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RBI चंडीगढ़ द्वारा पठानकोट, पंजाब में बैंकरों के लिए NAMCABS कार्यशाला का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), चंडीगढ़ ने 03-04 जून, को पंजाब के पठानकोट में बैंकरों के लिए एमएसएमई वित्तपोषण क्षमता निर्माण पर राष्ट्रीय मिशन (NAMCABS) कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला का उद्घाटन विवेक श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिज़र्व बैंक, चंडीगढ़ द्वारा किया गया, जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी पंकज सेठिया, महाप्रबंधक, RBI; मनमीत छाबड़ा, महाप्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आर के मीना, SLBC पंजाब। इस कार्यशाला में पंजाब के छः जिलों अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरन तरन, कपूरथला और होशियारपुर के 20 अलग-अलग बैंकों से लगभग 90 बैंकरों ने भाग लिया।

विवेक श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिज़र्व बैंक ने एमएसएमई विकास और रोजगार सृजन को सुविधाजनक बनाने में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि, “एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और बैंकों को उद्यमियों के प्रति अधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। बदलती वैश्विक बाधाओं के इस समय, एमएसएमई को ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के तहत स्थानीय उत्पादों को चैंपियन बनाने के लिए सशक्त बनाना अर्थव्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाए रखेगा।

पंकज सेतिया, महाप्रबंधक ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला को प्रतिभागियों के लिए एमएसएमई वित्तपोषण के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत दिशानिर्देशों और अभिनव दृष्टिकोणों पर खुद को अपडेट करने का एक अवसर बताया। उन्होंने बैंकरों से विशेष रूप से वर्तमान वैश्विक वातावरण में अधिक उत्तरदायी और उद्यमी-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, जहां 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्थानीय विनिर्माण को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

दो दिनों के तकनीकी सत्रों का संचालन RBI, SIDBI, MSME DFO, TransUnion CIBIL के विषय-वस्तु विशेषज्ञों और वाणिज्यिक बैंकों के अनुभवी फैकल्टी द्वारा किया गया। इन सत्रों में MSME क्रेडिट मूल्यांकन, जोखिम शमन, फिनटेक समाधान और नियामक अपडेट के व्यावहारिक पहलुओं को कवर किया गया।

बैंकर्स ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया, RBI की इस कार्यक्रम को आयोजित करने की पहल की सराहना की और कहा कि प्राप्त ज्ञान उनकी क्षमता को सशक्त करेगा ताकि वे जमीन पर अधिक प्रभावी रूप से जीवंत MSME इकाइयों का समर्थन कर सकें।

NAMCABS कार्यशाला को बैंकरों को व्यावहारिक समझ और उपकरण प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने, औपचारिक वित्त तक पहुँच को विस्तारित करने और MSME क्षेत्र की सतत वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की बड़ी तैयारी, वित्त मंत्री के ‘3Fs’ फॉर्मूले से थमेगी महंगाई

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट के बीच फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि घरेलू इकेनॉमी लगातार मजबूत बनी हुई है। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के 37वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्यूल बचाने की अपीलों के बाद कुछ लोगों द्वारा निराशावादी और नकारात्मक माहौल बनाए जाने की आलोचना की और कहा कि देश में भय फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं है तथा लोगों में विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया वृद्धि को बनाए रखने के लिए संतुलित तरीके से तैयार की गई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से सरकार को एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ फर्टिलाइजर की कीमतें भी अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी क्षेत्र पर कुछ चुनौतियां पैदा कर रही हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐसे समय में 3एफ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है और प्रधानमंत्री के आह्वानों का संदर्भ भी इसी पृष्ठभूमि में है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्थिति को लेकर यह दावा कर रहे हैं कि सब कुछ बर्बाद हो रहा है, जो सही नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा कि चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी कारणों से उत्पन्न हुई हैं, जबकि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत भय फैलाने की स्थिति में नहीं है। हमें अपने शब्दों और कार्यों से लोगों में विश्वास पैदा करना चाहिए। सीतारमण ने यह भी कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के 8.1 लाख करोड़ रुपए के लंबित भुगतान का मामला उनकी कार्यशील पूंजी और वृद्धि को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने पब्लिक सेक्टर के उपक्रमों से कहा कि वे एमएसएमई को भुगतान करने में 45 दिन की समय-सीमा से अधिक विलंब न करें।