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पंजाब कैबिनेट के बड़े फैसले: रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी बिल को मंजूरी, नर्सिंग और PICTS कर्मचारियों को भी राहत

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 6 अक्टूबर 2026:

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) बिल, 2026 को मंजूरी देने के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में नए पद सृजित करने, नर्सिंग सेवा नियमों में संशोधन और PICTS के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने को भी मंजूरी दी गई।

पंजाब सरकार के अनुसार, रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी बिल, 2026 का उद्देश्य रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बांध क्षेत्रों का योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है। इस बिल के माध्यम से रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी की स्थापना का रास्ता साफ होगा।

रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी को पर्यटन और सांस्कृतिक मामले विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा। अथॉरिटी को क्षेत्र के एकीकृत विकास, भूमि प्रबंधन, विभिन्न विकास परियोजनाओं को लागू करने और पर्यटन स्थलों के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय और नियामक शक्तियां प्रदान की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे इन क्षेत्रों में पर्यटन और विकास गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में नए पदों को मंजूरी

कैबिनेट ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब के कार्यालय में ड्राइवरों के नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी है। ये पद 19 स्थायी सेवादार पदों और एक स्थायी मुहर्रिर पद को सरेंडर करके बनाए जाएंगे।

सरकार के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब के कार्यालय के प्रशासनिक और दैनिक कामकाज को अधिक सुचारू एवं प्रभावी बनाना है।

नर्सिंग सेवा नियमों में संशोधन

मंत्रिमंडल ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन सरकारी नर्सिंग कॉलेज, पटियाला और अमृतसर में ट्यूटर के पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने के लिए पंजाब नर्सिंग एजुकेशन सर्विस रूल्स (ग्रुप बी), 2016 के परिशिष्ट-बी में संशोधन को भी मंजूरी दी है।

इन पदों पर निदेशक, अनुसंधान एवं चिकित्सा शिक्षा, पंजाब के नियंत्रण में नियमित आधार पर कार्यरत ऐसी स्टाफ नर्सों और नर्सिंग सिस्टर्स को पदोन्नति का अवसर मिलेगा, जिन्होंने संबंधित क्षेत्र में एम.एससी. नर्सिंग की योग्यता हासिल की हो। नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम एक वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

PICTS के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाएं होंगी नियमित

पंजाब कैबिनेट ने पंजाब इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एजुकेशन सोसाइटी (PICTS) के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के तहत पात्र कर्मचारियों को PICTS के अधीन निर्धारित वेतनमान में सेवाएं नियमित करने का लाभ मिलेगा। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट आधार पर सेवाएं दे रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट के इन फैसलों को पंजाब में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, पर्यटन क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास और सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।