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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…27-05-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ में आज का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। जहाँ एक ओर केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू और पुलिस के बीच तीखी बहस ने राजनीतिक पारा बढ़ा दिया, वहीं कनाडा में खालिस्तान समर्थकों द्वारा तिरंगे के अपमान की घटना ने आक्रोश पैदा किया। राज्य में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताई है, जबकि पटियाला और लुधियाना से दिल दहला देने वाली हत्या की खबरें सामने आई हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं आज की 10 प्रमुख खबरें।

1. केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और पुलिस के बीच विवाद : केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू संगरूर के धुरी में बीजेपी नेता ओंकार सिंह को छुड़ाने पहुंचे थे, जहाँ उनकी पुलिस के साथ तीखी बहस हुई। AAP ने आरोप लगाया कि बिट्टू ने महिला SSP रवजोत कौर ग्रेवाल से बदतमीजी की और अधिकारियों को “दलाल” कहा। कांग्रेस ने भी बिट्टू पर एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ने और कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

2. कनाडा में तिरंगे का अपमान: कनाडा के वैंकूवर में प्रतिबंधित संगठन SFJ से जुड़े खालिस्तानी समर्थक इंदरजीत सिंह गोसल ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक का काफिला रोका। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस घेरा तोड़कर भारतीय तिरंगे को फाड़ दिया और उसे पैरों तले रौंदा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

3. भीषण गर्मी के बीच प्री-मानसून का अलर्ट: पंजाब और चंडीगढ़ में ‘सीवियर हीटवेव’ का दौर जारी है, जहाँ बठिंडा में तापमान 45.8 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार 28 मई से एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे तेज हवाओं और ओलावृष्टि के साथ प्री-मानसून की बारिश होने की संभावना है।

4. पटियाला: ड्रम में मिली युवती की लाश: पटियाला की रेलवे कॉलोनी में एक नीले रंग के ड्रम में युवती का शव मिला है। मृतका के हाथ पर ‘नेहा’ नाम और दिल का टैटू बना हुआ है। पुलिस को संदेह है कि प्रेम संबंधों के चलते हत्या कर शव को यहाँ फेंका गया है। युवती का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।

5. लुधियाना: पत्थर से कुचलकर युवक की हत्या : लुधियाना के शेरपुर चौक के पास शराब के लिए पैसे छीनने के विवाद में बृजलाल नामक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोपियों ने पत्थर से उसका सिर और चेहरा कुचल दिया। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

6. अमृतसर: गुरुद्वारे में शॉर्ट सर्किट से आग : अमृतसर के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह जी शहीद गंज साहिब में शॉर्ट सर्किट के कारण टेंट में आग लग गई。 आग के कारण श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई, हालांकि सेवादारों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। गौरतलब है कि 4 दिन पहले भी यहाँ एक हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई थी।

7. निकाय चुनाव: कम वोटिंग से नेताओं में हलचल : पंजाब के निकाय चुनाव में इस बार पिछले चुनावों के मुकाबले 9.59% कम मतदान हुआ है। शहरी क्षेत्रों में मतदान का ग्राफ गिरने से राजनीतिक दल चिंता में हैं। जानकारों का मानना है कि दलबदल और अन्य राजनीतिक समीकरणों के कारण मतदाताओं में उत्साह कम रहा।

8. मुंबई एयरपोर्ट से दो कुख्यात गैंगस्टर गिरफ्तार: सुरक्षा एजेंसियों ने मुंबई एयरपोर्ट से जसवंत सिंह उर्फ जस्सा और करन कीड़ा को गिरफ्तार किया है। जस्सा बंबीहा गैंग से जुड़ा है, जबकि करन कीड़ा अकाली पार्षद की हत्या में वांटेड है। दोनों फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश भागने की फिराक में थे।

9. जालंधर: ऑनलाइन हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग: जालंधर में एक युवक को ऑनलाइन लड़की बुलाना भारी पड़ गया। युवक का आरोप है कि लड़की ने उसे पुलिस का डर दिखाकर 15 हजार रुपये ऐंठ लिए और तीसरी बार पैसे मांगने घर पहुँच गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी है।

10. लुधियाना: ईद पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम कल : ईद के मौके पर लुधियाना की मस्जिदों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी की अगुआई में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त पूनम सिंह ने लुधियाना में जनगणना 2027 के कार्यों की समीक्षा की, दिए दिशा-निर्देश

नीति निर्माण और विकास के लिए सही जनगणना डेटा आवश्यक: अतिरिक्त उपायुक्त

जनगणना के दौरान कोई भी घर अनदेखा न रहे: पूनम सिंह

लुधियाना / सत्ता संदेश

अतिरिक्त उपायुक्त-कम-जिला जनगणना अधिकारी पूनम सिंह ने बुधवार को जनगणना 2027 के चरण-1 के तहत लुधियाना पश्चिम तहसील में तैनात गणनाकारों और सुपरवाइजरों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें घरों की सूचीकरण प्रक्रिया और आवासीय जनगणना शामिल थी।

बैठक में जिला जनगणना कोऑर्डिनेटर अलोक कुमार, मास्टर ट्रेनर उपमा कौल, जनगणना स्टाफ, लुधियाना पश्चिम के तहसीलदार और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त ने चल रही फील्ड गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की और जनगणना अभ्यास के दौरान गणनाकारों और सुपरवाइजरों को आने वाली विभिन्न तकनीकी, प्रशासनिक और संचालन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने जनगणना कार्यों के सुचारू, पारदर्शी और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और निर्देश दिए।

निर्धारित कार्यों की शुद्धता और समय पर पूर्णता पर जोर देते हुए पूनम सिंह ने फील्ड स्टाफ को घर सूचीकरण कार्यों को पूरा करते समय जनगणना दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण डेटा संग्रह सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर समन्वय बनाए रखने की भी अपील की। उन्होंने सुपरवाइजरों को गणनाकारों के कार्य की नियमित रूप से निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि सर्वेक्षण प्रक्रिया के दौरान कोई भी घर अनदेखा न रहे।

जनसहयोग के महत्व पर जोर देते हुए अतिरिक्त उपायुक्त ने फील्ड स्टाफ को निवासियों के साथ बातचीत करते समय विनम्र व्यवहार बनाए रखने और जनगणना गतिविधियों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी कहा।

अतिरिक्त उपायुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डेटा नीति निर्माण, कल्याण योजनाओं की योजना, बुनियादी ढांचे के विकास और सरकारी संसाधनों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सही जनगणना डेटा आवश्यक है।

अधिकारियों ने बैठक के दौरान बताया कि जनगणना 2027 के फील्ड कार्यों के लिए जिला लुधियाना में लगभग 10,000 गणनाकार और लगभग 1,600 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त पूनम सिंह ने जिले भर में विश्वसनीय और व्यापक डेटा संग्रह सुनिश्चित करने के लिए जनगणना अभ्यास को कुशलता और योजनाबद्ध तरीके से संचालित करने के प्रशासन के संकल्प को दोहराया।

नहरी पानी का उपयोग 78 प्रतिशत से अधिक होना पंजाब की कृषि के लिए एक अच्छा प्रयास है : परमवीर सिंह एडवोकेट

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के सक्षम नेतृत्व में राज्य में कृषि को फिर से लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के वाइस चेयरमैन परमवीर सिंह एडवोकेट ने विचार साझा करते हुए बताया कि पंजाब में सिंचाई के लिए नहरी पानी से जुड़े जो कार्य चल रहे हैं, उनकी देखरेख मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।

2022 में जब मान सरकार ने कार्यभार संभाला था, उस समय पिछली सरकारों के कार्यकाल में केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का ही उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। मान सरकार पिछले चार वर्षों से खेतों की सिंचाई सीधे नहरी पानी से सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसके तहत टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों और कच्ची नालियों (कस्सियों) की मरम्मत की गई है। सैकड़ों किलोमीटर नई कच्ची नालियां और पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब अब 78 प्रतिशत से अधिक नहरी पानी का उपयोग कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ महीनों में इस आंकड़े को 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाना है।

इस पहल से पंजाब की भूमि को कई लाभ हुए हैं। राज्य के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पंजाब का भूजल स्तर लगभग 2 मीटर ऊपर आया है। पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार दर्ज किया गया सुधार है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर मोटरें कम चलने के कारण बिजली की भारी बचत हुई है, जिसे अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नहरी पानी के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रयासों के कारण पंजाब तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। नहरी पानी की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाया है।

खेल जगत में शोक की लहर: दिग्गज ओलंपियन और खेल प्रशासक राजा रणधीर सिंह का निधन, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जताया दुख

पंजाब डेस्क : भारतीय खेलों के स्वर्णिम इतिहास के साक्षी रहे दिग्गज निशानेबाज और कुशल प्रशासक राजा रणधीर सिंह का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के चचेरे भाई रणधीर सिंह पिछले कुछ समय से बीमार थे और उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज : राजा रणधीर सिंह का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाले खिलाड़ी थे। उन्होंने 1968 से 1984 तक लगातार 5 ओलंपिक खेलों में भारत का गौरवशाली प्रतिनिधित्व किया।

मैदान के बाहर भी रहा बड़ा कद : एक खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद, उन्होंने खेल प्रशासन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। वे लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के महासचिव रहे। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष जैसे गरिमामय पदों की जिम्मेदारी संभाली। खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कैप्टन अमरिंदर सिंह का भावुक संदेश : कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोशल मीडिया पर इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए लिखा कि उनके भाई का जाना एक व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति है। उनके निधन पर राजनीतिक और खेल जगत की तमाम हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है और इसे भारतीय खेलों के एक युग का अंत बताया है।

आषाढ़ी वारी और मानसून का हवाला देते हुए कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया एक महीने टालने की मांग की

मुंबई / / सत्ता संदेश

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है। पार्टी ने इसके पीछे आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा और मानसून के दौरान भारी बारिश की संभावना का हवाला दिया है।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को पत्र लिखकर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है और इससे कई पात्र मतदाता सूची से वंचित रह सकते हैं।

पत्र में कहा गया है कि आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर की वार्षिक वारी यात्रा में पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के 20 से अधिक जिलों से लाखों ‘वारकरी’ श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से दूर रहते हैं, जिससे बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा चलाए जा रहे घर-घर सर्वेक्षण में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मतदाता सूची पुनरीक्षण जारी रहा, तो तीर्थयात्रा पर गए श्रद्धालुओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे योग्य मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्वाचन आयोग ने 14 मई को एसआईआर कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत लगभग 72 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। प्रक्रिया का पहला चरण 19 जून तक जारी है, जबकि दूसरा चरण 30 जून से 29 जुलाई तक प्रस्तावित है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी अवधि में महाराष्ट्र में मानसून अपने चरम पर होता है, खासकर मुंबई महानगर क्षेत्र, कोंकण, पुणे और सतारा जैसे इलाकों में भारी वर्षा की संभावना रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि खराब मौसम के कारण न केवल लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आ सकती है।

सपकाल ने कहा कि चुनावी सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को ऐसी परिस्थितियों में लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए एसआईआर कार्यक्रम को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में बड़े धार्मिक आयोजन और मौसमी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं।

जंग के बीच बड़ी राहत: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता! ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खुलने का रास्ता हुआ साफ

इंटरनेशनल डेस्क : अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के सरकारी टीवी के दावों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) होने जा रहा है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जगी है।

क्या है समझौते की शर्तें? ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने दावा किया है कि उन्हें अमेरिका के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए एक शुरुआती और अनौपचारिक मसौदा (Draft MoU) प्राप्त हुआ है। इस समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

नाकेबंदी का अंत: अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य टुकड़ियों को हटा लेगा और उसकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को समाप्त कर देगा।

होर्मुज स्ट्रेट का खुलना: इसके बदले में ईरान एक महीने के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध के पहले वाले स्तर पर बहाल कर देगा।

ईंधन आपूर्ति: गौरतलब है कि दुनिया की कुल ईंधन सप्लाई का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

सत्यापन के बिना कदम नहीं उठाएगा ईरान: भले ही यह समझौता बड़ी राहत दे सकता है, लेकिन इसमें कुछ पेंच भी फंसे हैं। मसौदे के अनुसार, ईरान का कहना है कि वह बिना ठोस सत्यापन (Verification) के कोई कदम नहीं उठाएगा। इसके अलावा, ओमान के साथ मिलकर जहाजों की आवाजाही के मैनेजमेंट के मुद्दे पर अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है। साथ ही, इस मसौदे में युद्धपोतों की तैनाती में बदलाव का कोई जिक्र नहीं है।

मशहूर बंगाली डायरेक्टर अनीक दत्ता का दुखद निधन: कोलकाता में छत से गिरने से गई जान, मौके से मिला सुसाइड नोट

मनोरंजन डेस्क : बंगाली सिनेमा के दिग्गज और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अनीक दत्ता का बुधवार, 27 मई को निधन हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, वह कोलकाता स्थित अपने आवास की छत से गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें ढाकुरिया के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सुसाइड नोट ने बढ़ाई गुत्थी: पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसके बाद विभाग इस मामले की जांच में जुट गया है कि यह एक हादसा था या आत्महत्या,। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में दो नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले दत्ता पिछले कुछ समय से सांस संबंधी बीमारियों से भी जूझ रहे थे।

भूतेर भबिश्यत’ से मिली थी पहचान : अनीक दत्ता को उनकी 2012 में आई फिल्म ‘भूतेर भबिश्यत’ (Bhooter Bhabishyat) के लिए जाना जाता है, जिसे बंगाली सिनेमा में ‘कल्ट’ का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने महान निर्देशक सत्यजीत रे को श्रद्धांजलि देते हुए फिल्म ‘अपराजितो’ भी बनाई थी, जिसे देश-विदेश में काफी सराहना मिली। फिल्मों में आने से पहले वह विज्ञापन जगत का एक बड़ा नाम थे और प्रसिद्ध नरेंद्र चंद्र दत्ता (यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के संस्थापक) के पोते थे।

सिनेमा जगत में शोक : अनीक दत्ता के आकस्मिक निधन से पूरे मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। उनके सहयोगियों और प्रशंसकों ने उन्हें समकालीन बंगाली सिनेमा की सबसे मुखर और अनूठी आवाजों में से एक बताया है।

भारत ने अंतरिक्ष तकनीक में बढ़ाया कदम, रेड बैलून एयरोस्पेस ने लॉन्च किया पहला स्वदेशी ‘सुपर-प्रेशर बैलून’

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत ने उच्च वायुमंडलीय और अंतरिक्ष अनुसंधान तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए बुधवार को अपना पहला स्वदेशी ‘सुपर-प्रेशर बैलून’ (एसपीबी) सफलतापूर्वक लॉन्च किया। निजी क्षेत्र की कंपनी ‘रेड बैलून एयरोस्पेस’ द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक बैलून में भारत और विदेशों के सात साझेदारों के वाणिज्यिक उपकरण लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत के उभरते अंतरिक्ष और उच्च-ऊंचाई अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सुपर-प्रेशर बैलून को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह बाहरी वायुमंडलीय दबाव से अधिक आंतरिक दबाव बनाए रख सके। इसी विशेष तकनीक के कारण यह बैलून अत्यधिक ऊंचाई पर लंबे समय तक स्थिर रहकर भारी उपकरणों को लेकर उड़ान भर सकता है।

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि इस स्वदेशी एसपीबी का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन, मौसम अध्ययन, संचार तकनीक परीक्षण और रक्षा संबंधी प्रयोगों सहित कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसमें लगाए गए उपकरण उच्च वायुमंडल में डेटा संग्रह, पर्यावरणीय अध्ययन और तकनीकी परीक्षणों के लिए उपयोगी होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुपर-प्रेशर बैलून पारंपरिक मौसम गुब्बारों की तुलना में अधिक समय तक उड़ान भर सकते हैं और उपग्रह मिशनों की तुलना में कम लागत पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई देश इन्हें अंतरिक्ष अनुसंधान और उच्च-ऊंचाई निगरानी के लिए उपयोग कर रहे हैं।

‘रेड बैलून एयरोस्पेस’ का यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के बढ़ते विस्तार को भी दर्शाता है। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिए जाने के बाद कई भारतीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां नई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं।

कंपनी ने बताया कि इस मिशन में देश-विदेश के सात साझेदारों के वाणिज्यिक उपकरण शामिल किए गए हैं, जिससे यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उदाहरण बन गई है। इन उपकरणों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के तकनीकी और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तरह की तकनीकों का सफल विकास जारी रहता है, तो भारत उच्च-ऊंचाई अनुसंधान और कम लागत वाले वैज्ञानिक मिशनों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। इससे संचार, रक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

यह लॉन्च भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो आने वाले समय में देश के अंतरिक्ष एवं वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रमों को नई गति दे सकता है।

TDB-DST ने स्वदेशी AIoT समाधान के व्यावसायीकरण हेतु IDT Innovation Technologies को समर्थन दिया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के उद्योग 4.0 इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने और स्वदेशी औद्योगिक डिजिटल परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने “उद्योग 4.0: औद्योगिक एआईओटी उपकरणों का विकास और व्यावसायीकरण” नामक परियोजना के लिए नागपुर स्थित आईडीटी इनोवेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में संसाधन दक्षता, ऊर्जा अनुकूलन, पूर्वानुमानित रखरखाव और परिचालन उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित औद्योगिक समाधानों का व्यावसायीकरण करना है। यह पहल स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से बुद्धिमान विनिर्माण, डिजिटल औद्योगिक अवसंरचना और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के भारत सरकार के विजन के अनुरूप है।

कंपनी ने एक एकीकृत औद्योगिक एआईओटी इकोसिस्टम विकसित किया है जिसमें प्रोप्राइट्री हार्डवेयर डिवाइसेज और एक सुरक्षित एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह इकोसिस्टम वास्तविक समय में औद्योगिक निगरानी और डेटा-आधारित परिचालन प्रबंधन के लिए बनाया गया है। हार्डवेयर में एक्चुएटर मॉनिटर, ऊर्जा मीटर, मशीन कंडीशन सेंसर, तापमान और विद्युत स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली और एज-आधारित डेटा अधिग्रहण इकाइयां शामिल हैं। ये प्रौद्योगिकियां केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम करती हैं, जिससे औद्योगिक कार्यों में सुरक्षित डेटा एकत्रीकरण, विज़ुअलाइज़ेशन, एनालिटिक्स और पूर्वानुमानित प्रदर्शन निगरानी संभव हो पाती है।

प्रस्तावित स्वदेशी समाधान को विद्यमान औद्योगिक मशीनों और विद्युत अवसंरचना के साथ सहजता से एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और बड़े विनिर्माण इकाइयों द्वारा बिना किसी बड़े परिचालन व्यवधान के इसे आसानी से अपनाया जा सकता है। मॉड्यूलर और स्केलेबल आर्किटेक्चर परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर चरणबद्ध तैनाती और भविष्य में विस्तार में भी सक्षम बनाता है।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “इंडस्ट्री 4.0 प्रौद्योगिकियां विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए केंद्रीय महत्व रखती हैं। स्वदेशी औद्योगिक एआईओटी समाधानों के लिए टीडीबी की सहायता, अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्र के लिए भारतीय नवाचार के नेतृत्व में स्मार्ट विनिर्माण, ऊर्जा-कुशल औद्योगिक प्रणालियों और डिजिटल परिवर्तन को सक्षम बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

आईडीटी इनोवेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने टीडीबी की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता कंपनी के सेंसलाइव™ प्लेटफॉर्म को अपनाने में तेजी लाएगी, जो वास्तविक समय में औद्योगिक निगरानी और विश्लेषण के लिए है। साथ ही, यह उद्योगों को ऊर्जा प्रबंधन, परिचालन दक्षता और विनिर्माण उत्पादकता में निरंतर सुधार के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी।

बेमौसम बारिश के बावजूद बढ़ेगा गेहूं उत्पादन, 2025-26 में 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद गेहूं उत्पादन में वृद्धि का अनुमान जताया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फसल सत्र 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन 2.29 प्रतिशत बढ़कर 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.79 करोड़ टन दर्ज किया गया था, जबकि चालू फसल सत्र के लिए प्रारंभिक अनुमान 12.02 करोड़ टन का लगाया गया था। अब जारी नवीनतम अनुमान इस प्रारंभिक आकलन के लगभग अनुरूप है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के कारण गेहूं उत्पादन में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। हालांकि कई राज्यों में फसल कटाई के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की खबरें सामने आई थीं, फिर भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट नहीं आई।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अच्छी पैदावार दर्ज की गई है। खासकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उत्पादन वृद्धि ने कुल राष्ट्रीय आंकड़ों को मजबूत आधार दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने के लिए गेहूं उत्पादन का स्थिर और बढ़ता स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है और घरेलू खपत के साथ-साथ सरकारी भंडारण व्यवस्था के लिए भी पर्याप्त उत्पादन आवश्यक माना जाता है।

सरकार का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए गेहूं की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। इसके अलावा उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम की घटनाएं भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम अनुकूल खेती, फसल बीमा, जल प्रबंधन और तकनीकी सहायता को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी यह अनुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आगामी महीनों में भंडारण और खरीद प्रक्रिया सुचारू रहती है, तो इससे देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।