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बरसों से मेरी ख्वाहिश थी कि भारतीय क्रिकेट का दबदबा रहे और वह समय आ गया है : मिताली

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) मिताली राज ने कहा है कि विश्व स्तर पर भारतीय क्रिकेट के दबदबे का उनका बरसों पुराना सपना सच हो रहा है जबकि पुरूष टीम, महिला टीम और जूनियर टीमों ने हाल ही के वर्षों में बड़े आईसीसी खिताब जीते हैं ।

पिछले कुछ साल में भारतीय पुरूष टीम ने 2024 और 2026 टी20 विश्व कप, महिला टीम ने पहला वनडे विश्व कप जीता । जूनियर स्तर पर अंडर 19 टीमों ने भी विश्व खिताब जीते हैं ।

मिताली ने बीसीसीआई नमन पुरस्कारों के दौरान कहा ,‘‘ मैं बरसों से चाहती थी कि भारतीय क्रिकेट का दबदबा हो और अब वह समय आ गया है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ पिछले दो तीन साल में भारतीय क्रिकेट महिला, पुरूष या अंडर 19 लड़के और लड़कियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है । एक पूर्व क्रिकेटर होने के नाते भारतीय क्रिकेट की प्रगति होते देखकर गर्व महसूस होता है ।’’

मिताली , पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और रोजर बिन्नी को बीसीसीआई पुरस्कार समारोह में रविवार को कर्नल सी के नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया ।

उन्होंने भारतीय क्रिकेट, खासकर महिला क्रिकेट के कायाकल्प का श्रेय बीसीसीआई के पूर्व सचिव और आईसीसी के मौजूदा अध्यक्ष जय शाह को दिया ।

उन्होंने कहा ,‘‘ मैने महिला क्रिकेट में बदलाव को देखा है और मैं बीसीसीआई और जय सर के सहयोग का जिक्र करना चाहूंगी । पिछले चार पांच साल में भारतीय महिला क्रिकेट में भारी बदलाव आया है और यह एक व्यक्ति के कारण हुआ है ।’

मिताली ने कहा ,‘‘ वैश्विक स्तर पर इसके लिये उनका विजन और प्रतिबद्धता । उन्होंने महिला क्रिकेट के विकास के लिये काफी प्रयास किये हैं ।’’

बीसीसीआई में शाह के कार्यकाल में महिला और पुरूष क्रिकेटरों की समान मैच फीस की शुरूआत हुई और पूरी तरह से पेशेवर महिला प्रीमियर लीग भी शुरू हुई ।

मिताली ने यह भी कहा कि अपने कैरियर में उन्होंने सचिन तेंदुलकर और द्रविड़ से काफी प्रेरणा ली ।

उन्होंने कहा ,‘‘ महिला क्रिकेट का अपना सफर रहा है लेकिन हमने पुरूष क्रिकेटरों से काफी प्रेरणा ली । मैने राहुल और सचिन से काफी कुछ सीखा । उनसे बल्लेबाजी को लेकर लंबी बातचीत की और सुझाव भी मिले जो काफी काम आये ।’’

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे बिन्नी ने कहा ,‘‘ मैं खुशकिस्मत हूं कि भारत के लिये खेलने का मौका मिला । इतनी बड़ी आबादी वाले देश में हर किसी को यह मौका नहीं मिलता । भारत के लिये खेलना सबसे बड़ा लक्ष्य था जो मैने हासिल किया ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ खेलने के बाद मैने ब्रेक लिया लेकिन फिर लगा कि अभी भी क्रिकेट को कुछ दे सकता हूं । फिर कोचिंग में उतरा और कर्नाटक की टीम के बाद भारत की जूनियर टीमों को कोचिंग दी और युवाओं के साथ अनुभव साझा करना बहुत अच्छा रहा ।’’

शतक से चूकने पर बेनेट ने कहा, क्रिकेट ऐसा ही है, मैं हमेशा उस स्थिति में नहीं रहूंगा

 चेन्नई, 27 फरवरी (भाषा) जिम्बाब्वे के सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट ने टी20 विश्व कप में शतक बनाने से तीन रन चूकने के बावजूद कहा कि अगर वह भारत के खिलाफ शतक बनाने में सफल रहते तो अच्छा होता लेकिन वह अपने प्रदर्शन से खुश हैं।

बेनेट की 97 रन की नाबाद पारी टीम के काम नहीं आई क्योंकि जिम्बाब्वे को भारतीय टीम के हाथों 72 रन से हार का सामना करना पड़ा। भारत में चार विकेट पर 256 रन बनाए थे जिसके जवाब में जिम्बाब्वे छह विकेट पर 184 रन ही बना पाया।

बेनेट ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘अच्छा होता अगर मैं शतक पूरा कर लेता। क्रिकेट में कभी-कभी ऐसा ही होता है। मैं हमेशा उस स्थिति में नहीं रहूंगा। मुझे खुशी है कि मैंने अच्छी पारी खेली लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सका। 250 रन से अधिक का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल था।’’

इस 22 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि अच्छी साझेदारी नहीं निभाने के कारण उनकी टीम को नुकसान हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई नया बल्लेबाज क्रीज पर उतरता तो मैं उससे यही कहता कि गेंद को अच्छी तरह से देखो और फिर उस पर शॉट लगाओ। मैं क्या कर रहा हूं इसकी चिंता मत करो, बस तुम अपना काम करो। हमारे लिए अच्छी साझेदारी निभाना जरूरी था।’’

बेनेट ने पारी के 13वें ओवर में भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पर लॉन्ग ऑन के ऊपर छक्का लगाकर अपना अर्धशतक पूरा किया।

उन्होंने कहा, ‘‘बुमराह का सामना करना मुश्किल था। मैं पहली बार उनके खिलाफ खेल रहा था। वह अव्वल दर्जे के विश्व स्तरीय गेंदबाज हैं। मैं बस यही सोच रहा था की गेंद पर अपना ध्यान केंद्रित रखूं और अपना स्वाभाविक खेल खेलूं। गेंद मेरी जद में थी और मैंने उस पर जोरदार शॉट मारा।’’

बेनेट ने कहा कि लक्ष्य बहुत बड़ा था और उसे हासिल करना बहुत मुश्किल था।

उन्होंने कहा, ‘‘250 से 260 रन के लक्ष्य को हासिल करना बहुत मुश्किल होता है। यह मैदान पर जाकर खुद को अभिव्यक्त करने, स्कोरबोर्ड की ज्यादा चिंता न करने, अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने और अपने मजबूत पक्षों के अनुसार खेलने का मौका था। अगर नतीजा अच्छा निकलता है तो ठीक है, अगर नहीं निकलता तो भी ठीक है। आज परिणाम वैसा नहीं रहा जैसा हम चाहते थे।’’

बेनेट ने कहा कि भले ही उनकी टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई है लेकिन सुपर आठ में जगह बनाने से उनके लिए कई सकारात्मक पहलू रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने पहली बार सुपर आठ के लिए क्वालीफाई किया है, इसलिए जाहिर है कि हमारे लिए इस टूर्नामेंट में कई शानदार पल रहे हैं और हम इससे खुश हैं। हमें अभी दक्षिण अफ्रीका से मैच खेलना है। हमने वेस्टइंडीज और भारत के खिलाफ मैचों से बहुत कुछ सीखा है और अगले मैच से भी जितना हो सके सीखने की कोशिश करेंगे।’’