केवल 5,100 मेगावाट है, जिसके चलते पावरकॉम ने सेंट्रल पूल से 7,000 मेगावाट बिजली खरीदी है, फिर भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

हड़ताल और तकनीकी कारण: संकट के पीछे पावरकॉम के टेक्निकल स्टाफ की हड़ताल एक बड़ी वजह है। कर्मचारी केवल 8 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं और कोई अतिरिक्त काम नहीं कर रहे, जिससे फीडर ट्रिप होने पर उसे ठीक करने में घंटों लग रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रीक्वेंसी (50 हर्ट्ज) में जरा भी उतार-चढ़ाव होने पर सिस्टम खुद ही ट्रिप हो जाता है। आज भी लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, मोहाली और पटियाला के कई इलाकों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

लुधियाना में शुक्रवार रात 8 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल, प्रशासन ने पूर्ण सहयोग की अपील की

लुधियाना/सत्ता संदेश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और अगर नगर पीएसपीसीएल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में शुक्रवार को रात 8:00 बजे से 8:15 बजे तक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

हितधारकों के साथ बैठक के दौरान, सहायक आयुक्त पायल गोयल ने निवासियों से सभी प्रकार की बत्तियाँ बंद करके ब्लैकआउट अभ्यास का अनुपालन करने का आग्रह किया। नागरिकों को सचेत करने के लिए लगभग 7:55 बजे सायरन बजाया जाएगा और धार्मिक स्थलों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएंगी। सायरन बजने के तुरंत बाद, पीएसपीसीएल बिजली आपूर्ति काट देगा।

ड्रिल पीएयू में अलार्म के साथ शुरू होगी और इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा और एनसीसी सहित कई एजेंसियों के समन्वित प्रयास शामिल होंगे। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपातकालीन स्थिति का अनुकरण करना है।

सहायक आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि यह अभ्यास किसी भी अप्रत्याशित आपात स्थिति के लिए एहतियाती उपाय है। निवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे अभ्यास के दौरान जनरेटर, पावर बैकअप सिस्टम, टॉर्च, मोमबत्ती या माचिस का उपयोग न करके पूर्ण सहयोग करें और बिजली पूरी तरह बंद रखें।

पीएसपीसीएल की संपत्तियां बेचने पर हाईकोर्ट की रोक: सरकारी विभागों के भारी बकाया के बदले संपत्तियां बेचने के कदम को मिली चुनौती

पंजाब डेस्क : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पंजाब सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा गया है।

सरकारी विभागों पर है करोड़ों का बकाया: याचिका के अनुसार, अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा, राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के मद में भी 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है। बकायेदारों की सूची में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

संपत्तियां बेचना जनहित के खिलाफ: याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भारी वित्तीय दबाव और बकाये की भरपाई के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है, जो जनहित के प्रतिकूल और विधि-विरुद्ध है। याचिका में दलील दी गई कि जब सरकारी विभाग स्वयं नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियों को बेचकर घाटा पूरा करना पूरी तरह अनुचित है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:

-पीएसपीसीएल की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।

-डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए जाएं।

-राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

हाईकोर्ट ने फिलहाल संपत्तियों की बिक्री पर रोक बरकरार रखी है और स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी।