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कांग्रेस का कैप्टन को ‘घर वापसी’ का ऑफर: ईडी नोटिस के बाद गरमाई पंजाब की सियासत; बेटी बोली- ‘भाजपा में ही रहेंगे पिता’

पंजाब डेस्क : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एक पुराने मामले में कैप्टन को समन (Notice) जारी किए जाने के बाद, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में वापस लौटने का न्योता दिया है।

भूपेश बघेल ने दिया ऑफर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने कैप्टन के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें ‘घर वापसी’ का ऑफर दिया है। बघेल ने कहा कि यदि कैप्टन कांग्रेस में लौटने पर विचार करते हैं, तो पार्टी इस पर विचार कर सकती है, हालांकि अंतिम फैसला हाईकमान ही लेगा। उन्होंने कैप्टन को पंजाब की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा बताया।

बेटी जय इंदर कौर का दो टूक जवाब: कांग्रेस की इस पेशकश पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी और पंजाब भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता भाजपा में ही रहेंगे और कहीं नहीं जा रहे हैं। ईडी नोटिस पर उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें नोटिस मिला है, और वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सियासी बयानबाजी और आरोप: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया है कि जैसे ही कैप्टन ने पंजाब के मुद्दों और भाजपा की समझ पर सवाल उठाए, उन्हें ईडी का समन भेज दिया गया। उन्होंने इसे केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति करार दिया। दूसरी ओर, 84 वर्षीय कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के गठबंधन की वकालत कर रहे हैं ताकि 2027 के चुनावों में मजबूती से उतरा जा सके।

कैप्टन का राजनीतिक सफर: कैप्टन अमरिंदर सिंह तीन बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और अपनी नई पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ बनाई, जिसका सितंबर 2022 में उन्होंने भाजपा में विलय कर दिया था।

पंजाब कांग्रेस को राहुल गांधी की सख्त चेतावनी: अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, राजा वारिंग बने रहेंगे प्रेसिडेंट

पंजाब डेस्क: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस हाईकमान ने राज्य यूनिट में चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में पंजाब कांग्रेस नेताओं के साथ करीब 3 घंटे की मीटिंग में राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता और गुटबाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चरणजीत चन्नी को झटका: मीटिंग के दौरान, राहुल गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पिछले दिनों दलित पॉलिटिक्स को लेकर दिए गए बयानों पर गहरी नाराजगी जताई। चन्नी ने शिकायत की थी कि पंजाब कांग्रेस के सभी टॉप पोस्ट (प्रेसिडेंट, CLP लीडर वगैरह) पर ऊंची जातियों के लोग हैं, जबकि राज्य में दलित आबादी 35-38% है। राहुल गांधी ने साफ किया कि पंजाब कांग्रेस की मौजूदा लीडरशिप और प्रेसिडेंट (अमरिंदर सिंह राजा वारिंग) में कोई बदलाव नहीं होगा।

मीडिया में बयानों पर रोक: राहुल गांधी और नेशनल जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेणुगोपाल ने नेताओं को पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर मीडिया या सोशल मीडिया पर कोई बयान न देने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह पार्टी प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखे, पब्लिक में दिए गए बयानों पर हाईकमान सख्त एक्शन लेगा।

हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे- प्रताप बाजवा: मीटिंग के बाद पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कई मुद्दों पर चर्चा हुई है और पार्टी आने वाले चुनाव मिलकर लड़ेगी और जीतेगी। पंजाब कांग्रेस इंचार्ज भूपेश बघेल ने कहा कि आने वाले एक साल के लिए एक आउटलाइन तैयार की गई है, जिसमें MNREGA जैसे प्रोग्राम पर फोकस किया जाएगा।

इस मीटिंग में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमर सिंह और विजय इंदर सिंगला समेत कई दूसरे सीनियर नेता भी मौजूद थे।