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प्रथम आईसीएमआर वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल बैठक 2026 में एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान में भारत के उभरते नेतृत्व को उजागर किया गया


दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत में प्रथम-मानव चरण 1 नैदानिक ​​परीक्षणों को सुदृढ़ करने के लिए आईसीएमआर ने रिपोर्ट जारी की

बहुकेंद्रीय अनुसंधान की एकल नैतिक समीक्षा के लिए प्रचालनगत दिशानिर्देश जारी

विशेषज्ञों ने भारत के नैदानिक ​​अनुसंधान और नियामक इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 20 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय नैदानिक ​​परीक्षण दिवस: एकीकृत चिकित्सा नैदानिक ​​परीक्षणों पर फोकस” थीम के तहत “प्रथम आईसीएमआर वार्षिक नैदानिक ​​परीक्षण सम्मेलन 2026″ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम ने भारत के नैदानिक ​​परीक्षण इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने और देश में साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

इस बैठक में नीति निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधकर्ता, नियामक प्राधिकरण और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एकत्रित हुए और नैदानिक ​​अनुसंधान में उभरते अवसरों, नैतिक ढांचों, नियामक प्रक्रियाओं और नवाचारों पर चर्चा की।

इस कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) वी.के. पॉल, डॉ. राजीव बहल और वैद्य राजेश कोटेचा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक समुदाय के प्रख्यात विशेषज्ञ और हितधारक उपस्थित थे।

बैठक को संबोधित करते हुए गणमान्य व्यक्तियों ने उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने और देश में स्वास्थ्य सेवा वितरण तंत्र को मजबूत करने के लिए मजबूत नैदानिक ​​अनुसंधान प्रणालियों, नैतिक शासन और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल कार्यप्रणालियों के वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में से एक आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया पर आईसीएमआर-सीसीआरएएस के बहुकेंद्रीय चरण तृतीय रेंडोमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (आरसीटी) के निष्कर्षों की प्रस्तुति थी। इस अध्ययन में एनीमिया के प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोणों का मूल्यांकन किया गया, जो भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।

इस नैदानिक ​​परीक्षण में पुनर्नवादि मंडुरा की प्रभावशीलता की तुलना अकेले और द्राक्षवलेहा के साथ संयोजन में मानक आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण के साथ की गई। मध्यम एनीमिया से पीड़ित 18-49 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 4,000 गैर-गर्भवती महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में 90 दिनों की अवधि में हीमोग्लोबिन के स्तर और नैदानिक ​​परिणामों का आकलन किया गया। निष्कर्षों से पता चला कि दोनों आयुर्वेदिक औषधियां चिकित्सीय रूप से मानक आयरन-फोलिक एसिड चिकित्सा के समकक्ष थीं।

इस कार्यक्रम में “भारत में प्रथम चरण के नैदानिक ​​परीक्षणों को आगे बढ़ाना: नियामक प्रक्रियाओं और अवसरों पर एक डेल्फी अध्ययन” शीर्षक वाली रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। यह रिपोर्ट फार्मास्युटिकल उद्योग, संविदा अनुसंधान संगठनों (सीआरओ), शिक्षा जगत और राष्ट्रीय नियामक एजेंसियों के 37 विशेषज्ञों के साथ दो चरणों के परामर्श के माध्यम से तैयार की गई थी।

इस अध्ययन में भारत में प्रारंभिक चरण के नैदानिक ​​परीक्षणों की प्रगति को प्रभावित करने वाली प्रमुख बाधाओं की पहचान की गई और देश में नवाचार-संचालित नैदानिक ​​अनुसंधान का समर्थन करने के लिए नियामक क्षमता को मजबूत करने, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने सहित उपायों की अनुशंसा की गई।

इस आयोजन के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि “भारत में बहुकेंद्रीय अनुसंधान की एकल नैतिक समीक्षा के लिए परिचालन दिशानिर्देश” का विमोचन था , जिसका उद्देश्य देश भर में बहुकेंद्रीय अनुसंधान अध्ययनों के लिए नैतिक समीक्षा तंत्र को मजबूत और सुसंगत बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान एकीकृत अनुसंधान साक्ष्य की नीतिगत स्वीकृति” विषय पर एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया। इस चर्चा ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति और स्वास्थ्य सेवा व्यवहार में रूपांतरित करने पर सार्थक विचार-विमर्श को सुगम बनाया।

वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल बैठक ने भारत के क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम में सहयोग को बढ़ावा देने, नैतिक और नियामक ढांचे को सुदृढ़ करने और नवाचार एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के प्रति आईसीएमआर की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।