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बिजली मंत्री ने गिद्दड़विंडी में 66KV ग्रिड सब स्टेशन का किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

  • मान सरकार की एक और पहल – गिद्दड़विंडी में 66 KV ग्रिड सब-स्टेशन का उद्घाटन बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने किया
  • 5 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट से 10 गांवों की बिजली सप्लाई और मजबूत होगी: – बिजली मंत्री

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व और राज्य के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दूर की सोच के तहत, राज्य के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने आज लुधियाना जिले की जगराओं तहसील के गिद्दड़विंडी गांव में एक नए 66 KV ग्रिड सब-स्टेशन का उद्घाटन किया।

इस मौके पर जगराओं विधानसभा क्षेत्र की MLA सर्वजीत कौर मानूके और पावरकॉम के CMD डॉ. बसंत गर्ग भी मौजूद थे।

इस मौके पर बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि राज्य सरकार बिजली उपभोक्ताओं को बिना रुकावट बिजली सप्लाई देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि PSPCL ने अपने कंज्यूमर्स को बिना रुकावट, भरोसेमंद और बेहतर बिजली सप्लाई पक्का करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है और यह प्रोजेक्ट 5 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट इलाके के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करेगा और गिद्दड़विंडी, लोधीवाल, तिहाड़ा, शेरेवाल, सोधीवाल, मलसियां ​​बाजन, कन्निया, रसूलपुर जंडी, तरफ कोटली और अबूपुरा समेत 10 गांवों के हजारों कंज्यूमर्स को बिना रुकावट और भरोसेमंद बिजली सप्लाई का फायदा मिलेगा।

इस सब-स्टेशन के लिए गांववालों की तरफ से कुल 1 एकड़ 2 कनाल ज़मीन दी गई, जिसमें 1 एकड़ 1 कनाल ज़मीन गिद्दड़विंडी गांव ने और 1 कनाल ज़मीन लोधीवाल गांव ने लोगों के हित में दान की। बिजली मंत्री ने पंजाब सरकार की तरफ से गांववालों के इस योगदान की तारीफ की और इसे लोगों के हित की एक बड़ी मिसाल बताया। उन्होंने आगे बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत 6.30 km लंबी 66 KV ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई है, जिसके लिए 29 टावर लगाए गए हैं। इसके अलावा ट्रांसमिशन लाइन और 66 KV लाइन बे पर कुल 2 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सब-स्टेशन, जिसमें 12.5 MVA कैपेसिटी का पावर ट्रांसफॉर्मर और 7 आउटगोइंग 11 KV फीडर शामिल हैं, की लागत 1 करोड़ 78 लाख रुपये आई है। इसके अलावा सब-स्टेशन बिल्डिंग समेत सिविल कामों पर 1 करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

जगराओं विधानसभा क्षेत्र की MLA श्रीमती सर्वजीत कौर माणूके ने कैबिनेट मंत्री श्री तरुणप्रीत सिंह सौंद का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज उन्होंने मेरे विधानसभा क्षेत्र के गांव गिद्दड़पिंडी में 66 KV ग्रिड का उद्घाटन किया है। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने मेरे विधानसभा क्षेत्र के सभी कामों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जगराओं विधानसभा क्षेत्र के बुज़कर, काउंके और भम्मीपुर के ग्रिड भी जल्द ही शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जगराओं विधानसभा क्षेत्र में बिजली की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

राज्य सरकार की वजह से ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और मजबूत हुआ – CMD डॉ. बसंत गर्ग

इस मौके पर पावरकॉम के CMD डॉ. बसंत गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य में बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाने और लोगों को हाई-लेवल सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि गिद्दड़विंडी का यह 66 KV सब-स्टेशन आने वाले समय में इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास को और तेज करेगा और इससे करीब 20 गांवों की बिजली सप्लाई बेहतर होगी। इसके साथ ही इन गांवों को बिजली सप्लाई करने वाले 11 KV फीडर और मौजूदा 66 KV सब-स्टेशनों के कनेक्शन से लोड कम होगा और वोल्टेज बेहतर होगा, जिससे ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और मजबूत और असरदार होगा।

बिजली मंत्री ने PSPCL कर्मचारियों को 10,500 सुरक्षा टूल किटें वितरित कीं
  • बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने पीएसपीसीएल कर्मचारियों को 12.60 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 10,500 सुरक्षा टूल किटों के वितरण का शुभारंभ किया
  • बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा पंजाब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः तरुणप्रीत सिंह सोंध

लुधियाना / सत्ता संदेश

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य के बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL ) ने बिजली वितरण प्रणाली पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए 10,500 सुरक्षा टूल किटें खरीदी हैं। इन टूल किटों के वितरण का शुभारंभ पंजाब के बिजली मंत्री स. तरुणप्रीत सिंह साँध ने सराभा नगर, लुधियाना स्थित पीएसपीसीएल कार्यालय में आयोजित एक समारोह के दौरान किया।

इस अवसर पर डॉ. बसंत गर्ग, आईएएस, चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी), पीएसपीसीएल तथा इंजी. इंदरपाल सिंह, निदेशक (डिस्ट्रिब्यूशन) भी उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए बिजली मंत्री स. तरुणप्रीत सिंह सौंध ने कहा कि बिजली कर्मचारी हर मौसम और हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सेवाएं देते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान वितरण प्रणाली पर कार्य करते समय सहायक लाइनमैन (एएलएम), लाइनमैन तथा अन्य कर्मचारियों के साथ हुए घातक और गैर-घातक हादसों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण अनेक बिजली कर्मचारियों को अपनी बहुमूल्य जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि वर्तमान पंजाब सरकार ने बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल की है।

उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे इन सुरक्षा टूल किटों का नियमित उपयोग करें तथा सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करें, ताकि बहुमूल्य जीवन सुरक्षित रह सकें और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा, कल्याण तथा बेहतर कार्य-परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा भविष्य में भी ऐसे कर्मचारी हितैषी प्रयास जारी रहेंगे। समारोह की मेजबानी इंजी. जगदेव सिंह हांस, मुख्य इंजीनियर, सेंट्रल ज़ोन, लुधियाना ने की। इस अवसर पर मुख्य इंजीनियर (पी एंड एम), मुख्य इंजीनियर (स्टोर्स एंड वर्कशॉप) तथा पीएसपीसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

12.60 करोड़ रुपये की लागत से 10,500 सुरक्षा टूल किटों की खरीदः सीएमडी डॉ. बसंत गर्ग

पीएसपीसीएल के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) डॉ. बसंत गर्ग, आईएएस ने बताया कि पंजाब सरकार की पहल के तहत पीएसपीसीएल ने प्रत्येक सुरक्षा टूल किट पर लगभग 12,000 रुपये खर्च किए हैं तथा 10,500 टूल किटों की खरीद पर कुल 12.60 करोड़ रुपये की लागत आई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा टूल किट उपलब्ध कराने के साथ-साथ कर्मचारियों को इन सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग संबंधी निरंतर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि कार्य के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। प्रत्येक सुरक्षा टूल किट में कैनवास बैग, प्लास, स्क्रूड्राइवर सेट, स्पैनर सेट, रैचेट सेट, नियोन टेस्टर, पोल सेफ्टी बेल्ट, सेफ्टी हेलमेट, वोल्टेज सेंसर, रिफ्लेक्टिव जैकेट, सेफ्टी गॉगल्स, रिचार्जेबल एलईडी टॉर्च तथा सेफ्टी दस्ताने शामिल हैं, जो कर्मचारियों को कार्य के दौरान बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगे.

अमृतसर में ट्रांसफॉर्मर में भीषण आग के बाद लोगों का फूटा गुस्सा, पावरकॉम के खिलाफ सड़क जाम कर धरना
  • अमृतसर में ट्रांसफॉर्मर में भीषण आग के बाद लोगों का फूटा गुस्सा, पावरकॉम के खिलाफ सड़क जाम कर धरना
  • बार-बार जल रहा ट्रांसफॉर्मर बना मुसीबत, नए ट्रांसफॉर्मर की मांग को लेकर लोगों का प्रदर्शन

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर के आबादी गुरु नगर, मन्ने दी वेली के बैकसाइड इलाके में लगे बिजली के ट्रांसफॉर्मर में शनिवार देर रात करीब 1:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। स्थानीय निवासी जतिंदर सिंह खालसा ने बताया कि आग लगने के बाद इलाके के लोगों ने रेत डालकर आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन आग करीब डेढ़ घंटे तक लगातार जलती रही।

लोगों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद बिजली विभाग के जेई और एसडीओ को कई बार फोन किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन पावरकॉम की ओर से बिजली सप्लाई बंद नहीं किए जाने के कारण फायर ब्रिगेड की टीम भी तुरंत आग पर काबू नहीं पा सकी।

अगले दिन जब बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो लोगों का आरोप था कि नया ट्रांसफॉर्मर लगाने की बजाय उसी पुराने और जले हुए ट्रांसफॉर्मर को दोबारा चालू कर दिया गया। दोपहर करीब 1:30 बजे बिजली बहाल की गई, लेकिन अधिक लोड होने के कारण एक घंटे बाद फिर बिजली बंद हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले छह महीनों से यह ट्रांसफॉर्मर लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। ट्रांसफॉर्मर के आसपास दुकानें और छोटे बच्चे रहते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। बिजली विभाग के रवैये से नाराज़ लोगों ने सड़क जाम कर पावरकॉम के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इलाके में करीब 190 किलोवाट का बिजली लोड है, जबकि लगा हुआ ट्रांसफॉर्मर केवल 100 किलोवाट क्षमता का है। इसी ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफॉर्मर बार-बार खराब हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पावरकॉम के एक्सईएन से बातचीत के दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि नया ट्रांसफॉर्मर लगाने की तैयारी है, लेकिन कुछ स्थानीय लोग अपने घरों के सामने ट्रांसफॉर्मर लगाने का विरोध कर रहे हैं, जिससे काम में देरी हो रही है।

पुलिस प्रशासन और एसपी ने लोगों को भरोसा दिलाया कि अगले दिन सुबह 10 बजे पावरकॉम के एक्सईएन स्वयं मौके पर पहुंचेंगे और पुलिस की मौजूदगी में बिजली लोड को दो हिस्सों में बांटकर दो नए ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। इस आश्वासन और बिजली बहाली का काम शुरू होने के बाद लोगों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

हालांकि, स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे बाईपास पर बड़े स्तर पर दोबारा प्रदर्शन करेंगे।

पंजाब में बिजली संकट: सरकार ने शेड्यूल्ड कट किए रद्द, बढ़ती मांग और हड़ताल ने बढ़ाई मुसीबत

पंजाब डेस्क : पंजाब में भीषण गर्मी और बिजली की बढ़ती मांग के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में बार-बार लग रहे अघोषित कटों के कारण हो रही किरकिरी के बाद अब 30 अप्रैल तक सभी शेड्यूल्ड शटडाउन (Scheduled Shutdowns) रद्द कर दिए गए हैं। विभाग ने आदेश जारी किया है कि बिना जोनल ऑफिस की लिखित मंजूरी के 11 kV या उससे ऊपर का कोई भी काम (PTW) नहीं किया जाएगा ताकि सप्लाई बहाल रहे।

जनता का गुस्सा और प्रदर्शन: शुक्रवार रात को पूरे पंजाब में 2 से 4 घंटे के कट लगे, जिससे 40 डिग्री से अधिक तापमान में लोग सो नहीं सके। इसके विरोध में मानसा और बुढलाडा में लोगों ने बिजली दफ्तरों का घेराव किया, वहीं बठिंडा के कोटसमीर और तुंगवाली गांव में ग्रामीणों ने बिजली ग्रिड पर पहुंचकर प्रदर्शन किया।

मांग और आपूर्ति का गणित: पंजाब में बिजली की डिमांड तेजी से बढ़ते हुए 12,130 मेगावाट तक पहुंच गई है। राज्य में उत्पादन केवल 5,100 मेगावाट है, जिसके चलते पावरकॉम ने सेंट्रल पूल से 7,000 मेगावाट बिजली खरीदी है, फिर भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

हड़ताल और तकनीकी कारण: संकट के पीछे पावरकॉम के टेक्निकल स्टाफ की हड़ताल एक बड़ी वजह है। कर्मचारी केवल 8 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं और कोई अतिरिक्त काम नहीं कर रहे, जिससे फीडर ट्रिप होने पर उसे ठीक करने में घंटों लग रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रीक्वेंसी (50 हर्ट्ज) में जरा भी उतार-चढ़ाव होने पर सिस्टम खुद ही ट्रिप हो जाता है। आज भी लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, मोहाली और पटियाला के कई इलाकों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

लुधियाना में शुक्रवार रात 8 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल, प्रशासन ने पूर्ण सहयोग की अपील की

लुधियाना/सत्ता संदेश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और अगर नगर पीएसपीसीएल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में शुक्रवार को रात 8:00 बजे से 8:15 बजे तक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

हितधारकों के साथ बैठक के दौरान, सहायक आयुक्त पायल गोयल ने निवासियों से सभी प्रकार की बत्तियाँ बंद करके ब्लैकआउट अभ्यास का अनुपालन करने का आग्रह किया। नागरिकों को सचेत करने के लिए लगभग 7:55 बजे सायरन बजाया जाएगा और धार्मिक स्थलों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएंगी। सायरन बजने के तुरंत बाद, पीएसपीसीएल बिजली आपूर्ति काट देगा।

ड्रिल पीएयू में अलार्म के साथ शुरू होगी और इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा और एनसीसी सहित कई एजेंसियों के समन्वित प्रयास शामिल होंगे। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपातकालीन स्थिति का अनुकरण करना है।

सहायक आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि यह अभ्यास किसी भी अप्रत्याशित आपात स्थिति के लिए एहतियाती उपाय है। निवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे अभ्यास के दौरान जनरेटर, पावर बैकअप सिस्टम, टॉर्च, मोमबत्ती या माचिस का उपयोग न करके पूर्ण सहयोग करें और बिजली पूरी तरह बंद रखें।

पीएसपीसीएल की संपत्तियां बेचने पर हाईकोर्ट की रोक: सरकारी विभागों के भारी बकाया के बदले संपत्तियां बेचने के कदम को मिली चुनौती

पंजाब डेस्क : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पंजाब सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा गया है।

सरकारी विभागों पर है करोड़ों का बकाया: याचिका के अनुसार, अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा, राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के मद में भी 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है। बकायेदारों की सूची में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

संपत्तियां बेचना जनहित के खिलाफ: याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भारी वित्तीय दबाव और बकाये की भरपाई के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है, जो जनहित के प्रतिकूल और विधि-विरुद्ध है। याचिका में दलील दी गई कि जब सरकारी विभाग स्वयं नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियों को बेचकर घाटा पूरा करना पूरी तरह अनुचित है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:

-पीएसपीसीएल की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।

-डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए जाएं।

-राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

हाईकोर्ट ने फिलहाल संपत्तियों की बिक्री पर रोक बरकरार रखी है और स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी।