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India-UK CETA: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात पर होगा शून्य शुल्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है। इसे पिछले कुछ सालों में भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप तथा युवा पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

भारत को ये होंगे लाभ
इस करार से भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा। इससे कीमतों में कमी आएगी। पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

क्या है सीईटीए?
सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे। इसके अलावा डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिससे इसे भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।

स्कॉच व्हिस्की के दाम घटेंगे
स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर भी आयात शुल्क में कटौती होगी। स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 फीसदी शुल्क पहले चरण में 75 फीसदी और दस वर्षों में घटकर 40 फीसदी रह जाएगा।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी व कुछ मांस उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।

आईटी कंपनियों के लिए बड़ी राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा।

सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में
यह पहला मौका है, जब भारत ने किसी एफटीए में ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, ताकि भारतीय ईवी उद्योग को शुरुआती पांच वर्षों तक सुरक्षा मिल सके। पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रकों पर शुल्क 44 फीसदी से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 फीसदी हो जाएगा।

किन उद्योगों को फायदा?
रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस एवं प्रोसेस्ड फूड, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट एवं स्टोन उत्पाद

क्या हो सकता है सस्ता?
सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम, नेल पॉलिश

भारत–केन्या संयुक्त व्यापार समिति की 10वीं बैठक नैरोबी में आयोजित, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर

केन्या के लिए भारत एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा; व्यापार बढ़कर 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर हुआ

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) का 10वां सत्र 27-28 अप्रैल, 2026 को नैरोबी, केन्या में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की समीक्षा और उसे मजबूत करना था। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य के व्यापार राज्य विभाग की प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोटा ओम्बम ने की।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि का उल्लेख किया, जिसमें भारत केन्या के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार 2025-26 में 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2024-25 के 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर से 24.91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। चर्चा व्यापार विविधीकरण को बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को हल करने और इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में पूरकर्ताओं का लाभ उठाने पर केंद्रित थी।

समिति ने मानकीकरण और अनुरूपता मूल्यांकन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केन्या मानक ब्यूरो (केईबीएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) सहित चल रही व्यापार सुविधा पहलों पर प्रगति की समीक्षा की। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या राजस्व प्राधिकरण (केआरए) के बीच आगमन से पहले सीमा शुल्क सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और व्यापार करने में आसानी में सुधार पर जोर दिया गया।

जेटीसी बैठक के दौरान, व्यापार, निवेश और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारत-केन्या वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

दोनों पक्षों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की संभावना को स्वीकार किया। यह उल्लेख किया गया कि केन्याई बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (एसआरवीए) खोले हैं, और इस व्यवस्था का अधिक उपयोग द्विपक्षीय लेनदेन को सुगम बना सकता है। स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) तंत्र अपनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

उभरते क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया, साथ ही ऑटोएक्सपो केन्या और द बिग 5 कंस्ट्रक्ट केन्या जैसी प्रदर्शनियों में भागीदारी पर भी चर्चा हुई। रेलवे सहित अवसंरचना विकास में सहयोग पर भी विचार किया गया, जिसमें भारत ने केन्या की मानक गेज रेलवे के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, परियोजना प्रबंधन और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति में सहायता प्रदान करने की पेशकश की। भारतीय शिपयार्डों के साथ जहाज निर्माण में सहयोग के अवसरों की भी खोज की गयी।

फार्मास्यूटिकल्स में, भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका पर प्रकाश डाला और बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। दोनों पक्षों ने स्वच्छता और पादप स्वच्छता बाधाओं को दूर करते हुए कृषि उत्पादों में व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा की।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत ने सौर और पवन परियोजनाओं सहित केन्या की स्वच्छ ऊर्जा पहलों का समर्थन करने की तत्परता व्यक्त की। केन्याई पक्ष ने सूचित किया कि उसने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने का अपना निर्णय बता दिया है और वह जल्द से जल्द इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर हुई चर्चा में यूपीआई जैसी भुगतान प्रणालियों, भारत कनेक्ट और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले डिजिटल प्लेटफार्मों पर सहयोग शामिल था।

क्षमता निर्माण को सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम जैसी पहलों के तहत खनन, भूविज्ञान, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए। उच्च शिक्षा, डिजिटल शिक्षण प्लेटफार्मों और कौशल विकास में सहयोग के साथ-साथ “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने विविधतापूर्ण, संतुलित और भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और व्यापार को सुगम बनाने, लंबित मुद्दों को हल करने और व्यापार-से-व्यापार जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

संयुक्त व्यापार सम्मेलन (जेटीसी) के दौरान, भारत-केन्या संयुक्त व्यापार मंच का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और केन्या राष्ट्रीय वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर (केएनसीसीआई) के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख भारतीय और केन्याई व्यवसायों ने भाग लिया। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य की व्यापार प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोता ओम्बम ने मुख्य भाषण दिए। उनके साथ केएनसीसीआई के अध्यक्ष और इन्वेस्टकेन्या के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी उपस्थित थे। इस मंच ने उद्योग जगत के नेताओं को विनिर्माण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, अवसंरचना, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों का विस्‍तार करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त, बैठक के दौरान, भारत-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय के साथ एक संवाद का आयोजन किया। इस संवाद में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय और उनके साथ आए सीआईआई व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया और केन्या में व्यापार करने से संबंधित अवसरों और अनुभवों पर ध्यान केंद्रित किया गया।