अफगानिस्तान में भुखमरी का हाहाकार: 47 लाख लोग दाने-दाने को मोहताज, पेट पालने के लिए अपनी ही औलादें बेचने को मजबूर हुए मां-बाप
इंटरनेशनल डेस्क : भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में गरीबी और भुखमरी का संकट अब एक भयानक मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 10 प्रतिशत आबादी, यानी 47 लाख लोग गंभीर भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। हालात इतने भयावह हैं कि मजबूर माता-पिता अपने बच्चों का पेट भरने और उनका इलाज कराने के लिए उन्हें बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
इलाज के लिए बेची 5 साल की बेटी : मजबूरी की ऐसी ही एक दास्तां सईद अहमद की है, जिन्होंने अपनी 5 साल की बीमार बेटी का इलाज कराने के लिए उसे 2 लाख अफगानी में एक रिश्तेदार को बेच दिया। फिलहाल उन्होंने इलाज के लिए कुछ पैसे लिए हैं और 5 साल बाद उन्हें अपनी बेटी को भेजना होगा। इसी तरह घोर प्रांत के अब्दुल राशिद अजीमी अपनी 7 साल की जुड़वां बेटियों को बेचने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके पास उन्हें खिलाने के लिए भोजन नहीं है।
संकट की मुख्य वजहें:
विदेशी मदद में कटौती: संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस साल विदेशी मदद में 2025 के मुकाबले 70% तक की भारी गिरावट आई है।
बेरोजगारी और सूखा: काम की तलाश में लोग घंटों सड़कों पर खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। भीषण सूखे और महंगाई ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।
बासी रोटी का सहारा: कई परिवार केवल बासी रोटी और गर्म पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। जब स्थानीय बेकरियों में बासी रोटी बांटी जाती है, तो उसे लेने के लिए सैकड़ों लोग टूट पड़ते हैं।
अस्पतालों में बढ़ती मौतें :कुपोषण के कारण अस्पतालों में नवजात बच्चों की स्थिति चिंताजनक है। दवाओं की कमी और इलाज का खर्च न उठा पाने के कारण कई बच्चे दम तोड़ रहे हैं और बेबस माता-पिता उन्हें अस्पताल से घर ले जाने को मजबूर हैं।

