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आरबीआई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: वित्तीय संस्थानों में 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के वित्तीय संस्थानों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़े 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट ने बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में बढ़ते साइबर जोखिम तथा वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आरबीआई के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ऋण लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई वित्तीय अनियमितताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से कई मामलों का संबंध पुराने ऋण खातों और पूर्व अवधि की अनियमितताओं से भी है, जिन्हें अब रिपोर्ट किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में तेजी आने से ग्राहकों को सुविधा तो मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी, फर्जीवाड़ा और डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में तकनीकी सुरक्षा और निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को जोखिम प्रबंधन प्रणाली मजबूत करने, साइबर सुरक्षा उपायों को उन्नत करने और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को भी सतर्क रहने और अनजान लिंक, कॉल या डिजिटल भुगतान अनुरोधों से बचने की सलाह दी है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़ी रकम से जुड़े धोखाधड़ी मामलों का असर केवल संबंधित संस्थानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे निवेशकों और आम ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय पर पहचान, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी के मामलों का जल्दी पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगी।

गुजरात: ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत साइबर ठगी पर बड़ी कार्रवाई, 631 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी में 13 गिरफ्तार

गुजरात / सत्ता संदेश


गुजरात पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत 631 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ऑनलाइन ठगी का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित रूप से देशभर में फैले बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा थे।

यह कार्रवाई Gujarat Police द्वारा राज्यभर में चलाए गए विशेष अभियान के तहत की गई, जिसका उद्देश्य बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी अकाउंट्स और डिजिटल पेमेंट धोखाधड़ी में शामिल नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ (Operation Mule Hunt) के तहत जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर “म्यूल अकाउंट्स” का इस्तेमाल कर अवैध लेन-देन को अंजाम देते थे। ये खाते आम नागरिकों के नाम पर खोले जाते थे और इनका उपयोग ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी की कई घटनाओं से जुड़ा हुआ पाया गया है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान तथा गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और आम लोगों को भी बैंकिंग जानकारी साझा करने में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

HDFC बैंक का बड़ा एक्शन: दुबई बॉन्ड स्कैम मामले में 3 टॉप अधिकारी बर्खास्त, ग्राहकों से धोखाधड़ी का आरोप

बिजनेस डेस्क: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, HDFC बैंक ने एक सख्त कदम उठाते हुए अपने तीन शीर्ष अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने दुबई में विदेशी ग्राहकों को धोखे में रखकर उनका पैसा गलत और जोखिम भरी स्कीमों में निवेश करवाया था। बैंक ने यह कार्रवाई एक विस्तृत आंतरिक जांच के बाद की है।

क्या है पूरा मामला? यह विवाद बैंक की दुबई स्थित DIFC (दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर) ब्रांच से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों ने स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए निवेशकों को सही जानकारी नहीं दी।

कई निवेशकों को प्रोत्साहित किया गया कि वे भारत में जमा अपने FCNR (विदेशी मुद्रा) डिपॉजिट्स को बहरीन ट्रांसफर करें और वहां से क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) से जुड़े जोखिम भरे AT1 बॉन्ड में निवेश करें। जब निवेशकों को इस ‘मिस-सेलिंग’ (गलत बिक्री) का अहसास हुआ, तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई।

इन 3 बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज: बैंक ने जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया है, उनमें शामिल हैं:

-संपत कुमार: ग्रुप हेड, ब्रांच बैंकिंग।

-हर्ष गुप्ता: एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (मध्य पूर्व और अफ्रीका)।

-पायल मंध्यान: एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (मध्य पूर्व और अफ्रीका)।

नियामकों की सख्ती और इस्तीफे: इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले साल दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने बैंक की दुबई ब्रांच पर नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगा दी थी।

इसके अलावा, हाल ही में बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने भी प्रबंधन के साथ “नैतिक” मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। बैंक ने स्पष्ट किया है कि वे नियमों के पालन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।