IITM और ARIES के बीच हिमालयी क्षेत्र में दीर्घकालिक निगरानी केंद्र स्थापित करने के लिए समझौता
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ‘मिशन मौसम’ पहल के तहत जलवायु और वायुमंडलीय विज्ञान में सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और कदम।
- आईआईटीएम और एआरआईईएस, देवस्थल के बीच 18 जून को पचास वर्षों से अधिक की अवधि के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
- समझौता ज्ञापन का उद्देश्य भारत जलवायु अवलोकन नेटवर्क (बीसीओएन) के अंतर्गत जलवायु चरों के दीर्घकालिक अवलोकनों का उपयोग करके जलवायु परिवर्तन पर सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
- बीसीओएन मौसम संबंधी मापदंडों, जलवायु-सक्रिय सूक्ष्म गैसों (ग्रीनहाउस गैसें और अल्पकालिक जलवायु कारक), वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और मिट्टी की नमी संबंधी प्रेक्षणों की निगरानी करेगा।
- देश में जलवायु संबंधी अग्रणी अनुसंधान में सहायता करने के लिए दीर्घकालिक, उच्च गुणवत्ता वाला और उच्च सटीकता वाला जलवायु डेटासेट बनाने का प्रयास
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने 18 जून को ऑनलाइन माध्यम से नैनीताल स्थित आर्यभट्ट अवलोकन विज्ञान अनुसंधान संस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस MoU पर IITM के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव और नैनीताल स्थित ARIES के निदेशक डॉ. मनीष कुमार नाजा ने हस्ताक्षर किए।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन पर सहयोगात्मक अनुसंधान और मौसम संबंधी मापदंडों तथा जलवायु-सक्रिय सूक्ष्म गैसों, जैसे ग्रीनहाउस गैसें, अल्पकालिक जलवायु कारक और मृदा नमी आदि के दीर्घकालिक अवलोकन को बढ़ावा देना है। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य भारत जलवायु अवलोकन नेटवर्क के अंतर्गत एआरआईएस, देवस्थल में एक जलवायु अवलोकन केंद्र स्थापित करना है।
देवस्थल स्थित ARIES नामक उच्च पर्वतीय चोटी उन्नत वायुमंडलीय अवलोकन के लिए एक अनूठा वातावरण प्रदान करती है। इसका अपेक्षाकृत स्वच्छ वातावरण आधारभूत वायुमंडलीय विशेषताओं को समझने, ग्रीनहाउस गैसों का अध्ययन करने, जलवायु संबंधी प्रदूषकों के परिवहन का अध्ययन करने और हिमालयी क्षेत्र में जलवायु प्रक्रियाओं की गतिशीलता को समझने के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करता है।
BCON भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत IITM द्वारा परिकल्पित और कार्यान्वित एक राष्ट्रीय अवलोकन संबंधी पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में दीर्घकालिक, उच्च परिशुद्धता जलवायु निगरानी ढांचा विकसित करना है।
BCON एक मजबूत राष्ट्रीय डेटाबेस विकसित करेगा जो दीर्घकालिक रुझानों का पता लगाने में सहायता करेगा, जलवायु परिवर्तन अनुसंधान को आगे बढ़ाएगा और जलवायु आकलन और साक्ष्य आधारित नीति विकास के लिए भारत की क्षमता को मजबूत करेगा।
BCON के माध्यम से उत्पादित उच्च सटीकता वाले डेटासेट पृथ्वी प्रणाली मॉडल के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सत्यापन और बेंचमार्किंग भी प्रदान करेंगे। इसमें भारत का पहला ईएसएम, आईआईटीएम ईएसएम भी शामिल है, जिससे भारतीय जलवायु परिवर्तन के अधिक सटीक सिमुलेशन सक्षम होंगे और भविष्य के जलवायु अनुमानों में सुधार होगा।

