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NBA अध्यक्ष का CSIR-IMTECH चंडीगढ़ दौरा, माइक्रोबियल संसाधन संरक्षण और रिसर्च क्षमताओं की समीक्षा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त IFS अधिकारी वीरेंद्र आर. तिवारी ने शनिवार को चंडीगढ़ स्थित CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (CSIR-IMTECH) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे माइक्रोबियल संसाधन संरक्षण, अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं का जायजा लिया।

दौरे का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण और माइक्रोबियल संसाधन विज्ञान के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा। NBA अध्यक्ष ने संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से बातचीत की तथा विभिन्न प्रमुख सुविधाओं का निरीक्षण किया। इनमें माइक्रोबियल टाइप कल्चर कलेक्शन एंड जीन बैंक (MTCC), फर्मेंटेशन डिवीजन और प्रोटीन सेंटर प्रमुख रहे।

वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से की बातचीत

वीरेंद्र आर. तिवारी ने वैज्ञानिकों एवं छात्रों के साथ सीधे संवाद किया और माइक्रोबियल संसाधनों के संरक्षण एवं उनके वैज्ञानिक उपयोग में संस्थान के योगदान की सराहना की। MTCC में बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट और एक्टिनोमाइसेट्स सहित हजारों प्रमाणित सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखा गया है।

इन माइक्रोबियल संसाधनों का उपयोग कृषि, जैव-उर्वरक, खाद्य प्रसंस्करण, औद्योगिक एंजाइम और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे संसाधन वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

नियामक ढांचे पर भी हुई चर्चा

दौरे के दौरान NBA नेतृत्व और CSIR-IMTECH के वैज्ञानिकों के बीच माइक्रोबियल संसाधनों से संबंधित नियामक ढांचे और जैव विविधता कानून को लेकर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने माइक्रोबियल टाइप कल्चर को लेकर नियामकीय प्रावधानों को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चर्चा में बताया गया कि MTCC के 1,300 से अधिक संदर्भ कल्चर वैज्ञानिक सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए संदर्भ मानक के तौर पर काम करते हैं। शोधकर्ताओं और उद्योग के लिए इन प्रमाणित सामग्रियों तक आसान पहुंच को वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

MTCC के योगदान की सराहना

NBA अध्यक्ष ने MTCC की सुविधाओं के उच्च स्तर के रखरखाव और वैश्विक गुणवत्ता मानकों के पालन की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर माइक्रोबियल संसाधनों के संरक्षण में MTCC की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अलका राव राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की आधिकारिक सदस्य भी हैं। बैठक के दौरान भारत के माइक्रोबियल जैव संसाधनों को संरक्षित करने और उनका टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक एवं कानूनी साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

1986 में हुई थी MTCC की स्थापना

MTCC की स्थापना 1986 में हुई थी और यह पेटेंट से संबंधित जैविक सामग्रियों के डिपॉजिट के लिए बुडापेस्ट ट्रीटी के तहत भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निक्षेपागार सुविधाओं में शामिल है। वर्ष 2007 में इसे जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत Designated National Repository (DNR) के रूप में अधिसूचित किया गया।

CSIR-IMTECH की स्थापना 1984 में हुई थी। संस्थान का उद्देश्य माइक्रोबियल विज्ञान में उत्कृष्ट अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए बुनियादी खोजों को स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ना है।