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नाको की राष्ट्रीय रणनीति को गति प्रदान करते हुए पंजाब राज्य ने जिला-आधारित एचआईवी प्रतिक्रिया को बल दिया

ज़ीरकपुर / सत्ता संदेश

प्राथमिकता वाले 21 जिलों ने लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई के माध्यम से 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु रणनीतियों को क्रियान्वित किया

ज़ीरकपुर, 16 अप्रैल 2026: एचआईवी नियंत्रण में अधिक प्रभाव वाले जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत National AIDS Control Organisation (नाको) ने आज चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पंजाब के प्राथमिक जिलों को एक मंच पर लाकर 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं महानिदेशक, नाको ने की। इस अवसर पर पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री कुमार राहुल सहित राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी भी उपस्थित रहे।

डॉ. राकेश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा, “पंजाब जैसे राज्यों में, जहाँ इंजेक्शन से नशे का उपयोग एचआईवी संक्रमण को बढ़ावा देता है, इस स्तिथि में हमारी प्रतिक्रिया तुरंत एवं तीव्र होनी चाहिए। डेटा पर आधारित जिला-स्तरीय रणनीतियाँ तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जुड़ाव इस इस स्तिथि को बदलने के लिए बहुत जरूरी है” । उन्होंने आगे कहा कि जिलों को अधिक सशक्त बनाना एवं जवाबदेही प्रदान करना राष्ट्रीय लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह कार्यशाला राज्यों में National AIDS Control Organisation (NACO) द्वारा संचालित संरचित पहलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विकेन्द्रीकृत और डेटा आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से उच्च भार वाले जिलों में एचआईवी कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना है। पंजाब, जहाँ एचआईवी प्रसार दर 0.42% हे और अनुमानित 1,10,715 लोग एचआईवी के साथ जीवनयापन कर रहे हैं (PLHIV), इस लक्षित रणनीति के अंतर्गत एक प्राथमिकता वाला राज्य बना हुआ है।

कार्यक्रम के सुदृढ़ कार्यक्रम कार्यवाही हेतु कुल 21 प्राथमिक जिलों-तरण तारण, अमृतसर, मोगा, पठानकोट, मानसा, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, होशियारपुर, एस.ए.एस. नगर, जालंधर, कपूरथला, गुरदासपुर, बरनाला, फरीदकोट, संगरूर, पटियाला, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर, बठिंडा, रूपनगर एवं श्री मुक्तसर साहिब-की पहचान की गई है। कार्यशाला में जिला टीमों ने अपनी प्रगति प्रस्तुत की, कार्यक्रम संचालन से जुड़ी चुनौतियों को प्रस्तुत किया तथा एचआईवी की रोकथाम, जाँच एवं उपचार सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु रणनीतियाँ विकसित कीं।

राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, श्री कुमार राहुल ने कहा, “पंजाब लक्षित और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से अपने एचआईवी प्रत्युत्तर को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला ने जिलों को अपनी रणनीतियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और बेहतर सेवा वितरण तथा स्वास्थ्य परिणामों के लिए जवाबदेही को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाया है।”

कार्यशाला में वरिष्ठ जिला अधिकारियों, जिनमें उप आयुक्त, अतिरिक्त उप आयुक्त, सिविल सर्जन और जिला एचआईवी/एड्स नियंत्रण अधिकारी शामिल थे, की सक्रिय भागीदारी रही, जिसने एचआईवी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समन्वित एवं परिणाम केंद्रित नजरिए को बल मिला। इस एक दिवसीय कार्यशाला ने पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित किया तथा जिलों ने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु ठोस कार्ययोजनाएँ बनाई ।

नाको वर्ष 2030 तक एड्स उन्मूलन की दिशा में एक समन्वित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु, राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

चंडीगढ़ कार्यशाला का सफल आयोजन भारत के जिला-आधारित प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।

दूरसंचार विभाग, हरियाणा एलएसए द्वारा सिरसा, हरियाणा में सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं एवं साइबर धोखाधड़ी रोकथाम पर हितधारक कार्यशाला एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

सिरसा/ सत्ता संदेश

सिरसा दूरसंचार विभाग (DoT), हरियाणा एलएसए ने सिरसा पुलिस के सहयोग से टैगोर ऑडिटोरियम, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में एक प्रभावी संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता श्री राधाचरण शाक्य, अतिरिक्त महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा एलएसए एवं श्री दीपक सहारण, पुलिस अधीक्षक (SP) सिरसा ने की। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दूरसंचार सेवा प्रदाता (TSP) के अधिकारी तथा जिले भर के प्वाइंट्स ऑफ सेल (PoS) शामिल थे। यह कार्यक्रम सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं को बढ़ावा देने एवं साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक, हरियाणा एलएसए ने राष्ट्र निर्माण एवं माननीय प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सुरक्षित संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग के माध्यम से बढ़ते साइबर धोखाधड़ी एवं ठगी के मामलों पर चिंता व्यक्त की और सभी हितधारकों द्वारा सतर्कता एवं सक्रिय उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा अपनाए गए विभिन्न तंत्रों की जानकारी दी, जिनमें अवैध गतिविधियों में संलिप्त मोबाइल नंबरों की पहचान एवं ट्रैकिंग हेतु सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) तथा संचार साथी पोर्टल का उपयोग शामिल है। अतिरिक्त महानिदेशक ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) तथा बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के सेवा केंद्रों के सहयोग से वित्तीय जोखिम संकेतक (FRIs) विकसित किए जा रहे हैं, जो दूरसंचार के दुरुपयोग से उत्पन्न संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पहचान एवं चिन्हांकन में सहायक हैं।

नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग हेतु प्रमुख माध्यमों की जानकारी भी दी गई, जिनमें त्वरित रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन तथा www.cybercrime.gov.in पोर्टल शामिल हैं, जिससे समय पर हस्तक्षेप कर वित्तीय नुकसान से बचाव किया जा सकता है। प्रतिभागियों को सुरक्षित बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन के लिए 1600 श्रृंखला के उपयोग के बारे में भी अवगत कराया गया तथा दूरसंचार सेवाओं के जिम्मेदार उपयोग एवं सतर्कता के महत्व पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में सिम प्राप्ति प्रक्रिया का भी विस्तार से विवरण दिया गया तथा PoS संचालकों एवं TSPs के लिए आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला गया, जिससे सिम के दुरुपयोग को रोका जा सके। संचार साथी प्लेटफॉर्म के अंतर्गत विभिन्न नागरिक-केंद्रित पहलों की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें संदिग्ध कॉल एवं संदेशों की रिपोर्टिंग हेतु ‘चक्षु’, खोए/चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करने की सुविधा, अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी, ‘नो योर मोबाइल हैंडसेट’ (KYM) तथा अंतरराष्ट्रीय कॉल ट्रैकिंग हेतु RICWIN शामिल हैं।

चर्चा के दौरान एसपी सिरसा ने नागरिकों की साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान हेतु DoT की पहल की सराहना की तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs), TSPs एवं DoT के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कॉल्स, वर्चुअल कॉल्स एवं वीपीएन के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर भी सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। DoT ने आश्वासन दिया कि इन मुद्दों का समाधान विधि के प्रचलित प्रावधानों के अंतर्गत पूर्ण क्षमता एवं समन्वय के साथ किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें PoS संचालकों एवं पुलिस अधिकारियों के प्रश्नों का संतोषजनक समाधान किया गया। DoT ने जन-जागरूकता, निवारक उपायों एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे एक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं जिम्मेदार दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।