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भारत-साइप्रस रिश्तों को मिली नई मजबूती, रणनीतिक साझेदारी के साथ कई अहम समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को Nikos Christodoulides के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत और Cyprus ने अपने संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें औपचारिक रूप से “रणनीतिक साझेदारी” में बदलने का ऐलान किया।

दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, नौवहन, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही साझा परियोजनाओं और निवेश को गति देने के उद्देश्य से एक संयुक्त कार्यबल गठित करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं तथा नई रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक सहयोग को और मजबूत करेगी।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत को वैश्विक स्तर पर उभरती महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भविष्य में व्यापारिक और समुद्री संपर्क को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक संयुक्त संपादकीय लेख लिखा

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बताया कि उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मिलकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें इस पक्ष का विस्तार से वर्णन किया गया है कि भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध एक निर्णायक चरण पर पहुंच गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच का संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह मजबूत संबंध नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

मैंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ मिलकर एक संपादकीय लेख लिखा है जिसमें जानकारी दी गई है कि भारत-इटली संबंध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हमारी साझेदारी नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है।

प्रधानमंत्री ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ (ईआरटी) को संबोधित किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 17 मई 2026 को गोथेनबर्ग में यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ (ईआरटी) को संबोधित किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टेर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय उद्योग जगत के वरिष्ठ नेता तथा प्रमुख यूरोपीय और भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस बातचीत में भाग लिया, जिसकी मेज़बानी वोल्वो ग्रुप द्वारा की गई थी।

अपने मुख्य भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्‍य को रेखांकित किया तथा एक अधिक जटिल और अनिश्चित वैश्विक परिवेश में विश्वसनीय साझेदारियों के महत्व पर बल दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में हो रही प्रगति का स्वागत किया, जिसमें ऐतिहासिक भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ताओं का सफल समापन भी शामिल है। उन्होंने इस समझौते को एक परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी बताया, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, सेवाओं तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं में नए अवसर सृजित करेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) जैसी संपर्क परियोजनाएँ भारत-यूरोप व्यापार साझेदारी में नया मूल्य जोड़ती हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि आज भारत निवेश, नवाचार और विनिर्माण के लिए विश्व के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक है। उन्होंने भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति, अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधारों, शासन में व्यापार सुगमता पर केंद्रित प्रयासों, विस्तृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं, जीवंत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तथा तीव्र गति से रूपांतरित हो रहे अवसंरचना क्षेत्र को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के “भारत के लिए डिज़ाइन करें, भारत में निर्माण करें और भारत से निर्यात करें” के दृष्टिकोण को दोहराया तथा यूरोपीय कंपनियों को भारत के साथ एक विश्वसनीय और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में अपने जुड़ाव को और गहरा करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत और यूरोप को मिलकर लचीली एवं विविधीकृत आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी अवसंरचना और ऊर्जा परिवर्तन को रेखांकित किया, जिसमें परिवहन, लॉजिस्टिक्स, अक्षय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन तथा परमाणु ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश शामिल है। उन्होंने यूरोपीय उद्योग जगत के नेताओं को दूरसंचार और डिजिटल अवसंरचना; कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप टेक विनिर्माण; ग्रीन ट्रांज़ीशन तथा स्वच्छ ऊर्जा; अवसंरचना, गतिशीलता और शहरी रूपांतरण; तथा स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच प्रतिभा गतिशीलता, शिक्षा तथा कौशल साझेदारियों के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने भारत के युवा और कुशल कार्यबल को भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए एक प्रमुख शक्ति बताया तथा जन-से-जन संबंधों और नवाचार साझेदारियों को और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोप सीईओ राउंड-टेबल को वार्षिक रूप से आयोजित करने तथा ईआरटी में एक ‘इंडिया डेस्क’ स्थापित करने का सुझाव दिया। इस बातचीत ने भारत-यूरोप आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया तथा सतत् विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग और लचीली वैश्विक साझेदारियों के प्रति भारत और यूरोप की साझा प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के गोथेनबर्ग में प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस महारानी विक्टोरिया ने भी इस बैठक में भाग लिया और महामहिम राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ और रानी सिल्विया की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महामहिम राजा के 80वें जन्मदिन पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, नवाचार, हरित परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और सुरक्षा, डिजिटलीकरण, एसएमई, अंतरिक्ष, अनुसंधान, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी मेलजोल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति को स्वीकार किया। उन्होंने इन संबंधों को मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं और नवाचार, स्थिरता तथा आर-एंड-डी संबंधों से प्रेरित हैं। उन्होंने इस बढ़ते सहयोग को दिशा देने के लिए नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनीतिक संपर्क और संस्थागत संवाद बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया।

भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर, दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की। यह रणनीतिक साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी: स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद; अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी; उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय संपर्क; और साथ मिलकर भविष्य का निर्माण– लोग, ग्रह, स्वास्थ्य और लचीलापन। इस रणनीतिक साझेदारी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए, दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य योजना 2026-2030 को अपनाया, जो राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा, जलवायु और लोगों के आपसी जुड़ाव के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है।

दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में संपन्न हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते ने आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू किया है, और वे व्यापार, निवेश तथा तकनीकी संपर्कों को और मजबूत बनाने के लिए इसके शीघ्र कार्यान्वयन हेतु प्रयास जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, सतत गतिशीलता और डिजिटल परिवर्तन सहित रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के साथ स्वीडन के निरंतर सहभागिता की सराहना की। प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन ने डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के क्षेत्र में भारत द्वारा की जा रही प्रगति की सराहना की। उन्होंने स्वीडन की अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारतीय समुदाय के सकारात्मक योगदान का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विकास गाथा में स्वीडन की और अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

दोनों नेताओं ने आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ(यूएनओ) और अन्य बहुपक्षीय संगठनों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में स्वीडन के मजबूत समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

कांग्रेस ने पूर्वोत्तर की उपेक्षा की और अपने शासनकाल में असम में उग्रवाद को बढ़ावा दिया : मोदी

गुवाहाटी, 14 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उस पर पूर्वोत्तर की उपेक्षा करने और अपने शासनकाल के दौरान असम में उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

मोदी ने यहां एक रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा देश की सुरक्षा को खतरे में डाला है और असम में उसके कार्यकाल के दौरान भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति में लिप्त होकर ऐसे निर्णय लिए, जिनसे इन चीजों को बढ़ावा मिला।’’

मोदी ने कहा, ‘‘देश का विभाजन मुस्लिम लीग के कारण हुआ था, लेकिन अब ‘एमएमसी’ – माओवादी, मुस्लिम, कांग्रेस – हैं और लोगों को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया, लेकिन भाजपा ‘‘अवैध अप्रवासन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसलिए अगले पांच साल राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं’’।

उन्होंने यह भी दावा किया कि असम में 10 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस ‘‘सत्ता में रहने के समय से भी अधिक खतरनाक हो गई है और यह बात उसके नेताओं द्वारा दिये गये जहरीले बयानों से स्पष्ट है।’’

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने सात दशकों में ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल तीन पुलों का निर्माण किया, लेकिन भाजपा सरकार ने 10 वर्षों में पांच पुलों का निर्माण किया।

मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार के प्रयासों से असम में चौतरफा विकास हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा असम की पहचान और उसकी परंपराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।’’

मोदी ने कहा कि भाजपा की सफलता का श्रेय केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को जाता है और पार्टी संगठनात्मक शक्ति में भरोसा रखती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भाजपा कार्यकर्ता होना मेरी सबसे बड़ी योग्यता और सम्मान है और यह मेरे लिए गर्व का स्रोत है।’’