नेपाल में बाढ़ के बाद फिर कांपी धरती, 5.6 तीव्रता के भूकंप से दहशत
वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बीच अब एक बार फिर धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई है। मंगलवार रात नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, नेपाल में रात 9:38 बजे के करीब भूकंप दर्ज किया गया। NCS के रिकॉर्ड में इसकी तीव्रता 5.6 बताई गई है, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में इसकी तीव्रता 5.0 बताई गई थी। भूकंप का केंद्र नेपाल में काठमांडू से करीब 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और इसकी गहराई लगभग 167.6 किलोमीटर दर्ज की गई।
नेपाल में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब देश अभी कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब से उबरने की कोशिश कर रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में हुई इस प्राकृतिक आपदा में भारी तबाही हुई थी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
भूकंप के झटकों का असर काठमांडू और आसपास के इलाकों में महसूस किए जाने की खबर है। हालांकि, मंगलवार रात आए भूकंप से किसी नई बड़ी तबाही या बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल के लिए यह नया झटका इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि देश के कई हिस्से अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत एवं पुनर्वास पर निर्भर हैं।
बाढ़ के पीछे भूकंप नहीं, ग्लेशियर का मलबा और मलबे का बहाव
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर शुरुआत में यह आशंका जताई गई थी कि इसके पीछे भूकंप की भूमिका हो सकती है। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की जांच में स्पष्ट किया गया कि उस समय दर्ज की गई भूकंपीय ऊर्जा वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और उसके साथ हुए मलबे के बहाव से उत्पन्न हुई थी। यानी उस आपदा का मुख्य कारण पारंपरिक अर्थों में आया भूकंप नहीं था।
USGS के मुताबिक ग्लेशियर से जुड़े ढलान के अचानक टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। इस मलबे ने पानी और नदी के बहाव को अपने साथ मिलाकर एक बेहद शक्तिशाली फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया। यह मलबा और बाढ़ करीब 100 किलोमीटर तक नीचे की ओर फैली और रास्ते में मौजूद बस्तियों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हुआ। चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट भी भारी मलबे और पानी की चपेट में आ गया। सड़कें, पुल, इमारतें और पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ा बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ।
हजारों लोग अब भी लापता, बचाव अभियान जारी
नेपाल में राहत और बचाव एजेंसियां अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और पुल टूटने से राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े कई कर्मचारी भी लापता हुए हैं।
हाल ही में एक सुरंग में नौ दिन तक फंसे दो नेपाली हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बचाया गया, जिससे बचाव अभियान में उम्मीद भी जगी है। हालांकि, हजारों लोगों के अब भी लापता होने के कारण परिजनों की चिंता बनी हुई है।
नेपाल इस समय एक साथ कई प्राकृतिक और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ बाढ़ और मलबे से तबाह हुए इलाकों में राहत एवं पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ भूकंप के ताजा झटकों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले दिनों में भी प्रशासन और राहत एजेंसियों की सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

