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राष्ट्रीय खेल दिवस 2026: चंडीगढ़ में ‘खेलो इंडिया संवाद’ में युवाओं ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के अवसर पर चंडीगढ़ के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रव्यापी युवा संवाद कार्यक्रम “खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात पीएम के साथ” का आयोजन किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत मेरा युवा भारत (MY Bharat) की ओर से आयोजित इस पहल का उद्देश्य युवाओं को खेल, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ते हुए विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन के सीधे प्रसारण से हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में देश के खेल इकोसिस्टम में आए बदलाव, युवा नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण और वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के भारत के संकल्प पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद चंडीगढ़ के विभिन्न शैक्षणिक परिसरों में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ स्थानीय युवा संवाद सत्र आयोजित किए गए।

खेल दिग्गजों ने युवाओं से साझा किए अनुभव

RGNIYD क्षेत्रीय केंद्र में प्रसिद्ध वेटलिफ्टर विकास ठाकुर और पैरा-एथलीट राजन ढकल ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने खेल में निरंतरता, मेहनत और संघर्ष के जरिए सफलता हासिल करने के अपने अनुभव साझा किए।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) में अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज अंजुम मौदगिल ने छात्रों से बातचीत की। उन्होंने वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं में मानसिक अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास के महत्व पर चर्चा की।

GGDSD कॉलेज में हॉकी खिलाड़ी गुरजीत कौर, पैरा-एथलीट बबनप्रीत कौर और रोइंग चैंपियन भगवान सिंह ने युवाओं से संवाद किया। इस दौरान टीम वर्क, रणनीतिक सोच और दृढ़ संकल्प जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए गए।

वहीं MCM DAV कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय जूडोका मेहक सिंह ने कॉम्बैट स्पोर्ट्स में मानसिक मजबूती और शारीरिक दक्षता के महत्व पर युवाओं को जानकारी दी।

MY Bharat और VBYLD 2027 के लिए जागरूकता अभियान

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को MY Bharat डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने और पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके साथ ही युवाओं को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 की क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

आयोजकों का उद्देश्य युवाओं को खेल गतिविधियों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ की शपथ

कार्यक्रम का समापन चंडीगढ़ के सभी आयोजन स्थलों पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। विद्यार्थियों और युवाओं ने नशे से दूर रहने तथा समाज को नशा-मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

आयोजकों के अनुसार, खेलों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, स्वस्थ जीवनशैली और टीम भावना को बढ़ावा देने के साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य रहा।

आधार ऐप 40 मिलियन डाउनलोड के पार, डिजिटल पहचान सेवाओं को दे रहा बढ़ावा
  • आधार ऐप 40 मिलियन डाउनलोड के पार, सुविधाजनक डिजिटल पहचान सेवाओं को दे रहा बढ़ावा
  • लगभग 49 लाख निवासियों ने मोबाइल नंबर अपडेट किया; 11.65 लाख ने आधार ऐप का उपयोग करके पता अपडेट किया
  • निवासियों ने बायोमेट्रिक्स को लॉक/अनलॉक करने के लिए 19 मिलियन से अधिक बार आधार ऐप का उपयोग किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आधार ऐप ने 40 मिलियन (4 करोड़) डाउनलोड का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है, जो सुविधाजनक और डिजिटल-प्रथम पहचान सेवाओं में निवासियों के बढ़ते भरोसे को रेखांकित करता है।

आधार ऐप का बढ़ता उपयोग घर बैठे पता अपडेट करने, मोबाइल नंबर अपडेट, ईमेल अपडेट, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और ई-आधार डाउनलोड सहित आधार से जुड़ी सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुँचने के लिए एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में इसके उभरने को दर्शाता है।

अपने लॉन्च के बाद से, आधार ऐप ने 11.65 लाख पते के अपडेट की सुविधा प्रदान की है, जिससे निवासी आधार केंद्र पर जाए बिना आसानी से अपने आधार विवरण को अपडेट रख सकते हैं।

इस ऐप ने लगभग 49 लाख मोबाइल नंबर अपडेट को भी सक्षम बनाया है, जिससे निवासियों को अपने आधार से जुड़े सटीक संपर्क विवरण बनाए रखने में मदद मिली है।

1 जुलाई को ईमेल अपडेट सुविधा शुरू होने के बाद से, आधार ऐप के माध्यम से लगभग 12.5 लाख ईमेल पते जोड़े या अपडेट किए गए हैं, जिससे जहां भी लागू हो, निवासियों और यूआईडीएआई (UIDAI) के बीच संचार को और मजबूती मिली है। यह सुविधा, जिसके लिए पहले ₹75 का शुल्क लिया जाता था, आधार ऐप पर 31 दिसंबर 2026 तक निःशुल्क कर दी गई है।

इस ऐप ने अपनी गोपनीयता (प्राइवेसी) और सुरक्षा सुविधाओं के मामले में भी मजबूत स्वीकार्यता देखी है। निवासियों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा का 19.1 मिलियन (1.91 करोड़) से अधिक बार उपयोग किया है। यह सुविधा आधार नंबर धारकों को आवश्यकता पड़ने पर अपने बायोमेट्रिक्स को तुरंत लॉक या अनलॉक करने की अनुमति देकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे मात्र कुछ टैप के साथ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाती है।

आधार ऐप को आधार नंबर धारकों को अपनी पहचान दिखाने, साझा (शेयर) करने और सत्यापित करने के लिए एक सुविधाजनक और गोपनीयता-प्रथम तरीका प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह विकसित भारत के लिए डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप जीवन की सुगमता (ईज ऑफ लिविंग) को और बेहतर बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

माय भारत पंजाब एवं चंडीगढ़ द्वारा सघन युवा पंजीकरण एवं जागरूकता अभियान का शुभारंभ

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय मेरा युवा भारत (माय भारत) द्वारा 1 जुलाई से 15 अगस्त, 2026 तक देशभर में सघन युवा पंजीकरण एवं जागरूकता अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य माय भारत पोर्टल पर अधिक से अधिक युवाओं का पंजीकरण सुनिश्चित करना तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को सशक्त बनाना है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रश्मीत कौर, राज्य निदेशक, माय भारत पंजाब, शिवधन शर्मा, केंद्र शासित प्रदेश निदेशक, माय भारत चंडीगढ़, तथा श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत चंडीगढ़ ने पंजाब एवं चंडीगढ़ के युवाओं से माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण कर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया।

अब तक पंजाब में 5,62,959 तथा चंडीगढ़ में 70,208 युवाओं का माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण हो चुका है। वर्तमान अभियान का उद्देश्य स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, गांवों, ब्लॉकों तथा शहरी क्षेत्रों तक पहुंचकर इन आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।

माय भारत एक अभिनव “फिजिटल” (भौतिक + डिजिटल) मंच है, जो युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़ी विभिन्न अवसरों से जोड़ता है। पंजीकृत युवा अनुभवात्मक अधिगम कार्यक्रम (Experiential Learning Programmes – ELPs), स्वयंसेवी अवसर (Volunteer Opportunities – VOs), युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम, केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं एवं अभियानों, इंटर्नशिप, कौशल विकास, मेंटरशिप तथा प्रमाणित डिजिटल स्वयंसेवक पहचान जैसी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए प्रमाण-पत्र एवं मान्यता भी प्रदान की जाती है।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा: “पंजाब एवं चंडीगढ़ के युवाओं में भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपार क्षमता है। हम प्रत्येक युवा से आग्रह करते हैं कि वे माय भारत आंदोलन से जुड़ें और इस मंच पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाएं। अभियान के अंतर्गत महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, दिव्यांग युवाओं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के युवाओं की समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।”

माय भारत पंजाब एवं चंडीगढ़ ने सभी शिक्षण संस्थानों, युवा संगठनों, सरकारी विभागों तथा अन्य हितधारकों से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने एवं अधिक से अधिक युवाओं का पंजीकरण सुनिश्चित करने में सहयोग देने का आह्वान किया है।

युवा पंजीकरण हेतु माय भारत पोर्टल पर जाएँ: www.mybharat.gov.in

‘मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की एकता के लिए अमर प्रेरणा’ : पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। 

श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। 

डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’

कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।

उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न ‘दीपक’ यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  

यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।

भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  

75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।

डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। 

कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे। 

UIDAI ने आधार ऐप से ईमेल अपडेट की मुफ्त सुविधा शुरू की
  • भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार ऐप के माध्यम से आधार में ईमेल अपडेट को निःशुल्क सक्षम किया
  • पहले दो दिनों में 25 लाख से अधिक ईमेल अपडेट दर्ज किए गए

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने निवासियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अब लोगों को आधार ऐप के माध्यम से सीधे आधार में अपनी ईमेल आईडी जोड़ने या अपडेट करने की अनुमति दे दी है, जिससे आधार केंद्र जाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

यह सेवा केवल आधार ऐप के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध है, जो 1 जुलाई, 2026 से छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगी। इससे निवासियों के लिए अपनी आधार जानकारी को अपडेट रखना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। भौतिक रूप से आने-जाने की आवश्यकता को समाप्त करके, यह पहल डिजिटल इंडिया के अंतर्गत विकसित भारत की दिशा में लोगों के अनुकूल डिजिटल सेवा प्रदान करने के लिए यूआईडीएआई की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

आधार ऐप पर नई सेवा उपलब्ध होने के दो दिनों के भीतर ही 250,000 से अधिक लोगों ने अपना ईमेल पता अपडेट कर लिया है। ईमेल को आधार से लिंक करने से आधार प्रमाणीकरण अनुरोध निष्पादित होने पर वास्तविक समय में ईमेल सूचनाएं प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

यह पारदर्शिता को बढ़ाता है और आधार संख्या धारकों को किसी भी उद्देश्य के लिए उनके आधार के उपयोग के बारे में सूचित रहने में सक्षम बनाकर सुरक्षा की एक अतिरिक्त सुविधा प्रदान करता है।

जीवन को सुगम बनाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया नया आधार ऐप लोगों को अपने स्मार्टफ़ोन से ही मोबाइल नंबर अपडेट और पता अपडेट सहित कई सेवाओं का आसानी से लाभ उठाने में सक्षम बना रहा है।

अब तक 40 लाख से अधिक लोगों ने नए आधार ऐप का उपयोग करके अपने मोबाइल नंबर अपडेट किए हैं। वहीं, लगभग 10 लाख लोगों ने इस ऐप का उपयोग करके अपना पता भी अपडेट किया है।

यूआईडीएआई लोगों को आधार में ईमेल आईडी जोड़ने और अपडेट करने की सुविधा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है। निवासी आधार ऐप डाउनलोड या अपडेट करके ईमेल अपडेट करने की सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।

नया आधार ऐप एंड्रॉयड और ऐप्पल आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। लोग इसे यहां से डाउनलोड कर सकते हैं:

एंड्रॉइड: https://play.google.com/store/apps/details?id=in.gov.uidai.pehchaan&hl=en_IN

आईओएस – https://apps.apple.com/in/app/aadhaar/id6744029871

देशव्यापी PM-VBRY उत्सव में शामिल होगा चंडीगढ़; पीएम करेंगे 2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि के वितरण का नेतृत्व

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के सफल कार्यान्वयन के उपलक्ष्य में,  श्रम और रोजगार मंत्रालय 19 जून, 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के माननीय प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में एक राष्ट्रीय PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान, भारत के माननीय प्रधानमंत्री प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे।

PM-VBRY के तहत प्रोत्साहन राशि के इस वितरण से 15 लाख से अधिक लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम में लगभग 1,200 आमंत्रित लोगों के शामिल होने की आशा है, जिनमें नियोक्ता और कर्मचारी, लाभार्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। माननीय प्रधानमंत्री देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले लाभार्थियों के साथ बातचीत भी करेंगे। इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे के साथ-साथ श्रम और रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

देशव्यापी पहुंच अभियान के हिस्से के रूप में, देश भर में 200 स्थानों पर एक साथ क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्षेत्रीय कार्यक्रमों में जन प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होगी, जिनमें 2 राज्यपाल, 5 मुख्यमंत्री, 12 केंद्रीय मंत्री, 1 उपमुख्यमंत्री, 13 राज्य श्रम मंत्री, 39 राज्य मंत्री, 59 सांसद, 56 विधायक और 2 महापौर शामिल हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के साथ उनकी भागीदारी PM-VBRY की देशव्यापी पहुंच को और मजबूत करेगी और रोजगार सृजन तथा कार्यबल के औपचारिककरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। देशव्यापी भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए विज्ञान भवन में मुख्य कार्यक्रम की कार्यवाही का प्रसारण सभी क्षेत्रीय स्थानों पर किया जाएगा।

देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में लगभग 65,000 से 70,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की आशा है, जिनमें लगभग 9,000 नियोक्ता प्रतिनिधि और लगभग 45,000 कर्मचारी शामिल हैं।

इसी क्रम में, क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ द्वारा दिनांक 19.06.2026 को जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज, सैक्टर 32-सी, चण्डीगढ़ – 160030 में PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें मुख्य अतिथि श्री सौरभ जोशी, मेयर, चण्डीगढ़ होंगे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में श्री राजीव कुमार गुप्ता, आई.ए.एस., श्रम आयुक्त, पंजाब सरकार, श्री हेमांग डिमजेल, उप मुख्य श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री आकाश मित्तल, सहायक श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री पंकज वोहरा, संयुक्त निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, श्री एस एस नेगी, डी.जी., श्रम ब्यूरो, श्री हुक्म सिंह, सदस्य, क्षेत्रीय समिति शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, विभिन्न स्थापनाओं के कर्मचारी, नियोक्ता, कर्मचारी एसोसिएशन तथा नियोक्ता एसोसिएशन के सदस्य भाग लेंगे।

PM-VBRY  के बारे में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ELI) योजना है। इसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, संगठित कार्यबल में पहली बार शामिल होने वालों की मदद करना और नियोक्ताओं को अतिरिक्त नौकरियां पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार नौकरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (अधिकतम ₹15,000 तक) मिलता है, जबकि नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए दो साल तक प्रोत्साहन दिया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अतिरिक्त दो साल के लिए बढ़ा हुआ सहयोग मिलता है, जिससे श्रम-प्रधान उद्योगों में लगातार नौकरियां पैदा करने को बढ़ावा मिलता है।

कुल ₹99,446 करोड़ के बजट के साथ, PM-VBRY का लक्ष्य दो साल की अवधि में देश भर में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थियों के औपचारिक कार्यबल में पहली बार शामिल होने की आशा है। इस योजना के तहत लाभ 1 अगस्त, 2025 और 31 जुलाई 2027 के बीच पैदा हुई नौकरियों पर लागू होते हैं। इस योजना का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना, गुणवत्तापूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना और समावेशी व टिकाऊ आर्थिक विकास के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देना है।

इस योजना के दो हिस्से हैं:

भाग A – पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन:

इस हिस्से के तहत, EPFO  में पंजीकृत और ₹ 1 लाख प्रति माह तक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी, एक महीने के वेतन के बराबर प्रोत्साहन (अधिकतम ₹15,000 तक) दो किस्तों में प्राप्त करने के पात्र हैं। पहली किस्त लगातार छह महीने की सेवा पूरी होने के बाद दी जाती है, जबकि दूसरी किस्त बारह महीने की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा होने के बाद दी जाती है। जो कर्मचारी छह महीने से अधिक समय तक लगातार नौकरी में रहते हैं, वे इस योजना के तहत लाभ पाने के पात्र हो जाते हैं, जिससे कार्यबल को बनाए रखने और लगातार औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है। प्रोत्साहन की दूसरी किस्त को एक निश्चित अवधि के लिए बचत साधन/जमा खाते में रखा जाएगा ताकि युवा श्रमिकों में लंबी अवधि की बचत की आदत को बढ़ावा दिया जा सके।

भाग B – नियोक्ताओं के लिए सहयोग:

यह हिस्सा सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है। नियोक्ताओं को हर अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो साल तक ₹3,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन मिलेगा, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह महीने तक लगातार नौकरी पर बना रहे। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, ये प्रोत्साहन दो और साल के लिए बढ़ा दिए गए हैं, जिसमें तीसरा और चौथा साल भी शामिल है। इस हेतु पात्र होने के लिए, EPFO के अंतर्गत रजिस्टर्ड स्थापनाओं को कम से कम दो अतिरिक्त कर्मचारी (50 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) या पांच अतिरिक्त कर्मचारी (50 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) भर्ती करने होंगे।

पार्ट A के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को सभी भुगतान “आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम” (ABPS) का प्रयोग करके प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के ज़रिए किए जाते हैं, जबकि पार्ट B के तहत नियोक्ताओं को प्रोत्साहन सीधे उनके PAN-लिंक्ड बैंक अकाउंट में क्रेडिट किए जाते हैं।

आशा है कि PMVBRY योजना से नौकरियां बढ़ेंगी, विशेषकर मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर में, और साथ ही औपचारिक कार्यबल में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना देश भर में लाखों कामगारों के बीच रोज़गार को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने में भी काफी मदद करेगी।

PMVBRY योजना ने औपचारिक रोज़गार को बढ़ावा देने और कामगारों और नियोक्ताओं, दोनों को मदद करने में पहले ही काफी शुरुआती सफलता प्रदर्शित की है। मार्च 2026 में, योजना के पार्ट A के तहत 4.41 लाख पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ₹ 247 करोड़ के फायदे दिए गए, जिससे औपचारिक कार्यबल में आने वाले युवा कामगारों को सीधी वित्तीय मदद मिली। पार्ट B के तहत, 17,551 स्थापनाओं को ₹ 214 करोड़ के प्रोत्साहन दिए गए, जिससे लगभग 6.46 लाख कामगारों को अतिरिक्त रोज़गार मिला।

क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ के हिस्से सहित पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल की समेकित कुल स्थिति का विवरण नीचे दिया गया है:

1.  दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-B लाभार्थी (नियोक्ता)

विवरण                                                      स्थापनाओं की संख्या            राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                          2,428                    56,85,77,793
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                                      794                    26,63,94,224

2. दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-A लाभार्थी (कर्मचारी)

विवरण                                          लाभार्थियों की संख्या       राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                15,287           8,38,03,235
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                           5,435           3,26,38,831

“नोट: पार्ट-A के पहले चरण के दौरान बांटी गई राशि से संबंधित विवरण अभी उपलब्ध नहीं हैं।”

आने वाले समय में मिलने वाला लाभ PM-VBRY को लागू करने की दिशा में एक और अहम पड़ाव है। यह देशव्यापी कार्यक्रम रोज़गार पैदा करने, कार्यबल को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ाने के प्रति सरकार की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों को लगातार मदद देकर PM-VBRY भारत की रोज़गार रणनीति के एक अहम स्तंभ और ‘विकसित भारत’ के विज़न में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के तौर पर उभर रहा है।

आकांक्षाओं का गणित: भारत में रोजगार का सवाल अब स्थिरता पर क्यों निर्भर है

जब 1954 में सर आर्थर लुईस ने गरीब अर्थव्यवस्थाओं के अमीर बनने की परिघटना को समझाने का काम शुरू किया, तो उन्होंने विकास की मुख्य प्रक्रिया को पूंजी के संचय के रूप में नहीं बल्कि कामगारों के जीवन-निर्वाह वाली खेती से हटकर अधिक कमाई वाले उद्योगों एवं
सेवा क्षेत्रों की ओर मुड़ने के तौर पर पहचाना। उनका यह अनुमान बिल्कुल ही सही था कि यही बदलाव देर से औद्योगीकरण करने वाले हर देश का भविष्य तय करेगा। आज भारत ठीक इसी मोड़ पर खड़ा है और नीति-निर्माताओं के सामने सवाल पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध कराने भर का नहीं है। बल्कि, उनके सामने इससे भी अधिक अहम सवाल यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसी नौकरियां पैदा करने की स्थिति में है या नहीं जो पर्याप्त तादाद में हों, औपचारिक हों और एक युवा कामगार को जीवन भर बढ़ती उत्पादकता एवं सुरक्षा दे सकने लायक टिकाऊ हों।

इस जिम्मेदारी के भार को काफी सटीकता से बताया जा सकता है। ‘आर्थिक समीक्षा 2023-24’ ने ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे)’ और आबादी से जुड़े अनुमानों के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि इस दशक की बाकी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग 78.5 लाख गैर-कृषि नौकरियां सृजित करनी होंगी। यह आंकड़ा दो बढ़ते दबावों का नतीजा है: पहला, कामकाज के क्षेत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ने के साथ श्रमशक्ति में हो रही लगातार बढ़ोतरी; और दूसरा, संरचनात्मक बदलाव के कारण खेती से बाहर आने वाले
कामगार। रोजगार में खेती की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 46 प्रतिशत है। वर्ष 2047 तक इस हिस्सेदारी के घटकर एक-चौथाई तक आ जाने की संभावना है।

जुलाई 2025 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई और उसके अगले महीने से शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ उस अंतर को पाटने की अब तक की सबसे सोची- समझी कोशिश है। इस योजना के तहत, जुलाई 2027 तक की दो वर्षों की अवधि में 3.5 करोड़ से अधिक औपचारिक नौकरियां सृजित करने हेतु ‘कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)’ के जरिए 99,446 करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं। ईपीएफओ में पंजीकृत किसी कंपनी में पहली बार शामिल होने वाला और महीने में एक लाख रुपये से कम कमाने वाला कामगार, दो किस्तों
में कुल 15,000 रुपये तक पाने का हकदार बन जाता है। दूसरी किस्त वित्तीय साक्षरता पाठ्यक्रम (फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स) करने पर और बचत (सेविंग्स) के तौर पर मिलती है। वहीं, निर्धारित आधार-रेखा (बेसलाइन) से अधिक लोगों को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं को हर नए कामगार के लिए महीने में 3,000 रुपये तक मिलते हैं। ये शर्तें कुछ इस तरह तय की गई हैं कि छोटी कंपनियां भी इसके दायरे से बाहर हो जाने के बजाय इसमें शामिल हो सकें।

यह योजना भर्ती संबंधी सब्सिडी वाले आम व निराशाजनक तरीकों से इसलिए अलग और बेहतर है क्योंकि इसमें पहला लाभ मिलने से पहले छह महीने तक लगातार नौकरी करना आवश्यक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहली बार काम करने वाले को नौकरी पर रखने का लाभ तभी मिलता है जब वह कर्मचारी काम में कुशल बन जाए और टिका रहे। यह शर्त शुरुआती भर्ती को एक पक्की प्रतिबद्धता में बदल देती है, जिससे नियोक्ता को प्रशिक्षण की लागत वसूलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और कर्मचारी को भी उतने महीने मिल जाते हैं जिनमें वह असली हुनर सीख सके ​​और भरोसेमंद रिकॉर्ड बना सके। इस तरह, यह योजना केवल नौकरी देने के लिए नहीं बल्कि कर्मचारी को बनाए रखने की अपेक्षाकृत अधिक कठिन प्रक्रिया के लिए पुरस्कृत करती है और इसके बाद कर्मचारी के पास रोजगार क्षमता एक ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड होता है जिसका वह कहीं भी सदुपयोग कर सकता है।

इस योजना का सबसे अधिक झुकाव मैन्यूफैक्चरिंग की ओर है, जहां नियोक्ता को मिलने वाला प्रोत्साहन दो वर्ष के बजाय चार वर्ष तक मिलता है। समय-सीमा को दोगुनी करने का यह निर्णय औद्योगिक क्षमता तैयार होने में लगने वाले अधिक समय को ध्यान में रखकर लिया गया है। साथ ही, इससे निर्माता (मैन्यूफैक्चरर) समय से पहले स्वचालित व्यवस्था (ऑटोमेशन) लाकर कामगारों को हटाने के बजाय श्रमशक्ति बढ़ाने की ओर प्रेरित होते हैं। अहम बात यह है कि सरकार ने इसे देश को वैश्विक मैन्यूफैक्चरिंग केन्द्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दृष्टि से जरूरी माना है। ईपीएफओ ​​के जरिए, हर नए कामगार को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर मिलता है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का पहली बार अहसास होता है। अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले बहुत कम कामगारों को यह सुरक्षा मिल पाती है। इस योजना के शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। इसके शुरू होने के बाद से लगभग 60 लाख नए कर्मचारी नामांकित हुए हैं। इनमें से अधिकतर 30 वर्ष से कम आयु के हैं और 18 लाख से अधिक महिलाएं हैं। वहीं, लगभग 1.77 लाख प्रतिष्ठानों ने 66 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए हैं। इन प्रतिष्ठानों में कई ऐसी छोटी कंपनियां शामिल हैं, जहां लंबे समय से अनौपचारिक काम का बोलबाला रहा है।

हालांकि, एक अच्छी शुरुआत को पूरी तरह से सफल बदलाव मान लेना नासमझी होगी। इस योजना में धोखाधड़ी में शामिल कंपनियों को बाहर रखने, हर छह महीने में इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न के जरिए यह सुनिश्चित करना कि नौकरी सिर्फ कागजों के बजाय असल में बनी हुई है और भुगतान की स्वचालित प्रणाली जैसी कई अच्छी बातें हैं। ये सभी खूबियां इस बात को दर्शाती हैं कि योजनाकारों को इस बात का अहसास है कि ऐसी योजना में उन भर्तियों को लाभ नहीं मिलना चाहिए जो अन्यथा भी हो जातीं। इसकी असली सफलता पहले वर्ष में नामांकित लोगों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से पता चलेगी कि वे नौकरियां उस प्रोत्साहन के समाप्त होने के बाद भी बनी रहती हैं या नहीं और इससे पैदा होने वाली मांग को पूरा करने के लिए काम के लायक युवा मौजूद हैं या नहीं। इसीलिए, इस योजना की सफलता कौशल को सिखाने में किए जा रहे निवेश से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि बेरोजगारी सिर्फ आमदनी से ही वंचित नहीं करती, बल्कि यह लोगों के हुनर, आत्म-सम्मान और समाज में उनकी हैसियत को भी कमजोर करती है। वोल्टेयर ने भी यही बात कही थी जब उन्होंने कैंडिड के जरिए यह निष्कर्ष दिया था कि काम करने से तीन बड़ी समस्याएं – बोरियत, बुराई और अभाव – दूर रहती हैं। इस तरह की योजना की अहमियत इसलिए है क्योंकि यह रोजगार के सही और संपूर्ण मतलब को समझती है। यह औपचारिक नौकरी को सिर्फ गिनती के आंकड़े के तौर पर नहीं, बल्कि कामकाजी जीवन की पहली सुरक्षित
सीढ़ी के तौर पर देखती है। अब जबकि भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है, तो चुनौती इस बात की है कि इस योजना में दिखाई गई धैर्य की भावना को बनाए रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि युवाओं को सार्थक रोजगार, जिसे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय परियोजना के केन्द्र में रखा है, कुछ समय के प्रोत्साहन तक सीमित रहने के बजाय एक पूरी पीढ़ी के लिए टिकाऊ, उत्पादक और सम्मानजनक काम के रूप में मिले।

(लेखक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं)

‘युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका’: मनसुख मांडविया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ राष्ट्रीय राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए युवा: माय भारत युवा सम्मेलन’ को संबोधित किया।
इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, नवाचारों, उभरते दिग्गजों और उपलब्धि हासिल करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि वाले युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसमें राष्ट्र निर्माण में युवाओं की परिवर्तनकारी भूमिका और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा, “युवा हमारी शक्ति, हमारा गौरव, हमारा संकल्प और हमारा भविष्य हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, युवा भारतीयों को नवाचार करने, उत्कृष्टता हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। चाहे स्टार्टअप हो, खेल हो, सार्वजनिक सेवा हो, उद्यमिता हो या रचनात्मक क्षेत्र, युवा भारतीय अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ा रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने माय भारत की हालिया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धि की भी सराहना की और युवाओं से इस मंच के कार्यक्रमों, स्वयंसेवी अवसरों और राष्ट्र निर्माण की पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
डॉ. मांडविया ने युवाओं से अपनी क्षमता को पहचानने और उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा “यह समय युवाओं का है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक विकसित भारत की परिकल्पना की है जो युवा भारतीयों के विचारों, नवाचार और आकांक्षाओं से आकार लेता है। हमें मिलकर एक प्रतिस्पर्धी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा जो 140 करोड़ नागरिकों के सपनों को साकार करे।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, कहा कि भारत के युवा मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी हैं, और एक युवा भारतीय द्वारा हासिल की गई हर उपलब्धि देश को विकसित भारत की ओर बढ़ने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता किसी भी क्षेत्र में दृढ़ता, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होती है, और उन्होंने खेल, उद्यमिता, कंटेंट क्रिएशन, कला और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में युवा भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना की।
युवा सम्मेलन के दौरान, अभिनेता विक्रांत मैसी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया और डिजिटल सशक्तिकरण तथा नवाचार के माध्यम से सृजित अवसरों पर जोर दिया।

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एआई का जनजातीय भाषाओं में संवादः समावेशी विकास का द्योतक या जनजातीय गरिमा को प्रौद्योगिकी का समर्थन 

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाड़ियों और दूरदराज की बस्तियों में, एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है: विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान रूप से अधिकार है।

महत्वाकांक्षा का पैमाना

यह समझने के लिए कि प्रौद्योगिकी जनजातीय विकास के लिए अपरिहार्य क्यों हो गई है, किसी को पहले चुनौती की व्यापकता को समझना चाहिए। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन), धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए), राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और संबंधित पहलों में 549 जिलों और 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,911 ब्लॉकों के 63,000 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है, जिससे 5.5 करोड़ से अधिक आदिवासी नागरिक लाभान्वित हुए हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) पर विशेष ध्यान देने के साथ, इन प्रयासों का उद्देश्य आवास, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, कनेक्टिविटी और आजीविका जैसी आवश्यक सेवाओं का सम्पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करना है। इस तरह के विविध और विस्तृत इलाके में हर परिवार तक पहुंचने के लिए ऐसी प्रणाली की आवश्यकता होती है जो डेटा-संचालित, कनेक्टेड और उत्तरदायी होती है और यही हम तैयार कर रहे हैं।

इस वर्ष जनजातीय गरिमा उत्सव का आयोजन लगभग चार विषयगत सप्ताह के आसपास किया जा रहा है, जो एक साथ जनजातीय विकास के पूर्ण आयाम को दर्शाते हैं। उद्घाटन का विषय, “विकास के एक वाहक के रूप में प्रौद्योगिकी”, इस बात को दर्शाता है कि कैसे डिजिटल सिस्टम, विज्ञान और नवाचार भारत के कुछ दूरस्थ समुदायों तक शासन और अवसर का विस्तार करने में मदद कर रहे हैं। इस दृष्टिकोण के केंद्र में एक सरल सिद्धांत निहित है: जनजातीय भाषाओं, संस्कृतियों, विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पर्याप्त सम्मान करते हुए विकास को अंतिम दूरी तक पहुंचना चाहिए। 

प्रौद्योगिकी द्वारा जनजातीय गरिमा को बढ़ावा 

उद्देश्य के साथ निर्देशित होने पर प्रौद्योगिकी क्या हासिल कर सकती है, इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण बिरसा 101 यानी सिकल सेल रोग के लिए भारत की पहली स्वदेशी सीआरआईएसपीआर-आधारित जीन थेरेपी है। सिकल सेल रोग लंबे समय से जनजातीय आबादी के लिए स्वास्थ्य की एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है और भारत अब समानता और पहुंच में निहित उन्नत विज्ञान के साथ उस चुनौती का जवाब दे रहा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से अनुसंधान, नैदानिक परीक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का समर्थन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। सीएसआईआर-आईजीआईबी में हाल ही में एक संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और सिकल सेल योद्धाओं को एक साथ लाया गया, जो वैज्ञानिक प्रगति और प्रयासों के पीछे की मानवीय तात्कालिकता दोनों को दर्शाता है।

साझा लक्ष्य स्पष्ट है: एक किफायती, एकमुश्त उपचारात्मक उपचार विकसित करना जो जरूरतमंद हर आदिवासी परिवार तक पहुंच सके। बीआईआरएसए 101 केवल चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि से भी बढ़कर है। यह एक घोषणा है कि भारत का सबसे उन्नत विज्ञान अपने सबसे पात्र समुदायों की सेवा करेगा।

यह दृढ़ विश्वास एक पहल से कहीं अधिक गहरा है। ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) और आयुर्जेनोमिक्स जैसे प्रयास दर्शाते हैं कि कैसे आधुनिक तकनीक आदिवासी समुदायों द्वारा लंबे समय से संरक्षित समृद्ध औषधीय और पारिस्थितिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, मान्यीकरण और संरक्षण में मदद कर सकती है।

समावेशन की यही भावना इस बात को आकार दे रही है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जनजातीय विकास के साथ जोड़ा जा रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, मंत्रालय ने एक सरल लेकिन दृढ विश्वास पर आधारित एआई-सक्षम प्लेटफार्मों की श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भाषा एक बाधा नहीं है जिसे दूर किया जाना है, बल्कि एक पहचान है जिसका उत्सव मनाया जाना चाहिए। आदि वाणी, जनजातीय भाषाओं के लिए एआई-संचालित अनुवादक, टेक्स्ट-टू-टेक्स्ट और टेक्स्ट-टू-स्पीच अनुवाद, ओसीआर और आदिवासी भाषाओं में सरकारी योजना की जानकारी के वितरण का समर्थन करता है, जिससे नागरिकों को घर पर बोलने वाली भाषा में सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ने में सक्षम बनाया जाता है। ट्राइबॉट एक बहुभाषी संवादी एआई सहायक है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों को तत्क्षण मार्गदर्शन और शिकायत निपटारे में सहायता प्रदान करके इस प्रयास को और मजबूत करता है। भगवान बिरसा मुंडा सेल और आईआईटी दिल्ली के साथ आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान भी इन प्रयासों पर चर्चा की गई, जो जनजातीय भाषाओं के दीर्घकालिक संरक्षण और सुदृढ़ीकरण सहित एआई के सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और समुदाय-केंद्रित इस्तेमाल पर केंद्रित थी।

प्रौद्योगिकी सांस्कृतिक अभिकथन और आर्थिक सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली माध्यम भी बन रही है। आगामी ट्राइबएक्स प्लेटफॉर्म का उद्देश्य जनजातीय कलाओं, भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान, संगीत, शिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है। इस प्रयास को पूरा करते हुए, जनजातीय भारत का प्रस्तावित जीआई संभावित कला और शिल्प एटलस भौगोलिक संकेत क्षमता के साथ जनजातीय हस्तशिल्प, वन उत्पादों और पारंपरिक कला रूपों का डिजिटल रूप से मानचित्रण करेगा, जिससे ब्रांडिंग, बाजार पहुंच और जनजातीय बौद्धिक विरासत की पहचान को मजबूत करने में मदद मिलेगी। पायलट आधार पर पांच राज्यों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों में इनोवेशन हब की योजना बनाई गई है, जो नवाचार के नेतृत्व वाले आदिवासी उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए डिजाइन और उत्पाद विकास सहायता, जीआईएस-आधारित योजना डैशबोर्ड और इनक्यूबेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर और आगे बढ़ेंगे। 

प्रौद्योगिकी जनजातीय समुदायों तक शासन के तरीके को समान रूप से बदल रही है। पीवीटीजी घरेलू सर्वेक्षणों के लिए पीएम-जनमन के तहत सर्वेक्षण सेतु दूरदराज के क्षेत्रों में कल्याण वितरण की तत्क्षण, जियो-टैग निगरानी को सक्षम बनाता है। 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में संचालित, इस प्लेटफॉर्म ने 8,552 सर्वेक्षणकर्ताओं के समर्थन के साथ पहले ही 3.43 लाख घरेलू प्रस्तुतियां दर्ज की हैं। इस तरह की डेटा-संचालित प्रणालियां यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि प्रत्येक पात्र परिवार की पहचान की जाए और उसे आवश्यक सेवाओं से जोड़ा जाए। इसके साथ ही मंत्रालय दावा प्रस्तुतीकरण, जीआईएस-आधारित मानचित्रण, वर्कफ्लो की निगरानी और शिकायत निवारण को सुव्यवस्थित करने के लिए एक एआई-सक्षम वन अधिकार अधिनियम शासन मंच विकसित कर रहा है। साथ में, ये पहल आदिवासी नागरिकों के लिए शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और सुलभ बना रही हैं।

जनजातीय समुदाय: विकसित भारत के वाहक

एक क्षण ऐसा होता है, जो उस सार को पकड़ लेता है, जिसके लिए हम काम कर रहे होते हैं। यह किसी नीतिगत दस्तावेज या मंत्रिस्तरीय समीक्षा में नहीं पाया जाता है। यह तब पाया जाता है जब दूरदराज की बस्ती की एक आदिवासी महिला, तकनीक से, भाषा से सशक्त होती है और उसे इस बात का अहसास होता हो कि उसकी बात को राष्ट्र सुन रहा है। ऐसे में वह अपनी शर्तों पर सरकारी सेवाओं से जुड़ती है और पूरी गरिमा के साथ जवाब प्राप्त करती है। वह क्षण किसी यात्रा का अंत नहीं है। यह भारत की राष्ट्रीय गाथा में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

जनजातीय गरिमा उत्सव इस संदेश को गर्व के साथ ले जाता है। जनजातीय समुदाय, अपनी दृढता, अपने पारिस्थितिक ज्ञान, अपनी कलात्मक परंपराओं और इस भूमि में अपनी गहरी जड़ों के साथ, विकसित भारत की दहलीज पर इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे इसके सबसे शक्तिशाली और प्रेरक वाहकों में शामिल हैं। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी दूरियों को पाटती है, जैसे-जैसे विज्ञान उपचार प्रदान करता है, जैसा कि एआई जंगलों और पहाड़ियों की भाषाओं में बोलता है, और जैसे-जैसे शासन सबसे दूर के गांव के अंतिम परिवार तक पहुंचता है, हम हर दिन भारत के करीब आते हैं जो न केवल व्यापकता के रूप में विकसित है, बल्कि अपनी मानवता में परिपूर्ण है। यह वह विकसित भारत है जिसे हम माननीय प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित होकर एक साथ मिलकर निर्मित कर रहे हैं। 

(लेखिका भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव हैं) 

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के लिए राष्ट्रीय क्‍विज का शुभारंभ

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने गृह मंत्रालय के सहयोग से विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीवीपी) 2026 के लिए मेरा युवा भारत पोर्टल के माध्‍यम से राष्ट्रीय क्विज का शुभारंभ किया है। यह प्रश्नोत्तरी जून 2026 में आयोजित होने वाले सीमावर्ती गांवों के लिए सहभागिता कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी के लिए चयन का पहला चरण है।

युवाओं के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय पहल विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 का उद्देश्य लेह-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सीमावर्ती गांवों के विकास के प्रति जागरुकता बढाना और जमीनी स्तर की भागीदारी, सामुदायिक जुड़ाव तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करना है।

10 से 20 मई 2026 तक आयोजित इस ऑनलाइन क्विज में देशभर के युवा भाग ले सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के दृष्टिकोण और उद्देश्यों के बारे में जागरुक करना है, साथ ही राष्ट्र निर्माण और सीमावर्ती समुदायों के विकास में युवाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

यह क्विज प्रतिभागियों के लिए सीमावर्ती गांवों के परिवर्तन, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण के प्रति जागरुकता, शासन संबंधी पहलों, सामुदायिक भागीदारी और सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों के बारे में जानने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगी।

क्विज़ में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों की पात्रता और फिटनेस का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 500 मेरा युवा भारत स्वयंसेवकों का चयन किया जाएगा, जो जून 2026 में आयोजित होने वाले साप्‍‍ताहिक विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में भाग लेंगे।

चयनित स्वयंसेवक सीमावर्ती गांवों में जमीनी स्तर के कार्यों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान, युवा संवाद कार्यक्रम, पर्यावरण संबंधी पहल, सांस्कृतिक आदान-प्रदान गतिविधियां, जागरुकता अभियान, करियर परामर्श सत्र और जमीनी स्तर के विकास और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित अनुभवात्मक शिक्षण के अवसर शामिल होंगे।

यह पहल युवाओं को विकसित भारत @2047 में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में सशक्त बनाने और जीवंत सीमावर्ती समुदायों के महत्व के बारे में जागरुकता बढाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इच्छुक युवा मेरा युवा भारत पोर्टल के माध्यम से इस क्विज में भाग ले सकते हैं।