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ईरान में युद्द के बीच भारतीय दूतावास ने जारी की नई एडवाइजरी, भारतीयों से देश छोड़ने की अपील की

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

ईरान और इस्राइल के बीच फिर तेज हुए सैन्य संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को तनाव के मुहाने पर ला खड़ा किया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भारत सरकार को भी अपने नागरिकों के लिए हाई अलर्ट जारी करना पड़ा। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि भारतीय नागरिक ईरान की यात्रा बिल्कुल न करें और जो लोग अभी वहां मौजूद हैं, वे उपलब्ध साधनों से तुरंत देश छोड़ दें। दूतावास की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में मिसाइल हमले, एयरस्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।

क्या पश्चिम एशिया फिर बड़े युद्ध की तरफ बढ़ रहा है?

इस्राइल और ईरान के बीच सोमवार को फिर भारी तनाव देखने को मिला। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए, जिससे युद्धविराम लगभग टूटता नजर आया। पिछले 24 घंटों में कई शहरों में हमले हुए। रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया और मिसाइलों की बौछार देखी गई। हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने नई एडवाइजरी जारी कर भारतीयों से सतर्क रहने को कहा। भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील और खतरनाक हो चुकी है। ऐसे में भारतीय नागरिक किसी भी हालत में ईरान की यात्रा न करें। वहीं जो लोग ईरान में मौजूद हैं, उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकलने की सलाह दी गई है।

आखिर अचानक हालात इतने खराब कैसे हुए?

  • तनाव तब और बढ़ गया जब इस्राइल ने रविवार को बेरूत के दक्षिणी इलाकों में एयरस्ट्राइक की।
  • इसके बाद ईरान ने जवाबी हमला करते हुए इस्राइल की तरफ मिसाइलें दागीं।
  • सोमवार को दोनों तरफ से फिर हमले और जवाबी कार्रवाई हुई।
  • ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इस्राइली जहाजों पर रोक लगाने का एलान किया।
  • लाल सागर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है।

क्या ट्रंप युद्ध रोकने की कोशिश कर रहे हैं?

मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार इस संघर्ष को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की और ईरान पर जवाबी हमले से बचने की सलाह दी। ट्रंप का मानना है कि अगर इस्राइल फिर हमला करता है तो पूरा क्षेत्र लंबे युद्ध में फंस सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते के बेहद करीब पहुंच चुका था, लेकिन अचानक हुए हमलों ने हालात बिगाड़ दिए। उन्होंने ईरान से भी बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की। ट्रंप ने कहा कि तुमने मिसाइलें दाग दीं, अब काफी है। वापस बातचीत करो और समझौता करो।

अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

PM मोदी की ‘सोना न खरीदने’ की अपील का बाज़ार पर बड़ा असर; सोने के भाव में गिरावट, जानें ताज़ा भाव

बिजनेस डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील का असर अब बाज़ार पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। सोमवार को बाज़ार खुलते ही सोने की वायदा कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जारी उतार-चढ़ाव को भी इस बदलाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

MCX पर सोने का ताज़ा: भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट गोल्ड का वायदा भाव आज 580 रुपये (0.38%) की गिरावट के साथ 1,51,944 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुँच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,52,530 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

सर्राफा बाज़ार की स्थिति : दिल्ली के स्थानीय सर्राफा बाज़ार में भी सोने के दामों में कमी देखी गई है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9% शुद्धता वाले सोने का भाव 100 रुपये टूटकर 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इसी प्रकार, 99.5% शुद्धता वाला सोना भी 100 रुपये सस्ता होकर 1,55,100 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है।

चांदी की कीमतों में उछाल: जहाँ सोने के भाव गिरे हैं, वहीं चांदी के दाम में हल्की तेज़ी देखी गई है। जुलाई 2026 की एक्सपायरी वाली चांदी के दाम 400 रुपये से अधिक बढ़कर 2,62,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे।

वैश्विक बाज़ार का रुख: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.7% की बढ़त दर्ज की गई और यह 4,721 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और निवेशकों द्वारा की जा रही प्रॉफिट बुकिंग का असर बाज़ार पर निरंतर बना हुआ है।

24 घंटे के भीतर पलटा फैसला: ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में गनबोट्स ने की जहाजों पर फायरिंग

इंटरनेशनल डेस्क : खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। शुक्रवार को ईरान ने जिस होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का ऐलान किया था, उसे 24 घंटे के भीतर ही दोबारा बंद कर दिया गया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने के जवाब में की गई है।

बाजार में उथल-पुथल और अमेरिकी रुख : शुक्रवार को जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर रास्ता खोलने की पुष्टि की थी, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% की गिरावट दर्ज की गई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कदम का स्वागत किया था। लेकिन, जब ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौते तक अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी, तो ईरान ने अपना फैसला बदल दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया गया है।

युद्ध जैसी स्थिति: गनबोट्स से हमला हालात तब और बिगड़ गए जब शनिवार को ओमान के तट से 20 मील दूर दो व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की गई। जहाज के कप्तानों के अनुसार, यह हमला ईरानी गनबोट्स द्वारा किया गया था। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सख्त लहजे में कहा है कि उनकी नेवी दुश्मनों को करारी हार देने के लिए तैयार है।

22 अप्रैल की समयसीमा और संभावित खतरा: क्षेत्र में लागू युद्धविराम अब केवल तीन दिन में, यानी 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि इस तारीख तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने भी मई 2026 में विकसित अपनी नई मिसाइलों के इस्तेमाल की धमकी दी है।

इस्लामाबाद में होगी अमेरिका-ईरान की नई परमाणु वार्ता: शांति की उम्मीद या फिर बढ़ेगा तनाव?

इंटरनेशनल डेस्क : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे (Nuclear Issue) पर बातचीत का अगला दौर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि रविवार तक पाकिस्तान पहुँच सकते हैं और सोमवार (20 अप्रैल, 2026) से औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है।

सीजफायर खत्म होने से पहले समझौते की कोशिश: यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ दो हफ्तों का सीजफायर अब समाप्त होने के करीब है। इससे पहले पिछले वीकेंड हुई कई घंटों की बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार भी बातचीत विफल रहती है, तो क्षेत्र में तनाव फिर से भड़क सकता है।

ट्रंप का भरोसा और ईरान का संदेह :अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और ईरान कुछ अहम मुद्दों पर झुकने को तैयार है। हालांकि, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप के इन दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।

होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय संकट: इस वार्ता का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) बना हुआ है, जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपना नौसैनिक घेराव (Blockade) नहीं हटाया, तो वह इस रास्ते को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

इसके अलावा, लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी 10 दिन का सीजफायर भी इस बातचीत में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

तेलंगाना विधानसभा ने केंद्र से पश्चिम एशिया युद्ध रोकने की पहल का आग्रह किया, प्रस्ताव पारित

हैदराबाद, 30 मार्च (भाषा) तेलंगाना विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए पहल करने का आग्रह किया।

उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जारी युद्ध का प्रतिकूल प्रभाव न केवल पश्चिम एशिया पर बल्कि पूरे विश्व पर पड़ रहा है, जिससे हजारों लोगों की मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना और अन्य राज्यों के लगभग 90 लाख भारतीय इस क्षेत्र में रहते हैं और युद्ध के प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि ईंधन आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव के कारण महंगाई बढ़ रही है और लोगों की आजीविका छिन रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि युद्ध अनियंत्रित रूप से जारी रहा, तो यह तीसरे विश्वयुद्ध का रूप ले सकता है, जिससे मानवता के अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इन अत्यंत खतरनाक परिणामों को देखते हुए, यह सदन भारत सरकार से युद्ध को रोकने और वैश्विक शांति स्थापित करने की दिशा में काम करने के लिए पहल करने का आग्रह करता है।’’

ईरान के परमाणु हथियार पर ट्रंप की बड़ी चेतावनी: ‘एक घंटे में कर देगा इस्तेमाल, पूरा मध्य-पूर्व हो जाएगा तबाह’

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान के हाथ परमाणु हथियार लग गए, तो वह उनका इस्तेमाल करने में एक घंटा या एक दिन भी नहीं लगाएगा और तुरंत हमला कर देगा। उन्होंने आगाह किया कि इससे न केवल इज़राइल, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व (Middle East) तबाह हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को ‘हिंसक और क्रूर’ बताते हुए दावा किया कि ईरानी प्रशासन ने पिछले तीन हफ्तों में अपने ही 32,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। उन्होंने ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि केवल दो हफ्तों के हमलों में ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। ट्रंप के दावों के अनुसार, अब ईरान के पास न तो वायुसेना बची है, न ही नौसेना और उनके एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी नष्ट हो चुके हैं।इसके अलावा, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि यह दुनिया के लिए एक बड़ा ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से कई देश अपनी ऊर्जा का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन और जापान जैसे देशों को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वहाँ अपने युद्धपोत (Warships) तैनात करने चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी थी।

ईरान में मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर, तेहरान ने इजरायल पर दागीं मिसाइलें

इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान से बड़ी खबर आ रही है। मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया (तीसरा) सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है।

तेहरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं, जिसके जवाब में अमेरिका और इजरायल की ओर से भी ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मोजतबा खामेनेई के चयन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वे ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। इस बीच, लेबनान सीमा पर भी संघर्ष तेज है; हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों पर आर्टिलरी और मशीनगन से हमले करने का दावा किया है, जिससे सैनिकों को पीछे हटना पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर ‘फ्रीडम शील्ड’ नामक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है, जिसमें करीब 18,000 सैनिक शामिल हो रहे हैं। युद्ध के इन हालातों का असर आर्थिक मोर्चे पर भी दिखा है, जहाँ भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स) ओपनिंग के साथ ही 2000 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया और कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं।

*मध्य पूर्व में बदलती स्थिति के बीच भारत पूरी तरह तैयार – ऊर्जा आपूर्ति मजबूत*

*कच्चे तेल और पेट्रोलियम की विविधीकृत खरीद; 24×7 नियंत्रण कक्ष द्वारा आपूर्ति स्थिति की निगरानी*

नई दिल्ली, 3 मार्च 2026: मध्य पूर्व में उथल-पुथल की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा स्थिति में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने मौजूदा परिस्थितियों में देश की तैयारियों के बारे में मीडिया को अवगत कराया।

जानकारी के अनुसार-भारत वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। देश में कच्चे तेल और पेट्रोल, डीजल और एटीएफ सहित प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार है, जिससे मध्य पूर्व से उत्पन्न होने वाली अल्पकालिक समस्याओं का निदान किया जा सके।

यह भी बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर अपनी आबादी के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित की है। भारतीय ऊर्जा कंपनियों के पास अब ऐसे ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच है जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुजरते। ऐसे कार्गो उपलब्ध रहेंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के दौरान आपूर्ति में अस्थायी रूप से होने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद करेंगे।

देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और स्टॉक की स्थिति पर लगातार नज़र रखने के लिए मंत्रालय ने 24×7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। वर्तमान में, सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है। भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार निगरानी के आधार पर, सरकार को उम्मीद है कि यदि आवश्यक हुआ तो स्थिति को और सुधारने के लिए चरणबद्ध तरीके अपनाए जा सकते हैं।

ईरान की इजरायल को परमाणु हमले की धमकी: ‘सत्ता बदली तो डिमोना न्यूक्लियर प्लांट को बना देंगे निशाना’

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इजरायल के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके देश में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) की कोई भी कोशिश की गई, तो वह इजरायल के सबसे गुप्त और महत्वपूर्ण डिमोना परमाणु संयंत्र (Dimona Nuclear Site) को अपना निशाना बनाएगा। यह चेतावनी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ISNA ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से जारी की है।यह गंभीर धमकी उस समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार ईरान में शासन बदलने के संकेत दे रहे हैं।

इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप इस लक्ष्य को लेकर पूरी तरह अडिग हैं और उन्होंने पहले ही जरूरी टारगेट मार्क कर लिए हैं।

क्या है डिमोना न्यूक्लियर साइट और क्यों है यह खास?

गुप्त इतिहास: आधिकारिक तौर पर इसे ‘शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर’ कहा जाता है, जो नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। इसका निर्माण 1950 के दशक में फ्रांस की गुप्त तकनीक से शुरू हुआ था।

झूठ की दीवार: शुरुआत में इजरायल ने दुनिया को यह बताया था कि यह केवल एक ‘कपड़ा फैक्ट्री’ है।

परमाणु हथियारों का केंद्र: हालांकि इजरायल इसे एक रिसर्च सेंटर बताता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है, जहाँ परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम तैयार किया जाता है।

अभेद्य सुरक्षा: इस क्षेत्र की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इसके ऊपर से विमान उड़ाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है।अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का मानना है कि लगातार हमलों और वरिष्ठ नेतृत्व को हुए नुकसान के कारण वर्तमान ईरानी सरकार भारी दबाव में है।