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अटल इनोवेशन मिशन ने फ्रंटियर रीजन प्रोग्राम के तहत जम्मू-कश्मीर में 500 नए एटीएल (अटल इनोवेशन मिशन) के लिए आवेदन आमंत्रित किए


जम्मू एवं कश्मीर / सत्ता संदेश

पूरे जम्मू एवं कश्मीर में गैर-एटीएल स्कूलों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग और कश्मीर विश्वविद्यालय के सहयोग से भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत नवाचार इको-सिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में 500 नई अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्थापना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की।

ये 500 नए एटीएल (आधिकारिक विकास केंद्र) एआईएम के व्यापक फ्रंटियर रीजन प्रोग्राम का प्रमुख घटक हैं, जिसका उद्देश्य गहन संस्थागत समन्वय और स्थानीय कार्यान्वयन मॉडल के माध्यम से भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुकूलित और समावेशी नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य स्कूलों, विश्वविद्यालयों, उद्योग और नवाचार संस्थानों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने के जरिए, जम्मू-कश्मीर से युवा नवोन्मेषकों और परिवर्तन लाने वालों की एक नई पीढ़ी को पोषित करने के साथ-साथ जिलों में नवाचार के अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।

इस पहल का उद्देश्य जम्मू एवं कश्मीर को सीमावर्ती क्षेत्रों में नवाचार के लिए एक अग्रणी मॉडल में रूपांतरित भी है, जिसके लिए स्कूली छात्रों, विशेष रूप से दूरस्थ, सीमावर्ती, पहाड़ी और अल्प सुविधा प्राप्त क्षेत्रों के छात्रों के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजाइन थिंकिंग और समस्या-समाधान शिक्षा तक पहुंच का विस्तार किया जाएगा।

इस आवेदन की शुरुआत सितंबर 2025 में एटीएल सारथी और सीमांत क्षेत्र कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान घोषित विजन को क्रियान्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जहां कश्मीर विश्वविद्यालय को केंद्र शासित प्रदेश में एटीएल इकोसिस्टम का समर्थन और सुदृढ़ीकरण करने के लिए नोडल मेंटरिंग संस्थान के रूप में नामित किया गया था।

इस योजना के कार्यान्वयन के तहत, एआईएम ने स्कूल शिक्षा विभाग और कश्मीर विश्वविद्यालय के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और संस्थागत परिस्थितियों के अनुरूप एक विशेष आवेदन ढांचा तैयार किया है। इस ढांचे में कई प्रासंगिक संशोधन शामिल हैं, जिनमें सरकारी, निजी, सहायता प्राप्त, केंद्रीय विद्यालय, सेना के सद्भावना स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी विभिन्न श्रेणियों के स्कूलों को शामिल करना, स्कूल में सीटों और नामांकन से संबंधित मानदंडों में छूट देना और दूरस्थ, सीमावर्ती, पहाड़ी और अल्प विकसित क्षेत्रों में स्थित स्कूलों को विशेष महत्व देना शामिल है।

केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों के विद्यालयों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रचार-प्रसार रणनीति भी विकसित की गई है। इसमें जिला स्तरीय जागरूकता सत्र, विद्यालय प्रमुखों और शिक्षकों के लिए मार्गदर्शन कार्यक्रम, विभागीय माध्यमों से आधिकारिक संचार और समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विद्यमान एटीएल नेटवर्क और संस्थागत साझेदारियों का उपयोग शामिल है।

नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक दीपक बागला ने शुभारंभ के दौरान कहा, “आज जब हम जम्मू-कश्मीर में 500 अटल नवाचार प्रयोगशालाओं (एटीएल) के लिए आवेदन आमंत्रित कर रहे हैं, तो हम न केवल इन प्रयोगशालाओं की स्थापना कर रहे हैं, बल्कि समस्या-समाधानकर्ताओं, रचनाकारों और राष्ट्र-निर्माताओं की एक नई पीढ़ी का पोषण भी कर रहे हैं। ये प्रयोगशालाएं दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्र सहित केंद्र शासित प्रदेश के हर कोने के छात्रों को सशक्त बनाएंगी ताकि वे बड़े सपने देख सकें, निडर होकर प्रयोग कर सकें और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान विकसित कर सकें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, अटल नवाचार मिशन एक समावेशी नवाचार इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जो यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक युवा को विकसित भारत 2047 के विजन में योगदान करने का अवसर मिले। हमारा दृढ़ विश्वास है कि नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी नेताओं की अगली पीढ़ी जम्मू-कश्मीर के विद्यालयों से उभर सकती है।”

उन्होंने विद्यालयों से जम्मू-कश्मीर के नवाचार इकोसिस्टम के नवाचार केंद्र बनने के लिए आवेदन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

जम्मू-कश्मीर के विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव श्री राम निवास शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “विद्यालय शिक्षा विभाग एआईएम और सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि भौगोलिक स्थिति या प्रबंधन के प्रकार की परवाह किए बिना, सभी जिलों के विद्यालय इस अवसर का लाभ उठा सकें। यह पहल छात्रों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और अनुभवात्मक शिक्षा को मजबूत करेगी, साथ ही दूरस्थ और विकासशील क्षेत्रों के विद्यालयों को भारत के नवाचार आंदोलन में सक्रिय भागीदार बनने में सक्षम बनाएगी।”

कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नीलोफर खान ने अपने संदेश में जम्मू एवं कश्मीर में एक मजबूत जमीनी स्तर की नवाचार संस्कृति के निर्माण के महत्व पर बल दिया और केंद्र शासित प्रदेश के स्कूलों में उभरते नवाचार इकोसिस्टम को सलाह देने, मार्गदर्शन करने और मजबूत करने में एटीएल सारथी के माध्यम से विश्वविद्यालय की भूमिका को रेखांकित किया।

लॉन्च से पहले का एक प्रमुख आकर्षण “इनोवेशन मशाल” पहल का आयोजन था, जिसे एआईएम और जम्मू-कश्मीर सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से कई जिलों में संचालित किया गया था। एटीएल स्कूलों में एक प्रतीकात्मक मशाल यात्रा के रूप में परिकल्पित इस पहल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में नवाचार, रचनात्मकता और छात्र-नेतृत्व वाली भागीदारी की एक जीवंत संस्कृति को बढ़ावा देना था।

इनोवेशन मशाल श्रीनगर से शुरू हुई और उत्तरी एवं दक्षिणी कश्मीर के कई जिलों से होते हुए अंत में जम्मू पहुंची, जहां इसने नवाचार और वैज्ञानिक सोच की साझा भावना के माध्यम से एटीएल स्कूलों को जोड़ा।

इस पहल में जिला स्तरीय कार्यकलाप, विशेषज्ञों के जागरूकता भाषण, सामुदायिक संपर्क कार्यकलाप और पूरे क्षेत्र के एटीएल स्कूलों की भागीदारी शामिल थी। प्रत्येक प्रतिभागी एटीएल स्कूल ने जम्मू-कश्मीर के बढ़ते नवाचार आंदोलन में सामूहिक स्वामित्व और भागीदारी के प्रतीक के रूप में मशाल पर हस्ताक्षर किए।

इस आवेदन की शुरुआत व्यापक राज्यव्यापी प्रचार और कार्यान्वयन अभियान का आरंभ है, जिसमें स्कूलों के सुचारू और पारदर्शी चयन को सुनिश्चित करने के लिए संरचित मूल्यांकन और चयन तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस पहल से जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर नवाचार इकोसिस्टम को मजबूती मिलने, नवाचार-आधारित शिक्षण वातावरण के विकास में तेजी आने और समावेशी एवं भविष्योन्मुखी शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के विजन में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इस समारोह का समापन ऑनलाइन लॉन्च के दौरान उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जम्मू-कश्मीर में 500 एटीएल स्कूलों के लिए आवेदन पुस्तिका के औपचारिक विमोचन के साथ हुआ। उपरोक्त श्रेणियों में आने वाले सभी गैर-एटीएल स्कूल यहां आवेदन कर सकते हैं: https://aimapp2.aim.gov.in/atl_application_frp/

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।