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पंजाब भाजपा में बड़ा बदलाव: 2027 चुनाव के लिए ‘सिख’ चेहरे पर दांव

पंजाब डेस्क: केवल सिंह ढिल्लों बने पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। ढिल्लों, जो पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं, 4 साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। नियुक्ति के बाद ढिल्लों ने विश्वास जताया कि “पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब में कमल खिलेगा” और 2027 में भाजपा की सरकार बनेगी।

नियुक्ति के पीछे के रणनीतिक कारण:

सिख वोट बैंक: भाजपा ने पंजाब में सिख भावनाओं को देखते हुए जट्ट-सिख चेहरे को आगे बढ़ाया है ताकि राज्य के बड़े वोट बैंक को आकर्षित किया जा सके।

मालवा क्षेत्र पर पकड़: पंजाब की 117 में से 69 सीटें मालवा क्षेत्र में आती हैं, जहाँ जट्ट-सिख समुदाय का दबदबा है। ढिल्लों खुद इसी क्षेत्र के बरनाला जिले से आते हैं।

हिंदू पार्टी’ की छवि बदलना: अब तक पार्टी की कमान सुनील जाखड़ (अध्यक्ष) और अश्वनी शर्मा (वर्किंग अध्यक्ष) जैसे हिंदू चेहरों के पास थी। भाजपा इस छवि को बदलकर सिखों में पैठ बनाना चाहती है।कैप्टन अमरिंदर सिंह की भूमिका: इस नियुक्ति को कैप्टन अमरिंदर सिंह को संतुष्ट करने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि ढिल्लों उनके पसंदीदा नेता हैं।

विपक्ष का हमला और जाखड़ की विदाई: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ढिल्लों को बधाई देते हुए तंज कसा और सुनील जाखड़ के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। वहीं, AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस नियुक्ति के साथ ही भाजपा ने पंजाब चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान ली है। पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने ढिल्लों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक मजबूत होगा।

अन्य राज्यों में भी नियुक्तियां: भाजपा ने पंजाब के अलावा हरियाणा में डॉ. अर्चना गुप्ता को अध्यक्ष बनाया है, जो 43 साल बाद राज्य की पहली महिला भाजपा अध्यक्ष बनी हैं। इसके अलावा दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा और त्रिपुरा में अभिषेक देबराय को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…28-05-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। जहाँ एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए अपना नया प्रदेश अध्यक्ष चुना है, वहीं अमृतसर और मोगा जैसी जगहों से हिंसक झड़प और अपराध की दुखद खबरें सामने आईं। इसके अलावा चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में बड़े बदलाव और कल आने वाले निकाय चुनाव के नतीजों को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

1. पंजाब भाजपा को मिला नया सिख चेहरा: भारतीय जनता पार्टी ने सुनील जाखड़ का इस्तीफा स्वीकार करते हुए केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब BJP का नया प्रधान नियुक्त किया है। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने एक सिख चेहरे पर दांव खेला है। ढिल्लों, जो पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं, ने कहा कि अब पंजाब में ‘कमल’ खिलेगा।

2. अमृतसर में पार्किंग को लेकर खूनी संघर्ष: अमृतसर में गाड़ी खड़ी करने के मामूली विवाद में एक रिटायर्ड पुलिस अफसर और AAP नेता जयपाल सिंह बाऊ के परिवार के बीच फायरिंग हो गई। इस झड़प में आप नेता के पैर में गोली लगी है। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें तलवारें लहराते और पगड़ी उतरते देखा जा सकता है।

3. निकाय चुनाव के नतीजे अब घर बैठे: पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे कल (29 मई) घोषित होंगे। राज्य चुनाव आयोग ने पहली बार व्यवस्था की है कि लोग वेबसाइट (sec.punjab.gov.in) पर लाइव परिणाम देख सकेंगे। कुल 104 निकायों के लिए 115 केंद्रों पर मतगणना होगी।

4. रिश्वत लेते ASI का वीडियो वायरल, कार्रवाई शुरू: मोहाली में ट्रैफिक पुलिस के एक ASI को रिश्वत लेते हुए दो युवकों ने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आरोपी ASI को तुरंत लाइन हाजिर कर दिया गया और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

5. चंडीगढ़ में कोठियों के प्लॉट पर रोक: चंडीगढ़ प्रशासन ने मास्टर प्लान में संशोधन करते हुए अब शहर में प्लॉटेड डेवलपमेंट बंद करने का फैसला लिया है। अब शहर में केवल ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैट्स बनाने की अनुमति होगी ताकि वर्टिकल ग्रोथ को बढ़ावा मिल सके। हालांकि, हेरिटेज एरिया (सेक्टर 1-30) में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग नहीं बनेंगी।

6. मौसम अलर्ट: तीन दिन बारिश और ओलावृष्टि की संभावना: चंडीगढ़ और पंजाब के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। 29 और 30 मई को भारी बारिश की संभावना है, जिससे लू (Heatwave) से राहत मिल सकती है।

7. मोगा में शर्मनाक वारदात, मासूम से रेप और हत्या: मोगा में एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने पड़ोस में रहने वाली 9 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दयानंद को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड भागने की फिराक में था।

8. नशे की हालत में युवक-युवती का वीडियो वायरल: मोगा के ‘ड्रग हॉटस्पॉट’ माने जाने वाले इलाके साधा वाला बस्ती से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक युवक और युवती नशे में पूरी तरह बेसुध सड़क किनारे बैठे नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

9. VIP मूवमेंट के दौरान पुलिस से भिड़ा बुजुर्ग: लुधियाना में अपनी पोती को आइसक्रीम दिलाने जा रहे एक बुजुर्ग की पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हो गई। पुलिस ने VIP मूवमेंट के कारण रास्ता रोका था, जिस पर बुजुर्ग ने नाराजगी जताई। बाद में DC ने संबंधित पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया और बुजुर्ग को दफ्तर बुलाया।

10. निकाय चुनाव काउंटिंग की तैयारी पूरी: कल सुबह 8 बजे से 8 नगर निगम, 75 नगर कौंसिल और 21 नगर पंचायतों के लिए मतगणना शुरू होगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और त्रि-स्तरीय घेरे में स्ट्रांग रूम की निगरानी की जा रही है।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से शांतनु सेन ने दिया इस्तीफा

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Shantanu Sen ने All India Trinamool Congress के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांतनु सेन ने व्यक्तिगत कारणों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कदम को पार्टी के भीतर चल रहे हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन तृणमूल कांग्रेस के उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों और रुख को मीडिया में प्रस्तुत करते थे। वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम पार्टी के भीतर किसी असंतोष या पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करती रही है, और ऐसे में प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस रिक्त पद को कैसे भरता है और क्या शांतनु सेन भविष्य में किसी अन्य भूमिका में पार्टी में सक्रिय रहते हैं।

त्विषा शर्मा मौत मामला: सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Central Bureau of Investigation ने त्विषा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी उनकी सास और पूर्व न्यायाधीश Giribala Singh को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई।

यह मामला Madhya Pradesh High Court के आदेश के बाद और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जिसमें अदालत ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है, जिसकी जांच कई पहलुओं से की जा रही थी। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई है।

सूत्रों के अनुसार, मामले में घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव की भी भूमिका सामने आई है। हालांकि आधिकारिक रूप से सीबीआई ने विस्तृत आरोपों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जांच में कई अहम सुरागों पर काम किया जा रहा है।

गिरिबाला सिंह, जो पूर्व में न्यायिक सेवा से जुड़ी रही हैं, की गिरफ्तारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई एक गंभीर और असाधारण स्थिति होती है, जो न्यायिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर ध्यान आकर्षित करती है।

मृतका के परिवार ने सीबीआई की कार्रवाई का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। एजेंसी जल्द ही अदालत में आगे की रिपोर्ट पेश कर सकती है।

फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की नजर सीबीआई की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

भोजशाला परिसर विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली नई याचिका दाखिल

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Supreme Court of India में मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में एक नई याचिका दायर की गई है। इस याचिका में Madhya Pradesh High Court के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया गया था।

यह मामला लंबे समय से विवादित रहा है, जिसमें धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े निर्णय केंद्र सरकार तथा Archaeological Survey of India (एएसआई) ले सकते हैं।

नई याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट का यह निष्कर्ष तथ्यात्मक और कानूनी दृष्टि से विवादास्पद है, इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने आग्रह किया है कि मामले की विस्तृत सुनवाई की जाए और सभी ऐतिहासिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

भोजशाला परिसर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से मतभेद चले आ रहे हैं। एक पक्ष इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे एक ऐतिहासिक मस्जिद स्थल के रूप में देखता है।

इस मामले में पहले भी कई बार अदालतों में सुनवाई हो चुकी है और विभिन्न आदेश दिए गए हैं। हाल के हाईकोर्ट आदेश के बाद यह विवाद फिर से कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक रिपोर्टों और कानूनी पहलुओं का संतुलित मूल्यांकन बेहद जरूरी होता है। एएसआई की भूमिका भी इस प्रकार के विवादों में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह देश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी प्रमुख संस्था है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख तय होनी बाकी है, और सभी पक्षों की नजर अब शीर्ष अदालत के रुख पर टिकी है।

भलस्वा लैंडफिल को सितंबर तक साफ करने का लक्ष्य, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिए सख्त निर्देश

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

New Delhi में स्थित भलस्वा लैंडफिल साइट को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री Manohar Lal Khattar ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भलस्वा में मौजूद कूड़े के पहाड़ को इस साल सितंबर तक पूरी तरह से साफ किया जाए।

मंत्री ने बृहस्पतिवार को साइट का दूसरी बार निरीक्षण करते हुए कहा कि राजधानी में कचरा प्रबंधन को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि रोजाना उत्पन्न होने वाले नए कचरे का तत्काल प्रसंस्करण किया जाए, ताकि भविष्य में कचरे का नया ढेर न बन सके।

भलस्वा लैंडफिल दिल्ली के सबसे बड़े कचरा डंप साइट्स में से एक माना जाता है, जहां वर्षों से जमा कचरे के कारण पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। इनमें प्रदूषण, बदबू, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और जल-निकासी की समस्याएं शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सफाई का काम नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निपटान की प्रक्रिया को तेज किया जाए।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भलस्वा साइट पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए विशेष परियोजना चलाई जा रही है, जिसमें बायो-माइनिंग और रीसाइक्लिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर पुनः उपयोग योग्य सामग्री को निकाला जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी भी स्थान पर नया कूड़े का पहाड़ बनने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए नगर निकायों को नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में ठोस कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। यदि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए भलस्वा जैसे लैंडफिल साइट्स का पुनर्विकास और वैज्ञानिक सफाई अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।

फिलहाल सरकार ने सितंबर तक का लक्ष्य तय कर दिया है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर यह बड़ा सफाई अभियान कितना सफल हो पाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवेनिया के जनेज जान्शा को प्रधानमंत्री चुने जाने पर दी बधाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Slovenia की संसद द्वारा Janez Janša को प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें बृहस्पतिवार को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वह स्लोवेनिया के नए नेतृत्व के साथ मिलकर द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने की बात कही।

जानकारी के अनुसार, जनेज जान्शा को स्लोवेनिया की संसद में हुए मतदान के बाद देश का नया प्रधानमंत्री चुना गया है। वे स्लोवेनियाई राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक छवि एक अनुभवी और दक्षिणपंथी रुझान वाले नेता के रूप में देखी जाती है।

स्लोवेनिया यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है और यूरोपीय संघ का सदस्य भी है। भारत और स्लोवेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री स्तर पर इस तरह के बधाई संदेश दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भविष्य में व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

फिलहाल, भारत और स्लोवेनिया दोनों देशों की सरकारें आपसी सहयोग को बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी के ‘एक्स’ अकाउंट को ब्लॉक करने के खिलाफ याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Delhi High Court में एक अनोखे मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिसमें “कॉकरोच जनता पार्टी” के ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दायर की गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Purushaindra Kumar Kaurav की पीठ के समक्ष होनी है। याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी के आधिकारिक अकाउंट को बिना पर्याप्त कारण के ब्लॉक किया गया, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि ‘एक्स’ प्लेटफॉर्म द्वारा अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के फैसले की समीक्षा की जाए और इसे पुनः बहाल करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम है, और इसे बिना स्पष्ट कारण के बंद नहीं किया जा सकता।

हालांकि, मामले में ‘एक्स’ या संबंधित प्राधिकरण की ओर से ब्लॉकिंग के कारणों पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अदालत अब इस बात पर विचार करेगी कि क्या अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया नियमों और कानूनों के अनुरूप थी या नहीं।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह राजनीतिक दलों के डिजिटल अधिकारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कंटेंट पॉलिसी से जुड़े व्यापक सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अकाउंट ब्लॉकिंग और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर कई कानूनी विवाद सामने आए हैं।

फिलहाल सभी की नजर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और क्या अकाउंट की बहाली पर कोई अंतरिम राहत दी जा सकती है।

जल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर 1 जून को राष्ट्रीय कार्यशाला, भूजल संरक्षण पर होगा फोकस

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Ministry of Jal Shakti के तहत 1 जून को जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को लेकर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में नीति निर्माता, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक, स्टार्टअप और विशेषज्ञ शामिल होकर जल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतत भूजल प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और वर्षा जल संचयन जैसे विषयों पर व्यावहारिक समाधान तलाशना है। साथ ही जल संरक्षण के लिए आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा की जाएगी।

आयोजकों के अनुसार, देश में बढ़ते जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए यह कार्यशाला बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें ऐसे नवाचारों और नीतिगत सुझावों पर चर्चा होगी, जो आने वाले समय में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के कई हिस्सों में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता और अनियमित वर्षा के कारण जल संकट गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में तकनीक आधारित समाधान, डेटा विश्लेषण और सामुदायिक भागीदारी जल प्रबंधन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यशाला में स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए नए तकनीकी मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग सिस्टम, जल पुनर्चक्रण तकनीक और वर्षा जल संचयन के आधुनिक तरीके शामिल हैं। इसके अलावा, जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के आयोजन नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर लागू होने वाली योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं। कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव भविष्य की जल नीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

जल क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए जल सुरक्षा एक दीर्घकालिक चुनौती है, जिसे केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, निजी क्षेत्र की भागीदारी और आम जनता की सहभागिता से ही प्रभावी ढंग से हल किया जा सकता है।

शिवराज सिंह चौहान ने PMAY-G के तहत 12 राज्यों को 10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की

दिल्ली / सत्ता संदेश

‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 12 राज्यों को 10,021.42 करोड़ की मदर सैंक्शन केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी की उपस्थिति में जारी की।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिन राज्यों को मदर सैंक्शन जारी की उसमें- असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश का कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे। इसी संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 3.91 करोड़ घरों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

उन्होंने राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने हेल्पलाइन, शिकायत निवारण प्रणाली, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसे सराहनीय प्रयास किए हैं, जिनके कारण योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आई है।

महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमएवाई-जी के अंतर्गत लगभग 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में स्वीकृत किए गए हैं, जिससे महिलाओं का सम्मान, स्वाभिमान एवं सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है।

उन्होंने राज्यों से लंबित शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने तथा जारी की गई राशि के त्वरित उपयोग को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्यों के अनुरूप स्वीकृतियां पूर्ण नहीं की हैं, जिन्हें 30 जून 2026 तक पूरा किया जाना चाहिए।