ब्रेकिंग न्यूज़
ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026 के तहत इंस्पायरिंग सेरेमनी का किया गया आयोजन

लुधिायाना / सत्ता संदेश

  • लुधियाना में ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026 के तहत एजुकेशन मिनिस्टर हरजोत सिंह बैंस और मनीष सिसोदिया ने स्टूडेंट्स से सीधे बातचीत की।
  • एजुकेशन मिनिस्टर हरजोत सिंह बैंस और मनीष सिसोदिया ने क्लास 12 में 95 परसेंट से ज़्यादा मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को सम्मानित किया।
  • पंजाब में जल्द ही AI करिकुलम शुरू किया जाएगा – एजुकेशन मिनिस्टर हरजोत बैंस।
  • एजुकेशन रिफॉर्म्स के लिए स्टूडेंट्स और टीचर्स की राय को प्रायोरिटी दी जा रही है – मनीष सिसोदिया।
  • क्वालिटी एजुकेशन से देश की तरक्की के साथ एक नया रास्ता मिल रहा है।

बुधवार को लुधियाना के गुरु नानक देव भवन में ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026 के तहत एक बड़ा और इंस्पायरिंग सेरेमनी ऑर्गनाइज़ की गई। इस सेरेमनी में पंजाब के एजुकेशन मिनिस्टर श्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर श्री मनीष सिसोदिया खास तौर पर शामिल हुए। इवेंट का मेन मकसद स्टूडेंट्स और टीचर्स से सीधा डायलॉग बनाना और एजुकेशन सिस्टम में हो रहे बदलावों और रिफॉर्म्स पर चर्चा करना था।

इस मौके पर, 12वीं क्लास में 95 परसेंट से ज़्यादा नंबर लाने वाले मेधावी स्टूडेंट्स को खास तौर पर सम्मानित किया गया। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने अपने भाषण में कहा कि ये स्टूडेंट्स न सिर्फ अपने परिवारों का बल्कि पंजाब और देश का भी भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि ये बच्चे भविष्य में IAS, IPS, डॉक्टर, वकील और दूसरे बड़े पदों पर बैठकर देश की सेवा करेंगे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस इवेंट के दौरान स्टूडेंट्स के साथ खुली बातचीत की गई और उनसे इस बारे में राय ली गई कि एजुकेशन सिस्टम में क्या बदलाव लाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव ने स्टूडेंट्स से सीधे बातचीत की है और एग्जाम सिस्टम, सिलेबस और पढ़ाने के तरीकों पर सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों ने जो भी मुद्दे उठाए हैं, वे बहुत ही सही और समय के हिसाब से हैं।

शिक्षा मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आज के समय में एक बड़ा टॉपिक बन गया है। दुनिया के सभी देश इस टेक्नोलॉजी को तेज़ी से अपना रहे हैं, इसलिए पंजाब को भी समय के साथ चलने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पिछले एक साल से इस पर काम कर रही है और अगले महीने से राज्य के सभी स्कूलों में AI करिकुलम लॉन्च किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब ने स्कूल एजुकेशन के फील्ड में बहुत तरक्की की है और केरल को पीछे छोड़कर इंडिया के एजुकेशन इंडेक्स में टॉप पर पहुंच गया है। यह कामयाबी सभी टीचर्स, स्टूडेंट्स और सरकार की मिली-जुली कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में पंजाब एजुकेशन के फील्ड में और भी ऊंचाइयों को छुएगा।

इस मौके पर दिल्ली के पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा एजुकेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की ज़रूरत है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर बच्चे को अच्छी क्वालिटी की एजुकेशन देना सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की तरक्की उसके एजुकेशन सिस्टम पर निर्भर करती है और इसे मज़बूत करना आज के समय की ज़रूरत है।

मनीष सिसोदिया ने यह भी कहा कि AI आने वाले समय में नौकरी के नए मौके पैदा करेगा लेकिन कुछ ट्रेडिशनल नौकरियों पर भी असर पड़ेगा। इसलिए स्टूडेंट्स को नई टेक्नोलॉजी से तैयार करना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने एग्जामिनेशन सिस्टम को बेहतर बनाने, नकल रोकने और पढ़ाने के नए तरीकों को अपनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। इस दौरान उन्होंने स्टूडेंट्स और टीचर्स से सीधे बातचीत की और उनके विचार भी सुने।

इस मौके पर एजुकेशन सेक्रेटरी सोनाली गिरी ने भी टीचर्स और स्टूडेंट्स को संबोधित किया और उन्हें समाज के विकास के लिए हमेशा आगे आने का मैसेज दिया। उन्होंने उनसे ड्रग्स, बेरोजगारी और एजुकेशन सिस्टम में कमियों के खिलाफ मिलकर लड़ने की अपील की। ​​उन्होंने स्टूडेंट्स से अपने अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और मातृभूमि, संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में योगदान देने का संकल्प भी दिलाया।

यह इवेंट न सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा का सोर्स साबित हुआ बल्कि एजुकेशन सिस्टम में सुधारों के लिए एक नई दिशा भी दी। सरकार का स्टूडेंट्स की राय को महत्व देना और नई टेक्नोलॉजी अपनाना दिखाता है कि पंजाब एजुकेशन के क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क सेट करने की ओर बढ़ रहा है। इस मौके पर विधायक दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन सेकेंडरी सेक्रेटरी सिंह बल, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (रूरल डेवलपमेंट) डॉ. नरिंदर धालीवाल, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (लुधियाना ईस्ट) जसलीन कौर भुल्लर, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर डिंपल मदान, स्टेज सेक्रेटरी नेशनल अवार्डी मास्टर करमजीत सिंह ग्रेवाल के अलावा बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और टीचर्स मौजूद थे।

जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने एआई के वैश्विक उपयोग पर भारत का दृष्टिकोण रखा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में “इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के ‘मानव’ विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसी एआई मॉडल तक पहुँच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए। इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को ‘सेफ-बाय-डिजाइन’  होना चाहिए; एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए; डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों तक पहुँचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

सेंटर फॉर AI, MBCIE – सैटेलाइट सेंटर IIT रोपड़ ने “एआई फॉर एजुकेटर्स” कार्यक्रम के 75 प्रतिभागियों के सफल स्नातक होने का उत्सव मनाया

लुधियाना / सत्ता संदेश

सेंटर फॉर एआई, एमबीसीआईई – सैटेलाइट सेंटर आईआईटी रोपड़ द्वारा एमबीसीआईई परिसर, बीसीएम स्कूल, लुधियाना स्थित माता ठाकुर देवी ऑडिटोरियम में “एआई फॉर एजुकेटर्स ग्रेजुएशन सेरेमनी 2026” (बैच-02) का आयोजन किया गया। यह समारोह उन शिक्षकों की उपलब्धियों का उत्सव था जिन्होंने नवाचार को अपनाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के माध्यम से शिक्षा के भविष्य का नेतृत्व करने की दिशा में सफलतापूर्वक कार्यक्रम पूरा किया।

समारोह का शुभारंभ शैक्षणिक जुलूस (Academic Procession) एवं वंदे मातरम् से हुआ, जिसके बाद एमबीसीआईई के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रेम कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए समारोह के औपचारिक उद्घाटन की घोषणा की।

सेंटर फॉर एआई रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने केंद्र की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों तथा शिक्षकों एवं पेशेवरों को भविष्य के लिए तैयार कौशल प्रदान करने में उसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एआई के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग के महत्व को रेखांकित किया तथा एमबीसीआईई के चेयरमैन डॉ. सुनील कांत मुंजाल के दूरदर्शी नेतृत्व और हीरो साइकिल्स के प्रबंध निदेशक श्री एस.के. राय के सतत मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

समारोह में मुख्य अतिथि श्री आदित्य मदान, विशिष्ट अतिथि श्री पंकज जोशी तथा अध्यक्षता अधिकारी श्री देवाकर जैन उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री पंकज जोशी ने रोजगार के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिवर्तनकारी प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों को केवल वर्तमान करियर ही नहीं, बल्कि एआई द्वारा सृजित होने वाले भविष्य के अवसरों के लिए भी तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलनशीलता तथा भविष्य-केंद्रित कौशलों के महत्व पर बल दिया।

श्री आदित्य मदान ने अपने संबोधन में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एमबीसीआईई द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा आईआईटी इकोसिस्टम के साथ व्यापक एकीकरण के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अधिक अवसर सृजित करने की बात कही। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा विकसित कैपस्टोन परियोजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए उत्कृष्ट विचारों को आगे बढ़ाने में सहयोग का आश्वासन दिया।

अध्यक्षता अधिकारी श्री देवाकर जैन ने स्नातक शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि व्यावसायिक जिम्मेदारियों के बावजूद पुनः विद्यार्थी बनना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा के स्वरूप को बदल सकती है, लेकिन मूल्यों का निर्माण, जिज्ञासा का विकास और विद्यार्थियों को प्रेरित करने में शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण और अपरिहार्य रहेगी। उन्होंने प्रतिभागियों को विवेक और जिम्मेदारी के साथ नवाचार अपनाने तथा शिक्षा में परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।

समारोह के दौरान कार्यक्रम के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को उनकी असाधारण प्रतिबद्धता, नवाचारी सोच और प्रभावशाली परियोजनाओं के लिए पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एआई फॉर एजुकेटर्स प्रोग्रामबैच 02 के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान करना रहा। सभी स्नातक शिक्षकों को आजीवन सीखने की भावना तथा शिक्षा में एआई के सार्थक और जिम्मेदार उपयोग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सराहा गया।

समारोह का समापन गणमान्य अतिथियों के सम्मान, श्री नवदीप सिंह (हेडएकेडमिक्स) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन, औपचारिक समापन घोषणा, राष्ट्रगान, समूह छायाचित्र तथा लंच एवं नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।यह समारोह शिक्षकों की समर्पण भावना, जिज्ञासा और निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बना। सेंटर फॉर एआई, एमबीसीआईई – सैटेलाइट सेंटर आईआईटी रोपड़ ने भविष्य के लिए तैयार ऐसे शिक्षकों के समुदाय के निर्माण के अपने संकल्प को पुनः दोहराया, जो उभरती तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ उद्देश्यपूर्ण, जिम्मेदार और प्रेरणादायक नेतृत्व प्रदान करें।

भारत एआई क्रांति के अगले चरण का नेतृत्व करने को तैयार: माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी

नयी दिल्ली/ सत्ता संदेश

वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी Microsoft के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत अपने मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम और विशाल डेवलपर समुदाय के दम पर कृत्रिम मेधा (एआई) के अगले चरण की तैनाती में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, इंटरनेट की व्यापक पहुंच और तकनीकी प्रतिभा का बड़ा आधार इसे वैश्विक एआई विकास के केंद्र के रूप में उभरने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत एआई आधारित नवाचारों और अनुप्रयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे एआई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के नए अवसर बन रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और शासन जैसे क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग से देश में डिजिटल परिवर्तन को और गति मिलेगी।

माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी के अनुसार, भारत न केवल एआई तकनीक का उपयोग करने वाला बड़ा बाजार है, बल्कि यह एक ऐसा देश भी है जहां बड़ी संख्या में डेवलपर्स और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नवाचार में योगदान दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे कि आधार, यूपीआई और अन्य ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म एआई के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। इससे न केवल सेवाओं की दक्षता बढ़ेगी बल्कि पारदर्शिता और पहुंच में भी सुधार होगा।

अधिकारी ने कहा कि एआई के अगले चरण में जिम्मेदार और सुरक्षित तकनीक के विकास पर जोर होगा, और भारत इस दिशा में वैश्विक मानकों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एआई नवाचारों का वैश्विक हब बन सकता है, जहां तकनीक और प्रतिभा दोनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस ने गवर्नेंस समिट 2026 का आयोजन किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से 23 मई 2026 को आईएसबी मोहाली परिसर में गवर्नेंस समिट 2026: विकसित भारत के लिए समावेशी एआई सम्‍मेलन का आयोजन किया।

इस सम्मेलन के चौथे संस्‍करण का शुभारंभ भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के उद्घाटन भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था के हाशिये पर रहने वाले लोगों सहित प्रत्येक नागरिक की सेवा करने वाले एआई प्रणाली के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत को उत्पादकता बढ़ाने, शासन में सुधार करने और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि कौशल संबंधी नौकरियों पर एआई के प्रभाव को लेकर चिंताएं स्‍वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है। दिन भर के कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं हुईं, जिनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और उसकी वहनीयता और रोजगार सृजन एवं डिजिटल उद्यमिता शामिल थे। इसी दौरान एक गोलमेज सम्मेलन में राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायतों तक, अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए एआई की संचालन क्षमता की जांच की गई।

इस सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और विभिन्‍न प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया ताकि यह विचार किया जा सके कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग समावेश को बढ़ावा देने, शासन को मजबूत करने और भारत के विकास एजेंडे को गति देने के लिए किस प्रकार किया जा सकता है। इसमें रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस और कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों ने भाग लिया।

ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पर संगोष्ठी का आयोजन

मोहाली, 17 अप्रैल 2026: 17 अप्रैल को मुख्यालय विशेष महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल की पश्चिमी कमान चंडीगढ़ ने लखनौर (मोहाली) स्थित सिंदूर सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का केंद्र बिंदु ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव था। चर्चा में वर्तमान चेतावनियों, तस्करी और इनसे लड़ने हेतु सुरक्षा संस्थानों के मध्य दृढ समन्वय पर चर्चा की गयी।

इसमें सीमा सुरक्षा बल, बल मुख्यालय, नई दिल्ली, फील्ड फॉरमेशन, भारतीय सेना पश्चिमी कमान, भारतीय वायु सेना चंडीगढ़, पंजाब पुलिस, आई आई टी रोपड़, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, IISER मोहाली, नैनो साइंस सेंटर मोहाली, C-DAC मोहाली, NIELIT रोपड़ और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ सहित अन्य प्रमुख और विशिष्ठ संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।

संगोष्ठी में ड्रोन से होने वाली तस्करी, निगरानी और सीमा पार गतिविधियों से बढ़ते खतरों पर चर्चा की गयी। मुख्यतः, उन्नत ड्रोन पहचान और ड्रोन-रोधी प्रौधागिकयों की तैनाती, फोरेंसिक विश्लेषण क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने उभरते तकनीकी खतरों का मुकाबला करने के लिए एक सक्रिय और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और नवाचार, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को परिचालन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय सुरक्षा व ड्रोन खतरे के बदले परिदृश्य का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के साथ हुआ।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के होते हुए भी चिकित्सा शिक्षा में मजबूत नैदानिक ​​आधार की आवश्यकता पर बल दिया

दिल्ली / सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बच्चों में उभरते हुए गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यकृत संबंधी विकारों के बारे में बताने वाली अद्यतन चिकित्सा पाठ्यपुस्तक का विमोचन किया

बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी पाठ्यपुस्तक का विस्तारित संस्करण चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति को दर्शाता है

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ज्ञान के तीव्र विस्तार के युग में चिकित्सा में अवधारणा-आधारित शिक्षण पर बल दिय

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो चिकित्सा विज्ञान और मधुमेह के प्रख्यात प्राध्यापक भी हैं, ने आज स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए प्रोफेसर अनुपम सिबल और डॉ. सरथ गोपालन के संपादन में तैयार जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर कैथलीन बी. श्वार्ट्ज की ओर से लिखित प्रस्तावना वाली “बाल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण” पाठ्यपुस्तक के द्वितीय संस्करण का विमोचन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इसकी बढ़ती भूमिका के बावजूद चिकित्सा शिक्षा में मजबूत नैदानिक ​​आधार की आवश्यकता पर बल दिया।

मंत्री महोदय ने कहा कि एक बार ठोस नैदानिक ​​आधार स्थापित हो जाने पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता मूल्यवान सहायक, सहयोगी और सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चिकित्सा अवधारणाओं के मूल तत्व को समझे बिना एआई का सहारा लेता है तो उसके समक्ष किसी भी उपकरण, गैजेट, जांच या यहां तक ​​कि दवाओं के न होने की स्थिति में भी समाज की सेवा करने में सक्षम चिकित्सक बनने के लिए आवश्यक बुनियादी शिक्षण प्रक्रिया से वंचित रहने का जोखिम होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा संबंधी ज्ञान के तीव्र विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि शोध और प्रकाशन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जिसके कारण चिकित्सा शिक्षा के लिए वैचारिक स्पष्टता और मूलभूत नैदानिक ​​प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि यद्यपि नई तकनीकों ने सूचना तक पहुंच को आसान बना दिया है फिर भी सीखने की प्रक्रिया मूलभूत समझ और व्यावहारिक नैदानिक ​​अनुभव पर आधारित होनी चाहिए।

मंत्री महोदय ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण और बीमारियों की बढ़ती जटिलता सहित उभरती चुनौतियों के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा प्रणालियों को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चिकित्सा जगत के युवा पेशेवरों को मजबूत बुनियादी ज्ञान विकसित करने और धीरे-धीरे चुने हुए क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण की पाठ्यपुस्तक के दूसरे संस्करण में इस क्षेत्र में हुई नवीनतम प्रगति को शामिल किया गया है और 45 अध्यायों में इसका विस्तार किया गया है जिसमें कई नए विषय भी हैं। यह पुस्तक सूजन आंत्र रोग, न्यूरो-गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, सीलिएक रोग और गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यकृत संबंधी रोगों में आनुवंशिकी की भूमिका, एंडोस्कोपी और यकृत प्रत्यारोपण जैसे उभरते क्षेत्रों के बारे में विस्तृत विवरण प्रदान करती है।

यह भी पाया गया है कि बाल रोग विशेषज्ञों के पास आने वाले लगभग 30 प्रतिशत बच्चे पाचन और यकृत संबंधी विकारों से पीड़ित होते हैं जो इस क्षेत्र में अद्यतन ज्ञान और विशेष प्रशिक्षण के महत्व पर बल देता है। यह पाठ्यपुस्तक बाल रोग, बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के प्रशिक्षुओं और कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञों के लिए व्यापक संसाधन के रूप में तैयार की गई है।

इसका संपादन अपोलो हॉस्पिटल्स समूह के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर अनुपम सिबल और दिल्ली के मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ डॉ. सरथ गोपालन ने किया है। श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और बाल रोग विशेषज्ञ एवं यकृत रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद इशाक मलिक इसके सह-संपादक हैं।

इस पुस्तक की प्रस्तावना जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर कैथलीन बी. श्वार्ट्ज ने लिखी है। पाठ्यपुस्तक का पहला संस्करण 2016 में प्रकाशित हुआ था और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसका विमोचन किया था। वर्तमान संस्करण को उसी के आधार पर तैयार किया गया है और उसमें इस क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक विकास और नैदानिक ​​पद्धतियों को शामिल किया गया है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026: पीएम मोदी ने भारत को बताया दुनिया का सबसे बड़ा टेक टैलेंट हब, वैश्विक दिग्गजों का लगा जमावड़ा

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और टेक दिग्गजों को संबोधित किया,। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक हस्तियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मानव सामर्थ्य कई गुना बढ़ गया है, लेकिन हमें विजन और जिम्मेदारी दोनों को बड़ा रखना होगा।

मैक्रों के ‘नमस्ते’ और UPI की तारीफ ने बटोरीं सुर्खियां : समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई वैश्विक नेता शामिल हुए,। राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ से की, जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने भारत में तेजी से हो रहे बदलावों और यूपीआई (UPI) की सफलता की जमकर सराहना की। वहीं, यूएन महासचिव गुटेरेस ने ग्लोबल साउथ में पहले एआई शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत के नेतृत्व को बधाई दी,।

टाटा और गूगल की बड़ी घोषणाएं : टेक जगत के दिग्गजों ने भी भारत में बड़े निवेश और साझेदारी के संकेत दिए। टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की कि टाटा ग्रुप ओपनएआई (OpenAI) के साथ साझेदारी में भारत का पहला बड़े पैमाने पर एआई-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर बना रहा है। दूसरी ओर, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल भारत में अपने 15 अरब डॉलर के निवेश के तहत विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक एआई हब स्थापित कर रहा है, जिससे रोजगार और अत्याधुनिक तकनीक के अवसर पैदा होंगे।

टेक्नोलॉजी का लोकतंत्रीकरण : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन टेक्नोलॉजी को डेमोक्रेटाइज़ (democratize) करना है ताकि इसका लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच सके। इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जहाँ स्टार्टअप्स और टेक कंपनियां अपनी अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन कर रही हैं।