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आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

दिल्ली / सत्ता संदेश

सरकार के संज्ञान में आया है कि “जेजी बिल्डिंग ग्रुप” नामक एक संस्था द्वारा कुछ धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की जा रही हैं, जिसमें आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) से संबंध होने का झूठा दावा करके फर्जी भर्ती अभियान चलाए जा रहे हैं।

2. उक्त संस्था कथित तौर पर:

(i). एमओएचयूए के नाम का उपयोग करके फर्जी रिक्ति नोटिस जारी कर रही है;

(ii). मंत्रालय से प्राधिकरण/सहयोग का दावा करके उम्मीदवारों को गुमराह कर रही है;

(iii). रोजगार प्रदान करने के बहाने आवेदकों से कथित तौर पर मौद्रिक लाभ की मांग कर रही है;

(iv). ऐसे झूठे दावों को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म/वेबसाइट का संचालन कर रही है।

3. इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि:

(क). आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ऐसी कोई भर्ती सूचना जारी नहीं की है;

(ख) मंत्रालय ने किसी भी निजी एजेंसी/संस्था को अपनी ओर से भर्ती करने के लिए अधिकृत नहीं किया है;

(ग). इसके विपरीत दावा करने वाले किसी भी संचार को कपटपूर्ण और भ्रामक माना जाना चाहिए।

4. आम जनता, विशेषकर नौकरी चाहने वालों को सलाह दी जाती है:

(i). ऐसे फर्जी भर्ती प्रस्तावों का जवाब न दें

(ii). ऐसी संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें;

(iii). ऐसे प्रस्तावों के संबंध में कोई भुगतान न करें;

(iv). ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों को करें।

5. यह विज्ञप्ति जनहित में जागरूकता पैदा करने और भोले-भाले नागरिकों के शोषण को रोकने के लिए जारी की जा रही है।

लुधियाना के ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल ने बचत भवन में अपनी दूसरी औपचारिक बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की, जिसमें कल्याणकारी पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई और ट्रांसजेंडर समुदाय के समर्थन के ढांचे को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

बैठक की अध्यक्षता सहायक आयुक्त पायल गोयल ने की। इसमें जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) गुरमीत सिंह, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी (डीएसएसओ) वरिंदर सिंह तिवाना, सहायक सिविल सर्जन डॉ. विवेक कटारिया, मोहिनी महंत, गंगा सोशल फाउंडेशन की प्रोजेक्ट मैनेजर रीना कल्याण, सब-इंस्पेक्टर मनजीत कौर सहित अन्य समिति सदस्य और विभिन्न हितधारक उपस्थित रहे। बैठक में सामाजिक समावेशन के रोडमैप पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान यह बताया गया कि लुधियाना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 105 पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जो पंजाब के किसी भी जिले में सबसे अधिक संख्या है।

सहायक आयुक्त पायल गोयल ने इस प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि ये पहचान पत्र ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी लाभ और स्वास्थ्य सेवाओं तक सुगमता से पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए साउथ सिटी, अयाली खुर्द, लुधियाना स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) ने मुफ्त कौशल प्रशिक्षण और आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी कंप्यूटर शिक्षा, ब्यूटी पार्लर प्रबंधन और टेलरिंग जैसे विशेष पाठ्यक्रमों में नामांकन कर सकते हैं, जिनकी प्रति बैच क्षमता 30-35 व्यक्तियों की है।

SMILE योजना (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) के तहत संचालित गरिमा गृह पर भी चर्चा हुई, जहां लगभग 25 ट्रांसजेंडर व्यक्ति रह रहे हैं। डॉ. विवेक कटारिया ने बताया कि सिविल अस्पताल में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक अलग वार्ड स्थापित किया गया है और इसके लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग शौचालय भी बनाए गए हैं।

बैठक का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक संरचना में बदलाव और सामाजिक चुनौतियों पर केंद्रित रहा। सहायक आयुक्त (जनरल) ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि वे सप्ताह के अंत तक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करें और इसकी सूचना डीएसएसओ को दें, ताकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की विशेष आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी कार्यालयों में उनके कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

समिति ने ट्रैफिक लाइट्स पर भीख मांगने के संवेदनशील मुद्दे पर भी चर्चा की और इस विषय पर एक विशेष उपसमिति सक्रिय करने का निर्णय लिया। उद्देश्य अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर जागरूकता और आजीविका समर्थन के माध्यम से स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

अपने समापन संबोधन में पायल गोयल ने कहा कि इस सेल का मुख्य उद्देश्य सामाजिक बाधाओं को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दस्तावेज़ीकरण और प्रशिक्षण जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही जरूरी आम जनता में व्यापक जागरूकता फैलाना है, ताकि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मानजनक जीवन मिल सके।

सभी विभागों से अपील की गई कि वे सहानुभूति और तत्परता के साथ कार्य करें, ताकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को लुधियाना के सामाजिक ताने-बाने में पूरी तरह से शामिल किया जा सके।

अमृतसर: बिक्रमजीत सिंह पुरेवाल ने जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी का कार्यभार संभाला

अमृतसर/ सत्ता संदेश

संवाददाता-विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन-तरजिंदर सिंह

बिक्रमजीत सिंह पुरेवाल ने सोमवार 3 मई को जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी, अमृतसर के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। इससे पूर्व वे जिला तरनतारन में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

कार्यभार संभालने के उपरांत पुरेवाल ने कहा कि वे सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें समय पर लाभ उपलब्ध करवाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्री पुरेवाल का स्वागत किया तथा उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

‘सिक्किम पूर्वी भारत का स्वर्ग’, पीएम मोदी ने 50वें स्थापना दिवस पर सिक्किम को दी 4000 करोड़ की सौगात

गंगटोक, सत्ता संदेश

गंगटोक में पीएम मोदी का जोशीला अंदाज देखने को मिला, जहां विकास परियोजनाओं से पहले उन्होंने युवाओं के साथ फुटबॉल खेलकर माहौल को जोशीला कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम में 4,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम को पूर्वी भारत का स्वर्ग बताते हुए प्रकृति प्रेमी पर्यटकों से राज्य के ऑर्किडेरियम का भ्रमण करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार का मुख्य फोकस यहां कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है।

50 साल पूरे होने पर 4000 करोड़ की विकास परियोजना की मिली सौगात

सिक्किम राज्य को 50 साल पूरे होने पर राज्य में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने 4000 करोड़ की सौगात दी। पीएम मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्धघाटन किया। इन परियोजनाओं में सड़क, स्वास्थय, शिक्षा, पर्यटन, कृषि जैसे कई क्षेत्र शामिल है। जो विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढ़ाचे और सुविधाओं को मजबूत करने में अहम कदम माना जा रहा है। यह दौरा हिमालयी राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जो आने वाले समय में विकास की नई दिशा तय कर सकता है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

ऑर्किडेरियम का दौरा और आधुनिक पार्क की झलक

पीएम मोदी ने स्वर्णजयंती मैत्री मंजरी पार्क स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा किया। यह पार्क विश्वस्तरीय ऑर्किड अनुभव केंद्र के रुप में विकसित किया गया है। जिसे सिक्किम की प्राकृतिक खूबसूरती और जैव विविधता का प्रतीक माना जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री पलजोर स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल हुए। जहां उन्होंने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर जनता को संबोधित किया।

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है”

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है” — प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआरपीजीआईएमईआर ने 14वीं AMRIT फार्मेसी के साथ बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान — देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में सर्वाधिक संख्या

चंडीगढ़, 30 मार्च 2026: AMRIT फार्मेसी को “मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम” बताते हुए, प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने आज कहा, “आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह कार्य करते हुए पीजीआईएमईआर में भारी मरीज भार को संभालने और बनाए रखने में सक्षम बना रहा है, जबकि AMRIT उपचार को किफायती बनाकर इसकी रीढ़ का कार्य करता है।” यह बात उन्होंने संस्थान की 14वीं AMRIT (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी के उद्घाटन अवसर पर कही, जो देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में इस प्रकार की सर्वाधिक संख्या है।

नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक स्थित इस सुविधा का उद्घाटन प्रो. विवेक लाल द्वारा प्रो. आर.के. राठो, डीन (एकेडमिक्स); प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च); श्री पंकज राय, उप-निदेशक (प्रशासन); प्रो. संदीप बंसल, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक; विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, नर्सिंग अधिकारियों एवं पीजीआईएमईआर के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया।

श्री राजेश नायर, उपाध्यक्ष, AMRIT फार्मेसी, भी अपनी टीम के साथ इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो AMRIT पहल के निरंतर सहयोग और समन्वय को दर्शाता है।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. विवेक लाल ने AMRIT पहल को मरीज-केंद्रित देखभाल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के समर्थन में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, “हर मरीज गुणवत्तापूर्ण और किफायती उपचार का हकदार है। AMRIT के माध्यम से हम प्रतिष्ठित और मानक कंपनियों की दवाइयों को काफी रियायती दरों पर उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल मरीज देखभाल की रीढ़ बन चुकी है।”

सेवाओं के व्यापक दायरे और दबाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “आयुष्मान भारत मरीजों तक पहुंच सुनिश्चित कर रहा है, बड़ी संख्या में मरीजों का समर्थन कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि आर्थिक बाधाएं उपचार में बाधा न बनें। AMRIT इस व्यवस्था को किफायती और सुलभ बनाकर इसे और मजबूत करता है।”

विस्तार योजनाओं का उल्लेख करते हुए निदेशक पीजीआईएमईआर ने बताया कि वर्तमान में 14 AMRIT आउटलेट्स कार्यरत हैं और संस्थान निकट भविष्य में 2 से 3 और आउटलेट्स स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि किफायती दवाओं की अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा, “कार्डियोलॉजी और आपातकालीन सेवाओं जैसे उच्च भार वाले क्षेत्रों में AMRIT आउटलेट्स को 24×7 उपलब्धता के साथ स्थापित किया जा रहा है, जहां आयुष्मान भारत लाभार्थियों के लिए विशेष सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। यह कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक मरीज कल्याण आंदोलन है।”

AMRIT को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए उन्होंने कहा, “यह मरीजों के लिए सबसे प्रभावी हस्तक्षेपों में से एक है। हम भारत सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने इस तरह की जनहितकारी और प्रेरणादायक पहल को बढ़ावा दिया है।”

संचालन संबंधी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए प्रो. लाल ने निरंतर सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा, “कोई भी प्रणाली 100 प्रतिशत परिपूर्ण नहीं होती, लेकिन हम अधिकतम दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उपलब्धता और रिफंड जैसी चुनौतियों को सक्रिय रूप से संबोधित किया जा रहा है तथा प्रक्रियाओं को और सुगम बनाने के लिए मंत्रालय से संवाद जारी है।”

उन्होंने बढ़ते मरीज भार को संभालने के लिए मजबूत प्रणालियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। “मरीजों की संख्या को देखते हुए हम AMRIT आउटलेट्स की निर्बाध कार्यप्रणाली और पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि विशेष रूप से आयुष्मान भारत के तहत मरीज सेवाएं प्रभावित न हों,” उन्होंने कहा।

पीजीआईएमईआर की विरासत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “1963 से पीजीआईएमईआर मरीज देखभाल का एक सशक्त स्तंभ रहा है। हमारी सेवाओं का स्तर विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के समकक्ष है और हम निरंतर बुनियादी ढांचे और प्रणालियों को सुदृढ़ कर रहे हैं।”

संस्थागत सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “परिवर्तन के मार्ग में अदृश्य बाधाएं होती हैं, लेकिन हम दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। जो पहलें पहले कठिन लगती थीं—जैसे AMRIT को क्रिटिकल केयर क्षेत्रों तक विस्तार देना—आज वे वास्तविकता बन चुकी हैं। ये बदलाव शांत लेकिन प्रभावशाली हैं।”

भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रो. लाल ने बताया कि माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री 27 अप्रैल 2026 को पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे। इस अवसर पर न्यूरोसाइंसेज सेंटर, एडवांस्ड मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन अपेक्षित है।

निदेशक पीजीआईएमईआर ने प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में सुधार की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “हाल के महीनों में वित्तीय प्रक्रियाएं अधिक सुगम हुई हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया तेज हुई है और सेवा वितरण में सुधार आया है। इससे AMRIT आउटलेट्स के विस्तार और कुशल संचालन में भी मदद मिली है।”

14वीं AMRIT फार्मेसी का उद्घाटन पीजीआईएमईआर की किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जहां AMRIT और आयुष्मान भारत मिलकर बढ़ते मरीज भार को संभालने और जेब से होने वाले खर्च को कम करने में एक सशक्त पूरक व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं।

सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अपनाया बहुआयामी दृष्टिकोण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और बालिकाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद करता है। यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित और सशक्त बनाकर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2021-22 से 2025-26) में बीबीबीपी योजना का पुनर्गठन किया गया है और अब यह ‘मिशन शक्ति’ की ‘संभल’ उप-योजना का एक घटक है। बीबीबीपी का विस्तार देश के सभी जिलों में कर दिया गया है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से उन गतिविधियों पर अधिक खर्च करने को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।

बीबीबीपी के तहत इन पहलों ने एक रिकॉल वैल्यू स्थापित की है और विभिन्न हितधारकों—जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता शामिल है—को लामबंद करके इसे एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तत्काल चिंताओं को दूर करना है, बल्कि बालिकाओं को महत्व देने और उनके अधिकारों व अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना भी है।

मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित इसके घटकों सहित मंत्रालय की योजनाओं का दो बार—2020 में और पुनः 2025 में—नीति आयोग के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया गया है। इन अध्ययनों ने योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया है।

सरकार देश भर में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के समाधान हेतु एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है।

समग्र शिक्षा प्री-स्कूल से कक्षा XII तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, एक समग्र और समावेशी पाठ्यक्रम, लर्निंग आउटकम में सुधार, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को पाटने, और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करने पर जोर देती है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना कक्षा XII तक की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूली सुविधाएँ प्रदान करके स्कूली शिक्षा में लैंगिक और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को पाटने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक समुदायों और बीपीएल  परिवारों की 10-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को शामिल किया जाता है।

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लैंगिक संतुलन में सुधार के लिए लड़कियों को स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कक्षा IX से कक्षा XII तक की मेधावी छात्राओं को लक्षित करता है और इसमें छात्र-अभिभावक परामर्श, करियर परामर्श, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, टिंकरिंग गतिविधियां, विशेष व्याख्यान, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों के भ्रमण और विज्ञान शिविर व कार्यशालाएं शामिल हैं।

बालिकाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने व्यापक कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया मिशन शुरू किया है। सरकार ने देश भर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कौशल केंद्र’ भी स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत महिलाओं को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

सरकार ने देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं हेतु कई पहल/उपाय किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया योजना, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव आदि शामिल हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह रोजगार और स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) संचालित है।

सरकार महिलाओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए महिला-केंद्रित योजनाएं भी लागू कर रही है, जैसे कि नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग- किरण (डब्लूआईएसई-किरण), सर्ब-पावर (खोजपूर्ण अनुसंधान में महिलाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा देना) आदि।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।