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पंजाब में CM भगवंत मान से जुड़े ठिकानों पर CBI रेड के बाद सियासी घमासान, 2027 चुनाव से जोड़ा मामला

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 07 अक्टूबर 2026

Punjab CBI Raid: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े ठिकानों पर CBI की कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की रेड को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा।

भगवंत मान ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए परेशान करना बीजेपी की कार्यशैली रही है। उन्होंने कहा कि CBI की कार्रवाई से अब साफ हो गया है कि पंजाब में चुनावी माहौल शुरू हो चुका है।

रेड में कुछ नहीं मिला- CM भगवंत मान

संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि CBI ने जिन-जिन ठिकानों पर छापेमारी की, वहां से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के अधिकारी कार्रवाई के बाद चले गए और उन्हें कोई आपत्तिजनक चीज नहीं मिली।

मान ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें, उनके परिवार और पंजाब सरकार को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है तो वह किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने OSD राजबीर सिंह घुम्मन के गांव के लोगों द्वारा उनके समर्थन में खड़े होने की भी बात कही।

CBI ने पंजाब और चंडीगढ़ में 8 ठिकानों पर की तलाशी

वहीं, CBI के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

CBI ने यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई FIR के आधार पर की है।

राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 लोग FIR में आरोपी

CBI ने मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR में राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं।

CBI के अनुसार, जांच में आरोप है कि आरोपियों ने IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के बदले कथित तौर पर आर्थिक लाभ हासिल किया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI की एंट्री

इस मामले की शुरुआत ED की जांच से हुई थी। ED ने पंजाब के DGP को पत्र लिखकर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR दर्ज करने को कहा था। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।

5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने CBI को मामले की जांच सौंपने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने पंजाब पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और CBI को दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

हाईकोर्ट के इस आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी बीच CBI ने FIR दर्ज कर अगले ही दिन पंजाब और चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

फिलहाल CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है, जबकि CBI अपनी जांच के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

LPU हिंसा मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 11 गिरफ्तारियां; 20 लोग नामजद

जालंधर / सत्ता संदेश

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) हिंसा मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान योगेश अपूर्वा, निवासी मेहराटा, राजस्थान और आदित्य, निवासी हाजीपुर, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर हिंसा के दौरान गाड़ियों में तोड़फोड़ करने का आरोप है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल करने की तैयारी की जा रही है।

इससे पहले पुलिस इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी और 20 लोगों को नामजद किया गया था। नई गिरफ्तारियों के बाद मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

LPU परिसर में हुई हिंसा के दौरान तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट, पुलिस वाहनों में आगजनी और NH-44 को 18 घंटे से अधिक समय तक जाम किए जाने के मामले सामने आए थे। पुलिस ने पूरे मामले में 4 अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। जांच को आगे बढ़ाने के लिए 8 सदस्यीय SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का भी गठन किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए CCTV फुटेज समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर कथित भड़काऊ और फर्जी AI वीडियो के प्रसार को लेकर भी साइबर क्राइम टीम कार्रवाई कर रही है। पुलिस के मुताबिक ऐसे करीब 300 पोस्ट हटाए गए हैं।

इस मामले में सोशल मीडिया पर एक छात्रा के साथ कथित रेप की खबर भी तेजी से वायरल हुई थी। हालांकि, संबंधित छात्रा ने वीडियो जारी कर खुद को सुरक्षित बताया था और ऐसी किसी घटना से इनकार किया था।

LPU हिंसा मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी पंजाब सरकार और पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और CCTV फुटेज के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

रेगुलर DGP की नियुक्ति को लेकर सुखबीर बादल का बयान, बोले- पंजाब के लिए स्थायी पुलिस प्रमुख जरूरी

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से राज्य में नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार को उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रतिक्रिया दी है। हाईकोर्ट ने 2 अक्टूबर को कहा था कि DGP के पद पर तदर्थ व्यवस्था को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता और सरकार को इस संबंध में उचित निर्णय लेकर 13 अक्टूबर तक जानकारी देने को कहा है।

सुखबीर बादल ने कहा कि यह अच्छी बात है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजाब में नियमित DGP की नियुक्ति का रास्ता साफ हो रहा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर पिछले चार वर्षों में नियमित DGP नियुक्त नहीं करने का आरोप लगाया।

बादल ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पुलिस अधिकारियों पर दबाव रखा जाता था और अधिकारियों को उनकी पसंद के अनुसार काम करने की स्थिति में ही अस्थायी तौर पर पद पर बनाए रखने की बात कही जाती थी। ये आरोप सुखबीर बादल के राजनीतिक बयान हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि पंजाब में पुलिस व्यवस्था के लिए एक स्थायी DGP जरूरी है।

महंगाई और फसलों के दाम पर अकाली दल की चिंता

चंडीगढ़ में अकाली दल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने महंगाई और किसानों को फसलों के कम दाम मिलने का मुद्दा उठाया। पार्टी ने गेहूं के दाम में किए गए 25 रुपये के इजाफे को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र सरकार से फसलों की कीमतों पर दोबारा विचार करने की मांग की।

डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पार्टी की वरिष्ठ लीडरशिप ने हलका इंचार्जों के साथ बैठक कर आगामी कार्यक्रमों और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की।

6 अक्टूबर से डोर-टू-डोर अभियान

अकाली दल के मुताबिक, 6 अक्टूबर से अटारी से डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया जाएगा। यह अभियान सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा और लोगों से उनके प्रमुख मुद्दों तथा प्राथमिकताओं पर सुझाव लिए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि जनता से मिलने वाले सुझावों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा।

पार्टी ने 1 नवंबर को चुनावी घोषणा पत्र जारी करने की घोषणा की है। वहीं, 10 नवंबर से सुखबीर सिंह बादल की राज्यव्यापी बस यात्रा शुरू करने की बात कही गई है।

हरसिमरत कौर बादल के अभियान का अगला चरण

अकाली दल के अनुसार, हरसिमरत कौर बादल 5 अक्टूबर को मुक्तसर साहिब से ‘मावां दियां ललकार—बंद करो नशे का व्यापार’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत करेंगी। इसके अलावा 8 दिसंबर को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के जन्मदिवस के अवसर पर मोगा के नजदीक किली चहलां में बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की गई है।

पार्टी ने बनाई लीगल कमेटी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अकाली दल ने पंजाब सरकार पर पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर चरित्र हनन और गलत प्रचार करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए वरिष्ठ वकीलों की लीगल कमेटी बनाई गई है। डॉ. चीमा के मुताबिक जिला स्तर पर भी कानूनी कमेटियां गठित की जाएंगी।

कपूरथला : मेडिकल कॉलेज के निर्माण का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने 149 पेड़ हटाने की दी अनुमति

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य पर लगी रोक हटने के बाद अब इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने 8 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए निर्माण की जद में आ रहे 149 पेड़ों को हटाने की अनुमति दे दी। साथ ही कोर्ट ने इन पेड़ों के एवज में पांच गुना अधिक पेड़ लगाने के निर्देश दिए हैं।

मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए कपूरथला सरकारी अस्पताल की पुरानी इमारत को गिराया जाना है। इसके अलावा नए निर्माण के नक्शे में कुछ पुराने पेड़ भी आ रहे थे। पेड़ों को हटाने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होने के कारण मामला हाईकोर्ट पहुंचा था और निर्माण कार्य पर रोक लग गई थी।

मामले में कपूरथला के आम आदमी पार्टी नेता और जिला विरासत सेवा संगठन के प्रधान परविंदर ढोट ने भी पहल की। उन्होंने याचिका दायर करने वाले मोहाली निवासी वकील से मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज की जरूरत और जनहित को देखते हुए मामले में नरम रुख अपनाने की अपील की।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार निर्माण की जद में आने वाले 149 पेड़ों को हटाया जा सकेगा, लेकिन इसके बदले पांच गुना अधिक पौधे लगाए जाएंगे। परविंदर ढोट के अनुसार पौधारोपण की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी, जबकि आम आदमी पार्टी के वालंटियर भी पौधे लगाने और उनकी देखभाल में सहयोग करेंगे।

कोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया है। निर्माण स्थल पर पुरानी इमारत को गिराने का काम भी जारी है। परविंदर ढोट ने निर्माण स्थल का दौरा कर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा और जनहित से जुड़े ऐसे कार्यों में उनका सहयोग जारी रहेगा।

पीएसपीसीएल की संपत्तियां बेचने पर हाईकोर्ट की रोक: सरकारी विभागों के भारी बकाया के बदले संपत्तियां बेचने के कदम को मिली चुनौती

पंजाब डेस्क : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पंजाब सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा गया है।

सरकारी विभागों पर है करोड़ों का बकाया: याचिका के अनुसार, अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा, राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के मद में भी 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है। बकायेदारों की सूची में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

संपत्तियां बेचना जनहित के खिलाफ: याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भारी वित्तीय दबाव और बकाये की भरपाई के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है, जो जनहित के प्रतिकूल और विधि-विरुद्ध है। याचिका में दलील दी गई कि जब सरकारी विभाग स्वयं नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियों को बेचकर घाटा पूरा करना पूरी तरह अनुचित है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:

-पीएसपीसीएल की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।

-डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए जाएं।

-राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

हाईकोर्ट ने फिलहाल संपत्तियों की बिक्री पर रोक बरकरार रखी है और स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी।